ग्रामोदय

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विशेष संरक्षित जनजाति PVTGs समुदाय में जलवायु परिवर्तन अनुकूलन कृषि पारिस्थितिकी आधारित महिला नेतृत्व के साथ आजीविका, पोषण, स्वास्थ्य, कला संस्कृति को बढ़ावा देने का कार्य।

ब्रह्मास्त्र: जैविक खेती की ओर एक सशक्त कदम 🌱सतत और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रामोदय ग्राम विकास समिति ...
04/06/2026

ब्रह्मास्त्र: जैविक खेती की ओर एक सशक्त कदम 🌱

सतत और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रामोदय ग्राम विकास समिति ने 04 जून 2026 को छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड स्थित बीआरसी गुड़ली में ब्रह्मास्त्र जैविक दवाई का निर्माण किया ।

इस विशेष सत्र के दौरान, हमने स्थानीय किसानों के साथ मिलकर 50 लीटर ‘ब्रह्मास्त्र’ जैविक कीटनाशक का निर्माण किया।
ब्रह्मास्त्र एक अत्यंत प्रभावी जैविक कीटनाशक है, जो फसलों को हानिकारक कीटों से बचाने में मदद करता है। रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के रूप में इसका उपयोग न केवल उत्पादन लागत को कम करता है, बल्कि:
✅ मिट्टी की उर्वरता को सुरक्षित रखता है।
✅ पर्यावरण को रसायनों के दुष्प्रभाव से बचाता है।
✅ मानव स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है।

मुख्य विशेषताएं:
इस अवसर पर उपस्थित किसानों को न केवल ब्रह्मास्त्र बनाने की विधि का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, बल्कि इसके सही उपयोग, छिड़काव की मात्रा, उचित समय और आवश्यक सावधानियों पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

इसके साथ ही, हमने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों, स्थानीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग और कम लागत में बेहतर उत्पादकता प्राप्त करने के उपायों पर भी संवाद किया। हम मानते हैं कि किसानों को सशक्त बनाकर ही हम एक हरित और स्वस्थ भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

हम इस पहल में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले सभी कृषकों का धन्यवाद करते हैं। आइए, मिलकर खेती को और अधिक प्राकृतिक और टिकाऊ बनाएं।🌾

#ब्रह्मास्त्र #जैविकखेती #सततकृषि

31/05/2026
सतत कृषि की ओर एक बदलाव: बीआरसी आमानारा में प्राकृतिक खेती मिशन 🌱 31 मई 2026 को हमने कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड में...
31/05/2026

सतत कृषि की ओर एक बदलाव: बीआरसी आमानारा में प्राकृतिक खेती मिशन 🌱

31 मई 2026 को हमने कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड में एक महत्वपूर्ण कार्य किया। ग्रामोदय ग्राम विकास समिति ने कृषि विभाग के साथ मिलकर विशेष संरक्षित जनजाति (PVTGs) बैगा समुदाय के कृषकों के साथ 'निमास्त्र' निर्माण का व्यावहारिक सत्र सफलतापूर्वक पूरा किया।

हमारा लक्ष्य केवल ज्ञान साझा करना नहीं है, बल्कि 'इनपुट आत्मनिर्भरता' (Input Self-Reliance) को बढ़ावा देना है।

मुख्य बिंदु:

तकनीकी हस्तांतरण : - बैगा समुदाय के कृषकों को निमास्त्र के वैज्ञानिक फॉर्मूलेशन, उपयोग की मात्रा और इसके कीट नियंत्रण गुणों के बारे में प्रशिक्षित किया गया।

लागत का अनुकूलन :- रासायनिक कीटनाशकों से जैविक विकल्पों (निमास्त्र) की ओर बदलाव, किसानों की खेती की लागत को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण:- प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों के माध्यम से न केवल मिट्टी की उर्वरता को बहाल करना, बल्कि जैव-विविधता को भी संरक्षित करना हमारा उद्देश्य है।

बैगा समुदाय की पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक जैविक तकनीकों का यह समन्वय ही कबीरधाम के कृषि परिदृश्य में एक नया बदलाव लाएगा।

हम अपनी संस्था के माध्यम से जमीनी स्तर पर ऐसे ही 'सस्टेनेबल सॉल्यूशंस' विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

ग्रामोदय ग्राम विकास समिति के इस मिशन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले कृषि विभाग, कबीरधाम का विशेष आभार।

प्राकृतिक खेती की ओर कदम : आमानारा में आत्मनिर्भरता की नई पहल 🌱प्रकृति के संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्...
30/05/2026

प्राकृतिक खेती की ओर कदम : आमानारा में आत्मनिर्भरता की नई पहल 🌱

प्रकृति के संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रामोदय ग्राम विकास समिति निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में दिनांक 30 मई 2026 को ग्राम आमानारा स्थित बायो इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) में एक महत्वपूर्ण गतिविधि संपन्न हुई।
बीआरसी से जुड़े जागरूक किसानों ने जैविक कीटनाशक 'निमास्त्र' के निर्माण के लिए आवश्यक सामग्री—ताजी नीम की पत्तियों का संकलन किया। यह पूरी प्रक्रिया स्थानीय संसाधनों के सदुपयोग और रसायनों से मुक्ति की दिशा में एक बड़ा कदम है।
तैयारियों का सिलसिला जारी है! कल, 31 मई 2026 को संकलित संसाधनों का उपयोग कर प्रभावी जैविक खाद और कीटनाशकों का निर्माण किया जाएगा। पूरी कार्ययोजना तैयार है और हमारे किसान भाई-बहन इस पहल को सफल बनाने के लिए उत्साहित हैं।
ग्राम आमानारा में विशेष संरक्षित जनजातीय समूह (PVTGs) 'बैगा समुदाय' निवास करता है, जिनकी जीवनशैली और आजीविका कृषि-पारिस्थितिकी (Agro-ecology) पर आधारित रही है। उनके इस पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ना हमारा मुख्य ध्येय है।
बीआरसी, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत कृषि विभाग, कबीरधाम के मार्गदर्शन और सहयोग से संचालित किया जा रहा है। यहाँ गोबर, गौमूत्र और स्थानीय वनस्पतियों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जैव-उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जो न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएंगे बल्कि किसानों की लागत को भी कम करेंगे।

हमारा संकल्प है—स्वस्थ धरती, स्वस्थ किसान और सुरक्षित भविष्य!

सतत आजीविका की ओर एक कदम: ग्राम पकरीपानी में मत्स्य पालन को प्रोत्साहन 🐟🌱 दिनांक 28 मई 2026 को ग्रामोदय ग्राम विकास समित...
29/05/2026

सतत आजीविका की ओर एक कदम: ग्राम पकरीपानी में मत्स्य पालन को प्रोत्साहन 🐟🌱

दिनांक 28 मई 2026 को ग्रामोदय ग्राम विकास समिति द्वारा ग्राम पकरीपानी में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य स्थानीय मत्स्य पालकों को सशक्त बनाना और मत्स्य पालन गतिविधियों को सुव्यवस्थित करना था।

मुख्य कार्यवाही :
✅ सामुदायिक सशक्तिकरण : विशेष संरक्षित जनजाति (PVTGs) 'बैगा' समुदाय को जिला प्रशासन द्वारा मछली पालन हेतु 10 वर्षीय लीज प्राप्त हुई है। यह पहल उनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान में एक मील का पत्थर साबित होगी।

✅ सहयोग और समन्वय : मत्स्य पालन विभाग, कबीरधाम के विशेष तकनीकी सहयोग से मछली पालन की वैज्ञानिक पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

✅ सतत आजीविका : बैठक में मत्स्य पालन से होने वाले दीर्घकालिक लाभों, आय के स्रोतों और ग्राम पंचायत के साथ लीज राशि जमा करने जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर विस्तृत चर्चा की गई ।

ग्रामोदय ग्राम विकास समिति का ध्येय ग्रामीण समुदायों को आत्मनिर्भर बनाना है। हमें गर्व है कि हम बैगा समुदाय के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के मेल से उन्हें आजीविका के नए अवसर प्रदान करने में सहभागी बन रहे हैं ।

हम इस यात्रा में सहयोग के लिए जिला प्रशासन और मत्स्य पालन विभाग, कबीरधाम का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।

सामुदायिक सशक्तिकरण और सतत आजीविका की ओर कदम: बैगा युवा मत्स्य पालन समिति, इन्द्रीपानी 🌱🐟       इन्द्रीपानी में 'बैगा यु...
28/05/2026

सामुदायिक सशक्तिकरण और सतत आजीविका की ओर कदम: बैगा युवा मत्स्य पालन समिति, इन्द्रीपानी 🌱🐟

इन्द्रीपानी में 'बैगा युवा मत्स्य पालन समिति' की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय मत्स्य पालन व्यवसाय को सुदृढ़ करना और भविष्य की चुनौतियों का समाधान खोजना था।

ग्रामोदय ग्राम विकास समिति के मार्गदर्शन में आयोजित इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :

💧 जल प्रबंधन : तालाब में गिरते जल स्तर को देखते हुए मछलियों के संरक्षण के लिए विशेष रणनीति पर चर्चा हुई।
🛡️ सुरक्षा : मछली चोरी की आशंका को देखते हुए, अब समिति के सदस्य रात्रिकालीन निगरानी के लिए तालाब के पास ही एक सुरक्षा स्थल झोपड़ी का निर्माण करेंगे।
💰 वित्तीय अनुशासन : समिति ने आगामी जुलाई माह में तालाब की लीज राशि जमा करने का निर्णय लिया है।

बैठक में नाबार्ड के DDM, श्री हर्ष देशमुख जी का सानिध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने मत्स्य पालन के बेहतर प्रबंधन, आय में वृद्धि और स्वरोजगार के अवसरों पर बहुमूल्य मार्गदर्शन प्रदान किया।

भविष्य की संभावनाएं :
समिति और ग्रामीणों ने अपनी आजीविका को और अधिक विविध बनाने के लिए निम्नलिखित मांगे रखी हैं, जिन पर नाबार्ड के सहयोग से सकारात्मक विचार किया जा रहा है:
🔹 मत्स्य पालन के लिए आधुनिक जाल की व्यवस्था।
🔹 बकरी और सुअर पालन हेतु सहायता।
🔹 तालाब में जल स्तर को बनाए रखने के लिए ट्यूबवेल की सुविधा।

हमारा लक्ष्य केवल मत्स्य पालन ही नहीं, बल्कि एक आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है। नाबार्ड के सहयोग और ग्रामोदय ग्राम विकास समिति के प्रयासों से, इन्द्रीपानी के युवा अपने भविष्य को एक नई दिशा दे रहे हैं।

सामुदायिक सशक्तिकरण और सतत आजीविका की ओर कदम: बैगा युवा मत्स्य पालन समिति, इन्द्रीपानी 🌱🐟आज, इन्द्रीपानी में 'बैगा युवा ...
27/05/2026

सामुदायिक सशक्तिकरण और सतत आजीविका की ओर कदम: बैगा युवा मत्स्य पालन समिति, इन्द्रीपानी 🌱🐟

आज, इन्द्रीपानी में 'बैगा युवा मत्स्य पालन समिति' की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय मत्स्य पालन व्यवसाय को सुदृढ़ करना और भविष्य की चुनौतियों का समाधान खोजना था।

ग्रामोदय ग्राम विकास समिति के मार्गदर्शन में आयोजित इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए :

💧 जल प्रबंधन : तालाब में गिरते जल स्तर को देखते हुए मछलियों के संरक्षण के लिए विशेष रणनीति पर चर्चा हुई।
🛡️ सुरक्षा : मछली चोरी की आशंका को देखते हुए, अब समिति के सदस्य रात्रिकालीन निगरानी के लिए तालाब के पास ही एक सुरक्षा स्थल झोपड़ी का निर्माण करेंगे।
💰 वित्तीय अनुशासन : समिति ने आगामी जुलाई माह में तालाब की लीज राशि जमा करने का निर्णय लिया है।

बैठक में नाबार्ड के DDM, श्री हर्ष देशमुख जी का सानिध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने मत्स्य पालन के बेहतर प्रबंधन, आय में वृद्धि और स्वरोजगार के अवसरों पर बहुमूल्य मार्गदर्शन प्रदान किया।

भविष्य की संभावनाएं :
समिति और ग्रामीणों ने अपनी आजीविका को और अधिक विविध बनाने के लिए निम्नलिखित मांगे रखी हैं, जिन पर नाबार्ड के सहयोग से सकारात्मक विचार किया जा रहा है:
🔹 मत्स्य पालन के लिए आधुनिक जाल की व्यवस्था।
🔹 बकरी और सुअर पालन हेतु सहायता।
🔹 तालाब में जल स्तर को बनाए रखने के लिए ट्यूबवेल की सुविधा।

हमारा लक्ष्य केवल मत्स्य पालन ही नहीं, बल्कि एक आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है। नाबार्ड के सहयोग और ग्रामोदय ग्राम विकास समिति के प्रयासों से, इन्द्रीपानी के युवा अपने भविष्य को एक नई दिशा दे रहे हैं।

जैविक खेती की ओर कदम: इन्द्रीपानी में निमास्त्र का निर्माण 🌿ग्रामोदय ग्राम विकास समिति के सतत प्रयासों के अंतर्गत, कबीरध...
27/05/2026

जैविक खेती की ओर कदम: इन्द्रीपानी में निमास्त्र का निर्माण 🌿

ग्रामोदय ग्राम विकास समिति के सतत प्रयासों के अंतर्गत, कबीरधाम जिले के विकासखंड बोड़ला के पीवीटीजी बैगा समुदाय में आज दिनांक 27 मई 2026 को ग्राम इन्द्रीपानी बीआरसी में जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया।

इस पहल के तहत स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर 150 लीटर 'निमास्त्र' (Nimastra) जैविक कीटनाशक का निर्माण किया।

बैठक के मुख्य बातें : -

कार्य : ग्रामीणों को निमास्त्र बनाने की विधि, इसके वैज्ञानिक महत्व और फसलों में इसके सही उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई ।

आत्मनिर्भरता : जैविक कीटनाशक का उद्देश्य किसानों की महंगी रासायनिक दवाओं पर निर्भरता को कम करना है।

पर्यावरण संरक्षण : यह प्राकृतिक विधि न केवल फसलों के लिए सुरक्षित है, बल्कि मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

रासायनिक खेती से जैविक खेती की ओर यह बदलाव न केवल किसानों की लागत को कम करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की नींव रखेगा।

ग्रामोदय ग्राम विकास समिति, ग्राम स्तर पर स्थायी कृषि और आत्मनिर्भरता के लिए प्रतिबद्ध है।


#जैविकखेती #सततविकास

मीडिया के साथियों का आभार
25/05/2026

मीडिया के साथियों का आभार

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