19/08/2026
लहरवाड़ी गांव जैसी घटनाएं सिर्फ एक वारदात नहीं होतीं, बल्कि वे हमें अपने समाज के उस चेहरे को देखने पर मजबूर करती हैं, जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। ज़रा जरा सी बातों पर हत्या जैसी वारदात या सालों पुरानी दुश्मनी, आपसी रंजिश और नफरत जब इस हद तक पहुंच जाए, तो हमें रुककर यह सोचना होगा कि आखिर हमारी आने वाली नस्लों को हम किस दिशा में ले जा रहे हैं?
जिस उम्र में हमारे बच्चों के हाथों में किताब, हुनर और अपने भविष्य की जिम्मेदारी होनी चाहिए, उसी उम्र में अगर उनके आसपास गोलियां, हथियार, नफरत और दुश्मनी की बातें दिखाई देने लगें, तो यह सिर्फ कानून व्यवस्था का सवाल नहीं है, बल्कि हमारी सामाजिक और शैक्षणिक नाकामी का भी सवाल है।
हमें अपने बच्चों को सिर्फ पढ़ाना नहीं है, बल्कि उन्हें अखलाक, इंसानियत, जिम्मेदारी और सही गलत की पहचान भी सिखानी है। दीनी तालीम हो या आधुनिक शिक्षा दोनों का मकसद इंसान को बेहतर इंसान बनाना होना चाहिए।
हमें यह तय करना होगा कि हमारी अगली पीढ़ी पुरानी दुश्मनियां विरासत में लेगी या अपने लिए नया भविष्य बनाएगी।
बच्चे अगर अच्छे डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, कारोबारी, खिलाड़ी या हुनरमंद बनेंगे तो समाज आगे बढ़ेगा, लेकिन अगर उन्हें नफरत और बदले की विरासत दी गई, तो हम अपने ही हाथों अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करेंगे।
मेवात को हथियारों की नहीं, शिक्षा की जरूरत है।
नफरत की नहीं, अखलाक की जरूरत है।
दुश्मनी की नहीं, एक बेहतर भविष्य की जरूरत है।
आज वक्त है कि मां बाप, शिक्षक, समाज के जिम्मेदार लोग और हमारे रहनुमा मिलकर अपने बच्चों की तरफ ध्यान दें। हर बच्चे को स्कूल, सही माहौल, अच्छी संगत और सही मार्गदर्शन देना ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
आज़ाद मेहराब ✍️
MCI Lakshya | Mission Mewat Education