15/02/2026
झारखण्ड में कितना कारगर होगा कुनकी हाथी का concept - बाहर से आए कुनकी हाथियों और झारखण्ड के जंगली हाथियों के बीच तालमेल की कमी हिंसक भिड़ंत का कारण बन सकती है। हाथियों को एक जिले से दूसरे प्रभावित गांव तक ले जाने के लिए विशेष ट्रकोंकी जरूरत पड़ेगी, झारखण्ड की भौगोलिक स्थिति में फिलहाल यह संभव नहीं है।
यह हो सकता है। लेकिन हाथी मानव
संघर्ष को कम करने के लिए हाथियों के कॉरिडोर को पुनर्जीवित करना प्रकृति के अनुरूप जरूरी है। हाथियों के कॉरिडोर को भारी नुकसान हुआ है और व्यवस्था ना के बराबर हुई है। हाथी प्रभावित क्षेत्र के लोग तकनीकी रूप से सक्षम नहीं हैं इन्हें भी सक्षम बनाना जरूरी है। इससे भी बड़ी आवश्यकता ग्रामीणों के बीच जागरूकता का संचार है। हाथी के प्रति लोगों में संवेदनशीलता कम है।
कॉरिडोर के गाँवों में हाथियों से छेड़छाड़ आम है सैकड़ों युवा, बड़े, बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं भी हाथियों को जंगल में घेरे रहते हैं और यही हाथी मानव संघर्ष को हर दिन जन्म दे रहा है। हाथी संवेदनशील होते हैं और अपने परिवार पर संकट का साया देख हिंसक रूप अपना रहें हैं। हाथियों के हमले वहीं हो रहें है जब भीड़ उन्हें तंग करती है और दूसरा जब रात में लोग हाथियों के रास्ते पर आ जाते हैं झारखण्ड का यह राजकीय पशु मानव के लिए हिंसक हो चुका है। ऐसे कुछ जगह भी हैं रांची से सटे जहां हाथी गांव के पास स्थित जंगल में रहते हैं लेकिन जान किसी की नहीं जाती वे हाथियों से दायरा बनाकर रहते हैं। हां फसलों का नुकसान होता है, पर जल्दी किसी की मौत नहीं होती। दूसरी ओर हाथी भी दुर्घटना का शिकार हो कर मर रहें। नुकसान दोनों ओर से झारखण्ड को ही हो रहा है।
जागरूकता एवं कॉरिडोर को पुनर्जीवन इस संघर्ष को कम कर सकता है अन्यथा संहर्ष और बढ़ेगा। तकनीक का उपयोग एवं विदेशों की पद्धति को अपनाना भी होगा।
Hemant Soren
Ministry of Environment, Forest & Climate Change, Government of India