18/07/2025
रजत जयंती समारोह के ऐतिहासिक क्षण के गवाह बन रहे, बिरसा की इस धरती पर, यहां उपस्थित सभी महानुभावों को जोहार, नमस्कार।
पीयूसीएल, झारखंड की ओर से मैं अशोक झा, आप सबों का हार्दिक स्वागत करता हूं। विशेष रूप से, देश के विभिन्न राज्यों से आए उन साथियों का, जो अपनी व्यस्त दिनचर्या के बावजूद रजत जयंती समारोह में उपस्थित हैं। स्वागत है, पीयूसीएल के राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव व महासचिव डॉ. वी. सुरेश, अन्य पदाधिकारियों समेत सभी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों का जिनकी उपस्थिति मात्र से हमारा उत्साह चरम पर है।
यह सुखद संयोग है कि पीयूसीएल, झारखंड का रजत जयंती समारोह व राष्ट्रीय कन्वेंशन एक साथ आयोजित है। 16 सालों के अंतराल पर आप सब प्राकृतिक सौंदर्य से अटे-पटे, रत्न गर्भा धरती पर सामूहिक रूप से उपस्थित हैं। प्राकृतिक सौंदर्य, खनिज सम्पदा की प्रचुरता एवं प्रतिरोध के लिए दुनिया भर में मशहूर झारखंड में पीयूसीएल को अपनी विशिष्टताओं के साथ बरकरार रखना चुनौती थी। लेकिन हमें खुशी है कि विभिन्न झंझावातों को पार करते हुए, हम 25 साल का सफर पूरा कर लिए हैं। इस सफर में कुछ मिठे तो कुछ कड़वे अनुभव रहे हैं। उन अनुभवों को साझा करने का अवसर यह रजत जयंती समारोह हमें दिया है। यह समारोह हमें संदेश दे रहा है कि 25 सालों की यात्रा पर विहंगम दृष्टि डालते हुए, उपलब्धियों के साथ अपनी कमियों व टुकड़ों -टुकड़ों में आए चुनौतियों से हम सिखते हुए आगे की यात्रा के लिए तैयार हों। रजत जयंती के इस अवसर पर झारखंड के उन सभी साथियों का भी स्वागत है, जिनकी सहभागिता व सक्रियता से हम यहां तक पहुंच पाए हैं। हमारे जेहन में वे सब साथी हैं, जो अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन यह सफर उनके प्रयास, समर्पण व मार्गदर्शन से ही संभव हुआ है। पुरखों की पांत में शामिल हो गए, दिवंगत सभी साथियों को हम भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनकी कर्तव्यनिष्ठा, नागरिक स्वतन्त्रता के लिए समर्पण व पीयूसीएल को एक अलग पहचान देने में जो भूमिका रही है, उसे हम कतई विस्मृत नहीं कर सकते।
कार्यक्रम आगे बढ़े, अपने अनुभव हम साझा कर सके, इसलिए मैं ज्यादा समय नहीं लेना चाहता। झारखंड जो अपनी सामूहिकता, सामुदायिकता, विशिष्ट संस्कृति व स्वतंत्रता का पर्याय है, इस विरासत को बरकरार रखने की अपेक्षा के साथ एकबार फिर से आप सभी का स्वागत है।