29/01/2026
जमीनें सँवार सँवार के बाजरा जो गेंहूँ, चना और बाक़ी मोटे अनाज की खेती मैंने ही शुरू की, अनाज के सुरक्षित भंडारण विधि, बड़े चोकोर घर, पंचायत व्यवस्था, गोत्र टाल के शादी व्यवस्था, पहलवानी, कबड्डी भी मेरी ही देन है। मैं जाट हूं। अहीर गुज्जर कोरी कुर्मी पटेल मराठा मेरा ही विस्तार है या किसी भी खेतिहर मेहनती कौम में मुझे देख सकते हैं, #मैं_किसान_हूं।
मैनें तो नदियों जोहड़ों तालाबो के किनारे मैदानों में सभ्यताएं बसाई, जीवन बसाया फसल लहलाई पेड़ लगाए... पर कुछ शातिरों ने इनके किनारों पे उगाके धर्म धंधा इन नदियों सरोवरों को कर दिया गंदा।
"खेती" और “हल” मेरी ही देन है मैं अभी भी अपने इसी हल से सभ्याताओं की समस्या हल कर सकता हूँ...पर मैं लाचार हूं, सत्ताओ की चालों से...काश मेरे बच्चे मुझमें खुद को खोजते तो मैं फिर लहलहा देता खुशहाली ...हर कण कण में क्योंकि मेरे पास ही #हल है।...
अपने आप को समझें अपने पुरखों का इतिहास, रिवाज़ सँस्कृति आपको ठेठ किसानीयत ही मिलेगी। फिर आज के मुद्दों को समझो सब समझ आएगा फिर साफ साफ.. पर हिंदुत्व ना समझ आएगा कभी भी, ये ना कभी हमारा था, ना है ना होगा क्योंकि ये चतुर व्यापारी-पाखण्डवादी राजनीतिक लुटेरा गिरोह का षड्यंत्रकारी छलावा भर है, जिसमे भावुकता से किसान कमेरे फंस ही जाते है।
क्या हम एक प्रयोगशाला भर बनके रहेंगे अब ? हमारे हाथ है, हम आज के अपने आचार व्यवहार, सजगता, समझ से अपनी अगली पीढ़ीयों को क्या देके जाते हैं …।
(24 जून 2022 को मेरे पहले वाले पेज पर लिखा मेरा ये लेख आज सामने आ गया, फिर से आपके साथ सांझा कर रहा हूं )