21/03/2026
युवाओं को सटीक जानकारी
जिनके अभाव में ऋण नहीं ले पाते
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 9 फरवरी 2026 को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को ऋण देने के संबंध में एक महत्वपूर्ण संशोधन निर्देश (Amendment Directions) जारी किया है।
यह निर्देश मुख्य रूप से छोटे उद्यमियों के लिए बिना किसी गारंटी (Collateral-Free) के ऋण प्राप्त करने की क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित है। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. बिना गारंटी ऋण (Collateral-Free Loan) की सीमा में वृद्धि
सबसे बड़ा बदलाव सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSE) के लिए किया गया है:
पुरानी सीमा: पहले बैंक 10 लाख रुपये तक के ऋण के लिए कोई गारंटी नहीं मांगते थे।
नई सीमा: अब बैंकों के लिए 20 लाख रुपये तक के ऋण पर कोई भी 'कोलैटरल सिक्योरिटी' (जैसे जमीन, मकान या गहने गिरवी रखना) मांगना प्रतिबंधित कर दिया गया है।
PMEGP इकाइयों के लिए: प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत वित्तपोषित सभी इकाइयों को भी अब अनिवार्य रूप से 20 लाख रुपये तक का ऋण बिना गारंटी के मिलेगा।
प्रभावी तिथि: यह नया नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा।
2. 25 लाख रुपये तक की छूट (बैंक के विवेक पर)
यदि किसी उद्यमी का पिछला रिकॉर्ड और वित्तीय स्थिति अच्छी है, तो बैंक अपनी आंतरिक नीतियों के आधार पर बिना गारंटी वाले ऋण की इस सीमा को 25 लाख रुपये तक बढ़ा सकते हैं। इसके लिए बैंक 'क्रेडिट गारंटी स्कीम' (CGTMSE) का लाभ उठा सकते हैं।
3. 'केएफएस' (Key Fact Statement) अनिवार्य
लघु उद्यमों को ऋण देते समय बैंकों को अब एक KFS देना होगा। इसमें लोन से जुड़ी सारी जानकारी एक ही पन्ने पर होगी:
कुल ब्याज दर (Annual Percentage Rate - APR)।
लोन प्रोसेसिंग फीस और अन्य सभी शुल्क।
लोन की अवधि और EMI का विवरण।
4. स्वैच्छिक सोना/चांदी गिरवी रखने पर स्पष्टता
यदि कोई उधारकर्ता 20 लाख रुपये तक के ऋण के लिए अपनी मर्जी से सोना या चांदी गिरवी रखना चाहता है, तो इसे नियम का उल्लंघन नहीं माना जाएगा। लेकिन बैंक अपनी ओर से इसे अनिवार्य नहीं बना सकते।