09/04/2025
यौम-ए-रज़ा मुबारक हो______!
आज से 174 साल पहले, 10 शव्वालुल मुक़र्रम को उस बुज़ुर्ग हस्ती की विलादत हुई:
जिस ने हमारे ईमान व अ़क़ीदे की हिफ़ाज़त की,
जिस ने हमें बदअ़क़ीदों और हर फ़ित्ने से बचाया,
जिस ने हम को सच्चा इश्क़े रसूल (ﷺ) सिखाया,
जिस ने एक हज़ार से ज़्यादा किताबें लिखीं,
जो अपने वक़्त का मुजद्दिद यानी अपने ज़माने में सारे उलेमा व औलियाए किराम का सरदार था,
जिस ने बेदारी की हालत में सरकार (ﷺ) का दीदार किया,
जिस ने अपनी ज़िंदगी का हर लम्हा दीन के लिए गुज़ारा,
जो सुन्नियत की पहचान और हक़ की जान है,
जिस की ग़ुलामी पर सुन्नी नाज़ करते हैं।
यानी 10 शव्वाल को इमामे अहले सुन्नत, आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान बरेलवी (रद़ियल्लाहु अन्हु) की विलादत हुई।
इसी मुनासबत से हर साल 10 शव्वाल को यौम-ए-रज़ा मनाया जाता है।
लिहाज़ा आज यौमे रज़ा है, आज हर सुन्नी को ख़ूब ख़ुशी के साथ यौम-ए-रज़ा मनाना चाहिए।
हर सुन्नी को आला हज़रत का ज़िक्र करना चाहिए और आने वाली नस्लों के दिलों में आला हज़रत की मोहब्बत मुन्तक़िल करना चाहिए।
आप सब को हमारी जानिब से यौमे रज़ा मुबारक हो।
अल्लाह तआला हम सब को हमेशा मस्लके आला हज़रत पर क़ायम रखे, आमीन।
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अरक़म रज़ा अज़हरी
चैयरमैन सदरुल अफ़ाज़िल वेलफेयर ट्रस्ट
मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश (इन्डिया)
9 अप्रैल 2025