Environment And Social Research Organization - ESRO

Environment And Social Research Organization - ESRO Environment & Social Research Organization (ESRO) is an NGO registered under Societies Registration Act, XXI of 186o.

जीव + वन अर्थात जीवनएनवायरनमेंट एंड सोशल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (एस्रो) के तत्वाधान में जारी 45 दिवसीय प्रकृति संस्कार कार्...
12/06/2026

जीव + वन अर्थात जीवन
एनवायरनमेंट एंड सोशल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (एस्रो) के तत्वाधान में जारी 45 दिवसीय प्रकृति संस्कार कार्यशाला के दौरान युवा प्रत्येक दिन कुछ न कुछ सिख रहे है। इसी कड़ी में युवाओं ने जल जंगल और जमीन को समझने का प्रयास किया, जिसके अंतर्गत पेड़ो की आकृति को देख कर क्षेत्र की जलवायु को समझ सकते है, जैसे चौड़ी पत्ती के पेड़ो की भूमिगत संरचना क्या होगी और छोटी पत्ती वाली भूमि किस प्रकार की होगी साथ ही प्राकृतिक खेती के महत्व की भी जानकारी ली और आधुनिक जीवन को प्रकृति के साथ कैसे जिया जा सकता है, उन सभी पहलुओं पर लंबी वार्ता हुई।

"नदियां अविरल और निर्मल रहेंगी तो समाज स्वस्थ रहेगा"     केनरा बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान बागपत के सौजन्य ...
31/01/2026

"नदियां अविरल और निर्मल रहेंगी तो समाज स्वस्थ रहेगा"
केनरा बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान बागपत के सौजन्य से एनवायरनमेंट एंड सोशल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (एस्रो) के तत्वावधान में दिनांक 30.01.2026 को बिनौली क्षेत्र में 30 महिलाओं के मध्य नदी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नदियों के संरक्षण, स्वच्छता और उनके प्रति समाज के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना रहा।
इस अवसर पर संस्था के निदेशक संजय राणा ने कहा कि “हम नदियों को मां कहते हैं, लेकिन व्यवहार मेहतरानी अर्थात मैला ढोने वाली जैसा करते हैं। पूजा-पाठ में नदियों को पूजते हैं, लेकिन अपने दैनिक जीवन में उन्हें गंदगी का माध्यम बना देते हैं। जब तक हमारा व्यवहार नहीं बदलेगा, तब तक नदियों का अस्तित्व सुरक्षित नहीं रह सकता।” उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे घर-परिवार और समाज में जल संरक्षण व नदी स्वच्छता को लेकर नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में संस्था के कार्यक्रम अधिकारी देशवीर नैन ने कहा कि “हम अपने बुजुर्गों की सोच और परंपरागत ज्ञान के अनुरूप प्रकृति को सहेज कर नहीं रख पा रहे हैं, जिसकी वजह से नदियां सूख रही हैं, जल प्रदूषण बढ़ रहा है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संकट खड़ा हो रहा है। अब समय आ गया है कि हम प्रकृति के साथ अपने रिश्ते को फिर से समझें।”
अनुज कुमार कार्यालय सहायक RSETI बागपत ने महिलाओं से आव्हान किया कि नदी संवाद कार्यक्रम की सफलता तब है जब सभी महिलाएं इन बातों का अनुसरण करे, हम सुधरेंगे तो जग सुधरेगा। यह कहावत तब चरितार्थ होगी जब हम अपने में बदलाव लाएंगे।
नदी संवाद के दौरान राजेश, शशि, निशा, सविता आदि महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए और स्थानीय स्तर पर नदियों एवं तालाबों में बढ़ते प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे तथा घरेलू अपशिष्ट के दुष्प्रभावों पर चर्चा की। संवादात्मक सत्र के माध्यम से व्यवहार परिवर्तन, स्वच्छता और सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में ज्योति, मोनिका, शीतल, दीप्ति, सीमा, शालू शर्मा, जयमाला, संगीता सदस्यों का योगदान रहा।

दिनांक 05.12.2025 को एनवायरनमेंट एंड सोशल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (एस्रो) के कैंप कार्यालय बड़ौत में संस्था का 12 वाँ सम्मान...
07/12/2025

दिनांक 05.12.2025 को एनवायरनमेंट एंड सोशल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (एस्रो) के कैंप कार्यालय बड़ौत में संस्था का 12 वाँ सम्मान समारोह मनाया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री राजेंद्र शास्त्री जी ने की तथा मुख्य अतिथि डॉ जगदीश चौधरी (सदस्य विश्व जल आयोग) रहे, संचालन संस्था के सचिव देवेंद्र फोगाट ने किया।
इस अवसर पर देश के प्रसिद्ध एवं वयोवृद्ध पर्यावरणविद श्री ज्ञानेंद्र रावत जी को उनके द्वारा पर्यावरण पर किए गए कार्यों के लिए 12 वां "बदलाव के पुरोधा सम्मान 2025" से सम्मानित किया गया। 12 वां प्रकृति प्रहरी सम्मान 2025 श्री योगेंद्र सिंह मेरठ, श्री दुष्यंत बागपत, श्री रोहताश सिंह मेरठ एवं श्री ऋषिपाल सिंह पंवार मेरठ को पर्यावरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। प्रथम "वृक्ष मित्र सम्मान 2025" पूर्व रॉ अधिकारी रहे श्री देवेंद्र सिंह पंवार जी को उनके द्वारा हजारों वृक्ष लगाने के उपलक्ष्य में दिया गया। "बाल प्रतिभ सम्मान 2025" के लिए 12 विद्यालयों से आए 36 विद्यार्थियों को दिया गया साथ ही सभी अतिथियों ने बच्चो द्वारा बनाए गए नव वर्ष 2026 कैलेंडर का अनावरण किया गया।
शनिवार को हुए कार्यक्रम में विश्व जल आयोग के सदस्य डॉ जगदीश चौधरी ने कहां कि "हमारी भारतीय संस्कृति में जल को देवता कहां गया है और नदियों को मां, मगर वर्तमान समय में नदियां मैला ढोने वाली के रूप में बदल गई है और साथ ही जल व्यापार का केंद्र बन गया है। इन सब हालातों का मुख्य कारण हमारी प्राचीन संस्कृति से समाज द्वारा दूरी बनाना है। अगर समाज और व्यवस्थाओं ने नदियों और जल को पुनः उनका खोया हुआ गौरव नहीं लौटाया तो मानव समाज की इसकी बड़ी कीमत चुकानी होगी।
इस अवसर पर प्रसिद्ध एवं वयोवृद्ध पर्यावरणविद श्री ज्ञानेंद्र रावत जी ने कहां कि "वर्तमान समय में जिस प्रकार देश में वायु प्रदूषण का प्रकोप बढ़ता जा रहा है इससे देश में 18 से 20 लाख लोग प्रतिवर्ष अपनी जान से हाथ धो रहे है, हम जैसे बुजुर्गों और बालकों को इससे सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। वायु प्रदूषण पर समाज और सरकारों को गंभीर होने की तुरंत आवश्यकता है, वरना हालत गंभीर होने वाले है।"
इस अवसर पर संस्था के निदेशक संजय राणा ने अक्टूबर माह में हिमालय में आपदा विषय पर अध्ययन यात्रा की विस्तृत रिपोर्ट रखी और चेताया कि अगर हिमालय सुरक्षित रहेगा तब ही हम मैदानी क्षेत्र के लोग खुशहाल रह पाएंगे। इस अवसर पर डॉ. संजय मोघा, देशवीर नैन, सुषमा रानी, डॉ सतेंद्र तोमर, सोनू चौहान, धर्मेंद्र अग्रवाल, दीपक तोमर, ममता पंवार, प्रतिभा जैन, योगेंद्र सरोहा, देशपाल तोमर, कन्हैया, तनु, वंशिका, गुड्डन, आर्यन आदि का सहयोग रहा।

Address

20/509
Subhash Nagar
250611

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Environment And Social Research Organization - ESRO posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Environment And Social Research Organization - ESRO:

Shortcuts

Share