03/08/2026
गौतम मौर्य जी की निर्मम हत्या: न्याय की पुकार, अपराधियों को कठोरतम वैधानिक दंड मिले
जिला शाहजहांपुर के कमलनैनपुर कस्बा कैट निवासी हमारे भाई स्वर्गीय गौतम मौर्य जी की निर्मम हत्या की घटना ने पूरे समाज को स्तब्ध, दुखी और आक्रोशित कर दिया है। यह केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि एक परिवार की आशाओं, सपनों और भविष्य पर किया गया क्रूर प्रहार है।
बताया जा रहा है कि गौतम मौर्य जी अपने परिवार के इकलौते पुत्र थे तथा चार बहनों के बीच घर के एकमात्र सहारा और चिराग थे। उनके असामयिक निधन से परिवार पर ऐसा दुःख का पहाड़ टूटा है जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं हो सकती। हम दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं तथा शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।
मैं, आचार्य सर्वेश कुमार मौर्य, संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व मौर्य परिषद, उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार तथा जिला प्रशासन से मांग करता हूँ कि इस जघन्य हत्या की निष्पक्ष, त्वरित और प्रभावी जांच कराकर सभी दोषियों को भारतीय कानून के अनुसार कठोरतम दंड दिलाया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी अपराधी इस प्रकार का दुस्साहस करने का साहस न कर सके।
हमारी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं—
1 : हत्या के सभी आरोपियों के विरुद्ध शीघ्र विवेचना पूर्ण कर फास्ट-ट्रैक न्यायालय में मुकदमा चलाया जाए।
2 : यदि अपराध सिद्ध हो, तो कानून के अनुसार उपलब्ध कठोरतम दंड दिलाया जाए।
3 : मृतक गौतम मौर्य जी के परिवार को कम से कम ₹50 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।
4 : परिवार के पुनर्वास हेतु एक बीघा भूमि अथवा समुचित पुनर्वास पैकेज उपलब्ध कराया जाए।
5 : परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी या समकक्ष सहायता दी जाए।
6 : पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को न्याय की मांग करने, शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने का अधिकार देता है। साथ ही भारतीय कानून प्रत्येक नागरिक को आत्मरक्षा (Right of Private Defence) का अधिकार भी देता है। भारतीय न्याय संहिता (पूर्व में भारतीय दंड संहिता की धाराएँ 96 से 106) के सिद्धांतों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के जीवन या शरीर पर तत्काल और वास्तविक खतरा हो, तो वह आवश्यक और परिस्थितियों के अनुरूप आत्मरक्षा कर सकता है। किंतु यह अधिकार केवल तत्काल खतरे से बचाव के लिए है; इसका अर्थ प्रतिशोध लेना, कानून अपने हाथ में लेना या बाद में स्वयं दंड देना नहीं है। अपराधियों को दंडित करने का अधिकार केवल न्यायालय और विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के माध्यम से ही है।
विश्व मौर्य परिषद न्याय, संविधान और कानून के शासन में विश्वास रखती है। यदि पीड़ित परिवार को समयबद्ध न्याय नहीं मिलता, तो संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीकों से व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होगा, ताकि पीड़ित परिवार की आवाज शासन और प्रशासन तक प्रभावी रूप से पहुँच सके।
हम सभी नागरिकों से भी अपील करते हैं कि वे अफवाहों से बचें, शांति बनाए रखें और न्याय की इस लड़ाई में संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक मार्ग का समर्थन करें।
स्वर्गीय गौतम मौर्य जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
✊ जय जय मौर्य वंश ✊
✊ जय विश्व मौर्य परिषद ✊
MYogiAdityanath UP Police