13/04/2026
सम्मानित साथियों,
आज मैं एक महत्वपूर्ण विषय पर बात करना चाहता हूँ — क्या धर्मांतरित आदिवासी, आदिवासी नहीं रहता? इसका उत्तर स्पष्ट है — धर्म बदलने से आदिवासी पहचान नहीं बदलती।
आदिवासी होना हमारे जन्म, हमारी परंपरा, हमारी भाषा, हमारी संस्कृति और हमारे पूर्वजों से जुड़ा है। कोई व्यक्ति अगर अपना धर्म बदलता है, तो वह अपनी आस्था बदलता है, लेकिन वह अपने पूर्वज, अपनी जातीय पहचान और अपने समुदाय को नहीं बदल सकता।
मुंडा, उरांव, संथाल, हो या कोई भी जनजाति — ये पहचान धर्म से नहीं, बल्कि वंश और संस्कृति से तय होती है। अगर कोई आदिवासी ईसाई बन जाता है, या किसी और धर्म को मानता है, तो वह फिर भी आदिवासी ही रहता है। उसकी भाषा वही रहती है, उसका गोत्र वही रहता है, उसकी परंपरा वही रहती है।
इसलिए हमें यह समझना होगा कि धर्म अलग हो सकता है, लेकिन आदिवासी पहचान एक है। हमें आपस में बंटने की नहीं, बल्कि अपनी एकता को मजबूत करने की जरूरत है। क्योंकि हम सबकी जड़ एक है — हमारी धरती, हमारे पूर्वज और हमारी संस्कृति।
आइए, हम सब मिलकर कहें — धर्म अलग हो सकता है, लेकिन आदिवासी पहचान हमेशा एक रहती है।
धन्यवाद। जोहार