श्री आयुवान सिंह स्मृति संस्थान

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Organization Phiolosophy
विचारणीय बिंदु:
हमारे देश में हमारे समाज के सैंकड़ो नहीं हजारो संगठन काम कर रहे है | कई संगठन विशाल सम्मेलनों का आयोजन कर अपनी रजत,स्वर्ण व हीरक जयंतियां भी मन चुके है | इतने लम्बे समय से हजारो नहीं लाखों लोग इन सामजिक संगठनों के संपर्क में आए हैं तथा अल्प अथवा दीर्घ अवधि तक कार्यक्षेत्र में भी रहे है किन्तु ये संगठन समाज को क्षत्रियों की परम्परागत विचारधारा देने में पूर्णतः असफल रहे हैं|
विचारणीय विषय यह है की अधिकांश सामाजिक संगठनों को कौन लोग ? व किसलिए ? चला रहे है| जिन लोगो के पास परम्परागत धन था अथवा ऐन केन प्रकारेण धनोपार्जन कर लिया है,क्या वे ही लोग इन सामाजिक संगठनों के इर्द गिर्द पद द्वारा यश प्राप्त करने के लिए इकट्ठे नहीं हो गए है ?ऐसे भी समाजभक्त है जो समाज की पीठ पर पैर रखकर राजनैतिक सिंहासन प्राप्त करने के लिए आतुर व कार्यरत रहते हैं | इस वास्तविकता को देखकर हम इस निष्कर्ष पर पहुँच सकते है की जब व्यक्ति अपने निहित स्वार्थो की पूर्ती के लिए समाज को साधन बनाता है तो उसके लिए सिद्धांतो की कोई आवश्यकता नहीं होती, अपितु उसमे यह क्षमता होनी चाहिए कि वह समाज को लुभावने सपने दिखा सके व विनाश का भय दिखा कर उनेह अपने पीछे चलने के लिए बाध्य कर सके |
संसार के सर्वश्रेष्ठ आध्यात्मिक, धार्मिक, ऐतिहासिक व सांस्कृतिक ग्रन्थ क्षत्रियों द्वारा रचित हैं| ये ग्रंथ क्षत्रियों कि निष्ठा, ज्ञान व् शोर्य पर पर्याप्त प्रकाश डालते हैं जिससे हम इस निर्णय पर पहुँचने के लिए बाध्य हो जाते हैं कि क्षत्रियो के पास पूर्वकाल मैं ऐसी व्यावहारिक, परिष्कृत व श्रेष्ठ विचारधारा थी जिसके आधार पर वे अपना चरित्र निर्माण कर संसार पर न्यायपूर्ण शासन किया करते थे |क्या उपर्युक्त विचारधारा कि खोज व उसका परिक्षण इन सामाजिक संघठनों का मुख्या उद्देश्य नहीं होना चाहिए था ? लेकिन ऐसा हुआ नहीं, क्यों कि हमारे संगठनो के पास व्यक्ति स्वयम कि महत्वाकांक्षाओ कि पूर्ती के लिए आ रहा था व आ रहा है.न कि अपने खोये गौरव, धर्म, इतिहास व् संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिये |
हमारा समाज आज मुख्य रूप से तीन भागो में विभक्त है| पहला वर्ग-जो समाज के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा, उन राजाओं, महाराजाओं व नवधनाढ्यो से निर्मित हुआ है जो विचार कि द्रष्टि से बिलकुल शुन्य है| इनमे जो राजाओं महाराजों और पूर्व जागीरदारों का वर्ग है वह पूर्णतया अयोग्य व् निष्क्रिय होते हुए भी अपने आपको समाज का परम्परागत नेता मानता है तथा हमारे समाज का विशाल बहुमत इनके दर्शन कर अपने आपको धन्य समझता है | इस वर्ग का अति लघु अंश विचारशील तो अवश्य हुआ है किन्तु अकर्मण्यता उनमे पूरी तरह व्याप्त है | इसी वर्ग का दूसरा भाग नवधनाढ्यों, राजनैतिक व सामाजिक नेताओं का है | नवधनाढ्य लोग माध्यम वर्ग में से उठकर अपने पुरुषार्थ से उधोगों मैने प्रवेश कर धनाढ़य हुए हैं| इनका समाज से कोई लगाव नहीं है,किन्तु ये लोग राजाओं व् जागीरदारों के पास उठने-बैठने मैं गौरव का अनुभव करते है,जहाँ उनके लिये सीखने को कुछ नहीं है, किन्तु गँवाने के साधन पूर्णतया उपलब्ध हैं | राजनैतिक व सामाजिक नेता जिनको हम इसी वर्ग मैं समझते है, समाज के नजदीक केवल अपने हितसाधन के लिये आते है किन्तु गुलामी से ग्रस्त हमारा समाज इनके भी दर्शनों के लिये हमेशा लालायित रहता है|
समाज का दूसरा वर्ग माध्यम वर्ग का है जिसमें नवशिक्षित, माध्यम आर्थिक स्थिति के लोग आते हैं| इन लोगो मैं सामाजिक सोच हैं | समाज के पतन और पराभव को देख चिंतित ही नहीं दुखी भी है, किन्तु पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के गुलाम हमारे देश के स्कूल कॉलेजों में जो शिक्षण हो रहा है,प्रचार माध्यमो से जिस विनाश को प्रगति बताया जा रहा है,उसमे यह वर्ग भी अछुता नहीं है|इनका सोच इतना सतही है कि रोग कि जड़ तक पहुँचने कि सामर्थ्य इनकी बुद्धि मैं नहीं रह गई है| अतः बुराइयों व् उपरी बिगाड़ कि ऊपरी सतह पर ही तैरते रहकर ये लोग कुछ वर्षो तक भागदोड़ करने के बाद निराश होकर घर पकड़ लेते हैं| इसी वर्ग का एक भाग नवधनाढ्यों से आर्थिक प्रतिद्वंदिता कर अपनी आर्थिक स्थिति को बिगाड़ कर हताशा मई डूब जाता है|

24/08/2026

श्री दादूजी महाराज के प्रथम शिष्य सवाई श्री सुंदरदास जी महाराज का जीवन परिचय श्री गजेंद्र सिंह जी बड़नगर द्वारा।।

25/05/2026

श्री गौरवसिंहजी बड़नगर द्वारा दिया गया श्री देवीसिंहजी महार का जीवन परिचय....
"एक सखा की दूसरे सखा को शब्दों द्वारा दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि"

12/05/2026

कुँवर आयुवान सिंह जी हुड़ील पर कृष्णवर्धन सिंह जी गुढ़ागोडजी जी का शानदार उद्बोधन

राजर्षि कुं. आयुवानसिंहजी हुडील (दूरदर्शी चिंतक) एवं राजर्षि ठा. देवीसिंहजी महार (आधुनिक विश्वामित्र) श्रद्धांजलि सभा 2026

राजर्षि कुं. आयुवानसिंहजी हुडील (दूरदर्शी चिंतक) एवं राजर्षि ठा. देवीसिंहजी महार (आधुनिक विश्वामित्र) की स्मृति में एक व...
10/05/2026

राजर्षि कुं. आयुवानसिंहजी हुडील (दूरदर्शी चिंतक) एवं राजर्षि ठा. देवीसिंहजी महार (आधुनिक विश्वामित्र) की स्मृति में एक विशाल समारोह का आयोजन समस्त बंधुओं की उपस्थिति के साथ सम्पन्न हुवा …

05/05/2026
01/05/2026

राजर्षि कुं. आयुवानसिंहजी हुडील (दूरदर्शी चिंतक) एवं राजर्षि ठा. देवीसिंहजी महार (आधुनिक विश्वामित्र) की स्मृति में एक विशाल समारोह इस वर्ष दिनांक 10 मई, 2026 (रविवार) को दोपहर एक बजे (ठीक एक बजे) झोटवाड़ा, जयपुर मे आयोजित किया जा रहा है।

📍ओम राधिका मैरिज गार्डन, 80 फीट रोड़, प्रताप सर्किल, गोकुलपुरा चौराहा, कालवाड़ रोड़, झोटवाड़ा, जयपुर

30/04/2026

🌼 सादर आमंत्रण 🌼

आप सपरिवार सादर आमंत्रित हैं एक भव्य एवं गरिमामयी
“विशाल स्मृति समारोह” में, जहाँ महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
आपकी गरिमामयी उपस्थिति इस आयोजन की शोभा को और बढ़ाएगी। 🙏

📅 दिनांक: 10 मई 2026 (रविवार)
⏰ समय: दोपहर 1:00 बजे
📍 स्थान: ओम राधिकामैरिज गार्डन, 80 फीट रोड, प्रताप सर्किल,
गोकुलपुरा चौराहा, कालवाड़ रोड, झोटवाड़ा, जयपुर

📚 विशेष आकर्षण: प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक विशाल पुस्तक मेला

आपकी उपस्थिति हमारे लिए सम्मान और गौरव की बात होगी।

श्री क्षत्रिय युवक संघ के स्वयंसेवक श्री उदय सिंह जी काचरेड़ा के पुत्र  ग्रेनेडियर श्री देशराज सिंह जी काचरेड़ा जो स्वयं...
28/04/2026

श्री क्षत्रिय युवक संघ के स्वयंसेवक श्री उदय सिंह जी काचरेड़ा के पुत्र ग्रेनेडियर श्री देशराज सिंह जी काचरेड़ा जो स्वयं भी एक स्वयंसेवक थे और भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। दिनांक 24/04/2026 को आपने देश सेवा में रहते हुए शहादत प्राप्त करी।
आज दिनांक 28/04/2026 को प्रातः 8 बजे से पाटन (नीमकाथाना,सीकर) से आपके पैतृक गांव काचरेड़ा के लिए शौर्य यात्रा निकाली जाएगी व वही आपका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।।

आपकी शहादत को शत शत नमन

श्री क्षत्रिय युवक संघ के स्वयंसेवक श्रीअर्पितसिंहजी सुल्ताना के दादोसा ठा.सा. श्रीरघुवीरसिंहजी का आज प्रातः निधन हो गया...
09/04/2026

श्री क्षत्रिय युवक संघ के स्वयंसेवक श्रीअर्पितसिंहजी सुल्ताना के दादोसा ठा.सा. श्रीरघुवीरसिंहजी का आज प्रातः निधन हो गया है। ईश्वर इस दुख की घड़ी में परिवारजनों को सम्बल प्रदान करें।

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