Shri Manorath Prasad Harivansh Smriti Trust

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श्री मनोरथ प्रसाद हरिवंश स्मृति ट्रस्ट एक सामाजिक एवं जनकल्याणकारी संस्था है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, सामाजिक सेवा,पर्यावरण, निराश्रित व्यक्तियों के उत्थान हेतु कार्य करती है
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‘जिंदगी की राह’ की सारथी बनीं एन्जल शर्मा, अब हरिवंश सम्मान से होंगी सम्मानितहिमाचल प्रदेश की एम्बुलेंस पायलट अंजू देवी ...
02/10/2026

‘जिंदगी की राह’ की सारथी बनीं एन्जल शर्मा, अब हरिवंश सम्मान से होंगी सम्मानित

हिमाचल प्रदेश की एम्बुलेंस पायलट अंजू देवी ‘एन्जल शर्मा’ का चयन — आपातकाल में मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने की सेवा को मिला राष्ट्रीय सम्मान

देहरादून।
किसी मरीज के लिए अस्पताल तक पहुंचने का हर एक मिनट जिंदगी और मौत के बीच का अंतर हो सकता है। ऐसे कठिन और संवेदनशील समय में एम्बुलेंस की कमान संभालकर मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने वाली हिमाचल प्रदेश की अंजू देवी ‘एन्जल शर्मा’ को अब उनके सेवा-समर्पण के लिए तृतीय अखिल भारतीय हरिवंश सम्मान 2026 से सम्मानित किया जाएगा।

श्री मनोरथ प्रसाद हरिवंश स्मृति ट्रस्ट उत्तराखंड की ओर से आयोजित होने वाला यह प्रतिष्ठित सम्मान समारोह 25 अक्टूबर 2026 को देहरादून में आयोजित किया जाएगा। एन्जल शर्मा का चयन उन व्यक्तित्वों की श्रेणी में किया गया है, जिन्होंने अपने कार्यक्षेत्र में सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को महत्व दिया है।

एम्बुलेंस की स्टेयरिंग से सेवा का सफर

एम्बुलेंस पायलट की भूमिका सामान्य ड्राइविंग से कहीं अधिक जिम्मेदारी वाली होती है। सामने मरीज की गंभीर स्थिति, पीछे परिजनों की चिंता और बीच में अस्पताल तक सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंचाने की चुनौती—ऐसे में चालक का संयम, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

एन्जल शर्मा इसी जिम्मेदारी को निभाते हुए जरूरतमंद मरीजों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाती रही हैं। उनके इसी कार्य को मानवीय सेवा के एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखते हुए ट्रस्ट ने उन्हें अखिल भारतीय हरिवंश सम्मान 2026 के लिए चयनित किया है।

‘सेवा के अनदेखे चेहरों’ को सम्मान

हरिवंश सम्मान समारोह का एक प्रमुख उद्देश्य ऐसे लोगों को सार्वजनिक सम्मान देना है, जिनका योगदान समाज के लिए महत्वपूर्ण होने के बावजूद अक्सर सुर्खियों में नहीं आ पाता। एम्बुलेंस पायलट के रूप में एन्जल शर्मा की भूमिका इसी श्रेणी में आती है।

ट्रस्ट का मानना है कि समाज में सेवा केवल बड़े पदों अथवा प्रतिष्ठित संस्थानों से नहीं होती, बल्कि अपने दायित्व को पूरी निष्ठा और संवेदनशीलता से निभाने वाले प्रत्येक व्यक्ति का योगदान महत्वपूर्ण है।

25 अक्टूबर को देहरादून में सम्मान

तृतीय अखिल भारतीय हरिवंश सम्मान 2026 समारोह का आयोजन 25 अक्टूबर 2026 को संस्कृति भवन, आकाशवाणी केंद्र के निकट, देहरादून में प्रस्तावित है। समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित प्रतिभाओं एवं समाजसेवियों को उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।

एन्जल शर्मा को दिया जाने वाला सम्मान उन तमाम कर्मठ लोगों के प्रति भी सम्मान का प्रतीक होगा, जो कठिन परिस्थितियों में दूसरों की सहायता के लिए अपने कर्तव्य पर डटे रहते हैं।

| एन्जल शर्मा

नाम: अंजू देवी ‘एन्जल शर्मा’
राज्य: हिमाचल प्रदेश
क्षेत्र: एम्बुलेंस सेवा / पायलट
सम्मान: तृतीय अखिल भारतीय हरिवंश सम्मान 2026
सम्मान समारोह: 25 अक्टूबर 2026
स्थान: देहरादून, उत्तराखंड

ट्रस्ट का संदेश

“समाज के लिए अपने दायित्व को ईमानदारी, संवेदनशीलता और सेवा-भाव से निभाने वाला प्रत्येक व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है।”

एन्जल शर्मा का चयन इसी सेवा-भाव को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

02/10/2026
डा आदर्श भारद्वाज होंगे अखिल भारतीय हरिवंश सम्मान से सम्मानित युवा साहित्यकार आदर्श भारद्वाज : साहित्य, समाजसेवा और प्रे...
30/09/2026

डा आदर्श भारद्वाज होंगे अखिल भारतीय हरिवंश सम्मान से सम्मानित
युवा साहित्यकार आदर्श भारद्वाज : साहित्य, समाजसेवा और प्रेरणा का उभरता हुआ नाम

आदर्श भारद्वाज बिहार के मधुबनी ज़िले के झंझारपुर के एक प्रतिभाशाली युवा साहित्यकार हैं, जिन्होंने कम आयु में ही साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। लगभग 11 वर्ष की आयु में कक्षा 7 के छात्र के रूप में उन्होंने अपनी असाधारण लेखन क्षमता, रचनात्मक सोच और सामाजिक संवेदनशीलता से देश-विदेश के अनेक लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उनके पिता डॉ. सुरविन्द कुमार झा तथा माता डॉ. सुधा झा ने बचपन से ही उनमें अध्ययन, अनुशासन, संस्कार और रचनात्मक अभिरुचि का विकास किया। परिवार के सहयोग और निरंतर प्रोत्साहन ने उन्हें साहित्य की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आदर्श की रुचि केवल पुस्तकों के लेखन तक सीमित नहीं है, बल्कि वे भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, बाल अधिकार, राष्ट्रप्रेम तथा सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर भी निरंतर कार्य करते हैं। अब तक वे आठ पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं, जिनमें The Algorithm of Fear, Hidden World, Eternal Love, Divine Saga, Ink Before Age, The Midnight Anthology, बस्ते में कविता तथा मैथिली यात्रा-वृत्तांत नन्हकी आँखिसँ भूटान प्रमुख हैं। इन कृतियों में बाल मनोविज्ञान, कल्पनाशीलता, नैतिक शिक्षा, सामाजिक चेतना, यात्रा-संस्मरण तथा प्रेरणादायक विचारों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। विशेष रूप से बस्ते में कविता बच्चों के लिए सरल, प्रेरक और संस्कारपूर्ण कविताओं का संग्रह है, जबकि नन्हकी आँखिसँ भूटान उनकी पहली मैथिली पुस्तक है, जिसमें भारत-भूटान की मैत्री, संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और यात्रा के अनुभवों का अत्यंत रोचक एवं संवेदनशील वर्णन किया गया है।

आदर्श भारद्वाज को उनके साहित्यिक योगदान के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। उन्हें 2nd International Achievers Award, Bhutan, International Star Kids Award, Atal Samman 2025, Magadh Gaurav Samman 2025, Sri Atal Bihari Vajpayee Writer of the Year 2026, Ativishisht Pratibha Samman 2026 सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त उन्हें भारत, नेपाल और भूटान से मानद उपाधियों एवं विभिन्न साहित्यिक सम्मानों से भी अलंकृत किया गया है। उनकी साहित्यिक उपलब्धियों और सामाजिक योगदान को देखते हुए उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है तथा अनेक मंचों पर युवा प्रेरणा के रूप में आमंत्रित किया जाता है। वे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2026 के लिए भी नामांकित हो चुके हैं, जो उनके उत्कृष्ट कार्यों का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है।

साहित्य के साथ-साथ आदर्श समाजसेवा में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। वे बच्चों में पुस्तक-पठन की आदत विकसित करने, शिक्षा के महत्व का प्रचार करने, भारतीय भाषाओं विशेषकर हिंदी एवं मैथिली के संरक्षण और संवर्धन, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, नशामुक्ति, नैतिक शिक्षा तथा सांस्कृतिक मूल्यों के प्रसार के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। वे समय-समय पर विद्यालयों, साहित्यिक मंचों, सामाजिक संस्थाओं तथा युवा कार्यक्रमों में भाग लेकर विद्यार्थियों को पढ़ने, लिखने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम हैं। उनकी रचनाओं में राष्ट्रभक्ति, मानवीय संवेदनाएँ, पारिवारिक मूल्य, अनुशासन, परिश्रम और सकारात्मक सोच का विशेष स्थान है। यही कारण है कि उनकी लेखनी बालकों, युवाओं तथा अभिभावकों सभी को समान रूप से प्रेरित करती है।

आदर्श भारद्वाज की उपलब्धियाँ यह सिद्ध करती हैं कि यदि प्रतिभा के साथ समर्पण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम जुड़ जाए तो आयु कभी भी सफलता की सीमा नहीं बनती। उन्होंने कम उम्र में यह साबित किया है कि दृढ़ संकल्प, सृजनात्मक सोच और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना से कोई भी व्यक्ति राष्ट्र और समाज के लिए प्रेरणा बन सकता है। वे आज के युवाओं के लिए केवल एक लेखक नहीं, बल्कि एक प्रेरक व्यक्तित्व हैं, जिनका उद्देश्य साहित्य के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाना, भारतीय संस्कृति और भाषाओं का गौरव बढ़ाना तथा नई पीढ़ी को ज्ञान, नैतिकता और मानवीय मूल्यों के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। उनके कार्य यह संदेश देते हैं कि शिक्षा, साहित्य और समाजसेवा का समन्वय ही एक सशक्त, जागरूक और संस्कारित समाज की नींव रख सकता है।
25 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में Shri Manorath Prasad Harivansh Smriti Trust द्वारा डा आदर्श भारद्वाज को उनकी साहित्यिक यात्रा से प्रभावित होकर राष्ट्रीय स्तर का अखिल भारतीय हरिवंश सम्मान से सम्मानित किया जायेगा

28/09/2026

🏆 आधिकारिक घोषणा | तृतीय अखिल भारतीय हरिवंश सम्मान–2026

श्री मनोरथ प्रसाद हरिवंश स्मृति ट्रस्ट उत्तराखंड (भारत) को यह घोषणा करते हुए हर्ष एवं गौरव की अनुभूति हो रही है कि देश की सुप्रसिद्ध गायिका सुश्री अभिलिप्सा पंडा को संगीत एवं भक्ति संगीत के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए तृतीय अखिल भारतीय हरिवंश सम्मान–2026 से सम्मानित किया जाएगा।

अपनी सुमधुर एवं प्रभावशाली गायन शैली के माध्यम से भारतीय संगीत और भक्ति भाव को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने वाली अभिलिप्सा पंडा ने विशेष रूप से “हर हर शंभू” जैसी लोकप्रिय प्रस्तुति के माध्यम से देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

यह सम्मान समारोह कला, संस्कृति, संगीत, समाजसेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रतिभाशाली एवं विशिष्ट व्यक्तित्वों के सम्मान को समर्पित है।

🌸 तृतीय अखिल भारतीय हरिवंश सम्मान समारोह–2026

📅 दिनांक: 25 अक्टूबर 2026, रविवार
📍 स्थान: देहरादून, उत्तराखंड

ट्रस्ट परिवार की ओर से सुश्री अभिलिप्सा पंडा को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ।

यह सम्मान भारतीय कला, संस्कृति एवं प्रतिभा के प्रति हमारे सामूहिक सम्मान का प्रतीक है।

श्री मनोरथ प्रसाद हरिवंश स्मृति ट्रस्ट उत्तराखंड (भारत)
🌐 www.shriharivansh7717.com
📞 9368634239




#अखिलभारतीयहरिवंशसम्मान
#अभिलिप्सापंडा





श्री हित हरिवंश
27/09/2026

श्री हित हरिवंश

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हरिवंश शरणम् में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई राधाष्टमीपंडित (डा.) डी. पी. हरिवंशी ने सुनाई राधारानी की महिमा, वृंदाव...
20/09/2026

हरिवंश शरणम् में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई राधाष्टमी

पंडित (डा.) डी. पी. हरिवंशी ने सुनाई राधारानी की महिमा, वृंदावन धाम का किया भावपूर्ण वर्णन

भिक्कावाला। श्री राधारानी के प्राकट्य दिवस राधाष्टमी के पावन अवसर पर श्री मनोरथ प्रसाद हरिवंश स्मृति ट्रस्ट की ओर से हरिवंश शरणम्, गोकुल मार्ग, भिक्कावाला में विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ किया गया। कार्यक्रम के दौरान पूरा वातावरण राधा-कृष्ण की भक्ति से ओत-प्रोत रहा तथा श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा के साथ राधारानी का स्मरण और पूजन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्री राधारानी एवं श्रीकृष्ण के पूजन-अर्चन और मंगलाचरण के साथ किया गया। इसके पश्चात पंडित (डा.) डी. पी. हरिवंशी ने राधाष्टमी के आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व पर विस्तारपूर्वक कथा सुनाई।

राधारानी के स्वरूप और महिमा का किया वर्णन

कथा के दौरान पंडित (डा.) डी. पी. हरिवंशी ने कहा कि राधारानी केवल भक्ति का स्वरूप ही नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की ह्लादिनी शक्ति और प्रेम की पराकाष्ठा के रूप में पूजनीय हैं। उन्होंने राधा नाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि श्री राधारानी की भक्ति मनुष्य के जीवन में प्रेम, करुणा, समर्पण और आध्यात्मिक शांति का भाव उत्पन्न करती है।

उन्होंने श्रद्धालुओं को राधाष्टमी के पर्व की धार्मिक मान्यता से अवगत कराते हुए श्री राधारानी के प्राकट्य से जुड़े प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु एकाग्र होकर धार्मिक प्रसंगों को सुनते रहे।

वृंदावन धाम की आध्यात्मिक महिमा का भावपूर्ण वर्णन

पंडित (डा.) डी. पी. हरिवंशी ने कथा के दौरान वृंदावन धाम की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने वृंदावन को श्री राधा-कृष्ण की प्रेम और भक्ति परंपरा से जुड़ा पावन धाम बताते हुए वहां की कुंज गलियों, यमुना तट, निकुंज परंपरा तथा राधा-कृष्ण की लीलाओं से जुड़े विभिन्न आध्यात्मिक प्रसंग श्रद्धालुओं के समक्ष रखे।

उन्होंने कहा कि वृंदावन की विशेषता केवल वहां स्थित मंदिरों में ही नहीं, बल्कि वहां की राधा-कृष्ण भक्ति, संकीर्तन और साधना की परंपरा में भी दिखाई देती है। कथा के दौरान जब वृंदावन की भक्ति परंपरा और राधा-कृष्ण की लीलाओं का वर्णन हुआ तो श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण

कथा के बीच पंडित (डा.) डी. पी. हरिवंशी ने राधा-कृष्ण की भक्ति से जुड़े भजन एवं भक्तिमय पद प्रस्तुत किए। भजनों के दौरान श्रद्धालुओं ने भी राधा नाम का संकीर्तन किया।

हरिवंश शरणम् का वातावरण “राधे-राधे” और “राधारानी की जय” के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की और राधारानी के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की।

श्रीमती कमला देवी रहीं मुख्य आयोजक

राधाष्टमी के इस विशेष धार्मिक आयोजन की मुख्य आयोजक श्रीमती कमला देवी रहीं। उनके मार्गदर्शन एवं सहयोग से कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराया गया। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं का स्वागत करते हुए राधाष्टमी की शुभकामनाएं दीं और कहा कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजनों का उद्देश्य समाज में भक्ति, संस्कार, सेवा और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है।

श्रीमती कमला देवी ने कहा कि श्री राधारानी की भक्ति प्रेम, करुणा और समर्पण का संदेश देती है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।

सामाजिक सेवा के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहा ट्रस्ट

श्री मनोरथ प्रसाद हरिवंश स्मृति ट्रस्ट द्वारा सामाजिक सेवा के साथ-साथ धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को भी निरंतर बढ़ावा दिया जा रहा है। ट्रस्ट की ओर से समय-समय पर धार्मिक आयोजन, भक्ति कार्यक्रम, स्वास्थ्य सेवा, जरूरतमंदों की सहायता एवं सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

ट्रस्ट का उद्देश्य सेवा कार्यों के साथ भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को समाज की नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।

राधाष्टमी कार्यक्रम के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से श्री राधारानी एवं श्रीकृष्ण का स्मरण किया। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने आयोजन की सराहना करते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की अपेक्षा व्यक्त की।

कार्यक्रम का समापन राधे-राधे के जयघोष के साथ हुआ और हरिवंश शरणम् का वातावरण देर तक राधा-कृष्ण की भक्ति में सराबोर रहा।

कंस का अहंकार ही कंस को ले डूबा
16/09/2026

कंस का अहंकार ही कंस को ले डूबा

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मिट्टी से साकार हुई गणेश प्रतिमा, प्रियांशी सिंघल की कला ने मोहा नगरवासियों का मनकालागढ़ (पौड़ी गढ़वाल)। गणेश चतुर्थी के...
15/09/2026

मिट्टी से साकार हुई गणेश प्रतिमा, प्रियांशी सिंघल की कला ने मोहा नगरवासियों का मन

कालागढ़ (पौड़ी गढ़वाल)। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर कालागढ़ नगर में कला और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। नगर के प्रसिद्ध व्यापारी एवं समाजसेवी पवन सिंघल की सुपुत्री एवं फाइन आर्ट विशेषज्ञ प्रियांशी सिंघल द्वारा मिट्टी से निर्मित भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमा इन दिनों नगरवासियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

प्रियांशी सिंघल ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का परिचय देते हुए प्राकृतिक मिट्टी से भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमा तैयार की है। प्रतिमा की बारीक कारीगरी, भाव-भंगिमा और आकर्षक स्वरूप लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। गणेश चतुर्थी जैसे धार्मिक पर्व पर स्वयं अपने हाथों से मिट्टी की प्रतिमा तैयार कर प्रियांशी ने कला के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी सुंदर संदेश दिया है।

मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में प्रियांशी की यह पहल युवाओं को पारंपरिक कला, रचनात्मकता और पर्यावरण के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा देती है। नगर में उनकी बनाई गणेश प्रतिमा को देखने के लिए लोग उत्सुकता के साथ पहुंच रहे हैं और उनकी कला की सराहना कर रहे हैं।

पहले भी मिल चुका है अखिल भारतीय सम्मान

प्रियांशी सिंघल की कलात्मक प्रतिभा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। उनकी कला प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिल चुका है। Shri Manorath Prasad Harivansh Smriti Trust द्वारा आयोजित अखिल भारतीय हरिवंश सम्मान-2025 से प्रियांशी सिंघल को सम्मानित किया जा चुका है। यह उपलब्धि कालागढ़ नगर के लिए भी गौरव का विषय है।

फाइन आर्ट के क्षेत्र में रुचि रखने वाली प्रियांशी लगातार अपनी रचनात्मक प्रतिभा को नए रूप में प्रस्तुत कर रही हैं। भगवान गणेश की मिट्टी से बनाई गई यह प्रतिमा उनकी कला के प्रति समर्पण और भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं से उनके जुड़ाव को दर्शाती है।

नगरवासियों ने की सराहना

प्रियांशी सिंघल की इस कलाकृति की नगरवासियों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि युवा पीढ़ी यदि इसी प्रकार अपनी प्रतिभा को भारतीय कला और संस्कृति से जोड़कर आगे बढ़ाए तो पारंपरिक कलाओं को नई पहचान मिल सकती है।

पवन सिंघल की सुपुत्री प्रियांशी सिंघल ने अपनी कला के माध्यम से कालागढ़ का नाम गौरवान्वित किया है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर उनके द्वारा निर्मित मिट्टी की गणेश प्रतिमा आस्था, कला और पर्यावरण संरक्षण—तीनों का सुंदर संदेश देती नजर आ रही है।

रिपोर्ट: कालागढ़, पौड़ी गढ़वाल

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हरिवंश शरणम
Kalagarh
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