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ठेले वाले कुरकुरे और खस्ता गोलगप्पे घर पर बनाना थोड़ा समय लेता है, लेकिन सही विधि से आप बिल्कुल बाजार जैसे गोलगप्पे बना ...
02/03/2025

ठेले वाले कुरकुरे और खस्ता गोलगप्पे घर पर बनाना थोड़ा समय लेता है, लेकिन सही विधि से आप बिल्कुल बाजार जैसे गोलगप्पे बना सकते हैं। इसका मुख्य राज है सही आटा और तलने की विधि। आइए, इसे बनाने की पूरी रेसिपी देखें:

सामग्री (गोलगप्पे के लिए):
सूजी (रवा) - 1 कप
गेहूं का आटा - 2 टेबलस्पून
तेल - 1 टीस्पून (मोयन के लिए)
नमक - 1/4 टीस्पून
पानी - 1/2 कप (गूंथने के लिए)
तेल - तलने के लिए

विधि:
1. आटा गूंथना:
एक बड़े बर्तन में सूजी, गेहूं का आटा, नमक और 1 टीस्पून तेल डालें।
इसे हाथ से अच्छी तरह मिलाएं।
थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें।
आटे को 20-30 मिनट के लिए गीले कपड़े से ढककर रखें, ताकि सूजी फूल जाए।

2. गोलगप्पे बेलना:
आटे को 4-5 भागों में बाँट लें और हर हिस्से को चिकना करें।
हर हिस्से को पतली रोटी के रूप में बेल लें।
किसी छोटे गोल कटोरी, ढक्कन, या कुकी कटर से छोटे-छोटे गोल टुकड़े काट लें।
बचे हुए आटे को फिर से गूंथकर बेलें और गोलगप्पे बनाएं।

3. तलना:
एक कढ़ाई में तेल गरम करें। तेल मध्यम-तेज़ आंच पर होना चाहिए।
गोलगप्पे को तेल में डालें और हल्के से दबाते हुए तलें। वे फूले और कुरकुरे बनेंगे।
तलने के बाद गोलगप्पे को टिश्यू पेपर पर निकालें, ताकि अतिरिक्त तेल हट जाए।

टिप्स:
सूजी के साथ थोड़ा आटा मिलाने से गोलगप्पे में मजबूती आती है।
तलते समय तेल का तापमान मध्यम होना चाहिए।
गोलगप्पों को पूरी तरह ठंडा होने के बाद एयरटाइट कंटेनर में स्टोर करें।
घर पर बनाए हुए गोलगप्पे भी उतने ही खस्ता और स्वादिष्ट होते हैं जितने ठेले पर मिलते हैं। 😊

खाना पचेगा या सड़ेगा-             खाना खाने के बाद पेट में खाना पचेगा या खाना सड़ेगा, यह जानना बहुत जरूरी होता है। हमने ...
02/03/2025

खाना पचेगा या सड़ेगा-
खाना खाने के बाद पेट में खाना पचेगा या खाना सड़ेगा, यह जानना बहुत जरूरी होता है। हमने रोटी खाई, हमने दाल खाई, हमने सब्जी खाई, हमने दही खाया लस्सी पी, दूध, दही छाछ, लस्सी फल आदि यह सब कुछ भोजन के रूप में हमने ग्रहण किया। यह सब कुछ हमें उर्जा देते हैं और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है।

पेट में एक छोटा सा स्थान होता है, जिसको हम हिन्दी में "आमाशय" कहते हैं। इसका संस्कृत नाम है "जठर"। यह एक थैली की तरह होता है। यह जठर हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी में आता है। यह बहुत छोटा सा स्थान है। हम जो कुछ भी खाते हैं, वह सब इस आमाशय में आ जाता है। आमाशय में जो अग्नि प्रदीप्त होती है उसे जठराग्नि कहते हैं।

यह जठराग्नि आमाशय में प्रदीप्त होने वाली आग है। जैसे ही हम खाना खाना खाते हैं, जठराग्नि प्रदीप्त हो जाती है। यह ऑटोमेटिक है,जैसे ही हमने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह में डाला, कि इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई। यह अग्नि तब तक जलती है जब तक खाना पचता है। अब हमने खाना खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया।अब जो आग (जठराग्नि) जल रही थी, वह बुझ गयी। आग अगर बुझ गयी, तो पचने की जो क्रिया है वह रुक जाती है।
अब हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि खाना पेट में जाने पर पेट में दो ही क्रियाएं होती हैं, एक क्रिया है जिसको हम कहते हैं पचना, और दूसरी है, सड़ना।

आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा, खाना पचेगा तो उससे रस बनेगा। रस से मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डियां, मल, मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत में मेद बनेगा। यह तभी होगा जब खाना पचेगा। खाना सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वह है यूरिक एसिड। यूरिक एसिड बढ़ने से ही घुटने, कंधे, कमर में दर्द होता है। जब खाना सड़ता है, तो यूरिक एसिड जैसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हैं एलडीएल ( खराब कोलस्ट्रॉल )। खराब कोलस्ट्रॉल के बढ़ने से ही ब्लड प्रेशर ( बीपी ) बढ़ता है। ये सभी बीमारियां तब आती हैं जब खाना पचता नहीं है, बल्कि सड़ता है।
खाना पचने पर किसी भी प्रकार का कोई भी जहर नहीं बनता है। खाना पचने पर जो बनता है वह है मांस, मज्जा, रक्त, वीर्य, हड्डियां, मल, मूत्र, अस्थि और खाना नहीं पचने पर बनता है यूरिक एसिड, कोलेस्ट्रोल, एलडीएल, वीएलडीएल और यही हमारे शरीर को रोगों का घर बनाते हैं। पेट में बनने वाला यही जहर जब ज्यादा बढ़कर खून में आता है, तो खून दिल की नाड़ियों में से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून में आया है, इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है। इसी से हार्ट अटैक होता है।

अतः हमें ध्यान इस बात पर देना चाहिए कि जो हम खा रहे हैं, वह ठीक से पचना चाहिए, इसके लिए पेट में ठीक से आग (जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए, क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं है और खाना पकता भी नहीं है। महत्व की बात खाने को खाना नहीं खाने को पचाना है। हमने क्या खाया, कितना खाया यह महत्त्वपूर्ण नहीं है। खाना अच्छे से पचे इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया है-

"भोजनान्ते विषं वारी" (खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है )। इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी नहीं पीना चाहिए। जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे में मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट में बदलता है। पेस्ट में बदलने की क्रिया होने तक एक घंटा ४८ मिनट का समय लगता है। उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है। बुझती तो नहीं, लेकिन बहुत धीमी हो जाती है। पेस्ट बनने के बाद शरीर में रस बनने की प्रक्रिया शुरू होती है, तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती है।

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5 मिनट में रसमलाई केक रेसिपीसामग्री:• ¾ कप दही• ½ कप तेल• 1 कप पाउडर चीनी • 1½ कप मैदा • 1 चम्मच बेकिंग पाउडर • ¼ छोटा च...
02/03/2025

5 मिनट में रसमलाई केक रेसिपी

सामग्री:
• ¾ कप दही
• ½ कप तेल
• 1 कप पाउडर चीनी
• 1½ कप मैदा
• 1 चम्मच बेकिंग पाउडर
• ¼ छोटा चम्मच सोडा
• आवश्यकतानुसार दूध
• ½ छोटा चम्मच इलायची पाउडर
• ½ कप व्हिपिंग क्रीम
• कुछ बूंदें रसमलाई एसेंस
• कुछ बूँदें पीला रंग

सजावट के लिए
• रसमलाई बोल्स
• गुलाब की पंखुड़ियाँ
• पिस्ता

निर्देश:

1. एक कटोरा लें, उसमें दही और तेल डालें और उन्हें तब तक अच्छी तरह मिलाएं जब तक कि तेल पूरी तरह से दही में न मिल जाए। पिसी चीनी डालें और चिकना होने तक फिर से मिलाएँ।
2. मिश्रण में सूखी सामग्री - मैदा, बेकिंग पाउडर और बेकिंग सोडा मिलाएं। चिकना घोल बनाने के लिए आवश्यकतानुसार धीरे-धीरे दूध डालें। इलायची पाउडर और रसमलाई एसेंस डालें और सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें। बैटर को माइक्रोवेव-सुरक्षित कटोरे में डालें और हवा के बुलबुले छोड़ने के लिए इसे धीरे से टैप करें।
3. बैटर को 5 मिनट के लिए माइक्रोवेव करें. इसे माइक्रोवेव से निकालें और ठंडा होने दें। 10 मिनट बाद केक को प्याले से निकाल लीजिए और पूरी तरह ठंडा होने दीजिए.
4. दूसरे कटोरे में, व्हिपिंग क्रीम डालें और नरम चोटियाँ बनने तक फेंटें। रसमलाई एसेंस और पीले खाद्य रंग की कुछ बूंदें मिलाएं, फिर कुछ सेकंड के लिए अच्छी तरह मिश्रित होने तक फेंटें।
5. तैयार क्रीम को एक स्पैटुला का उपयोग करके ठंडे केक के ऊपर समान रूप से फैलाएं।
6. केक के ऊपर बची हुई क्रीम और पाइप के फूल एक पाइपिंग बैग में भरें। पाइप वाले फूलों के किनारों पर रसमलाई के टुकड़े रखें। केक को गुलाब की पंखुड़ियों, कटे हुए पिस्ता और केसर के धागों से सजाएं।

*रसमलाई* _रसमलाईकेक_ *मिठाई* _रेसिपी_

मङ्गलम् भगवान विष्णुः मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः मङ्गलाय तनो हरिः॥
02/03/2025

मङ्गलम् भगवान विष्णुः मङ्गलम् गरुणध्वजः। मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः मङ्गलाय तनो हरिः॥

BISI BHEL
02/03/2025

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