निषाद विकास महासभा उत्तर प्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट १९६० के अंतर्गत एक पंजीकृत संस्था है जिसका उद्देश्य निषाद जाति एवं सम्बन्दित उपजातियों का सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक पुनरुथान करने हेतु समाज को संगठित करना। निषाद समुदाय के बहुमुखी विकास के लिए शासन द्वारा पारित आदेशों व नियमों तथा योजनाओं का समाज के लोगों को जानकारी उपलब्ध कराना एवं योजनाओं से लाभान्बित कराने का प्रयास
करना।
निषाद विकास महासभा, उत्तर प्रदेश के संस्थापक श्री आर पी रामसखा ने देश एवं प्रदेश में निषादों को संगठित करने का आह्वाहन किया और महासभा की स्थापना १९९० की तथा निषाद समाज के शोषित पीड़ित लोगों को उनके हक और अधिकारों को दिलाने के लिऐ शिक्षित, संगठित और प्रोत्साहित कर सामाजिक जागरूकता पैदा करने हेतु प्रयासरत हैं।
Nishad Vikas Mahasabha Uttar Pradesh is a registered institution/society under the “Society Registration Act, 1960”. The purpose of society is to unite and organise the peoples of Nishad caste and allied subcastes for social, educational, economic, and cultural revival and upliftment. The society is committed to aware the people of the community about the various schemes and initiatives of the government and making efforts to benefit them from these schemes for the multi-faceted development of the Nishad community. Ramsakha called for the organization of Nishad community in the country and the state and established the Mahasabha in the 1990. He organized the peoples to provide their rights and educated them. He raised the voice for the rights of the oppressed people of Nishad community and continuously strive to create social awareness by encouraging them.
संस्था के उद्देश्य:-
(i) निषाद जाति के आर्थिक, शैक्षिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक पुनरुत्थान हेतु समाज को संगठित करन।
(ii) निषाद समुदाय के प्रतिभावान युवक /युवतियों की पहचान कर उनको पुरुस्कृत करना एवं उज्जवल भविष्य के लिए उनका मार्गदर्शन करना।
(iii) आर्थिक संपन्नता हेतु युवक/युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनका कौशल विकास कर रोजगार के अवसर पैदा करना एवं क्षमता के अनुसार रोजगार दिलान।
(iv) निषाद समुदाय के बच्चों एवं प्रौढ़ों को शिक्षा की सुविधा प्रदान करने हेतु विद्यालयों एवं आश्रमों की स्थापना करन।
(v) निषाद समुदाय में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए स्वजातीय-पत्र एवं प्रेस की स्थापना करन।
(vi) निषाद समुदाय के विभिन्न गोत्रों एवं सम्बंदित उपजातियों में आंतरिक संबंध स्थापित करने हेतु अंतरगोत्रीय विवाह को प्रोत्साहन देना एवं समाज में फैली हुई कुरीतियों का उन्मूलन करन।
(vii) बाढ़ के समय तथा अन्य अवसरों पर संगठन के स्वयंसेवकों द्वारा डूबते हुए लोगों की प्राण रक्षा के लिए कार्य करन।
(viii) पैतृक धंधों एवं पारम्परिक अधिकारों की सुरक्षा तथा उनके विकास व आधुनिकीकरण की व्यवस्था करना एवं करवाना।
(ix) कृषि के क्षेत्र में उनके सभी अधिकारों की सुरक्षा की व्यवस्था तथा उन्नति करना एवं करान।
(x) नाव बनाना, जाल बुनना, मत्स्य पालन एवं मत्स्य आखेट करना व कराना, घाटों पर नाव चलाना है तथा तत्संबंदी उद्योगों को करना एवं करान।
(xi) निषाद समुदाय के युवकों को तैराकी, डुबकी लगाने आदि का प्रशिक्षण दें, दिलाकर जल पुलिस, मत्स्य पुलिस एवं जल सेना आदि की योग बनाकर राष्ट्र को सौंपन।
(xii) निषाद समुदाय के बहुमुखी विकास के लिए शासन द्वारा पारित आदेशों व नियमों तथा योजनाओं को समाज के लोगों को जानकारी कराना तथा उससे लाभान्वित कराने का प्रयास करन।