03/06/2024
एरिका पाम एक खूबसूरत इनडोर प्लांट है। यह प्रदूषण को कम करता है और आस-पास ऑक्सीजन लेवल को बढ़ाने में मदद करता है। हालांकि, कई लोगों को एरिका पाम की देखभाल करने में परेशानी होती है और उनकी शिकायत होती है कि वे नर्सरी से चाहे कितना भी स्वस्थ पौधा क्यों न लेकर आएं, कुछ समय बाद उसकी पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। पौधा बढ़ता नहीं है और कुछ समय बाद पौधा मर जाता है। एरिका पाम की उचित देखभाल जरूरी है, इसके लिए मिट्टी, पानी के साथ-साथ गमले रखने की सही जगह का चुनाव करना भी जरूरी है। आइए जानते हैं कि एरिका पाम की पत्तियों को हरा-भरा रखने और उसके सही विकास के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
एरेका पाम प्लांट को घर के अंदर और बाहर दोनों जगह रखा जा सकता है। घर के बाहर लगाए जाने पर एरेका पाम 7-10 फीट तक लंबा हो सकता है, जबकि घर के अंदर लगाए जाने वाले एरेका पाम प्लांट की अधिकतम ऊंचाई 5-6 फीट तक होती है। घर में इस पौधे को लगाना कई तरह से फायदेमंद है। आइए सबसे पहले इसके फायदों के बारे में जानते हैं।
क्या आप जानते हैं कि शुष्क हवा में सांस लेने से आंखों में खुजली, त्वचा में जलन, त्वचा का रूखापन, गले में खराश और जोड़ों के आसपास अकड़न हो सकती है? यह झुर्रियों और महीन रेखाओं का कारण बनकर आपको बूढ़ा भी दिखा सकता है। साथ ही, अगर आप साइनसाइटिस, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी सांस की बीमारियों से पीड़ित हैं, तो शुष्क हवा आपके स्वास्थ्य को और भी खराब कर सकती है। हीटर और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल करने वाले लोगों को शुष्क हवा की समस्या का सामना करना पड़ता है, लेकिन एरेका पाम जैसे इनडोर पौधे अपने घर में लगाने से आपके आसपास की नमी को नियंत्रित करके वातावरण को स्वस्थ बनाते है।
एरिका पाम की देखभाल:
1) इस पौधे को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती है। अगर पौधा घर के अंदर है तो पौधे के लिए सप्ताह में एक बार 200 मिली लीटर पानी पर्याप्त है। अगर यही पौधा घर के बाहर छाया में है तो मिट्टी सूखी दिखने पर 4 से 5 दिन में 500 मिली लीटर पानी देना उचित रहेगा।
2) गमले की जलनिकासी सही रखना जरूरी है, अगर जलभराव की स्थिति है तो इसकी पत्तियां सूखने लगती हैं और पीली होकर खराब होने लगती हैं।
3) इस पौधे को सीधी धूप में नहीं रखा जाता है, यह घर के अंदर का पौधा है, इसे सिर्फ धूप-प्रकाश की आवश्यकता होती है।
4) पौधे में हर 15 दिन में 1 चम्मच नीम का तेल पानी में मिलाकर स्प्रे करने और सूखने के बाद सूती कपड़े से हल्के हाथों से पोंछ देने से पत्तियां चमकदार रहती हैं।
5) पौधे को लगाने के लिए मिट्टी का मिश्रण इस प्रकार है।
50% साधारण मिट्टी, 10% रेत, 30% कम्पोस्ट खाद, 10% कोको पीट या पत्ती खाद या सूखे पत्ते या केले या प्याज के सूखे छिलके मिलाएं।
6) पौधे को घर के अंदर ऐसी जगह रखें जहाँ सूरज की रोशनी और खुली हवा आती हो।
7) जब भी पौधे पर कोई पत्ता और तना सूखा दिखे तो उसे समय से काटकर हटा दें। इससे पौधा बीमार नही होता है।
8) प्रत्येक 15 दिनों में मिट्टी की गुड़ाई अवश्य करें। अगर संभव न हो तो अधिकतम 30 दिन में एक बार जरूर करें।
9) हर 3 महीने में गमले के ऊपर से 1 इंच मिट्टी हटाएँ और गमले में लगभग 2 मुट्ठी खाद डालें। हर तिमाही में गमले की ऊपरी मिट्टी बदलने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
10) महीने में एक बार जड़ों के पास की मिट्टी खोदें और गमले में एक चम्मच इस्तेमाल की हुई चाय की पत्ती या 5 ग्राम सीवीड के दाने डालें। यह अच्छी ग्रोथ के लिए फायदेमंद है।
11) पौधे को महीने में एक बार मैग्नीशियम सल्फेट के घोल से नहलाएँ। इससे हरियाली अच्छी रहती है। पौधा स्वस्थ रहता है।
12) जब पौधा ठीक से बढ़ रहा हो और हरा-भरा हो तो उसका स्थान बार-बार न बदलें। कई बार स्थान बदलने से ही पौधे बीमार हो जाते हैं।
13) पौधे के उचित विकाश के लिए गर्म दिनों में प्रत्येक 10 से 15 दिनों में 200 मिलीलीटर कोई भी पतला तरल खाद गमले में पौधें की जड़ो में जरूर डाले।
14) पौधें के तने में किसी किट के लगने की दशा में फंगीसाइग और पेस्टीसाइड का पेस्ट बना कर ब्रश की सहायता से 15 दिन के अंतर में 2 बार प्रयोग करें।
मुझे उम्मीद है कि आपको सुंदर एरेका पाम पेड़ लगाने के तरीके के बारे में पढ़कर मज़ा आया होगा। आप अपने विचार कमेंट में व्यक्त कर सकते हैं। इस लेख को औरों के साथ साझा भी कर सकते हैं।