17/06/2026
*सैनिकों के नाम पर कथित वसूली का खेल? ईसीएचएस कार्ड बनवाने के नाम पर 30 हजार रुपये लेने का आरोप,दबाव पड़ते ही लौटाई रकम*
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*पूर्व सैनिकों के हितों की रक्षा करने का दावा, लेकिन आरोप आर्थिक शोषण के; मामला सामने आने के बाद उठे कई सवाल*
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रीवा। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों और उनके परिवारों को मिलने वाली सुविधाओं के नाम पर यदि कोई उनसे ही आर्थिक वसूली करने लगे, तो यह न केवल विश्वासघात है बल्कि व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। रीवा जिले के रातहरा बाईपास स्थित ज्ञान एमपी ऑनलाइन सेवा केंद्र पर ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां ईसीएचएस (एक्स-सर्विसमैन कॉन्ट्रिब्यूटरी हेल्थ स्कीम) कार्ड बनवाने के नाम पर एक पूर्व सैनिक के परिवार से 30 हजार रुपये लेने के आरोप लगे हैं। पीड़ित दीपक पटेल ने आरोप लगाया है कि वह अपने सेवानिवृत्त सैनिक बाबा का ईसीएचएस कार्ड बनवाने के लिए रातहरा बाईपास स्थित ज्ञान एमपी ऑनलाइन केंद्र पहुंचे थे। वहां मौजूद संचालक, जो स्वयं को पूर्व सैनिक बताता है, ने उन्हें यह कहते हुए 30 हजार रुपये जमा कराने के लिए कहा कि सेवानिवृत्ति के दौरान मेडिकल मद की राशि जमा नहीं हुई थी और कार्ड बनवाने के लिए यह भुगतान अनिवार्य है।
संगठन के माध्यम से जुड़ते हैं पूर्व सैनिक, शोषण के भी लगे आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि संबंधित व्यक्ति द्वारा पूर्व सैनिकों से जुड़ा एक संगठन भी संचालित किया जाता है, जिसके माध्यम से बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और उनके परिजन जुड़े हुए हैं। आरोप है कि इसी विश्वास और संपर्क का लाभ उठाकर लोगों को विभिन्न प्रक्रियाओं के नाम पर गुमराह किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन मामला सामने आने के बाद संगठन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
*रसीद मांगने पर मिलता रहा टालमटोल जवाब*
दीपक पटेल के अनुसार, राशि जमा कराने के बाद जब उन्होंने भुगतान की रसीद और प्रक्रिया संबंधी दस्तावेज मांगे तो उन्हें लगातार आज-कल कहकर टाला जाता रहा। कई दिनों तक चक्कर लगाने के बाद भी न तो कोई वैध रसीद दी गई और न ही भुगतान का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया। पीड़ित का आरोप है कि पैसे जमा कराने के बाद लगभग एक महीने तक राशि वापस नहीं की गई। इस दौरान जब भी उन्होंने रसीद या भुगतान संबंधी प्रमाण मांगा तो उन्हें बार-बार आज, कल और बाद में आने की बात कहकर टाल दिया गया। लगातार प्रयासों के बावजूद उन्हें न तो कोई वैध रसीद उपलब्ध कराई गई और न ही जमा की गई राशि का कोई आधिकारिक दस्तावेज दिया गया। मामला संदिग्ध लगने पर दीपक पटेल ने स्वयं सैनिक कल्याण बोर्ड (सोल्जर बोर्ड) पहुंचकर जानकारी जुटाई। वहां से मिली जानकारी ने पूरे मामले की तस्वीर बदल दी।
*सोल्जर बोर्ड की जानकारी ने खोली परतें*
दीपक पटेल का कहना है कि सैनिक कल्याण बोर्ड से उन्हें बताया गया कि वर्ष 2003 के बाद सेवानिवृत्त हुए सैनिकों के लिए ईसीएचएस से संबंधित अंशदान की राशि पेंशन प्रक्रिया के दौरान ही काट ली जाती है और अलग से 30 हजार रुपये जमा कराने की आवश्यकता नहीं होती। यहीं से यह सवाल खड़ा हो गया कि यदि नियमों के अनुसार राशि पहले ही समायोजित हो चुकी थी, तो फिर 30 हजार रुपये किस आधार पर लिए गए?
*दबाव बढ़ा तो खाते में लौट आए 30 हजार रुपये*
पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने नियमों की जानकारी के साथ लगातार जवाब मांगा और मामले को सार्वजनिक करने की बात कही, तब संबंधित व्यक्ति ने बिना किसी लिखित स्पष्टीकरण के उनके बैंक खाते में पूरी राशि वापस कर दी।
बताया जा रहा है कि राशि जमा होने के करीब एक महीने बाद पीड़ित के खाते में पूरी रकम वापस की गई। इससे यह सवाल और गहरा गया कि यदि राशि वैध रूप से ली गई थी तो उसे वापस करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
राशि वापस करने के दौरान कथित रूप से यह तर्क दिया गया कि सर्वर संबंधी समस्या के कारण काम नहीं हो पा रहा था और कुछ समय बाद प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।
अगर एक पत्रकार के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम सैनिकों का क्या? इस मामले ने कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। यदि एक जागरूक नागरिक और पत्रकार को नियमों की जानकारी न होने पर हजारों रुपये जमा कराने के लिए कहा जा सकता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों की स्थिति क्या होगी जो पूरी तरह ऐसे एजेंटों या सेवा केंद्रों पर निर्भर रहते हैं? स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस प्रकार के मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं अन्य सैनिक परिवार भी इसी तरह की कथित वसूली का शिकार तो नहीं हुए।
*पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों से विशेष अपील* दीपक पटेल ने जिले के सभी पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिजनों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले सैनिक कल्याण बोर्ड, ईसीएचएस कार्यालय अथवा संबंधित सरकारी विभाग से नियमों की जानकारी अवश्य प्राप्त करें। किसी भी व्यक्ति के कहने मात्र पर बड़ी राशि जमा न करें और प्रत्येक भुगतान की वैध रसीद लेना सुनिश्चित करें।
*जांच की उठी मांग* मामले के सामने आने के बाद संबंधित विभागों से इसकी निष्पक्ष जांच कराने की मांग तेज हो गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं होगा, बल्कि उन सैनिकों और उनके परिवारों के विश्वास के साथ खिलवाड़ भी माना जाएगा, जिन्होंने अपना जीवन देश सेवा में समर्पित किया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नियमों के विरुद्ध ली गई राशि बाद में वापस कर दी गई, तो क्या यह केवल एक भूल थी या फिर सैनिकों के नाम पर चल रहे किसी बड़े खेल की एक झलक? इसका जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
*सैनिकों के नाम पर कथित वसूली*
ईसीएचएस कार्ड बनवाने के नाम पर 30 हजार रुपये लेने का आरोप, सोल्जर बोर्ड से जानकारी मिलने के बाद लगभग एक महीने बाद वापस की गई राशि; रसीद मांगने पर टालमटोल के आरोप, पूर्व सैनिकों से जुड़े संगठन की भूमिका पर भी उठे सवाल, जांच की मांग तेज।