Sadrul Afazil Welfare Trust

Sadrul Afazil Welfare Trust Educational and Welfare Trust

تمام کائنات کو، رحمۃ للعالمین آقا (ﷺ) کا،1500 سالہ میلاد،بہت بہت مبارک ہو۔اللہ تعالی، اپنے حبیب (ﷺ) کے میلاد پاک کے صدقے...
04/09/2025

تمام کائنات کو،
رحمۃ للعالمین آقا (ﷺ) کا،
1500 سالہ میلاد،
بہت بہت مبارک ہو۔

اللہ تعالی، اپنے حبیب (ﷺ) کے میلاد پاک کے صدقے، ہمارا خاتمہ ایمان پر فرمائے، اور ہم کو ہمیشہ مصطفی کریم (ﷺ) کا غلام بنا کر رکھے۔ آمین

1500th Eid Meeladunnabi Mubarak ho Sari Duniya ko, Piyare Aaqa (ﷺ) ka 1500 sala Meelad bhut bhut Mubarak Ho.Nisar teri c...
04/09/2025

1500th Eid Meeladunnabi Mubarak ho

Sari Duniya ko, Piyare Aaqa (ﷺ) ka 1500 sala Meelad bhut bhut Mubarak Ho.

Nisar teri chahal pehal par Hazaron Eidein Rabeeul Awwal
Siway Eblees ke jahan me sbhi to khushiya mna rhe hain.

Form: Sadrul Afazil Welfare Trust's Team

Eid al-Adha Mubarak ho 💐❣️
06/06/2025

Eid al-Adha Mubarak ho 💐❣️

15/04/2025
यौम-ए-रज़ा मुबारक हो______!आज से 174 साल पहले, 10 शव्वालुल मुक़र्रम को उस बुज़ुर्ग हस्ती की विलादत हुई:जिस ने हमारे ईमान...
09/04/2025

यौम-ए-रज़ा मुबारक हो______!

आज से 174 साल पहले, 10 शव्वालुल मुक़र्रम को उस बुज़ुर्ग हस्ती की विलादत हुई:
जिस ने हमारे ईमान व अ़क़ीदे की हिफ़ाज़त की,
जिस ने हमें बदअ़क़ीदों और हर फ़ित्ने से बचाया,
जिस ने हम को सच्चा इश्क़े रसूल (ﷺ) सिखाया,
जिस ने एक हज़ार से ज़्यादा किताबें लिखीं,
जो अपने वक़्त का मुजद्दिद यानी अपने ज़माने में सारे उलेमा व औलियाए किराम का सरदार था,
जिस ने बेदारी की हालत में सरकार (ﷺ) का दीदार किया,
जिस ने अपनी ज़िंदगी का हर लम्हा दीन के लिए गुज़ारा,
जो सुन्नियत की पहचान और हक़ की जान है,
जिस की ग़ुलामी पर सुन्नी नाज़ करते हैं।

यानी 10 शव्वाल को इमामे अहले सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी (रद़ियल्लाहु अन्हु) की विलादत हुई।
इसी मुनासबत से हर साल 10 शव्वाल को यौम-ए-रज़ा मनाया जाता है।
लिहाज़ा आज यौमे रज़ा है, आज हर सुन्नी को ख़ूब ख़ुशी के साथ यौम-ए-रज़ा मनाना चाहिए।
हर सुन्नी को आला हज़रत का ज़िक्र करना चाहिए और आने वाली नस्लों के दिलों में आला हज़रत की मोहब्बत मुन्तक़िल करना चाहिए।
आप सब को हमारी जानिब से यौमे रज़ा मुबारक हो।
अल्लाह तआला हम सब को हमेशा मस्लके आला हज़रत पर क़ायम रखे, आमीन।
_____________
अरक़म रज़ा अज़हरी
चैयरमैन सदरुल अफ़ाज़िल वेलफेयर ट्रस्ट
मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश (इन्डिया)
9 अप्रैल 2025

18 रमज़ानुल मुबारकयौम-ए-विसाल, सह़ाबि-ए-रसूल (ﷺ), हज़रत ख़ालिद बिन वलीद (रद़ियल्लाहु अन्हु)सह़ाबि-ए-रसूल (ﷺ), हज़रत ख़ाल...
18/03/2025

18 रमज़ानुल मुबारक
यौम-ए-विसाल, सह़ाबि-ए-रसूल (ﷺ), हज़रत ख़ालिद बिन वलीद (रद़ियल्लाहु अन्हु)

सह़ाबि-ए-रसूल (ﷺ), हज़रत ख़ालिद बिन वलीद (रद़ियल्लाहु अन्हु) इस्लाम के अज़ीम जर्नैलों में से एक हैं, जिन्हें "सैफ़ुल्लाह" (अल्लाह की तलवार) का लक़ब दिया गया। आप क़ुरैश के नामवर सरदार वलीद बिन मुगीरा के बेटे थे। आग़ाज़ में इस्लाम के ख़िलाफ़ लड़े, लेकिन सुलह-ए-हुदैबिया के बाद 8 हिजरी में मुसलमान हो गए।

आप की क़ियादत में इस्लामी फौज ने कई तारीख़ी फ़तहें हासिल कीं, जिन में जंग-ए-मोता, यरमूक, और फ़तह-ए-शाम शामिल हैं। आप की जंगी हिकमत-ए-अमली और बहादुरी बे मिसाल थी।
18 रमज़ान, 21 हिजरी में मदीना के क़रीब विसाल फ़रमाया।

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17 रमज़ानुल मुबारक, यौम-ए-विसाल:उम्मुल मोमिनीन, सय्यिदा आयशा सिद्दीका़ रज़ियल्लाहु अ़न्हाख़ूब इसाल-ए-सवाब का एहतिमाम करे...
17/03/2025

17 रमज़ानुल मुबारक,
यौम-ए-विसाल:
उम्मुल मोमिनीन, सय्यिदा आयशा सिद्दीका़ रज़ियल्लाहु अ़न्हा
ख़ूब इसाल-ए-सवाब का एहतिमाम करें

जंग-ए-बदर इस्लाम की पहली और फैसला कुन जंग थी, जो 17 रमज़ान 2 हिजरी को मदीना मुनव्वरा से तक़रीबन 80 मील दूर बदर के मुक़ाम...
17/03/2025

जंग-ए-बदर इस्लाम की पहली और फैसला कुन जंग थी, जो 17 रमज़ान 2 हिजरी को मदीना मुनव्वरा से तक़रीबन 80 मील दूर बदर के मुक़ाम पर हुई।
यह जंग नबी अकरम ﷺ की क़ियादत में 313 मुजाहिदीन और क़ुरैश मक्का के 1000 के क़रीब काफिर जंगजुओं के दरमियान लड़ी गई।

यह जंग दरहक़ीक़त हक़ व बातिल के दरमियान पहला बड़ा मआरका था, जिसमें अल्लाह तआला ने मुसलमानों को शानदार फतह अता फ़रमाई। क़ुरैश के 70 अफराद मारे गए, जिनमें कई बड़े सरदार शामिल थे, और 70 क़ैदी बना लिए गए। मुसलमानों की तरफ़ से 14 सहाबा किराम शहीद हुए।

यह जंग इस्लामी तारीख़ में बहुत अहमियत रखती है, क्योंकि इसने इस्लाम की बुनियादों को मुस्तहकम किया और दुश्मनाने इस्लाम पर मुसलमानों की ताक़त वाज़ेह कर दी। क़ुरआन-ए-करीम में भी इस जंग को "यौमुल फ़ुरक़ान" यानी हक़ व बातिल में फ़र्क़ करने वाला दिन कहा गया है।

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