27/12/2025
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद का 26वां राष्ट्रीय वार्षिक अधिवेशन – जयपुर (राजस्थान)
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद का 26वां राष्ट्रीय वार्षिक अधिवेशन राजस्थान की राजधानी जयपुर में अत्यंत गरिमामय, अनुशासित एवं प्रेरणादायी वातावरण में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
इस ऐतिहासिक अधिवेशन में देशभर के सभी प्रदेशों एवं प्रांतों से परिषद के प्रतिनिधियों तथा मातृशक्ति की सहभागिता रही। कुल 40 प्रान्तों से 620 प्रतिनिधि इस अधिवेशन में उपस्थित रहे।
इस राष्ट्रीय अधिवेशन की अध्यक्षता परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी, PVSM, AVSM, SM ने की।
अपने उद्बोधन में उन्होंने “राष्ट्र प्रथम, सदैव सर्वदा” के भाव को रेखांकित करते हुए कहा कि सैनिक देश की सबसे अनुशासित, समर्पित और प्रतिबद्ध शक्ति हैं, जिन्होंने अपने जीवन का सर्वोत्तम समय राष्ट्रसेवा में अर्पित किया है। उन्होंने पूर्व सैनिकों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने का आश्वासन दिया। साथ ही पेंशन, स्वास्थ्य सेवाएँ, पुनर्वास, रोजगार, सामाजिक सम्मान तथा सैनिक परिवारों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर, सार्थक एवं सकारात्मक विमर्श हुआ।
इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का संचालन प्रदेश अध्यक्ष मेजर जनरल अनुज माथुर एवं उनकी पूरी टीम द्वारा अत्यंत सुव्यवस्थित, समन्वित और सराहनीय ढंग से किया गया।
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान के राज्यपाल माननीय श्री हरिभाऊ बागडे रहे। आर्मी एरिया ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा—
“ सैनिक कभी पूर्व नहीं होता। वर्दी में न होने पर भी वह राष्ट्र निर्माण में निरंतर योगदान देता रहता है।”
उन्होंने पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारजनों के कल्याण, सम्मान तथा सामाजिक सहभागिता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। साथ ही इस अवसर पर राजस्थान प्रांत की विशेष स्मृति (Book)-विमोचन भी किया गया।
दूसरे दिन राजस्थान सरकार के सैनिक कल्याण *मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौर की गरिमामय उपस्थिति रही। उन्होंने वीर नारियों का सम्मान किया तथा पूर्व सैनिकों को राष्ट्रसेवा एवं सामाजिक कार्यों में निरंतर सक्रिय रहने के लिए प्रेरित किया।
परिषद् की सैन्य संदेश मैगज़ीन के विशेष संस्करण (स्पेशल एडिशन) का विमोचन भी किया।
अधिवेशन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया, जिसमें राजस्थानी संस्कृति और लोक परंपराओं की प्रस्तुति ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अधिवेशन का एक विशेष आकर्षण तीनों दिनों तक परोसा गया पारंपरिक एवं स्वादिष्ट राजस्थानी भोजन रहा। इसके अतिरिक्त, बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति के लिए समुचित एवं सुव्यवस्थित आवास व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जो अत्यंत सराहनीय रही।
यह राष्ट्रीय अधिवेशन पूर्व सैनिकों की एकता, संगठन की सशक्तता तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी सतत भूमिका का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।
जय भारत।
जय भारत की सेना।