14/04/2026
प्यारे देशवासियों को मां भारती के वीर सपूत, भारत के महान गणितज्ञ आर्यभट्ट जी के जन्मोत्सव पर कोटि-कोटि नमन एवं शुभकामनाएं!
आर्यभट्ट (476-550 ईस्वी) प्राचीन भारत के महानतम गणितज्ञ और खगोलशास्त्री थे, जिन्हें 'भारतीय गणित का जनक' माना जाता है। उन्होंने पटना (कुसुमपुर) में 23 वर्ष की आयु में प्रसिद्ध ग्रंथ 'आर्यभटीय' लिखा। उन्होंने शून्य (0) की अवधारणा, (पाई) का सटीक मान, पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना और ग्रहण के वैज्ञानिक कारणों की खोज की | उनका जन्म 476 ईस्वी में हुआ था, जो गुप्त काल का समय था। उनके प्रमुख कार्यों में 'आर्यभटीय' और 'आर्य-सिद्धांत' शामिल हैं | उन्होंने 'शून्य' (0) का उपयोग करके स्थान-मान प्रणाली (place-value system) की नींव रखी। त्रिकोणमिति (Trigonometry) के सूत्र दिए। उन्होंने बताया कि पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घूमती है, जिससे दिन और रात होते हैं। चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण के पीछे की परछाई के कारण को वैज्ञानिक रूप से समझाया। वर्ष की सटीक लंबाई 365.258 दिनों के रूप में मापी। भारत के पहले उपग्रह (1975) का नाम उनके सम्मान में 'आर्यभट्ट' रखा गया था।