The Mirror of Railway

The Mirror of Railway ​The Mirror of Railway: भारतीय रेल का असली सच। रेल कर्मचारियों के हक की बेबाक आवाज़। सच्चाई का दर्पण।

15/08/2026

आज की घटना है ब्लेड मारा

भविष्य सुरक्षित हो, बुढ़ापा सम्मानजनक हो—यही हर कर्मचारी का अधिकार है!​आज देश का हर NPS और UPS के दायरे में आने वाला कर्...
26/07/2026

भविष्य सुरक्षित हो, बुढ़ापा सम्मानजनक हो—यही हर कर्मचारी का अधिकार है!
​आज देश का हर NPS और UPS के दायरे में आने वाला कर्मचारी असमंजस की स्थिति में है। पिछले 22 सालों से इंतजार करने के बाद भी हाथ क्या आया? सिर्फ आश्वासन और जुमले! दूसरों पर आरोप लगाने या नेताओं के भरोसे बैठने से अब बात नहीं बनेगी।
​जैसे देश के युवाओं, किसानों और छात्रों ने अपने हक को सरकार के सामने सिर्फ मांगा नहीं, बल्कि जनआंदोलन के जरिए छीन कर लिया, ठीक उसी तरह अब तमाम विभागों के कर्मचारियों को भी एकजुट होना होगा।
​❌ हमें न NPS चाहिए, न UPS और न ही कोई हाइब्रिड पेंशन!
✅ कर्मचारियों को सिर्फ और सिर्फ 100% OPS (पुरानी पेंशन योजना) चाहिए!
​आज जो नेता कर्मचारियों को यह समझाते हैं कि जो मिल रहा है उसे स्वीकार कर लो, वे असल में संघर्ष से डरते हैं। लेकिन कर्मचारी अब डरने वाला नहीं है। सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी और भगत सिंह ने अगर यह सोचा होता कि लड़ने से सजा मिल जाएगी, तो आज देश आजाद नहीं होता। आज रिटायर हो चुके पुराने कर्मचारी 25,000 से 60,000 रुपये तक की सम्मानजनक पेंशन पा रहे हैं, जबकि आज का युवा कर्मचारी बुढ़ापे की असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर है।
​अब वक्त आ गया है कि डर की जंजीरों को तोड़ा जाए, संघर्ष का रास्ता अपनाया जाए और अपने हक की लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया जाए।
​आप सभी से हाथ जोड़कर अपील है कि हमारे पेज को Follow और Subscribe जरूर करें और इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा Share करें।
​अगर आप लिख नहीं सकते, तो बोलिए; बोल नहीं सकते, तो साथ दीजिए; और अगर साथ भी नहीं दे सकते, तो कम से कम जो कर्मचारी हक के लिए लड़ रहे हैं, उनका विरोध तो मत कीजिए!
​आइए, एकजुट हों और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करवाएं।
​बिकास कुमार यादव
राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, AIRTU
​ ारा_हक_है

🚨🚨 ड्यूटी पास होने के बाद भी सीट क्यों नहीं देते TTE? 🚨​क्या रेलवे का लॉबी से ड्यूटी पास देना सिर्फ एक दिखावा है? अगर रे...
08/07/2026

🚨🚨 ड्यूटी पास होने के बाद भी सीट क्यों नहीं देते TTE? 🚨
​क्या रेलवे का लॉबी से ड्यूटी पास देना सिर्फ एक दिखावा है? अगर रेलवे ड्यूटी पास पर यात्रा की कोई उचित व्यवस्था नहीं कर सकती, तो स्पेयर ड्यूटी बंद कर दे। रेलवे को स्पेयर ड्यूटी भी करवानी है और सीट भी नहीं देनी है।
​यह सब टीटीई और रनिंग स्टाफ के बीच भाईचारा खराब कर रहा है। हालांकि ज्यादातर टीटीई समझदार हैं और सीट दे देते हैं, लेकिन कुछ टीटीई रनिंग स्टाफ को देखते ही ऐसे चिढ़ जाते हैं जैसे कोई बाहरी आ गया हो।
​👇👇 कल का मामला: 12925 (अमृतसर-मुंबई पश्चिम एक्सप्रेस) 👇👇
कोटा-रामगंजमंडी के बीच स्पेयर जा रहे लोको पायलट राजा रामकुमार के साथ टीटीई ने बदसलूकी की, गाली-गलौज की और चलती ट्रेन से धक्का देने की कोशिश की। टीटीई ने नौकरी खाने की धमकी दी और खाली सीट होने के बावजूद सीट देने से मना कर दिया। यहाँ तक कि आरपीएफ जवान ने भी मोबाइल छीनने और मारपीट की कोशिश की। लोको पायलट को पूरे सफर टॉयलेट के पास खड़े रहना पड़ा।
​यूनियन के ठेकेदारों से मेरा सीधा सवाल:
​आज लोको पायलट के साथ यह गुंडागर्दी हुई है, कल यह किसी और के साथ होगी। आखिर आप लोग सिर्फ चंदा वसूलने के लिए बैठे हैं या कर्मचारियों के सम्मान के लिए?
​राजस्थान में जब ट्रैक मेंटेनर और टीटीई के बीच ऐसा ही मामला हुआ था, तब आप लोगों ने चुप्पी क्यों साध रखी थी?
​क्या आप लोगों की 'गंदी राजनीतिक' और समझौतों के कारण ही आज TTE का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे कर्मचारियों के साथ मारपीट पर उतारू हो गए हैं?
​साथियों, अब समय आ गया है!
मामला किसी भी कैडर का हो—इंजीनियरिंग, रनिंग या ट्रैक मेंटेनर—जब बात आत्मसम्मान की आए, तो हमें एक साथ खड़ा होना होगा। कुछ जगहों पर टीटीई की यह बढ़ती गुंडागर्दी और रेलवे प्रशासन की चुप्पी तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक हम खुद एकजुट होकर सवाल नहीं पूछेंगे।
​— विकास कुमार यादव
(सेंट्रल रेलवे, इंजीनियरिंग कैडर)
​ #12925

बकवास, सिर्फ OPS मुद्दे की बात!​क्या आप तैयार हैं, साथियों? या अभी भी इन दलाल संगठनों की जुमलाबाजी के शिकार बने रहेंगे?​...
08/07/2026

बकवास, सिर्फ OPS मुद्दे की बात!
​क्या आप तैयार हैं, साथियों? या अभी भी इन दलाल संगठनों की जुमलाबाजी के शिकार बने रहेंगे?
​पिछले 22 वर्षों से OPS के नाम पर सिर्फ चंदा वसूली, रैलियों में दरी बिछवाना और कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ ही किया गया है। अभी 1 घंटा पहले भी नेताजी के पोस्ट को देख लिया—OPS के नाम पर मात्र 1 कर्मचारी का समर्थन! बाकी सब NPS और UPS की गुलामी में मस्त। क्या यही है आपका 22 साल का संघर्ष?
​अब बहुत हुआ!
​इन तथाकथित संगठनों और दलालों की दुकान बंद करने का वक्त आ गया है। हमें किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं है जो सिर्फ सरकार से समझौता करके कर्मचारियों को धोखा देते रहे हैं। कर्मचारी अब खुद अपनी लड़ाई लड़ेगा क्योंकि नेताजी और उनके संगठन पूरी तरह असफल हो चुके हैं।
​हमारा नया रास्ता—सीधा ज्ञापन:
इस मामले में सरकार की कोई गलती नहीं है।
सरकार का रुख बिल्कुल साफ है। सरकार कर्मचारियों को 100% OPS देने के लिए तैयार है। गलती सिर्फ दलाल संगठनों की है जो आपको भ्रमित करते रहे हैं। अब वक्त है भ्रम से बाहर निकलने का।
सरकार तक हमारी आवाज सीधे पहुँचेगी। अब किसी संगठन के पोस्टर या नारेबाजी की जरूरत नहीं है, हमें आवश्यकता है—सामूहिक रूप से सरकार को व्यक्तिगत ज्ञापन सौंपने की।
​अगर आप अब भी इन संगठनों की गंदी वाली राजनीति को समझना चाहते हैं और खुद के भविष्य के लिए आगे आना चाहते हैं, तो कमेंट बॉक्स में YES या NO लिखकर अपनी शक्ति दिखाएं।
​जागो कर्मचारी, जागो!
जुमलाबाजी बंद करो और खुद अपने हक के लिए खड़े हो जाओ।
​— विकास कुमार यादव
(सेंट्रल रेलवे, इंजीनियरिंग विभाग)
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https://www.facebook.com/share/p/1FgmCQwwhb/सरकार से डरना कायरता है, और कर्मचारियों को लूटना गद्दारी! ओल्ड पेंशन की जंग ...
08/07/2026

https://www.facebook.com/share/p/1FgmCQwwhb/
सरकार से डरना कायरता है, और कर्मचारियों को लूटना गद्दारी! ओल्ड पेंशन की जंग में ये संगठन सबसे बड़ी बीमारी!"

"जो पेंशन न दिला सके, वो कैसा यूनियन का झंडा? होश में आओ कर्मचारी, ...

🔥🔥 रेलवे ट्रैक मेंटेनर्स का 'खतरनाक' सच! कब तक सहोगे ये अन्याय? 🔥🔥​नेताओं के ढोल-नगाड़े बंद करो! अब समय 'फोटो सेशन' का न...
07/07/2026

🔥🔥 रेलवे ट्रैक मेंटेनर्स का 'खतरनाक' सच! कब तक सहोगे ये अन्याय? 🔥🔥
​नेताओं के ढोल-नगाड़े बंद करो! अब समय 'फोटो सेशन' का नहीं, 'हक' मांगने का है!
​ट्रैक मेंटेनर्स को पानी की बोतल थमाकर अपनी पीठ थपथपाने वाले उन 'नेता जी' से पूछिए—क्या हमारी जिंदगी की कीमत सिर्फ एक बोतल पानी है? 🛑
​सुनो रेल के ठेकेदारों और यूनियन के नाम पर धंधा करने वालों! हमारी ये मांगें नहीं, हमारा हक है:
​❌ सिर्फ लॉलीपॉप नहीं, काम चाहिए: 4200 GP में प्रमोशन कब मिलेगा?
❌ 8 घंटे की गुलामी नहीं, हक चाहिए: ड्यूटी के अंदर लंच टाइम जोड़ना होगा!
❌ जोखिम का पैसा चाहिए: रिस्क अलाउंस बढ़ाइए, क्योंकि हम पटरी पर जान हथेली पर रखकर चलते हैं।
❌ सुरक्षा का तमाशा बंद करो: अच्छी क्वालिटी के सेफ्टी शूज, जैकेट और रेनकोट समय पर दो!
❌ ट्रांसफर में पारदर्शिता लाओ: बिना शर्त, बिना सेटिंग-बाजी के ट्रांसफर पॉलिसी लागू करो।
❌ LDCE में 'Open to All' का मौका दो: हमें भी आगे बढ़ने का हक है!
❌ महिला साथियों का सम्मान: कैडर चेंज की सुविधा तुरंत लागू हो।
❌ जातिवाद बंद करो: यूनियन के नाम पर जो जाति-धर्म की राजनीति कर रहे हैं, उनकी दुकान बंद करने का वक्त आ गया है।
​साथियों, क्या हम रेलवे के लिए सिर्फ 'मजदूरी' करने और नेताओं की भीड़ बढ़ाने के लिए भर्ती हुए हैं?
क्या हमारा काम सिर्फ चंदा देना और जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे लगाना रह गया है? नहीं! जाग जाओ साथियों, वरना ये सिस्टम हमें पीसा जाएगा।
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👉 कमेंट में अपनी भड़ास निकालो, देखते हैं कितने शेर साथ खड़े हैं!
​✍️ विकास कुमार यादव
(सेंट्रल रेलवे, इंजीनियरिंग कैडर)
​

23/06/2026

फौजी परिवार की पीड़ा: विकास सिंह जी के समर्थन में वीडियो को ज्यादा से ज्यादा फैलाएं।"

13/06/2026

#रेलवेसुरक्षा #कर्मचारीकीआवाज

⚠️ इंजीनियरिंग विभाग के साथियों के लिए एक जरूरी संदेश: क्या हम खुद ही अपनी बर्बादी के जिम्मेदार हैं?​साथियों, मैं विकास ...
12/06/2026

⚠️ इंजीनियरिंग विभाग के साथियों के लिए एक जरूरी संदेश: क्या हम खुद ही अपनी बर्बादी के जिम्मेदार हैं?
​साथियों, मैं विकास कुमार यादव (इंजीनियरिंग विभाग, मध्य रेलवे, मुंबई) आप सभी से एक कड़वा सच साझा करना चाहता हूँ। जो लोग मेरी वीडियो या पोस्ट को बिना पूरा देखे या बिना पढ़े ही कमेंट कर देते हैं, कृपया पहले बात को गहराई से समझें।
​निजीकरण का असली सच क्या है?
आज इंजीनियरिंग विभाग में 70% से ज्यादा काम ठेकेदारों (Contractors) के हाथों में चला गया है। इसके लिए क्या सिर्फ अधिकारी जिम्मेदार हैं? नहीं! सच तो यह है कि इसका बड़ा हिस्सा हम खुद हैं।
​पढ़े-लिखे होने का 'अहंकार' और काम से 'फरारी':
रेलवे में जब 'ग्रुप डी' (Group D) की वैकेंसी निकलती है, तो उसमें साफ लिखा होता है कि यह 10वीं पास के लिए है। लेकिन आज बीटेक, एमटेक और ग्रेजुएशन करने वाले लोग यहाँ आ रहे हैं और फिर रोना रोते हैं कि "हम यह काम नहीं करेंगे"। भाई, जब तुमने फॉर्म ही उस पद के लिए भरा है जहाँ ट्रैक मेंटेनेंस का काम मुख्य है, तो फिर काम से जी क्यों चुराते हो? अगर काम नहीं करोगे, तो मजबूरन रेलवे ठेकेदारों को तो बुलाएगी ही।
​क्या हम गुलाम हैं?
रेलवे ने हमें ऑफिस में बाबूगिरी करने, बंगलों पर चाकरी करने, स्टोर्स में फाइलें ढोने, ट्रॉलीमैन बनने या किसी अधिकारी की 'चमचागिरी' करने के लिए भर्ती नहीं किया था! हमारी असली जगह ट्रैक है।
​आस्तीन के सांपों से सावधान:
हमारे बीच ही 10% ऐसे लोग हैं, जो खुद तो काम नहीं करते, लेकिन ऑफिस में जाकर बाकी 90% मेहनतकश ट्रैक मेंटेनर्स की बुराइयाँ करते हैं। ये लोग सिर्फ अपना 'काम' निकालने के लिए पूरे डिपार्टमेंट को बदनाम कर रहे हैं और इन्हीं की वजह से बाकी कर्मचारियों का शोषण हो रहा है।
​अंतिम चेतावनी:
अगर आज भी नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में रेलवे में अपनी नौकरी बचा पाना नामुमकिन होगा। 90% काम पहले ही प्राइवेट हाथों में जा चुका है।
​सभी ट्रैक मेंटेनर्स से मेरी विनती है:
​अपने पद की गरिमा और जिम्मेदारी को समझिए।
​अफसरों की चाकरी छोड़कर अपने सेक्शन में आकर काम संभालिए।
​अपनी मेहनत से विभाग को मजबूत कीजिए, ताकि किसी ठेकेदार की जरूरत न पड़े।
​इस पोस्ट को इतना शेयर करो कि वो 'नीच मानसिकता' वाले लोग भी इसे पढ़ें और उन्हें अपनी हरकत पर शर्मिंदगी महसूस हो। काम करो, तो डटकर करो, वरना इज्जत की रोटी भी नसीब नहीं होगी!
​आपका साथी,
विकास कुमार यादव
इंजीनियरिंग विभाग, मध्य रेलवे, मुंबई #काम_की_बात #रेलवे_इंजीनियरिंग #निजीकरण_बंद_करो #कर्मचारी_शक्ति #जिम्मेदारी

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