01/03/2025
शङ्का समाधान
लाल चींटियोंका घरसे न जाना, है अनिष्ट शक्तियोंके वासका सङ्केत !
प्रश्न : मेरे वडोदरा निवासके परिसरमें वर्षोंसे बहुत अधिक सङ्ख्यामें लाल चींटियोंका निवास है । उन्हें मारना नहीं चाहता हूं; किन्तु अनेक प्राकृतिक उपाय किए, जैसे कि आटा, आटा-'नमक', हलदी इत्यादि । उसी परिसरमें देशी गीर गो-माताएं (मां-बेटी) भी रही हैं । उनका भरपूर मूत्र भी भूमिमें गया है और उनका गोमय भी मिट्टीमें मिला है ।
चींटियोंके अतिरिक्त, घरमें चिडचिडापन, सिरकी वेदना, दुर्बलता, ऊर्जाकी न्यूनता भी रहती है । कृपया कोई उपाय बताएं कि ये चींटियां सस्नेह हमारे घरसे चली जाएं । - रोहित पारेख (वडोदरा, गुजरात)
उत्तर : मैं सभी गो-भक्तोंसे कहती हूं कि प्रत्येक समस्याका समाधान गोमातासे नहीं हो सकता है । उनकी भी अपनी मर्यादा है । यदि सबकुछ उनसे साध्य हो जाता, तो ईश्वर इस ब्रह्माण्डमें देवी-देवताओंका निर्माण ही नहीं करते । सर्वप्रथम आपके प्रकरणकी सूक्ष्म समीक्षासे जो ज्ञात होता है, वह बताती हूं :
आपके घरमें पितृदोष तो है ही, साथ ही दूसरे पातालके मान्त्रिकका आक्रमण भी है । आपको ज्ञात है या नहीं; किन्तु आपको बता दें कि जैसे सात उच्च लोक होते हैं (भू, भुव, स्वर्ग, मह:, जन, तप एवं सत्यलोक), वैसे ही सप्त पाताल भी होते हैं (अतल, वितल, नितल, गभस्तिमान, महातल, सुतल एवं पाताल) । जैसे उच्च लोकोंमें, बढते क्रमानुसार उच्च कोटिके साधक एवं उन्नत जीवों या जीवात्माओंका निवास होता है, वैसे ही पातालमें, जैसे-जैसे नीचे जाते हैं, वैसे-वैसे अधिक शक्तिशाली आसुरी शक्तियोंका वास होता है । वर्तमान कालमें, हिन्दुत्व हेतु कार्य करनेवाले सभी कार्यकर्ताओं, साधकों, उन्नतों एवं सन्तोंपर भी मान्त्रिकोंके सूक्ष्म स्तरपर आक्रमण हो रहे हैं । ऐसे आक्रमणोंसे बचने हेतु सन्तोंके द्वारा बताए योग्य उपाय करना अति आवश्यक है । - पूज्य् तनुजा ठाकुर, संस्थापक, वैदिक उपासना पीठ