30/05/2026
स्मृतियों को झकझोर देने वाली यह तस्वीर की सवाल खड़ी करती है। यह तस्वीर सिमडेगा जिले के संतोषी की मां की है, जो 27 सितंबर, 2017 को भात-भात रटते मर गई थी। पीयूसीएल की टीम सच्चाई को सामने लाने पीड़ित परिवार के पास गई थी। बातचीत के दरम्यान उसूल के पक्के और खोजी पत्रकारिता के पर्याय संजय वर्मा जी ने यह तस्वीर ली थी। लेकिन प्रशासन अपने पुराने नुस्खे पर अड़ी थी।
नागार्जुन ने बहुत पहले इसे अपनी कविता में दर्ज किया था।अंदर से धिक्कार उठेगी, बाहर से हुंकार
मंत्री लेकिन सुना करेंगे अपनी जय-जयकार
सौ का खाना खाएंगे, पर लेंगे नहीं डकार
मरो भूख से, फौरन आ धमकेगा थानेदार
लिखवा लेगा घरवालों से- ‘वह तो था बीमार’“
– नागार्जुन की “वह तो था बीमार”