14/06/2024
स्वयं ईश्वर द्वारा रचित और दुनिया की सबसे मूल्यवान पुस्तक आपके हाथों में है।
ईश्वरीय महा-अभियान से आप भी जुड़े!
भारत के 20 करोड़ घरों में ही नहीं, भगवद् गीता के इस आधारभूत संस्करण (मोक्षविद्यादायिनी परमपावन भगवद्गीता) को विभिन्न भाषाओं में क्रमशः दुनिया के अन्य 100 करोड़ घरों में पहुँचाने का संकल्प है। सिर्फ इसलिए नहीं कि यह स्वयं ईश्वर की वाणी है और आध्यात्मिक मुक्ति के मार्ग दिखलाती है, बल्कि इसलिए भी कि यह इस जीवन में मानसिक दुःखों और अवसादों को नष्ट कर देती है, जीवन की गुणवत्ता बढ़ा देती है और विश्वशांति को बढ़ावा देती है। आप भी 'मोक्षविद्यादायिनी परमपावन भगवद्गीता' ईश्वरीय ग्रन्थ को सभी घरों में पहुँचाने में अपना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। आपके द्वारा दिए गए छोटी-छोटी आंशिक योगदान भी हमारे लिए मूल्यवान है।
भगवान ने भगवद् गीता में कहा है -
"जो मनुष्य इस गीता-शास्त्र के मुक्तिदायी ज्ञान को प्रसारित करेगा वह मुझे प्राप्त करेगा, और उसके समान मेरा कोई दूसरा न प्रिय है, न होगा।" (18: 68-70)
के. कृष्णमूर्ति, श्रीधाम वृन्दावन