04/06/2026
["कॉकरोच जनता पार्टी"]
बात 16 मई 2026 की है। देश में बेरोजगारी की समस्या अपनी चरम सीमा पर थी और छात्र परेशान थे। तभी सुप्रीम कोर्ट के माननीय मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने देश के बेरोज़गार युवाओं की तुलना किचन में छिपे "कॉकरोचों" से कर दी। उन्होंने शायद सोचा होगा कि जैसे कॉकरोच बिना किसी काम के घर-घर में घूमते हैं, वैसे ही आज का युवा बस सोशल मीडिया पर रीलें देख रहा है। लेकिन जज साहब यह भूल गए कि कॉकरोच डार्विन के 'सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट' का सबसे बड़ा उदाहरण है! वो परमाणु हमले में भी जिंदा बच सकता है, तो क्या वो एक टिप्पणी से मर जाएगा? युवाओं ने इस अपमान को एक मेडल की तरह सीने पर लगा लिया। उन्होंने कहा, "अगर हम कॉकरोच हैं, तो हमारी एक पार्टी भी होगी!" और इस तरह जन्म हुआ 'कॉकरोच जनता पार्टी' का। देखते ही देखते यह डिजिटल कीड़ा देश के हर छात्र के मोबाइल स्क्रीन पर रेंगने लगा। जो छात्र पहले सिर्फ परीक्षा के पेपर लीक होने पर रोते थे, अब वो CJP के मीम्स देखकर सरकार की नीतियों पर हंसने लगे। यह भारत का पहला ऐसा आंदोलन था जिसकी रीढ़ की हड्डी कोई विचारधारा नहीं, बल्कि इंटरनेट का 'ब्लैक ह्यूमर' था।
अब जब देश के 2.2 करोड़ युवा (जो कि कई यूरोपीय देशों की कुल आबादी से ज्यादा हैं) एक अदृश्य कॉकरोच के पीछे मार्च करने लगे, तो सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें आना स्वाभाविक था। जिस देश में सरकार को विपक्ष के नेताओं से डर नहीं लगता, वहां एक 'डिजिटल कॉकरोच' ने रातों की नींद उड़ा दी। फिर क्या था? तुरंत राष्ट्रीय सुरक्षा का संकट घोषित कर दिया गया! इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और साइबर सेल के बड़े-बड़े अधिकारियों को काम पर लगाया गया। उनके कंप्यूटर स्क्रीन्स पर अब आतंकी ठिकानों के नक्शे नहीं, बल्कि 'अभिजीत दीपके' के बनाए कॉकरोच वाले मीम्स जूम-इन करके देखे जाने लगे। सरकार ने दावा किया कि ये घरेलू कॉकरोच नहीं हैं! इनके पीछे जॉर्ज सोरोस और पाकिस्तान का हाथ है। आरोप लगाया गया कि इस्लामाबाद और बांग्लादेश के नालों से लाखों 'विदेशी कॉकरोच' भारत के युवाओं के इंस्टाग्राम अकाउंट्स में घुसपैठ कर रहे हैं।
मजाक से इतर, इस पूरे व्यंग्य के पीछे एक बहुत ही कड़वी और दर्दनाक हकीकत छिपी है। भारत का युवा आज सच में खुद को एक 'कॉकरोच' ही महसूस कर रहा है। वह दिन-रात पढ़ाई करता है, माता-पिता की गाढ़ी कमाई कोचिंग सेंटरों में फूंकता है, और जब परीक्षा का दिन आता है, तो पता चलता है कि पेपर पहले ही वॉट्सऐप पर ₹5 लाख में बिक चुका है। NEET का पेपर लीक हो गया, CUET का सर्वर बैठ गया, रेलवे की नौकरियां सालों-साल लटकी रहीं। जब युवा सड़कों पर हक मांगने निकले, तो उन्हें लाठियां मिलीं और जब सोशल मीडिया पर बोले, तो उन्हें 'विदेशी एजेंट' बता दिया गया। सरकार को इस बात की बिल्कुल चिंता नहीं है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अधिकारी पेपर कैसे लीक करवा रहे हैं, या शिक्षा मंत्री की नाक के नीचे करोड़ों रुपयों का घोटाला कैसे हो रहा है? सरकार की पूरी ताकत इस बात की जांच करने में लगी है कि अमेरिका में बैठा एक लड़का बिना किसी VPN के भारतीय युवाओं को सरकार के खिलाफ हंसना कैसे सिखा रहा है! इस पूरे आंदोलन की सबसे मजेदार बात यह है कि इसका मुख्य रिमोट कंट्रोल भारत के किसी नाले या नुक्कड़ पर नहीं, बल्कि अमेरिका के बोस्टन शहर में बैठकर ऑपरेट हो रहा है। इसके मुख्य सूत्रधार, अभिजीत दीपके, बोस्टन की ठंडी हवाओं में बैठकर ट्वीट करते हैं और यहां भारत की तपती गर्मी में लाखों छात्र सड़कों पर उतरने को तैयार हो जाते हैं। इसे कहते हैं असली "वर्क फ्रॉम होम"!
6 जून को दिल्ली में दो ही चीजें देखने को मिलेंगी: या तो दिल्ली पुलिस 'पेस्ट कंट्रोल' (लाठीचार्ज और वाटर कैनन) की तरह इन छात्रों को खदेड़ेगी, या फिर ये डिजिटल कॉकरोच लुटियंस दिल्ली की वीआईपी सड़कों पर रेंगते हुए सरकार के 'अहंकार के किले' में छेद कर देंगे। इतिहास गवाह है, आप शेर को पिंजरे में बंद कर सकते हैं, हाथी को जंजीर से बांध सकते हैं, लेकिन अगर घर में 'कॉकरोच' घुस जाएं, तो पूरी गृहस्थी परेशान हो जाती है!
6 जून की शाम को जब दिल्ली की सड़कों पर लाठियां और नारे शांत हो जाएंगे, तब असली युद्ध शुरू होगा—डिजिटल कुरुक्षेत्र में! यह लड़ाई हथियारों से नहीं, बल्कि मीम्स, हैशटैग और रील व्यूज से लड़ी जाएगी। इस युद्ध के दो मुख्य मोर्चे होंगे, मोर्चा नंबर 1: इंस्टाग्राम – "द रीवोल्यूशन विल बी एस्थेटिक", मोर्चा नंबर 2: X (पुराना ट्विटर) – "द टूलकिट एंड द ट्रिब्यूनल"
6 जून की इस डिजिटल लड़ाई का विजेता कोई नहीं होगा। सरकार दावा करेगी कि उन्होंने 'विदेशी टूलकिट' को नाकाम कर दिया, CJP दावा करेगी कि उनके इंस्टाग्राम पर 2 मिलियन फॉलोअर्स और बढ़ गए। लेकिन इन सब के बीच, वह छात्र जिसने CUET या NEET की तैयारी के लिए रात-दिन एक किया था, वह 7 जून की सुबह उठकर फिर से गूगल पर सर्च कर रहा होगा—"How to crack exams if paper is already leaked?"
जब सरकार थक-हारकर CJP के मुख्य इंस्टाग्राम पेज पर 'डिजिटल बुलडोज़र' चला देगी, तो उन्हें लगेगा कि क्रांति का अंत हो गया। लेकिन वे भूल जाते हैं कि कॉकरोच को आप मुख्य दरवाजे से भगा सकते हैं, पर वह सिंक के नीचे से दोबारा निकल आता है! मुख्य पेज बैन होते ही भारत का पहला 'गंदे नालों का डिजिटल गुप्त साम्राज्य' शुरू होगा। इंस्टाग्राम पर पाबंदी लगते ही यह आंदोलन टेलीग्राम और वॉट्सऐप चैनल्स के अंडरग्राउंड टनल में शिफ्ट हो जाएगा। यह वो जगह है जहां पहले से ही भारत का आधा टैलेंट मूवी डाउनलोड करने और लीक पेपर ढूंढने के लिए बैठा रहता है।
इस पूरे तीखे राजनीतिक व्यंग्य का सबसे बड़ा और कड़वा सच यही है कि भारतीय लोकतंत्र में जनता हमेशा 'नाराज' रहती है और सरकारें हमेशा 'जांच' करती रहती हैं। भविष्य के चुनावों में भले ही कॉकरोच सिंबल वाली पार्टी को कुछ सीटें मिल जाएं, या सरकार भारी बहुमत से वापस आ जाए, लेकिन देश के चुनावी इतिहास में यह साल हमेशा याद रखा जाएगा। यह वह दौर था जब देश की सबसे बड़ी ताकत—यानी यहां की युवा आबादी को सिस्टम ने रेंगने पर मजबूर कर दिया था, लेकिन उन युवाओं ने उसी रेंगने की कला को सरकार की छाती पर मूंग दलने का सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बना लिया।
~अभय शंकर