Social Awareness & Welfare for All Livings N.G.O

Social Awareness & Welfare for All Livings N.G.O S.A.W.A.L. with a mission to Increasing Livelihood, Education & Health with a moto of Right to Equality for all Human Beings, Animals & Nature.

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Social Awareness & Welfare for All Livings (S.A.W.A.L.) with a mission to Increasing Livelihood, Education & Health with a moto of Right to Equality for all Human Beings, Animals & Nature.

सोशियल एवेयररनेस अन्द वेल्फेयर फॉर ऑल लिविंग्स (सवाल) एक गैर सरकारी संस्थान

है जो की प्रत्येक मनुष्य, जानवर या प्रकृति को बेहतर बनाने की ओर अग्रसर है और पूरी समानता के साथ उनके आजीविका, शिक्षा, एवं स्वास्थ्य को बेहतर बनाने को निरंतर प्रयासरथ है।

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Programming & Robotic Free Seminar Welcome You All !!
06/10/2021

Programming & Robotic Free Seminar Welcome You All !!

परसाई जी की बातें अब अक्षरशः सत्य साबित हो रही हैं ।
11/12/2017

परसाई जी की बातें अब अक्षरशः सत्य साबित हो रही हैं ।

***मुस्लिम समुदाय से अपील***बीते 3 वर्षों में सत्ता-समर्थित संगठनों का जितना ज़ोर बहुसंख्यकों के दिलों में मुसलमानों के ...
02/07/2017

***मुस्लिम समुदाय से अपील***
बीते 3 वर्षों में सत्ता-समर्थित संगठनों का जितना ज़ोर बहुसंख्यकों के दिलों में मुसलमानों के प्रति नफरत पैदा करने में रहा है उसके पीछे मंशा ये रही है कि किसी भी तरह से मुसलमानों को उकसाया जाए और बहुसंख्यकों के खिलाफ हिंसा करवाई जाए जिससे सामाजिक विभाजन हो सके ।
*
*
जब कभी आप का सब्र जवाब देने लग जाए और आप भी भीड़ के जवाब में भीड़ का शक्ल लेकर ठीक वैसा ही प्रतिउत्तर देने की सोचने लग जाएं तब ज़रा सा ठहर के सोचिएगा ,
आपको अपने आस पास सुभाष कोली जैसे बहुत से लोग याद आने लगेंगे जिनके लिए आप पाकिस्तानी नहीं हैं , जिनके लिए आप की दाढ़ी आतंक का प्रतीक नहीं है ,
जो आप के जैसा ही कुर्ता सिलवाने की इच्छा रखते हैं , जो आप के साथ एक ही थाली में खाना खाते हैं और एक ही प्याली में चाय पीते हैं ,
जो आपकी रगड़ी हुई तमाखू दबाते हैं और आपकी जूठी सिगरेट होठों से लगाते हैं , जो आप की टोपी भी निकालकर अपने सिर पर शौक से सजाते हैं ,
बेशक हम उनके और वे हमारे हैं
यकीन मानिये आप अकेले नहीं हैं ....
(काजी के की-बोर्ड से )

23/07/2015

आज भारत के स्वतंत्रता संग्राम के 2 महानायकों की जयंती है पहले है लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जिनका जन्म 23 जुलाई 1856 को रत्नागिरी महाराष्ट्र में हुआ था जिन्होंने लोगो को एकजुट करने के लिए महाराष्ट्र में सार्वजनिक गणेशोत्सव प्रारम्भ किया और आज़ाद चंद्र शेखर आज़ाद जिनका कहना था मैं आज़ाद था हूँ और रहूंगा और सच में कोई भी उन्हें जीवित नहीं पकड़ पाया||देश के ऐसे महान सपूतो को मेरा शत शत नमन।।हम खुद को धन्य माने की हमने उसी धरती में जन्म लिया जिसमे इन वीर सपूतो ने जन्म लिया जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।।हमें भी इनसे प्रेरणा लेकर कम से कम ऐसा एक काम करना चाहिए जिससे भारत माता का कुछ क़र्ज़ तो हम भी चूका सकें|||भारत माता की जय।।

03/11/2014

AAP SABHI KO CHHOTI DIWALI KI BAHUT -BAHUT BADHAAI,,,

28/10/2014

घमण्डी वक़्तों के बादशाहों बदलते मौसम की नब्ज़ देखो महज़ तुम्हारे इशारों पे अब हवा सुहानी नहीं चलेगी किसी की धरती, किसी की खेती, किसी की मेहनत, फ़सल किसी की जो बाबा आदम से चल रही थी, वो बेईमानी नहीं चलेगी |

जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारो, ऐसी मान्यता को झुट्लाता हुआ, समाज की दर दर ठोकरे खाता वह विकलांग जिसकी ना तो समाज स...
28/10/2014

जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारो, ऐसी मान्यता को झुट्लाता हुआ, समाज की दर दर ठोकरे खाता वह विकलांग जिसकी ना तो समाज सुन रहा था ना ही प्रशाशन, ऐसी स्थिति मे सवाल संस्था का इस व्यक्ति से मिलना और उसकी मदद करने को क्या कहेंगे आप।....क्या इसमे हमारा दोष है।....या हमे ऐसे हांथो के इंतज़ार मे हाँथ मे हाथ रख कर बैठना चाहिये?...या खुद आगे बढ़ कर वो हाँथ बन जाना चाहिये जिसकी समाज को ज़रूरत है?...सवाल है आप से...??.

संस्था द्वारा विकलांग अरुण बंसकार वॉर्ड नो २ सोहागपुर शहडोल के लिये गरीबी रेखा का कार्ड बनवाने के लिये तहसीलदार से संपर्क किया गया तहसीलदार जी के आदेश अनुसार तत्काल कार्यवाही हुई और तत्काल उसका आवेदन लोकसेवा केन्द्रा को दिलवाया गया।

27/10/2014

समाज की एक कड़वी हकीकत:-
जिसके गवाह हम सब हैं, जिसके जिम्मेदार हम सब हैं।
यह दर्दनाक घटना एक परिवार की है। जिसमें परिवार का मुखिया, उसकी पत्नी और दो बच्चे थे। जो जैसे तैसे अपना जीवन घसीट रहे थे।
घर का मुखिया एक लम्बे अरसे से बीमार था। जो जमा पूंजी थी वह डॉक्टरों की फीस और दवाखानों पर लग चुकी थी। लेकिन वह अभी भी चारपाई से लगा हुआ था। और एक दिन इसी हालत में अपने बच्चों को अनाथ कर इस दुनिया से चला गया।

रिवाज के अनुसार तीन दिन तक पड़ोस से खाना आता रहा, पर चौथे दिन भी वह मुसीबत का मारा परिवार खाने के इन्तजार में रहा मगर लोग अपने काम धंधों में लग चुके थे, किसी ने भी इस घर की ओर ध्यान नहीं दिया।

बच्चे अक्सर बाहर निकलकर सामने वाले सफेद मकान की चिमनी से निकलने वाले धुएं को आस लगाए देखते रहते। नादान बच्चे समझ रहे थे कि उनके लिए खाना तयार हो रहा है। जब भी कुछ क़दमों की आहत आती उन्हें लगता कोई खाने की थाली ले आ रहा है। मगर कभी भी उनके दरवाजे पर दस्तक न हुयी।
माँ तो माँ होती है, उसने घर से रोटी के कुछ सूखे टुकड़े ढूंढ कर निकाले। इन टुकड़ों से बच्चों को जैसे तैसे बहला फुसला कर सुला दिया।
अगले दिन फिर भूख सामने खड़ी थी। घर में था ही क्या जिसे बेचा जाता, फिर भी काफी देर "खोज" के बाद चार चीजें निकल आईं। जिन्हें बेच कर शायद दो समय के भोजन की व्यवस्था हो गई।
बाद में वह पैसा भी खत्म हो गया तो जान के लाले पड़ गए।
भूख से तड़पते बच्चों का चेहरा माँ से देखा नहीं गया। सातवें दिन विधवा माँ ही बड़ी सी चादर में मुँह लपेट कर मुहल्ले की पास वाली दुकान पर जा खड़ी हुई। दुकानदार से महिला ने उधार पर कुछ राशन माँगा तो दुकानदार ने साफ इनकार ही नहीं किया बल्कि दो चार बातें भी सुना दीं।
उसे खाली हाथ ही घर लौटना पड़ा। एक तो बाप के मरने से अनाथ होने का दुख और ऊपर से लगातार भूख से तड़पने के कारण उसके सात साल के बेटे की हिम्मत जवाब दे गई और वह बुखार से पीड़ित होकर चारपाई पर पड़ गया।
बेटे के लिए दवा कहाँ से लाती, खाने तक का तो ठिकाना था नहीं। तीनों घर के एक कोने में सिमटे पड़े थे।
माँ बुखार से आग बने बेटे के सिर पर पानी की पट्टियां रख रही थी, जबकि पाँच साल की छोटी बहन अपने छोटे हाथों से भाई के पैर दबा रही थी। अचानक वह उठी, माँ के कान से मुँह लगा कर बोली "माँ भाई कब मरेगा???"
माँ के दिल पर तो मानो जैसे तीर चल गया, तड़प कर उसे छाती से लिपटा लिया और पूछा "मेरी बच्ची, तुम यह क्या कह रही हो?"
बच्ची मासूमियत से बोली, "हाँ माँ ! भाई मरेगा तो लोग खाना देने आएँगे ना???"------------
कृपया अपनी दौलत से मंदिरों में या धर्म के नाम पर चढ़ावा चढ़ाने की बजाय किसी असहाय भूखे को खाना खिलाकर पुण्य प्राप्त करें।
भगवान भी खुश होंगे और आप भी।

25/10/2014

आपको और आपके परिवारजनों, मित्रों एवं शुभचिंतकों को धन त्रियोदसी, रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज के पंच दिवसीय प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनायें और बधाईयां।
😊
नया वर्ष आपके लिए सुख, समृद्धि, शांति, स्वास्थ, सम्मान एवं धन-वैभव दायक हो इसी कामना के साथ.........!

23/10/2014

Aaj mana lena diwali unke sath bhi jo bujh chuke diye aur jal chuke pataakho mein ummid ki roshni khojte hain....

Mana lena tum diwali us garib maa k sath bhi jise khushiyo ka tyohar bhi apne bacche k aansu k kaaran dukho ka pahaad lagta hai....

ho sake to mana lena diwali un khule aasmaan k niche rehne waalo k sath bhi jinki zindgi mein amaavas se jyada andhera fayla hai....

Khila dena mithaai ka tukda us anaath ko bhi jiski zindgi mein kadwi yaadon k siva aur kuchh bhi nahi...

aur ho sake to un be-sahara buzurgo k sath bhi 1 diya jala lena jinke "kuldeepo" ne jeete-jee unka antim-sanskar kar diya...

agar na kar sako kuch bhi toh samajh lena "raavan" abhi nahi mara woh hum mein,tum mein sab mein zinda rahega shayad "humesha...."

"bujhe huay mann se roshni ka tyohar sab ko mubarak ho..."

22/10/2014

पटाखो कि दुकान से दूर हाथों मे,
कुछ सिक्के गिनते मैने उसे देखा...

एक गरीब बच्चे कि आखों मे,
मैने दिवाली को मरते देखा.

थी चाह उसे भी नए कपडे पहनने की...
पर उन्ही पुराने कपडो को मैने उसे साफ करते देखा.

तुमने देखा कभी चाँद पर बैठा पानी?
मैने उसके रुखसर पर बैठा देखा.

हम करते है सदा अपने ग़मो कि नुमाईश...
उसे चूप-चाप ग़मो को पीते देखा.

थे नही माँ-बाप उसके..
उसे माँ का प्यार और बाप के हाथों की कमी महसूस करते देखा.

जब मैने कहा, "बच्चे, क्या चहिये तुम्हे"?
तो उसे चुप-चाप मुस्कुरा कर "ना" मे सिर हिलाते देखा.

थी वह उम्र बहुत छोटी अभी...
पर उसके अंदर मैने ज़मीर को पलते देखा

रात को सारे शहर कि दीपो कि लौ मे...
मैने उसके हसते, मगर बेबस चेहरें को देखा.

हम तो जिन्दा हैं अभी शान से यहाँ
पर उसे जीते जी शान से मरते देखा.

ना-मकूल रही दिवाली मेरी...
जब मैने जिन्दगी के इस दूसरे अजीब से पहलु को देखा.

कोई मनाता है जश्न और कोई रहता है तरसता...

मैने वो देखा..
जो हम सब ने देख कर भी नही देखा.।।

लोग कहते है, त्योहार होते हैं जिन्दगी में खुशियों के लिए,

तो क्यो मैने उसे मन ही मन मे घूटते और तरस्ते देखा??????इस दीपावली को कुछ ऐसा करें किसी गरीबि से बेबस इन्सान को भि त्योहार कि खुशिया बांटे जो भि बनता पडे जितना भि बनता पडे उसके लिये करे.
आप सभि को दीपावली कि हर्दिक शुभकामनाये.

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