17/09/2025
जज साहब के लिए स्पेशल! - द्वारा आचार्य प्रमोद दुबे जी🙏
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यज्ञो वै विष्णु: !
सृष्टि रूपी देव यज्ञ विष्णु हैं!
जज साहब ही नहीं, आधुनिक शिक्षा प्राप्त अँग्रेजी पढ़े- लिखे लोग भारतीय ज्ञान परंपरा से अनभिज्ञ होते हैं। फिर भी उच्च पदों पर बैठकर खेदजनक टिप्पणी कर देते हैं।
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विश् धातु से 'विष्णु' शब्द बना है और 'विश्व' शब्द भी
इसी धातु से 'प्रविष्ट' शब्द बना है।
विश्व में प्रविष्ट चैतन्य को विष्णु कहते हैं।
विष्णु की अवधारणा के कारण विश्व जीवन में अहिंसा, सत्य, परोपकार, विश्वबंधुत्व, समता, उचित, न्यायसंगत इत्यादि मानव मूल्य स्थापित हैं।
शब्दार्थ के अनुसार मैं ने विष्णु का परिचय दिया।
विष्णु का विशेष परिचय वैदिक सूक्तों से जानना चाहिए।
जज को विष्णु सूक्त अवश्य जानना चाहिए। ऐसे अल्पश्रुतों के लिए पुराण है-विष्णु धर्मोत्तर महापुराण।
संविधान के संदर्भ में विष्णु की अवधारणा को अवश्य समझना चाहिए।
विष्णु को जाने बिना उस 'हम' को नहीं जान सकते, जिस 'हम' से संविधान आरंभ होता है- 'हम' भारत के लोग...
जिस 'हम' में भारत के सभी लोग समाहित हैं।
यह सर्वात्मक 'हम' हमारे विष्णु विराट का अल्पांश है।
किसी 'जज' को संविधान का अनुसरण करने के लिए संविधान का 'हम' जानना अनिवार्य है
अन्यथा वह संविधान का संरक्षक नहीं बन सकता।
वैज्ञानिक दृष्टि यह कि
विष्णु का विराट स्वरूप अनंत ब्रह्माण्ड में व्याप्त हैं।
विष्णु को अनंत भगवान कहा जाता है।
'अन् अन्त' = अनन्त जिस का न आदि है न अन्त। उन्हें अनन्त शयनम् कहा जाता है।
विष्णु शेष शैया पर क्षीरसागर में सो हुए हैं।
ब्रह्माण्ड घूम रहा है, इससे दूध के समान सफेद आकाशगंगा /ग्लैक्सी सर्पाकार दिखती है।
खगोलीय पिण्डों के पार प्रकाश ही प्रकाश है उसे क्षीरसागर कहा गया है। यह अप्रमेय अनन्त है।
लोग इसी अनन्त के लिए अनन्त चतुर्दशी को व्रत रखते हैं।
अनन्त शब्द की चर्चा चल पड़ी तो 'अन्तिम' शब्द की चर्चा कर लेनी चाहिए,
क्योंकि अनन्त और अन्तिम दोनों अभेद हैं। विष्णु अनन्त है और शिव अन्तिम। शिव के हृदय विष्णु हैं और विष्णु के हृदय शिव।
अन्तिम शब्द काल बोधक है, यह महाकाल का नाम है।
प्राचीन विश्व संस्कृति में काल का 'अन्तिम' नाम सबको पता था।
फारस से लेकर ग्रीस और रोम तक अन्तिम भगवान को सभी सिर झुकाते थे।
फारसी में इंतकाल शब्द है- अंतकाल और लैटिन में अन्तिम का 'टिमा' उच्चारण होता है।
'अं' का लोप हो गया है अंतिमा से 'टिमा' शब्द बना और टिमा से अँग्रेजी में टाइम शब्द बना।
अँग्रेजी में अंत शब्द का उच्चारण जीभ ऐंठ कर 'एंट' किया जाता है।
अन्तिम काल > अंतकाल को सिर झुकाना पड़ता है- जज साहब!
आप अनन्त को अँग्रेजी में जरूर जान- समझ लीजिएगा कि इंफिनिटी क्या होता है? इससे
विष्णु की कुछ समझ हो जाएगी।
विष्णु अनन्त हैं- इंफिनाइट।
संविधान और न्याय का संदर्भ लें।
संविधान शब्द में सम् उपसर्ग है। 'सम्' क्या है? सम् समझे बिना विधि -विधान का सम्यक् व्यवहार नहीं हो सकता।
गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है- समोऽहं सर्वभूतेषु।
मैं सम् रूप से सर्वत्र व्याप्त हूँ।
श्रीकृष्ण कोई और नहीं, सर्वत्र प्रविष्ट विष्णु ही हैं।
आप सम् का पर्याय अँग्रेजी में (स = c) com/con समझिएगा ।
'संविधान' शब्द नहीं समझेगे तो 'हम भारत के लोग' कैसे समझिएगा ?
सम्यक् बुद्धि और साम्य के बिना न्याय कैसे कीजिएगा।
अर्थात विष्णु की अवधारणा नहीं समझिएगा तो न्याय कैसे कीजिएगा?