15/12/2024
गीता अध्याय 4 श्लोक 35
श्री कृष्ण कहते हैं कि जब साधक सच्चे ज्ञान को प्राप्त कर लेता है, तब वह समझ पाता है कि आत्मा ही सम्पूर्ण ब्रह्मांड का आधार है। यह ब्रह्म ज्ञान सभी द्वैतों और भ्रामक धारणाओं को मिटा देता है। आत्मा के इस सत्य का अनुभव होने पर व्यक्ति को यह बोध होता है कि संसार की हर वस्तु और हर क्रिया आत्मा में ही समाहित हैं और उसी से प्रकट हुई हैं।