Maharaja Gangasingh Ji Dharohar Sanrakshan Sansthan

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अंग्रेजों ने नहीं महाराजा गंगा सिंह ने बीकानेर में स्थापित किया था रेल कारखाना। मरुस्थल मे बिछा दी 1600 किलोमीटर रेलवे ल...
12/08/2026

अंग्रेजों ने नहीं महाराजा गंगा सिंह ने बीकानेर में स्थापित किया था रेल कारखाना। मरुस्थल मे बिछा दी 1600 किलोमीटर रेलवे लाइन।
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बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह दूरदर्शी राजा के रूप में जाना जाता है। आज भी उनका नाम बड़ी इज्जत और सम्मान के साथ लिया जाता है। बीकानेर रियासत के लिए गंग नहर के जरिए पानी लाना जिसके लिए उन्हें कलजुग का भागीरथ भी कहा जाता है। इसके साथ-साथ बीकानेर शहर में विकास की गंगा बहाने वाले। बीकानेर रियासत में मरुस्थल के कारण आना-जाना बहुत मुश्किल होता था। उस जगह भी उन्होंने 1600 किलोमीटर रेलवे लाइन बिछाई दी ,अपने आप में चुनौती पूर्ण कार्य था। शाहिद महाराजा गंगा सिंह जी चुनौती पूर्ण कार्य को करने के लिए ही पैदा हुए थे। जो अब भी असंभव लगता है। जैसे मरुस्थल में गंगा नहर का आना व रेगिस्तान में आवा गमन के लिए रेलवे लाइन का आना। बात 1891 बीकानेर रेलवे स्टेशन की स्थापना 1891 में हुई थी।इसका निर्माण उस समय बीकानेर के प्रसिद्ध व्यापारी राय दीवान बहादुर सर कस्तूरचन्द डांगा द्वारा दिए गए 3,46,000 रुपए के दान से किया गया था।यह स्टेशन जोधपुर - बीकानेर रेलवे लाइन का हिस्सा था जिसे 1889 में जोधपुर और बीकानेर रियासतों ने मिलकर जोधपुर बीकानेर रेलवे लाइन की स्थापना की थी। वर्ष 1891को 1000 किलोमीटर मीटर गेज लाइन खोली गई जिससे बीकानेर रियासत देश के रेल नेटवर्क से जुड़ गया। सबसे ज्यादा महाराजा गंगा सिंह के शासनकाल 1888 से 1943 के दौरान बीकानेर रियासत
में रेलवे नेटवर्क का भूतपूर्व विस्तार हुआ वर्ष 1935 तक का बीकानेर स्टेट रेलवे का कुल नेटवर्क 1600 किलोमीटर से अधिक लंबा हो चुका था। जो उस समय का राजपूताना राजस्थान का सबसे बड़ा रियासती रेलवे नेटवर्क था। बीकानेर से सूरतगढ़, बठिंडा ,हिसार ,रतनगढ़ ,सरदारशहर ,कोलायत, श्रीगंगानगर ,और अनूपगढ़ जैसे दुर-दराज के रेगिस्तान एवं सीमावर्ती इलाकों को मीटर गेज लाइनों से महाराजा गंगा सिंह ने जोड़ दिया और बीकानेर रियासत में जगह-जगह रेलवे लाइनों का जाल बिछा दिया। इतना ही नहीं रेल संसाधनों और मरम्मत के लिए महाराजा गंगा सिंह ने सन 1926 में बीकानेर में लालगढ़ रेलवे वर्कशॉप की स्थापना की। उस समय इस कारखाने में रेल कोच की मरम्मत का काम शुरू किया गया। उस समय इस कारखाने की वजह से हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध हुआ। इस रेलवे वर्कशॉप का महत्व इस बात से ही समझा जा सकता है कि इसकी स्थापना आजादी से करीब 21 साल पहले हुई ।आजादी के बाद भारतीय रेलवे ने अपने अधीन कर लिया आज भी बीकानेर रेलवे वर्कशॉप में 700 के करीब रेलवे कर्मचारी काम करते हैं। बीकानेर का दुर्भाग्य यह रहा है कि आजादी के बाद उसको कोई महाराजा गंगा सिंह जैसा नेतृत्व करने वाला कोई नेता नहीं मिला। जिस कारण पूरा बीकानेर संभाग दिन प्रतिदिन पिछड़ता जा रहा है। एक समय वह था जब महाराजा गंगा सिंह ने 1600 किलोमीटर रेलवे लाइन बिछाई। आजादी के बाद के नेताओं से आज तक बीकानेर शहर के रेलवे फटकों की समस्याओं का हल नहीं हो पाया। एक तरफ महाराजा गंगा सिंह ने अनूपगढ़ तक रेलवे लाइन बिछाई। आज के सांसद मंत्री से अनूपगढ़ से लेकर बीकानेर तक रेलवे लाइन विछाना मुश्किल हो रहा है। एक वह भी महाराजा गंगा सिंह जी का टाइम था कि लालगढ़ पैलेस तक रेलवे लाइन बिछी हुई थी। ट्रेन सीधे महाराजा गंगा सिंह के निवास के पास आकर रुकती थी। करीब 50 वर्षों तक व्यवस्था जारी रही। आज भले ही रेल पटरियां हटा दी गई है। लेकिन जिस डिब्बा में महाराजा गंगा सिंह पूरे देश में यात्राएं करते थे वह आज भी मौजूद है। काश महाराजा गंगा सिंह 20 साल और जीवित रहते बीकानेर रियासत को चार चांद लगा देते।
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श्रीगंगानगर राजकीय मेडिकल कॉलेज का नाम महाराजा गंगासिंह जी के नाम पर करने का अधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। राजस्थान...
12/08/2026

श्रीगंगानगर राजकीय मेडिकल कॉलेज का नाम महाराजा गंगासिंह जी के नाम पर करने का अधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया है। राजस्थान सरकार का बहुत बहुत धन्यवाद 💐

गंगनहर नहीं होती तो फ़िरोज़पुर अबोहर पाकिस्तान में चले जाते। ***************************************************साल 1899...
31/07/2026

गंगनहर नहीं होती तो फ़िरोज़पुर अबोहर पाकिस्तान में चले जाते।
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साल 1899 - 1900 बीकानेर रियासत में छप्पनिया अकाल से भुखमरी और महामारी फैल गई, इसमें लाखों लोग और मवेशी मर गए, लोगों को जिंदा रहने के लिए खेजड़ी की छाल और पेड़ों की पत्तियां तक खानी पड़ी, उस समय माहाराजा श्री गंगा सिंह बहुत दुखी हुए उन्होंने सोचा कि अगर बीकानेर रियासत के लोगों को बचाना है, तो पंजाब की सतलुज नदी का पानी गंगनहर के माध्यम से बीकानेर रियासत में हर हाल में लाना होगा, परंतु यह आसान नहीं था।
वर्ष 1903 में महाराजा गंगा सिंह जी ने तय किया कि वे इस प्रोजेक्ट को जरूर पुरा करेंगे। इस बीच ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल डाइस ने सर्वे कर इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया लेकिन पंजाब और बहावलपुर रियासत ने काम रुकवा दिया गंग नहर का काम बन्द हो गया, परंतु महाराजा गंगा सिंह कब हार मानने वाले थे। उनको किसी भी कीमत पर पानी चाहिए था। उस के बाद 1913 मैं हालात बदले प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत हुई बीकानेर की फौज ने युद्ध में अंग्रेजों का साथ दिया। अंग्रेजों की बनाई इंपिरियल वार केबिनेट का हिस्सा बने महाराजा गंगा सिंह। विश्व युद्ध के बाद जब वर्साई की संधि हुई तो इस संधि में हस्ताक्षर करने वाले महाराजा गंगा सिह भारत के एकमात्र राजा थे। इस कारण महाराजा गंगा सिंह का प्रभाव पूरे देश और अंग्रेज सरकार के बीच में बढ़ गया। इसका प्रणाम यह हुआ की 1919 में पंजाब सरकार ने सतलुज नहर प्रोजेक्ट के प्रस्ताव पर हामी भर दी। उसके बाद एक समझौता हुआ पंजाब सरकार बहावलपुर रियासत और बीकानेर रियासत के बीच में एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ। उस के बाद 5 दिसंबर 1925 को नहर के आधारशिला रखी गई, गंग नहर का काम फिरोजपुर से शुरू हुआ। उस समय इस प्रोजेक्ट की लागत 5 करोड़ 50 लाख आई। जब गंगनहर को बनाने में समस्या आई तो इसके साथ-साथ एक रेलवे लाइन भी बनाई गई। जो अभी बनी हुई है,और लोग इसका इस्तेमाल भी करते हैं। गंगानगर फिरोजपुर से लेकर श्रीगंगानगर तक 144 किलोमीटर लंबी नहर है, जिसे 2 साल में बनाया गया था। जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। गंगानगर बनने के बाद शिवपुरी हैंड पर महाराजा गंगा सिंह वायसराय लॉर्ड इरविन ने 26 अक्टूबर 1927 को गगनहर परियोजना का उद्घाटन किया जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। उसके बाद गंगानगर शहर की स्थापना की गई। उसके बाद महाराजा गंगा सिंह ने खेती किसानी के लिए पंजाब के किसानो बहावलपुर के किसानों को श्रीगंगानगर जिले में बसाना शुरू किया जिसमें बड़ी संख्या सिख किसानों की थी। उनके लिए चकबंदी की गई, हर गांव में गुरुद्वारे के लिए मंदिर के लिए पांच बीघा जमीन महाराजा गंगा सिंह द्वारा निशुल्क दी गई, जो वर्तमान में भी गुरुद्वारों मंदिरों के नाम जमीन लगी हुई है, इतना ही नहीं महाराजा गंगा सिंह जी ने बढाई गिरी का काम करते थे उसको भी 5 बीघा, पानी ढोने का काम करते थे मेहरा जाति को उसको भी 5 बिघा, मरे हुए पशुओं का चमड़ा उतारने का काम करते थे, उनके लिए भी पांच बीघा जमीन निशुल्क दी गई। ऐसी जमीनें अभी भी श्रीगंगानगर जिले में हजारों की संख्या में मिल जाती है गांव में। अब बात करते हैं भारत-पाकिस्तान बंटवारे के टाइम की उस समय से लेकर अब तक गंग नहर को फिरोजपुर से पानी दिया जाता है। इसको हुसैनी वाला हेड वर्क्स संचालित करता था। जब भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो हुसैनी वाला हेड वर्क्स पाकिस्तान का हिस्सा बन रहा था। इसके साथ-साथ फिरोजपुर अबोहर भी पाकिस्तान का हिस्सा बन रहे थे। अगर हुसैनी वाला हेड वर्क्स पाकिस्तान में चला जाता तो गंग नहर का संचालन कैसे होता, उसको पानी कैसे मिलता। इस बात को ध्यान में रखते हुए बीकानेर रियासत के तत्कालीन महाराजा शार्दुल सिंह ने इसका विरोध किया। उन्होंने अपने प्रयास करके दोनों देशों के बीच खिंची जा रही रेखा को ही बदलवा दिया। इसलिए कहा जाता है कि फिरोजपुर इसलिए भारत का हिस्सा बना क्योंकि उसमें हुसैनी वाला हेड वर्क्स गंगनहर को पानी दे रहा था। महाराजा गंगा सिंह को कलयुग का भागीरथ भी कहा जाता है। कलयुग के भगीरथ महाराजा गंगासिंह जी के कारण ही श्रीगंगानगर जिला धान का कटोरा कहलाता है, महाराजा गंगासिंह जी ने 1938 में ही जैसलमेर तक पानी पहुंचाने हेतु केनाल रूट नक्शा बना दिया था। 1944 में जब वे मुंबई में इलाजरत थे, तब अपने एडीसी को बुलाकर भाखड़ा डेम की फाइल मंगवा कर देर रात तक उस पर फुल इंस्ट्रक्शन दिए थे और सुबह के समय उनका देहावसान हो गया था। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ते हुए भी अन्तिम समय में भी अपने राज्य की प्रजा की चिन्ता करते हुए नहरी प्रोजेक्ट पर डिस्कस करना उनकी जनहित सोच को दर्शाता है।

महाराजा गंगासिंह जी धरोहर संरक्षण संस्थान श्रीगंगानगर और समस्त सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक, राजनीतिक संगठनों का जिन्होंन...
24/07/2026

महाराजा गंगासिंह जी धरोहर संरक्षण संस्थान श्रीगंगानगर और समस्त सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक, राजनीतिक संगठनों का जिन्होंने इस महत्वपूर्ण अभियान में सहयोग किया, सहभागी बने सभी का धन्यवाद।

माननीय मुख्यमंत्री जी ओर सम्पूर्ण जनप्रतिनिधियों का बहुत बहुत धन्यवाद 💐 आप सभी सभी सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक, राजनीतिक...
22/07/2026

माननीय मुख्यमंत्री जी ओर सम्पूर्ण जनप्रतिनिधियों का बहुत बहुत धन्यवाद 💐 आप सभी सभी सामाजिक, धार्मिक, व्यापारिक, राजनीतिक ओर समस्त क्षेत्र वासियों के अति सक्रिय सहयोग से महाराजा गंगासिंह के नाम पर मेडिकल कॉलेज के नामकरण हुआ है, होना भी चाहिए, आज जिनके कारण हमारा इलाका सब्ज़ बाग है, हमे समय आने पर सम्मान भी देना चाहिएं । पुनः सभी संगठनों, नागरिकों, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री जी श्री गजेन्द्र सिंह जी खींवसर साब का बहुत बहुत धन्यवाद 💐

श्रीगंगानगर मैडिकल कॉलेज का नाम महाराजा गंगासिंह जी के नाम पर करने हेतुराजस्थान सरकार का बहुत बहुत धन्यवाद व समस्त क्षेत...
22/07/2026

श्रीगंगानगर मैडिकल कॉलेज का नाम महाराजा गंगासिंह जी के नाम पर करने हेतु
राजस्थान सरकार का बहुत बहुत धन्यवाद व समस्त क्षेत्रवासियों को बहुत बहुत बधाई।

The Camel Corps, popularly known as the Ganga Risala, was established in 1889 AD by Maharaja Ganga Singh with a continge...
29/06/2026

The Camel Corps, popularly known as the Ganga Risala, was established in 1889 AD by Maharaja Ganga Singh with a contingent of 500 soldiers.

The Ganga Risala participated in the Boxer Rebellion (1900 AD), Somaliland Campaign (1902–04 AD), World War I (1914–19 AD), and World War II (1939–45 AD), earning numerous honours and awards for its distinguished service.

Before returning from the Second World War, it spent three months conducting an anti-locust campaign, an achievement considered unique in military history.

Special attention was given to the recruitment, training, and maintenance of camels, which formed the backbone of the Corps.

The Camel Corps को गंगा रिसाला के नाम से जाना जाता है ।सन 1889 ई. में बीकानेर महाराजा गंगा सिंह जी ने 500 सैनिकों की टुकड़ी के साथ इसका गठन किया।गंगा रिसाला ने बक्सर विद्रोह(1900 ई.),सोमालीलैंड विद्रोह (1902-04 ई.), प्रथम विश्वयुद्ध (1914-19 ई.)व द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-45 ई.)में भाग लिया और अनेक पुरस्कार प्राप्त किए।द्वितीय विश्वयुद्ध से लौटने से पूर्व तीन माह तक टिड्डी के विरुद्ध अभियान किया जो युद्ध इतिहास में अनूठा है।ऊटो (camel) की भर्ती एवं उनके रखरखाव का विशेष ध्यान रखा जाता था।
#आपणो_अग्रणी_राजस्थान

Great Maharaja Ganga Singhji of Bikaner आधुनिक भारत के भगीरथ 🙏🌺💕
24/06/2026

Great Maharaja Ganga Singhji of Bikaner आधुनिक भारत के भगीरथ 🙏🌺💕

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर हनुमानगढ़ श्री पुष्पेन्द्र सिंह जी हाथोज को महाराजा गंगासिंह ...
07/06/2026

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर हनुमानगढ़ श्री पुष्पेन्द्र सिंह जी हाथोज को महाराजा गंगासिंह जी का चित्र भेंट किया।
#आपणो_अग्रणी_राजस्थान

श्रीगंगानगर अन्ध विद्यालय के स्वामी ब्रह्मदेव जी महाराज को समाजसेवा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2026...
27/05/2026

श्रीगंगानगर अन्ध विद्यालय के स्वामी ब्रह्मदेव जी महाराज को समाजसेवा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2026 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म श्री' से राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित होकर आज उनके पंजाब के रास्ते श्रीगंगानगर पधारने पर ग्राम साधुवाली में ग्रामवासियों और मित्र मण्डली द्वारा स्वागत करके महाराजा गंगासिंह जी का चित्र भेंट किया गया।
#आपणो_अग्रणी_राजस्थान
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