Shramyog

Shramyog Shramyog is a non-governmental organization established in New Delhi under the Societies Registration Act of India (1860) in February 2011.

Shramyog is a People's Organization. We started Shramyog as completely a volunteer based informal group of friends who enjoyed discussing about social develop-ment programs and schemes. Gradually the discussions became more vibrant and we were no longer content with just talk! We wanted to do something and make a real difference. Scale didn’t matter to us. We spent the year 2009 in discussions an

d planning. Through a democratic process we agreed to focus on certain development is-sues. We raised some money through charity and dona-tions and started our first base of operations at a remote village in Uttarakhand. We believe in active participa-tion of the entire community, this belief was appreciated and the numbers started to grow. As we increased our area of operations we felt the need for more human and monetary resources. It was no longer efficient to continue working as a mere informal, volunteer based group only. The team wanted a more formal commitment which could co-exist with their regular life and livelihood. In a general meeting in 2010 it was decided to formalize our group as a registered NGO and as a direct result of this decision, on 11th February 2011 “Shramyog” became a registered NGO. The name Shramyog is derived from “Shram” which means “hard work” and “Yog” which means “organized union”. As the name describes, we are a community of hardworking people organized and uni-fied by the common goal of constructive and positive de-velopment of the society. We have spread nationally as well as internationally with active members coming and working with us, not only from across India but from across the globe

रचनात्मक महिला मंच द्वारा जारी पर्चा
01/06/2026

रचनात्मक महिला मंच द्वारा जारी पर्चा

उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष से ग्रामीण जन-जीवन में भय व्याप्त है। सल्ट ब्लॉक में पिछले दिनों हुई घटनाओं ने इ...
26/05/2026

उत्तराखंड में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष से ग्रामीण जन-जीवन में भय व्याप्त है। सल्ट ब्लॉक में पिछले दिनों हुई घटनाओं ने इस भय को और बढ़ा दिया है।

रचनात्मक महिला मंच पिछले तीन वर्षों से लगातार इस मुद्दे को उठा रहा है। अब हम इस संघर्ष से जुड़े तमाम पक्षों पर समझ बढ़ाने के लिए एक्शन रिसर्च कर रहे हैं। मिशन समृद्धि इस कार्य में हमारा सहयोग कर रहा है।

एक्शन रिसर्च के कार्य को शुरू करने के लिए आज श्रमयोग के रचनात्मक केंद्र पर प्रारंभिक बैठक हुई। जिसमें संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों और रचनात्मक महिला मंच के पदाधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

भौतिकी के प्रोफेसर हरीश चंद्र वर्मा जी बीते कल श्रमयोग के परिसर में थे।  उनके साथ में राज्य के अलग अलग जगहों से आये भौति...
26/05/2026

भौतिकी के प्रोफेसर हरीश चंद्र वर्मा जी बीते कल श्रमयोग के परिसर में थे। उनके साथ में राज्य के अलग अलग जगहों से आये भौतिक विज्ञान के शिक्षकों का दल भी था। गांव में रुके थे तो सायंकाल महिलाओं और बच्चों के साथ भी चर्चा हुई ।
दो दिन हमारा परिसर भौतिकी के सिद्धांतों और प्रयोगों की चर्चाओं में भीगा रहा।

रचनात्मक महिला मंच की क्लस्टर बैठकें निरंतर हो रही हैं। आज रथखाल क्लस्टर में बैठक हुई। क्लस्टर बैठक में उस क्लस्टर के सम...
10/05/2026

रचनात्मक महिला मंच की क्लस्टर बैठकें निरंतर हो रही हैं।

आज रथखाल क्लस्टर में बैठक हुई। क्लस्टर बैठक में उस क्लस्टर के समूहों के पदाधिकारी भाग लेते हैं।

- पंचायती राज की मजबूती
- बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष
- महिला सुरक्षा
चर्चा के प्रमुख बिंदु हैं।
किशोरियों को संगठित करने के प्रयासों पर भी चर्चा हो रही है।

पंचायती राज पर शीघ्र ही जागरूकता जत्था शुरू करने की तैयारी है।

06/05/2026

तडम में हुई घटना बहुत दुखद है।
वन्य जीवों के हमले में ग्रामीणों की मौत होना बहुत तकलीफदेह और चिंताजनक है। हम श्रमयोग परिवार की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

समूह की बैठको में हम बार-बार बताएं कि:

1. गांवो में आजकल शादियाँ हो रही हैं। शादी-विवाह में बचा हुआ खाना घरों के आस-पास न फेंके, इस पर जानवर (सुवर, हिरण, भालू इत्यादि) आते हैं-उनके पीछे गुलदार और बाघ आते हैं, इससे खतरा बढ़ता है।
2. रात्रि में घरों के आस-पास पर्याप्त प्रकाश करें।
3. गांव के आसपास झाड़ियां काट कर सफाई रखें।
4. जंगल समूह में ही जाएं।
5. जंगल की आग के प्रति सतर्क रहें।

रचनात्मक महिला मंच आपस में विचार विमर्श कर ग्रामीणों की सुरक्षा के संबंध में शीघ्र ही सरकार को ज्ञापन सौंपेगा।

प्राकृतिक धरोहर बचाओ अभियान श्रमयोग का एक महत्वपूर्ण अभियान है। युवा शिविर में हम इस पर चर्चा करते हैं।  युवती शिविर के ...
28/04/2026

प्राकृतिक धरोहर बचाओ अभियान श्रमयोग का एक महत्वपूर्ण अभियान है।
युवा शिविर में हम इस पर चर्चा करते हैं। युवती शिविर के तीसरे दिन अपने नौले-धारे-गाढ-गधेरों को समझने युवतियों का दल आज सुबह गांव के नौले पर पहुंचा। नौले के तंत्र को समझा और जल की गुणवत्ता का परीक्षण किया।

रचनात्मक महिला मंच ने आज विद्यालयों में छुट्टी का समय बदलने की मांग करते हुए उप जिलाधिकारी को पत्र दिया।मंच कहना है कि 2...
24/04/2026

रचनात्मक महिला मंच ने आज विद्यालयों में छुट्टी का समय बदलने की मांग करते हुए उप जिलाधिकारी को पत्र दिया।

मंच कहना है कि 2 बजे की धूप में छुट्टी करना ठीक नहीं है इससे बच्चे अस्वस्थ हो जा रहे हैं।

रचनात्मक महिला मंच द्वारा राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर ब्लॉक सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी को सम्...
24/04/2026

रचनात्मक महिला मंच द्वारा राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर ब्लॉक सभागार में गोष्ठी का आयोजन किया गया।

गोष्ठी को सम्बोधित करते हुए प्रधान संगठन सल्ट के अध्यक्ष गिरीश रावत ने कहा कि प्रधान संगठन और रचनात्मक महिला मंच मिलकर पंचायती राज की मजबूती के लिए संघर्ष करेंगे। इस अवसर पर रचनात्मक महिला मंच की अध्यक्ष सुनीता देवी ने कहा कि कुछ ही महीनों में नई पंचायतों के गठन को 1 वर्ष पूरा हो जायेगा। गठन के बाद ग्राम पंचायत विकास योजना बनाने की खानापूरी कर ली गई है। कहीं-कहीं कुछ काम भी हो रहे हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि परन्तु क्या हम पंचायती राज के वर्तमान हालातों से संतुष्ट हैं? क्या पंचायतें अपनी पूरी शक्ति के साथ काम कर पा रही हैं? उन्होंने कहा कि राज्य में पंचायतों की मजबूती के लिए लम्बे संघर्ष की जरूरत है।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए श्रमयोग के अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने कहा कि पंचायतों को संविधान की 11वीं अनुसूची के द्वारा कार्यों का आवंटन तो किया गया है पर धरातलीय परिस्थितियों को देखें तो कार्यों को अंजाम देने के लिए कर्मचारियों और वित्त पर पंचायतों का कोई नियंत्रण नहीं है। ऐसे में पंचायतें असहाय हैं और छोटे छोटे कामों के लिए उन्हें विभागों का मुँह ताकना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ग्राम पंचायत विकास योजना बनाने की प्रक्रिया बहुत लचर है। जिस वजह से पंचायतें न युवाओं के रोजगार के लिए कोई काम कर पा रही हैं न पोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की परिस्थितियां सुधर रही हैं। कृषि-पशुपालन सिकुड़ता जा रहा है। मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता जा रहा है। ऐसे में हम सबकी एकजुटता आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

गोष्ठी में मंच द्वारा वितरित पर्चे में कहा गया है कि 73वें संविधान संशोधन के तहत प्रदत्त विषयों पर गांव सभा का निर्णय अंतिम निर्णय होना चाहिए। साथ ही जब तक पंचायतों का वित्त, कार्यों की स्पष्टता और कार्मिकों पर नियंत्रण नहीं होगा तब तक पंचायती राज यों ही बेहाल रहेगा। पर्चे में आगे कहा गया है कि ग्राम सभा की एक बैठक में ग्राम पंचायत विकास योजना बनाना बिल्कुल भी संभव नहीं है। इसके लिए कम से कम तीन बैठकें होना जरूरी है।

गोष्ठी को रचनात्मक महिला मंच की सचिव पुष्पा बिष्ट, कोषाध्यक्ष दीपा देवी श्रमयोग के शंकर दत्त, चाच के प्रधान बच्ची राम इजराल. डडरिया के प्रधान शिवेंद्र सिंह. मेणाकोट की प्रधान सुनीता देवी, नैकणा की प्रधान मंजू देवी, काने के प्रधान मोहन राम, डगुला के प्रधान शंकर रावत, जसपुर कोट के प्रधान गोपाल दत्त, भ्याडी की प्रधान प्रीति रावत, नदोली की प्रधान अनीता देवी, झडगाव की प्रधान मधु देवी, कालीगाव की प्रधान पुष्पा देवी, झीमार की प्रधान तारा देवी, हिमांशु चौहान, किशोर सिंह, ने संबोधित किया। गोष्ठी का संचालन भूतपूर्व ग्राम प्रधान विजय ध्यानी ने किया।

रचनात्मक महिला मंच प्रत्येक सीजन में अपनी सदस्यों के कृषि उत्पादों को एकत्र कर बाजार में बेचता है।  उद्देश्य - अपनी सदस्...
11/04/2026

रचनात्मक महिला मंच प्रत्येक सीजन में अपनी सदस्यों के कृषि उत्पादों को एकत्र कर बाजार में बेचता है।

उद्देश्य - अपनी सदस्यों को उनकी उपज का उत्तम दाम दिलवाना है।

हल्दी की नई फसल आने पर इस सीजन में पहली खेप आज रामनगर मंडी को भेजी गई ।

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