07/07/2026
परमवीर कैप्टन विक्रम बत्रा जीवनगाथा
माह सितम्बर की तारिख नौ, गूँजी दो किलकारी थी
जुड़वा भाई लव कुश थे, दोनों में गहरी यारी थी
लव यानि कि विक्रम बत्रा, शेरशाह था बचपन से
सेना में शामिल होनें की, थी तैयारी तन मन से
त्याग समर्पण अथक प्रयासो, से खाकी को पाया था
हाँगकाँग में नेवी को भी, विक्रम ने ठुकराया था
कारगिल में युद्ध छिड़ा तो, विक्रम को जब था जाना
मित्रों ने बोला कर वादा, तू जल्दी वापस आना
ये सुन बाजू फड़क उठे थे, आँखों में चमका शोला
विक्रम ने हुँकार भरी तब, अपने मित्रों से बोला
या तो भारत के झंडे को, गाड़ वहाँ पर आऊँगा
या फिर भारत के झंडे में, लिपट यहाँ पर आऊँगा
——————————-
आओं दृश्य दिखाता हूँ मैं, केसर की उस क्यारी का
एन एच वन जब बना निशाना, शत्रु गोलाबारी का
वीर सपूतों को ले जाने, काल स्वयं ही आया था
विक्रम बत्रा आगे आकर, मृत्यु से टकराया था
टोली को आदेश मिला था, दुर्गम चोटी चढ़ने का
शौर्य पराक्रम की गाथा में, नई ईबारत गढ़ने का
तोलोलिंग पर शेर चढ़ा जब, दुश्मन भी था घबराया
इक्यावन चालिस पर जाकर, अमर तिरंगा लहराया
भारत की सेना ने दुश्मन, भगा दिये अपने घर से
ये दिल माँगे मोर कहा था, विक्रम ने चोटी पर से
विक्रम के इस घोष ने जैसे, ऊर्जा का संचार किया
भारत की सेना ने फिर तो, हर बाधा को पार किया
किंतु अड़तालिस पच्हत्तर, पर कब्जा था दुश्मन का
उसको वापस हासिल करना, ये सपना था हर मन का
विक्रम पर तब किया भरोसा, कर्नल जोशी ने बोला
शेरशाह जाओ चोटी पर, दुश्मन से ले लो लोहा
जय माता दी जयकारे संग, टोली आगे बढ़ती थी
भारत माता की जय कहकर, टोली चोटी चढ़ती थी
दुर्गम चोटी को जीता फिर, एक अनोखा काम किया
भारत के बेटों ने अदभुत, मिशन को अंजाम दिया
——————————-
किंतु इक अनहोनी होना थी, सहसा कुछ ना पता चला
सूर्योदय के समय लगा कि, एक सूरज फिर वहाँ ढला
जान बचाने साथी की, विक्रम ने कदम बढ़ाया था
दुश्मन ने गोली मारी तब, धोखा फिर दिखलाया था
मौत स्वयंवर रचा रही थी, समरधरा पर आकर के
विक्रम भी गर्वित होता था, अंतिम दुल्हन पाकर के
जय माता दी घोष लगाकर, मृत्यु के संग गमन किया
रक्तधार से माँग सजाकर, मृत्यु का तब वरण किया
हुई विदाई शेरशाह की, पूरा भारत रोया था
मातृभूमि का वीर सिपाही, चीरनिद्रा में सोया था
जाओ विक्रम याद करेगा, देश तेरी कुर्बानी को
तेरी गाथा सुना रहा हूँ, हर एक हिन्दुस्तानी को
परमवीर विक्रम बत्रा को, शत शत शीश झुकाऊँगा
अंतिम साँसों तक जीवन भर, विक्रम गाथा गाऊँगा
-हिमांशु हिन्द
+91-88270-89894
#07072023