03/01/2026
सड़क यात्रियों - सरकार का चढ़ावा तैयार रखो।
सर्दी की छुट्टियों मे आप सड़क यात्रा पर निकले हैं। आप नेशनल हाइवे पर है और खाली जगह मिलने पर 90 - 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक भी गाड़ी चला रहे है। आखिर गडकरी जी नए हाइवे को 140 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही गाड़ी मे बैठ कर जांच रहे है और कार की कंपनियाँ विकसित भारत मे विकसित कारों की अधिकतम गति को 222 किलोमीटर प्रति घंटा का विज्ञापन भी अखबार मे गर्व से कर रहे है।
तभी सामने पुलिस वाले आपको रोकते है और आपको बताते है की आपने गति सीमा जो की 80 किलोमीटर प्रति घंटा है, उसका उल्लंघन किया है। आप हैरान है की फॉर लाइन नेशनल हाइवे पर "भारत के राजपत्र" के अनुसार कार की अधिकतम गति सीमा तो 100 किलोमीटर प्रति घंटा है। यह बात पुलिस वालों को बताने पर वो एक बोर्ड की फोटो बताते हैं (ध्यान रहे यह एक अमानक बोर्ड है)। बोर्ड को अमानक बोल देने पर पुलिस वाले ज्यादा ज्ञान न झाड़ने, राजकार्य मे बाधा डालने, गाड़ी जब्त करने की बात करते है। यदि एसा न भी हुआ तो सीधे चालान ऑनलाइन भेज दिया जाता है।
अब जिस अधिक गति से दुर्घटना का हवाला दिया जा रहा है, क्या वो 80 से 100 है या दुर्घटनाएँ 120 - 140 किलोमीटर प्रति घंटा पर ज्यादा होती है? यहाँ एक आम आदमी जो 100 किलो मीटर को गति सीमा मान कर चल रहा है, उसके मन मे कुछ सवाल आते हैं:
1. यदि 80 किलोमीटर प्रति घंटा ही सुरक्षित गति है, तो क्यूँ न इसे गज़ट नोटिफिकेशन (राजपत्र) मे प्रकाशित कर दिया जाए और सभी राजमार्गों पर इसे सुनिश्चित किया जाए?
2. ड्राइवर के लिए सामने चल रहे वाहन से उचित दूरी रखने के साथ सड़क के गड्ढे, रोंग साइड ट्रेफिक, रोंग लेन मे चल रही गाड़ियो का अनुमान, सड़क किनारे खड़े ट्रक ट्रेलर, बिना टेल लाइट और अदृश्य ट्रक - ट्रालियों का अनुमान लगाना तो पहले ही जरूरी था, अब सरकार ये चाहती है की इन सबके साथ साथ आप हाइवे पर जिलावार गति सीमा का ध्यान रखें, सड़क के किनारे लगे अमानक बोर्ड को भी पहचाने, साथ ही सड़क से नजर हटा कर बार बार अपने स्पीडॉमीटर पर अपनी गति भी देखते रहे ताकि सरकार आपको सुरक्षित रखने का ढ़ोल पीट पाये।
अमानक बोर्ड लगा कर पुलिस / हाइवे अथॉरिटी कैसे यह उम्मीद करती है की विभिन्न राज्यों के यात्री राजस्थान के हाइवे पर अलग से अमानक बोर्ड को पहचान जाएंगे और गति सीमा का पालन करेंगे?
3. अब यदि 80 किलो मीटर प्रति घंटे की गति से अधिक रफ्तार पर चलना जुर्म है तो हाइवे के वो स्थल जहां सड़क पर दुकानों, रोंग पार्किंग, घटिया निर्माण, टूट फूट की वजह से आपको टोल देने के बाद भी 20 - 40 किलो मीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलना पड़ता है, उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा?
इस पोस्ट का मकसद संबन्धित अधिकारियों तक आम आदमी की इस परेशानी को पन्हुचाना है की कैसे आम आदमी ट्रेफिक के नियम मानने मे सहयोग करे? संबन्धित संस्थाएं (जिला कलेक्टर, ट्रेफिक पुलिस, NHAI, MORTH) एक प्रकार के नियम बनाएँ, अज्ञानता या भ्रम पैदा कर मनमाना राजस्व वसूल कर सड़क सुरक्षा का ढ़ोल न पीटें। आपके विचार आमंत्रित है। आप भी अपने विचार - अनुभव लिख कर संबन्धित अधिकारियों को टेग करें। Ministry of Road Transport and Highways, Government of India National Highways Authority of India - NHAI Nitin Gadkari The Times of India Dainik Bhaskar Rajasthan Patrika