10/06/2026
माँ कामाक्षी देवी आदि शक्ति का अत्यंत दिव्य और करुणामयी स्वरूप मानी जाती हैं। "कामाक्षी" शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— "काम" अर्थात इच्छा और "अक्षी" अर्थात नेत्र। अर्थात जिनकी कृपादृष्टि से भक्तों की सभी शुभ कामनाएँ पूर्ण होती हैं, वे माँ कामाक्षी हैं।
दक्षिण भारत के कामाक्षी अम्मन मंदिर में विराजमान माँ कामाक्षी को त्रिपुरसुन्दरी, ललिता महात्रिपुरसुन्दरी तथा श्रीविद्या की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। शाक्त परंपरा के अनुसार जब माँ सती के अंग पृथ्वी पर गिरे, तब कांचीपुरम का क्षेत्र शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र बना। कहा जाता है कि माँ ने यहाँ एक आम्रवृक्ष के नीचे कठोर तप किया और भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया।
माँ कामाक्षी का स्वरूप सौम्य होने पर भी अत्यंत शक्तिशाली है। वे एक हाथ में पाश, दूसरे में अंकुश, तीसरे में पुष्पबाण और चौथे में इक्षु धनुष धारण करती हैं। यह स्वरूप दर्शाता है कि देवी प्रेम, करुणा, ज्ञान और शक्ति के माध्यम से संसार का संचालन करती हैं। श्रीविद्या साधना में माँ कामाक्षी को समस्त ब्रह्माण्ड की अधिष्ठात्री शक्ति माना गया है।
माँ कामाक्षी की आराधना से सौभाग्य, धन, विद्या, वैवाहिक सुख, संतान प्राप्ति तथा आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भक्तों का विश्वास है कि माँ की कृपा से मन की अशांति दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
माँ कामाक्षी स्तुति
कामाक्षीं करुणारूपां कामितार्थप्रदायिनीम्। कल्याणीं कमलां वन्दे काञ्चीपीठनिवासिनीम्॥
त्रैलोक्यमातरं देवीं त्रिपुरां परमेश्वरीम्। भक्तानुग्रहदात्रीं तां कामाक्षीं प्रणमाम्यहम्॥
माँ कामाक्षी कवच
ॐ पूर्वे मां पातु कामाक्षी, आग्नेय्यां त्रिपुरसुन्दरी। दक्षिणे पातु मे नित्यं, नैऋत्यां भुवनेश्वरी॥
पश्चिमे पातु मे देवी, वायव्ये सर्वमङ्गला। उत्तरे पातु मे नित्यं, ऐशान्यां श्रीमहेश्वरी॥
ऊर्ध्वं रक्षतु मे विद्या, अधस्तात् परमेश्वरी। सर्वाङ्गं पातु मे नित्यं, कामाक्षी कामदायिनी॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
माँ कामाक्षी की उपासना विशेष रूप से शुक्रवार, पूर्णिमा तथा नवरात्रि में अत्यंत फलदायी मानी जाती है। उनकी कृपादृष्टि से भक्त के जीवन में प्रेम, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक प्रकाश का उदय होता है।
नमामीशमीशान #कामाक्षी #त्रिपुरसुन्दरी #श्रीविद्या #आदिशक्ति #सनातनधर्म