13/07/2026
राष्ट्र के लिए बहुत ही शर्म की बात है कि एक विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक और अविष्कारक 16 दिनों से भूख हड़ताल पे है । वो शिक्षा के लिए लड़ रहे है और देश की जनता चुप है
आज हमारी शिक्षा प्रणाली एक चौराहे पर खड़ी है। शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का आधार है। जब इस आधार में ही भ्रष्टाचार, लापरवाही या विफलता के संकेत मिलने लगें, तो एक जागरूक नागरिक के रूप में सवाल पूछना हमारा संवैधानिक और नैतिक अधिकार है।
क्या हम अपने भविष्य को ऐसे ही अंधकार में जाने दे सकते हैं? आज देश का युवा सड़कों पर है—सिर्फ इसलिए नहीं कि उन्हें न्याय चाहिए, बल्कि इसलिए क्योंकि वे एक ऐसी शिक्षा प्रणाली चाहते हैं जो उनके सपनों को पंख दे, न कि उन्हें कागजों में उलझा दे।
वर्तमान में शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग को लेकर डॉ सोनम वांगचु , छात्र और नागरिक आंदोलनरत हैं, वह केवल एक पद के प्रति असंतोष नहीं है, बल्कि यह सिस्टम में आमूल-चूल परिवर्तन की पुकार है।
यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरोध का नहीं, बल्कि उन मूल्यों के समर्थन का है जो एक सुदृढ़ शिक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक हैं। जब तक शिक्षा मंत्रालय में जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक प्रतिभाओं का पलायन और युवाओं का मोहभंग होता रहेगा।
आज डॉ सोनम वांगचु को भूख हड़ताल पे बैठे हुए 15 दिन हो गया लेकिन सरकार की एक भी मंत्री या किसी नेता का न तो कोई आश्वासन मिला , न ही कोई ट्वीट, न ही कोई उनसे मिलने तक आया है । इतना अहंकार है इस सरकार को अपनी कुर्सी से है तो बता देना चाहता हु कि ये जो कुर्सी पे आप बैठे हुए है इसपे जनता ने ही आप को चुन कर बैठाया है । इतना अहंकार तो अंग्रेज के पास भी नहीं था जब गांधी जी अंग्रेजों की खिलाफ आमरण अनशन पे बैठते थे तो अंग्रेज भी उनकी स्वाथ की खबर रखते थे और उनसे बात करने के लिए प्रतिनिधि मंडल को भेजा करते थे।लेकिन आज देश स्वतंत्र एवं लोकतांत्रिक होते हुए भी देश की जनता के मुद्दों पे कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है ।आज डॉ सोनम वांगचु को आमरण अनशन पे बैठे हुए 15 दिन हो गये लेकिन सरकार की तरफ से बात-चीत करने के लिए न कोई प्रतिनिधि मंडल आया , न कोई डॉ उनके स्वास्थ का चेकअप के लिए आया, न कोई मंत्री उनसे मिलने आया, न कोई नेता का ट्वीट आया । देश के एजुकेशन मिनिस्टर से इतना ही कहूँगा कि इतना घमंड अपने कुर्सी पे नहीं करना चाहिए। आज आप जिस कुर्सी पे बैठे है उसपे देश की जनता ही ने आप को बैठाया है । अगर देश की जनता आप से इस्तीफा देने को कह रही है तो दे क्यों न देते।
आखरी दो लाइन इस देश के एजुकेशन मिनिस्टर के लिए कहूँगा ।
कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है,
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं।