शब्दकार प्रमोद तिवारी साहित्य-सेवा न्यास

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शब्दकार प्रमोद तिवारी साहित्य-सेवा न्यास An organization established in loving memory of Shabdkaar Pramod Tiwari ji and dedicated to Literatu

17/09/2025

कुछ स्मृतियाँ चिरसंग्रहणीय होती हैं... K NEWS के 'कविता ज़िन्दाबाद' की शूटिंग के बाद ४ या ५ एपिसोड के प्रसारण हुए... हमारे एपिसोड के नम्बर ही नहीं आया... संयोग से इस बार की कानपुर यात्रा में आदरणीय सन्देश तिवारी भैया ने एक SSD दी, जिसमें यह एपिसोड मिल गया... पिक्चर क्वालिटी और वॉइस क्वॉलिटी दोनों ही बहुत अच्छी नहीं थी कई घण्टे के परिश्रम के बाद यह इस तरह एडिट हो पाया है.... श्रद्धेय प्रमोद तिवारी सर की कविताओं का हमारे जीवन पर विशेष प्रभाव रहा है...विशेष कर नदिया गीत का... उनकी स्मृति में कभी यह गीत लिखा...

उपलब्धियाँ बहुत होंगी, पर आप न होंगे साथ में।
ऐसा कभी कहाँ सोचा था, क्या है विधि के हाथ में?

स्वर्णिम सुधियाँ शेष बची हैं, और कई सीखें।
बाहर मुस्कानें हँसतीं हैं, भीतर से चीखें।।

हँसते हुए लकीरें सारी, चेहरे पर से साफ़ थीं;
देख नहीं पाये हम जो भी लिखा हुआ था माथ में।

कविता की अनवरत साधना, अपनी शर्तों पर।
मस्त फ़क़ीरी, सादा जीवन, अपने ही तेवर।

'नदिया' के तट पर हम खोजें, दूर आपको 'चाॅंद' तक;
संवेदना, दया, करुणा, वात्सल्य, स्नेह के क्वाथ में।

जीवन भर असत्य से लड़ना, चन्दन सम रहना।
प्रश्न न्याय का उठे जहाँ पर, साफ़-साफ़ कहना।।

विष पीकर, पीयूष बाँटकर, इस नश्वर संसार को।
आप रुद्र थे समा गये हैं, फिर से भोलेनाथ में।।

उपलब्धियाँ बहुत होंगी, पर आप न होंगे साथ में।
ऐसा कभी कहाँ सोचा था, क्या है विधि के हाथ में?

- पं. धीरज मिश्र 'शाण्डिल्य'

शब्दकार प्रमोद तिवारी साहित्य-सेवा न्यास

श्रद्धेय प्रमोद तिवारी जी सुपुत्र आदरणीय सन्देश तिवारी जी की कविता... पुत्र द्वारा पिता की विरासत को ज़िम्मेदारी के साथ ...
16/09/2025

श्रद्धेय प्रमोद तिवारी जी सुपुत्र आदरणीय सन्देश तिवारी जी की कविता... पुत्र द्वारा पिता की विरासत को ज़िम्मेदारी के साथ सम्हालना अभिभूत कर देता है...

- पं. धीरज मिश्र 'शाण्डिल्य'
पेज सञ्चालक

12/03/2025

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आज 12 मार्च है। आज ही के दिन हम सबके अत्यन्त प्रिय एवं आदरणीय कवि-गीतकार-शब्दकार श्रद्धेय प्रमोद तिवारी जी एवं उनके मित्र सुविख्यात हास्यकवि के.डी. शर्मा हाहाकारी जी को भीषण सड़क दुर्घटना से हुई अकाल मृत्यु ने हम से भौतिक रूप से पृथक कर दिया था... जो हम समस्त काव्यप्रेमियों के लिए वज्राघात के समान था...

किन्तु उनकी काव्य सम्पदा वीडियो-ऑडियो के रूप में हम सबके पास संरक्षित है... जिसके माध्यम से उनका निरन्तर स्मरण बना रहता है...

वैसे तो शब्दकार प्रमोद तिवारी जी कई गीत लोकजिह्वाग्र पर अवस्थित हैं किन्तु नदिया गीत अत्यन्त विशेष है, जो एक समर्थ रचनाकार के रूप में उनकी उपस्थिति को चिरकाल तक हिन्दी बोलने पढ़ने समझने वाले जनसमूह को प्रेरित करता रहेगा...

वर्तमान में उनके ज्येष्ठ सुपुत्र सन्देश तिवारी जी भी अपने पिताश्री की महान काव्य परम्परा को सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ा रहे हैं... यह देखकर हर्ष की अनुभूति होती है...

श्रद्धेय प्रमोद तिवारी जी एवं श्रद्धेय के.डी. शर्मा हाहाकारी जी को उनके प्रयाण दिवस पर शब्दकार परिवार की ओर से अश्रुपूरित श्रद्धाञ्जलि...

- पं. धीरज मिश्र 'शाण्डिल्य'
सहप्रशासक, शब्दकार प्रमोद तिवारी साहित्य-सेवा न्यास

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