06/07/2026
इलेक्ट्रॉन की खोज कैसे हुई और किसने की?
इलेक्ट्रॉन की खोज ब्रिटिश वैज्ञानिक जे. जे. थॉमसन (J. J. Thomson) ने वर्ष 1897 में की थी। उन्होंने प्रयोगों से सिद्ध किया कि परमाणु कोई अविभाज्य कण नहीं है, बल्कि उसके अंदर उससे भी छोटे ऋणावेशित कण मौजूद होते हैं। इन्हीं कणों को बाद में इलेक्ट्रॉन कहा गया।
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खोज से पहले वैज्ञानिक क्या मानते थे?
प्राचीन समय से यह माना जाता था कि पदार्थ छोटे-छोटे कणों से बना है, जिन्हें परमाणु कहा गया। लंबे समय तक वैज्ञानिकों का मानना था कि परमाणु को और छोटे भागों में नहीं बाँटा जा सकता।
“Atom” शब्द का मूल अर्थ भी लगभग यही है—जिसे विभाजित न किया जा सके।
लेकिन 19वीं शताब्दी में बिजली और गैसों पर हुए प्रयोगों से यह संकेत मिलने लगा कि परमाणु के अंदर भी छोटे आवेशित कण हो सकते हैं।
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कैथोड किरण नली का प्रयोग
इलेक्ट्रॉन की खोज के लिए जे. जे. थॉमसन ने कैथोड रे ट्यूब, यानी कैथोड किरण नली का प्रयोग किया।
यह काँच की एक बंद नली होती थी, जिसमें से अधिकतर हवा निकाल दी जाती थी। नली के दोनों सिरों पर धातु की दो प्लेटें लगाई जाती थीं—
ऋणात्मक प्लेट को कैथोड कहा गया।
धनात्मक प्लेट को एनोड कहा गया।
इन दोनों प्लेटों के बीच बहुत अधिक विद्युत विभव लगाया गया।
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प्रयोग में क्या हुआ?
जब नली में बहुत कम दबाव पर गैस रखी गई और इलेक्ट्रोडों के बीच उच्च वोल्टेज लगाया गया, तब कैथोड से एक प्रकार की अदृश्य किरण निकलती हुई दिखाई दी।
यह किरण सामने की ओर बढ़ती थी और काँच की दीवार से टकराने पर चमक उत्पन्न करती थी।
क्योंकि ये किरणें कैथोड से निकल रही थीं, इसलिए इन्हें कैथोड किरणें (Cathode Rays) कहा गया।
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थॉमसन ने कैथोड किरणों की जाँच कैसे की?
1. किरणें सीधी रेखा में चलती थीं
थॉमसन ने पाया कि कैथोड किरणें सामान्यतः सीधी रेखा में चलती हैं। यदि उनके रास्ते में कोई वस्तु रख दी जाए, तो उसकी छाया बन जाती थी।
इससे पता चला कि ये केवल प्रकाश नहीं, बल्कि किसी दिशा में चलने वाले कणों की धारा हो सकती हैं।
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2. कैथोड किरणें वस्तु को घुमा सकती थीं
किरणों के रास्ते में एक बहुत हल्का पहिया रखा गया। कैथोड किरणों के टकराने पर वह पहिया घूमने लगा।
इससे संकेत मिला कि कैथोड किरणों में मौजूद कणों का कुछ द्रव्यमान होता है और वे गति करते हुए ऊर्जा लेकर चलते हैं।
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3. विद्युत क्षेत्र में किरणें मुड़ गईं
कैथोड किरणों को दो विद्युत आवेशित प्लेटों के बीच से गुजारा गया।
देखा गया कि किरणें—
धनात्मक प्लेट की ओर आकर्षित हुईं।
ऋणात्मक प्लेट से दूर हट गईं।
इससे सिद्ध हुआ कि कैथोड किरणों में मौजूद कणों पर ऋणात्मक आवेश होता है।
विपरीत आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं, इसलिए ऋणावेशित कण धनात्मक प्लेट की ओर मुड़ गए।
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4. चुंबकीय क्षेत्र में भी किरणें मुड़ीं
थॉमसन ने कैथोड किरणों के पास चुंबकीय क्षेत्र लगाया। किरणों की दिशा फिर से बदल गई।
चुंबकीय क्षेत्र केवल चलने वाले आवेशित कणों पर बल लगाता है। इससे यह बात और स्पष्ट हुई कि कैथोड किरणें वास्तव में गतिशील आवेशित कणों की धारा हैं।
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5. अलग-अलग गैस और धातु से भी समान परिणाम मिले
थॉमसन ने कैथोड किरण नली में अलग-अलग गैसों का प्रयोग किया। उन्होंने कैथोड के लिए भी अलग-अलग धातुओं का उपयोग किया।
फिर भी कैथोड किरणों के कणों का व्यवहार और उनके आवेश-द्रव्यमान का अनुपात लगभग समान रहा।
इससे थॉमसन ने निष्कर्ष निकाला कि ये कण किसी एक विशेष गैस या धातु के नहीं हैं, बल्कि हर प्रकार के परमाणु के अंदर मौजूद होते हैं।
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थॉमसन का मुख्य निष्कर्ष
इन प्रयोगों के आधार पर जे. जे. थॉमसन ने कहा—
> परमाणु के अंदर अत्यंत छोटे, ऋणावेशित कण पाए जाते हैं।
इन कणों को शुरू में कॉर्पसकल्स (Corpuscles) कहा गया था। बाद में इन्हें इलेक्ट्रॉन नाम दिया गया।
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“इलेक्ट्रॉन” नाम किसने दिया?
इलेक्ट्रॉन कण की प्रयोगात्मक खोज जे. जे. थॉमसन ने की, लेकिन “इलेक्ट्रॉन” शब्द का प्रस्ताव आयरिश भौतिक वैज्ञानिक जॉर्ज जॉनस्टोन स्टोनी ने दिया था।
उन्होंने 1891 में विद्युत आवेश की मूल इकाई के लिए “Electron” शब्द का प्रयोग किया था। बाद में थॉमसन द्वारा खोजे गए ऋणावेशित कण को यही नाम दिया गया।
इसलिए—
इलेक्ट्रॉन नाम का प्रस्ताव: जॉर्ज जॉनस्टोन स्टोनी
इलेक्ट्रॉन की प्रयोगात्मक खोज: जे. जे. थॉमसन
खोज का वर्ष: 1897
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थॉमसन ने क्या मापा?
जे. जे. थॉमसन ने इलेक्ट्रॉन के आवेश और द्रव्यमान को अलग-अलग नहीं मापा था। उन्होंने इलेक्ट्रॉन के—
आवेश-द्रव्यमान अनुपात
\frac{e}{m}
का मान ज्ञात किया।
यहाँ—
= इलेक्ट्रॉन का आवेश
= इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान
थॉमसन ने पाया कि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान परमाणु की तुलना में बहुत छोटा होता है।
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इलेक्ट्रॉन का आवेश किसने मापा?
इलेक्ट्रॉन के आवेश का सही मान बाद में अमेरिकी वैज्ञानिक रॉबर्ट मिलिकन ने अपने प्रसिद्ध तेल-बूंद प्रयोग (Oil Drop Experiment) से मापा।
इलेक्ट्रॉन का आवेश लगभग होता है—
-1.602 \times 10^{-19}\ \text{कूलॉम}
ऋण चिह्न बताता है कि इलेक्ट्रॉन पर ऋणात्मक आवेश होता है।
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इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान लगभग—
9.11 \times 10^{-31}\ \text{किलोग्राम}
होता है।
यह प्रोटॉन के द्रव्यमान से लगभग 1836 गुना कम है।
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इलेक्ट्रॉन परमाणु में कहाँ होता है?
आधुनिक परमाणु मॉडल के अनुसार—
परमाणु के केंद्र में नाभिक होता है।
नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन पाए जाते हैं।
इलेक्ट्रॉन नाभिक के आसपास निश्चित ऊर्जा स्तरों और ऑर्बिटल्स में पाए जाते हैं।
इलेक्ट्रॉन को ग्रहों की तरह बिल्कुल निश्चित गोल रास्ते में घूमता हुआ समझना पूरी तरह सही नहीं है। आधुनिक क्वांटम सिद्धांत के अनुसार इलेक्ट्रॉन के मिलने की संभावना अलग-अलग क्षेत्रों में होती है, जिन्हें ऑर्बिटल कहा जाता है।
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इलेक्ट्रॉन की खोज का महत्व
इलेक्ट्रॉन की खोज विज्ञान के इतिहास की बहुत बड़ी खोज थी। इससे पहली बार यह सिद्ध हुआ कि परमाणु सबसे छोटा और अविभाज्य कण नहीं है।
इस खोज के बाद—
परमाणु की आंतरिक संरचना का अध्ययन शुरू हुआ।
प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की खोज का रास्ता खुला।
विद्युत धारा को बेहतर ढंग से समझा गया।
इलेक्ट्रॉनिक्स का विकास संभव हुआ।
रेडियो, टेलीविजन, कंप्यूटर और मोबाइल जैसी तकनीकों की नींव पड़ी।
रासायनिक बंधों और संयोजकता को समझना आसान हुआ।
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आसान शब्दों में सार
जे. जे. थॉमसन ने एक निर्वात जैसी काँच की नली में उच्च वोल्टेज लगाया। कैथोड से निकलने वाली किरणें विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों में मुड़ गईं। इससे सिद्ध हुआ कि इन किरणों में बहुत छोटे ऋणावेशित कण मौजूद हैं। ये कण हर प्रकार के परमाणु में पाए जाते हैं। इन्हीं को इलेक्ट्रॉन कहा गया।
अंतिम उत्तर: इलेक्ट्रॉन की खोज जे. जे. थॉमसन ने 1897 में कैथोड किरण नली के प्रयोग द्वारा की थी।