Gajinder Verma Photography

Gajinder Verma Photography Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Gajinder Verma Photography, Environmental conservation organisation, V. P. O Sahoo Teh. &Dist. Chamba, H. P.

कार्तिकेय जिन्हें दक्षिण भारत में मुरुगन और हिमाचल में कार्तिक स्वामी के रूप में पूजा जाता है भगवान शिव और माता पार्वती ...
14/04/2026

कार्तिकेय जिन्हें दक्षिण भारत में मुरुगन और हिमाचल में कार्तिक स्वामी के रूप में पूजा जाता है भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र माने जाते हैं। इन्हें वीरता, शक्ति और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। हिमाचल प्रदेश के Bharmour क्षेत्र में इनकी विशेष आस्था है, जहाँ लोक परंपराओं के अनुसार "केलंग बजीर" के रूप में भी इनका स्मरण किया जाता है।
भर्मौर क्षेत्र में कार्तिक स्वामी से जुड़ी मान्यता “लंग बाजीर” (स्थानीय देव परंपरा) के साथ भी जुड़ती है, जहाँ देवता को क्षेत्र का रक्षक और न्यायकारी शक्ति माना जाता है। लोक विश्वास है कि यह देव शक्ति प्राकृतिक संतुलन, पशुधन और मानव जीवन की रक्षा करती है। “लोहल” (या स्थानीय बोली में लोहल/लोहलु) से इसका संबंध उस प्राचीन स्थल और परंपरा को दर्शाता है जहाँ देवता की उपस्थिति और शक्ति का विशेष महत्व माना जाता रहा है।
इतिहास की दृष्टि से यह परंपरा वैदिक और स्थानीय जनजातीय आस्थाओं का संगम है। भर्मौर, जो कभी प्राचीन चंबा रियासत की राजधानी रहा, देव संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ कार्तिक स्वामी की पूजा न केवल धार्मिक भाव से, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण के प्रतीक के रूप में भी की जाती रही है।
कपट खुलने का धार्मिक महत्व और संदेश:
कार्तिक स्वामी के कपाट खुलना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और नई ऊर्जा का प्रतीक है। यह समय हमें अपने भीतर की नकारात्मकता को त्याग कर सत्य, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
“कार्तिक स्वामी के पावन कपाट खुलने के इस शुभ अवसर पर हम सभी के जीवन में नई आशा, शक्ति और सकारात्मकता का संचार हो। जैसे देवधाम के द्वार भक्तों के लिए खुलते हैं, वैसे ही हमारे मन के द्वार भी प्रेम, करुणा और सद्भाव के लिए सदैव खुले रहें। देव कृपा से समस्त क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और प्राकृतिक संतुलन बना रहे—यही हमारी सच्ची प्रार्थना है।”
bharmourvalley bharmour bharmourlove manimahesh kugtivalley kugtiwls kugtiwildlifesanctuary kartikswamitemple kartikswami kelangbazeer chamba ChambaNews chambaachambha ChambaValley himachalpradesh explore viralpost

06/04/2026

पर्यावरण चेतना केंद्र, साहू (चंबा) में Zoo Outreach Organization का प्रेरणादायक दौरा 🐾
साहू (चंबा) के लिए आज का दिन पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक विशेष महत्व रखता है। वर्ष 1985 से वन्यजीव संरक्षण एवं शोध के क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रही प्रतिष्ठित संस्था Zoo Outreach Organization के कार्यकारी निदेशक Sanjay Molur अपने 11 सदस्यीय दल के साथ पर्यावरण चेतना केंद्र, साहू पहुंचे।

इस अवसर पर दल ने केंद्र के संस्थापक Ratan Chand Sharma से भेंट कर उनके द्वारा क्षेत्र में किए जा रहे पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, जन-जागरूकता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। दल के सदस्यों ने केंद्र के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे जमीनी स्तर पर एक सशक्त पहल बताया।

आपसी संवाद के दौरान दोनों पक्षों ने भविष्य में पर्यावरण जागरूकता अभियान, वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान तथा समाज हित से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों में मिलकर कार्य करने की सहमति व्यक्त की। यह संभावित सहयोग न केवल साहू क्षेत्र बल्कि पूरे चंबा जनपद के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

इस अवसर पर Ratan Chand Sharma ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्रकृति और जैव विविधता का संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को इस मुहिम से जोड़ने और स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम में गांव साहू के अनेक गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे, जिनमें हेम सिंह जी, रविंदर ठाकुर जी, जयराम ठाकुर जी, संजू जी, पवन जी, हितेन जी, विनोद ठाकुर जी, विपन ठाकुर जी एवं गजिंदर वर्मा जी सहित अन्य स्थानीय नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस पहल का समर्थन किया।

उल्लेखनीय है कि Zoo Outreach Organization द्वारा प्रकाशित Zoo’s Print तथा Journal of Threatened Taxa जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रकाशन वन्यजीव संरक्षण और शोध के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे संस्थानों के साथ सहयोग से क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों को नई दिशा और मजबूती मिलने की पूरी संभावना है। “आज का संरक्षण, आने वाले कल की सुरक्षा” — इसी संकल्प के साथ पर्यावरण चेतना केंद्र, साहू निरंतर अपने प्रयासों को आगे बढ़ा रहा.

30/03/2026

शून्य अपशिष्ट दिवस (Zero Waste Day) – अर्थ, थीम और महत्व (2026)
♻️ शून्य अपशिष्ट दिवस क्या है?
शून्य अपशिष्ट दिवस (30 मार्च) हर साल मनाया जाता है। इसका उद्देश्य है: 👉 कचरे को कम करना
👉 पुनः उपयोग (Reuse) और पुनर्चक्रण (Recycle) को बढ़ावा देना
👉 लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना
सरल शब्दों में:
“ऐसा जीवन अपनाना जिसमें कचरा लगभग शून्य हो जाए”
🌱 2026 की थीम (Theme)
👉 “फैशन और वस्त्रों में शून्य अपशिष्ट की ओर”
(“Towards Zero Waste in Fashion and Textiles”)
इसका मतलब:
कपड़ों के कचरे को कम करना
पुराने कपड़ों का पुनः उपयोग
पर्यावरण-अनुकूल फैशन अपनाना
🌏 प्रकृति और पर्यावरण के लिए महत्व
🌿 प्रदूषण में कमी
कम कचरा = कम वायु, जल और भूमि प्रदूषण
प्लास्टिक कचरा नदियों और समुद्र में जाने से रुकता है
🌳 प्राकृतिक संसाधनों की बचत
पेड़ों की कटाई कम होती है
पानी और ऊर्जा की बचत होती है
🌦️ जलवायु परिवर्तन से लड़ाई
कचरे से निकलने वाली हानिकारक गैसें (जैसे मीथेन) कम होती हैं
🐾 वन्यजीव (Wildlife) के लिए महत्व
जानवरों की सुरक्षा
प्लास्टिक खाने से पशु-पक्षियों की मृत्यु कम होती है
आवास (Habitat) की रक्षा
जंगल, नदियाँ और पहाड़ साफ रहते हैं
जैव विविधता सुरक्षित रहती है
जहर से बचाव
कचरे के रसायन मिट्टी और पानी को जहरीला बनाते हैं
इससे जीव-जंतुओं को नुकसान होता है
🌼 हमारे लिए संदेश
👉 “आज का संरक्षण, कल की सुरक्षा”
👉 आज हम प्रकृति को बचाएंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित होगा

23/03/2026

विश्व भालू दिवस (World Bear Day) – 23 मार्च
विश्व भालू दिवस हर साल 23 मार्च को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भालुओं के संरक्षण और उनके प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई। यह कोई बहुत पुराना आधिकारिक UN दिवस नहीं है, बल्कि conservation groups और wildlife lovers द्वारा शुरू किया गया awareness day है।
“Bear Conservation & Habitat Protection” (भालू संरक्षण और उनके आवास की रक्षा)
दुनिया में भालू की कितनी प्रजातियां हैं?
पूरी दुनिया में 8 species (प्रजातियां) पाई जाती हैं:
Brown Bear
Polar Bear
American Black Bear
Asiatic Black Bear
Sloth Bear
Sun Bear
Spectacled Bear
Giant Panda
भारत में भालू की प्रजातियां
भारत में 4 species पाई जाती हैं:
Sloth Bear (सबसे आम)
Himalayan Black Bear
Brown Bear (Himalayan)
Sun Bear (North-East India)
हिमाचल प्रदेश में भालू
हिमाचल प्रदेश में मुख्य रूप से 2 species मिलती हैं:
👉 Himalayan Black Bear
👉 Himalayan Brown Bear
⚠️ भालुओं के सामने आज के बड़े खतरे
Habitat Loss (वनों की कटाई)
Human-Wildlife Conflict (इंसानों से टकराव)
Climate Change (खासतौर पर Polar Bear के लिए)
Poaching (शिकार)
Food scarcity (खाने की कमी)
भालू को “Good Forester” क्यों कहा जाता है?
भालू जंगल के प्राकृतिक माली (Natural Gardener) होते हैं:
ये फल खाते हैं और उनके बीज (seeds) अपने s**t (मल) के जरिए दूर-दूर तक फैला देते हैं
इससे नए पौधे उगते हैं और जंगल का विस्तार होता है
इसलिए इन्हें “Good Forester” कहा जाता है
भालू किन-किन पेड़ों/फलों को खाते हैं?
भालू omnivore होते हैं (सब कुछ खाने वाले)। ये खाते हैं:
जामुन (Berry)
आंवला
काफल (Himalayan fruit)
अंजीर (Fig)
सेब (Apple – पहाड़ी क्षेत्रों में)
अखरोट
शहद (Honey)
कीड़े-मकोड़े और छोटे जानवर
ये फल खाने के बाद बीजों को दूर तक फैलाते हैं।
भालू का संरक्षण क्यों जरूरी है?
1. जंगल के संतुलन के लिए
भालू ecosystem को balance करते हैं—seed dispersal, dead animals को साफ करना आदि।
2. Biodiversity बचाने के लिए
भालू food chain का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
3. Climate और environment के लिए
स्वस्थ जंगल = बेहतर जलवायु = अच्छा जल स्रोत
4. मानव जीवन के लिए
जंगल सुरक्षित होंगे तो पानी, हवा और खेती भी सुरक्षित रहेगी।
हम क्या कर सकते हैं?
जंगलों की कटाई रोकें
Wildlife awareness फैलाएं
Local communities को जोड़ें
Plastic और pollution कम करें
Government policies का समर्थन करें

22/03/2026

जल है तो कल है। विश्व जल दिवस 22 मार्च 2026.
विश्व जल दिवस हर वर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन हमें जल के महत्व को समझने और इसके संरक्षण के लिए प्रेरित करने का अवसर देता है। जल केवल जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि पर्यावरण, कृषि, उद्योग और मानव सभ्यता के अस्तित्व की नींव है।
विश्व जल दिवस की शुरुआत कब और क्यों हुई?
विश्व जल दिवस की शुरुआत 1992 में ब्राज़ील के रियो डी जेनेरियो में आयोजित “पृथ्वी सम्मेलन” (Earth Summit) के दौरान हुई। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने 1993 से हर साल 22 मार्च को इसे मनाने की घोषणा की।
इसका मुख्य उद्देश्य था:
लोगों को जल के महत्व के प्रति जागरूक करना
स्वच्छ जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना
जल संकट और प्रदूषण जैसे मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करना
विश्व जल दिवस 2026 की थीम Water and Gender", encapsulated by the campaign slogan "Where Water Flows, Equality Grows".
“Water for Peace (शांति के लिए जल)”
इस वर्ष की थीम यह संदेश देती है कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि शांति और सहयोग का माध्यम भी है। जब जल संसाधनों का सही और समान वितरण होता है, तो समाज में संघर्ष कम होते हैं और विकास की राह खुलती है।
जल का महत्व – शहर से गांव तक
शहरों में:-
पीने, खाना बनाने और स्वच्छता के लिए
उद्योगों और बिजली उत्पादन के लिए
शहरी जीवन की हर सुविधा जल पर निर्भर
गांवों में:-
खेती और सिंचाई का मुख्य स्रोत
पशुपालन और ग्रामीण जीवन का आधार
प्राकृतिक जल स्रोत जैसे नदियाँ, कुएँ, बावड़ियाँ
जल के बिना न शहर चल सकता है और न ही गांव।
पहले और आज के जल स्रोतों की तुलना
पहले:-
नदियाँ, झरने और कुएँ साफ और प्रचुर मात्रा में थे
वर्षा जल का संचयन स्वाभाविक रूप से होता था
जल का उपयोग सीमित और संतुलित था
आज:-
भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन
नदियों और झीलों में प्रदूषण
शहरीकरण के कारण जल स्रोतों का खत्म होना
जल संकट और पानी की कमी बढ़ती जा रही है
जल प्रदूषण के मुख्य कारण
औद्योगिक कचरा और रसायन
घरेलू गंदा पानी (सीवेज)
प्लास्टिक और ठोस अपशिष्ट
कृषि में कीटनाशकों और उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग
जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संतुलन का बिगड़ना
हमारी जैसी संस्थाओं की भूमिका (Awareness + Action)
पार्यावरण चेतना केंद्र जैसी संस्थाएं निम्न कार्य कर सकती हैं:
जागरूकता अभियान:-
गांव और स्कूलों में जल संरक्षण पर कार्यक्रम
पोस्टर, रैली और वर्कशॉप
सोशल मीडिया और यूट्यूब के माध्यम से जानकारी फैलाना
ग्राउंड लेवल कार्य:-
वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को बढ़ावा देना
सूखे जल स्रोतों (कुएँ,

21/03/2026

येली पौषि वन तेली पौषि अन्न
विश्व वानिकी दिवस 21 मार्च, 2026
हर वर्ष 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस (World Forestry Day) मनाया जाता है। यह दिन हमें जंगलों, पेड़ों और पौधों के महत्व को समझाने और उनके संरक्षण के लिए प्रेरित करता है। वन केवल हरियाली नहीं हैं, बल्कि पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं।
इतिहास (History)
विश्व वानिकी दिवस की शुरुआत वर्ष 1971 में यूरोपीय कृषि सम्मेलन (European Confederation of Agriculture) के सुझाव पर की गई थी। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने इसे वैश्विक स्तर पर मान्यता दी। तब से हर साल 21 मार्च को यह दिवस पूरे विश्व में मनाया जाता है।
वर्ष 2026 की थीम (Theme 2026)
👉 “Forests and Food Security” (वन और खाद्य सुरक्षा)
यह थीम इस बात पर जोर देती है कि वन हमें भोजन, पोषण और आजीविका प्रदान करते हैं और भूख मिटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विश्व, भारत और हिमाचल में पेड़-पौधों की विविधता
विश्व में लगभग 3,90,000 से अधिक पौधों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
भारत में करीब 45,000 से अधिक पौधों की प्रजातियाँ हैं, जिनमें से लगभग 18,000 फूलों वाली (flowering plants) हैं।
हिमाचल प्रदेश में लगभग 3,500 से अधिक पौधों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें कई औषधीय और दुर्लभ प्रजातियाँ शामिल हैं।
👉 पर्वतीय क्षेत्रों (जैसे हिमालय) में जैव विविधता बहुत अधिक होती है, क्योंकि यहाँ विभिन्न जलवायु और ऊँचाई के कारण अलग-अलग प्रकार के पेड़-पौधे पाए जाते हैं।
वनों का महत्व (Importance of Forests)
ऑक्सीजन का स्रोत – पेड़ हमें जीवनदायी ऑक्सीजन देते हैं।
जलवायु संतुलन – वन तापमान को नियंत्रित करते हैं और जलवायु परिवर्तन को कम करते हैं।
जैव विविधता का घर – लाखों जीव-जंतु और पौधों की प्रजातियाँ वनों में रहती हैं।
जल संरक्षण – वन जल चक्र को बनाए रखते हैं और वर्षा को प्रभावित करते हैं।
मानव जीवन के लिए उपयोगी – लकड़ी, औषधियाँ, फल-फूल आदि हमें वनों से मिलते हैं।
आज के समय में क्यों जरूरी है?
आज तेजी से हो रही वनों की कटाई (Deforestation), शहरीकरण और प्रदूषण के कारण जंगल खत्म हो रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप:
जलवायु परिवर्तन बढ़ रहा है
वन्य जीवों का अस्तित्व खतरे में है
प्राकृतिक आपदाएँ (बाढ़, सूखा) बढ़ रही हैं
इसलिए आज वनों का संरक्षण पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।
इसे कैसे मनाया जा सकता है? (Celebration Ideas)
वृक्षारोपण अभियान – नए पेड़ लगाना और उनकी देखभाल करना
जागरूकता कार्यक्रम – स्कूल, कॉलेज और समाज में भाषण, रैली, पोस्टर प्रतियोगिता।

The Great Cormorant :-Phalacrocorax carboHindi Name:-पनकौआ,जलकौवा,बड़ा पनकौवाLocation:-Chamba , Himachal Pradesh03/12/20...
19/03/2026

The Great Cormorant :-Phalacrocorax carbo
Hindi Name:-पनकौआ,जलकौवा,बड़ा पनकौवा
Location:-Chamba , Himachal Pradesh
03/12/2025

, photography birdsofhimachal himachalwildlife himachalbirds birdsphotography birdsphotos strabopixalclub@natgeoindia .nature .planet raw_birds nikond500 nikonindiaofficialhpwildlifepicture . birdsphotographer_of_indiawildsojournsmagzine indianbirds indianbirdsphotography birdsofindia birdsofindiansubcontinent sanctuaryasia

इस अवसर पर बच्चों को चंबा की समृद्ध वन्य संपदा, जैव विविधता, प्रकृति संरक्षण तथा फूड चेन (खाद्य श्रृंखला) के महत्व के बा...
28/02/2026

इस अवसर पर बच्चों को चंबा की समृद्ध वन्य संपदा, जैव विविधता, प्रकृति संरक्षण तथा फूड चेन (खाद्य श्रृंखला) के महत्व के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। आकर्षक PPT प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों को बताया गया कि किस प्रकार जंगल, वन्य जीव और मानव जीवन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। यदि प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है तो उसका सीधा प्रभाव मानव जीवन पर भी पड़ता है।

कार्यक्रम में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय साहो के जीव विज्ञान प्रवक्ता श्री विनोद टंडन ने संसाधन व्यक्ति (Resource Person) के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे इस संस्था के सदस्य भी हैं। उन्होंने अपने अनुभव और सरल उदाहरणों के माध्यम से बच्चों को वन्य जीव संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता के महत्व को समझाया। बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ प्रश्न पूछे और प्रकृति के प्रति अपनी जिज्ञासा व्यक्त की।

पार्यावरण चेतना केंद्र, साहू पिछले 25 वर्षों से निरंतर पर्यावरण संरक्षण, वन्य जीव सुरक्षा, प्लास्टिक मुक्त अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को जागरूक करता आ रहा है। संस्था का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।

आज आवश्यकता है कि चंबा जिले के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालय अपने विद्यार्थियों को ऐसे शैक्षणिक भ्रमण के लिए यहाँ अवश्य भेजें। यहाँ बच्चों को पुस्तकों से बाहर निकलकर प्रकृति को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलता है। यह अनुभव उनके जीवन में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और संरक्षण की भावना को मजबूत करेगा।

यदि हम चाहते हैं कि हमारा चंबा हरा-भरा, स्वच्छ और वन्य जीवों से समृद्ध बना रहे, तो हमें अपने बच्चों को प्रकृति के करीब लाना ही होगा। पार्यावरण चेतना केंद्र, साहू इस दिशा में एक सशक्त पहल है — आइए, हम सभी मिलकर इस प्रयास का हिस्सा बनें और अपने विद्यालयों के विद्यार्थियों को यहाँ शैक्षणिक भ्रमण हेतु प्रेरित करें।

🌿 “प्रकृति की रक्षा ही भविष्य की सुरक्षा है।”

hptourism HPForest wildlife bbcearth zooreach jott

The brown rock chat or Indian Chat:-Oenanthe fusca थरथरकँपनीFamily:-MuscicapidaeDOC:-22/02/2026Location:-Chamba,H.PIUCN ...
24/02/2026

The brown rock chat or Indian Chat:-Oenanthe fusca
थरथरकँपनी
Family:-Muscicapidae
DOC:-22/02/2026
Location:-Chamba,H.P
IUCN status:- Least Concern
ब्राउन रॉक चैट ( ओएनेंथे फुस्का ) या इंडियन चैट, मुस्सिकापिडे परिवार की एक पक्षी प्रजाति है । यह मुख्य रूप से उत्तरी और मध्य भारत में पाई जाती है। यह अक्सर पुरानी इमारतों और पथरीले इलाकों में देखी जाती है। यह मादा इंडियन रॉबिन से मिलती-जुलती है, लेकिन इसमें लाल रंग का वेंट नहीं होता और आकार में बड़ी होने के अलावा, इसकी शारीरिक मुद्रा और व्यवहार भिन्न होते हैं। उड़ते समय यह थ्रश और रेडस्टार्ट से कुछ हद तक मिलती-जुलती है। यह मुख्य रूप से जमीन पर पकड़े गए कीड़ों को खाती है। पहले इसे सेर्कोमेला वंश में एकमात्र प्रजाति के रूप में रखा गया था, लेकिन अब इसे व्हीटियर के साथ ओएनेंथे वंश में शामिल किया गया है ।
ब्राउन रॉक चैट के बारे में कुछ रोचक जानकारियां:
पहचान: यह लगभग पूरी तरह से चॉकलेट-भूरे रंग की होती है, जिसके पंख और पूंछ गहरे रंग के होते हैं। इसे अक्सर मादा इंडियन रॉबिन समझ लिया जाता है, लेकिन यह उससे थोड़ी बड़ी होती है और इसकी पूंछ के नीचे लाल रंग नहीं होता।
आवास और व्यवहार: इन्हें चट्टानी पहाड़ियों, पुरानी इमारतों, खंडहरों और ग्रामीण बस्तियों के आसपास देखना आम है। ये आमतौर पर अकेले या जोड़ों में रहते हैं और जमीन पर कीड़े-मकोड़े पकड़ते हैं।
गायन: ब्राउन रॉक चैट को सुरीला गायक माना जाता है, जो चहचहाहट और झंकार (warbles and trills) का मिश्रण गाती है।
नाम में बदलाव: पहले इसे Cercomela वंश (genus) में रखा गया था, लेकिन अब इसे Oenanthe (व्हीटियर) वंश में शामिल किया गया है।
स्थानीय प्रजाति: यह भारतीय उपमहाद्वीप की एक स्थानिक (native) प्रजाति है।
यह पक्षी अपने चंचल स्वभाव और पुरानी इमारतों के साथ तालमेल के कारण बर्डवॉचर्स के बीच काफी लोकप्रिय है।

GBBC 2026 – भरमौर की हिमालयी वादियों में एक यादगार पक्षी-अभियान13 से 16 फरवरी 2026 को हम चार मित्र – विनोद टंडन नरेश ठाक...
21/02/2026

GBBC 2026 – भरमौर की हिमालयी वादियों में एक यादगार पक्षी-अभियान

13 से 16 फरवरी 2026 को हम चार मित्र – विनोद टंडन नरेश ठाकुर , दीपक गर्ग शर्मा और मैं – Great Backyard Bird Count (GBBC 2026) के अंतर्गत जिला चंबा की भरमौर तहसील की उच्च हिमालयी घाटियों की ओर रवाना हुए। हमारा उद्देश्य था – हिमाचल की बर्फीली ऊँचाइयों में पाए जाने वाले पक्षियों का अवलोकन, फोटोग्राफी और दस्तावेजीकरण।

❄️ बर्फ से ढकी पहाड़ियां और दुर्लभ पक्षियों की तलाश

भरमौर की ऊँची पहाड़ियों पर इस समय गहरी बर्फ जमी हुई थी। तापमान शून्य से नीचे था, लेकिन हमारे उत्साह में कोई कमी नहीं थी। High Mountain Snow Birds की खोज और उनकी फोटोग्राफी हमारे अभियान का मुख्य आकर्षण रही।

इस दौरान हमने कई हिमालयी पक्षियों को उनके प्राकृतिक आवास में देखा। ठंडी हवाओं और कठिन रास्तों के बावजूद, प्रकृति के बीच बिताया गया हर पल अद्भुत और रोमांचकारी था।

📸 फोटोग्राफी और डॉक्यूमेंटेशन

दीपक ने अपनी बेहतरीन फोटोग्राफी से इस अभियान को यादगार बना दिया। बर्फ से ढके देवदारों के बीच उड़ते पक्षियों के दृश्य मन मोह लेने वाले थे। हमने गिनती और डेटा रिकॉर्डिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हमने सभी रिकॉर्ड्स को GBBC प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया ताकि यह वैश्विक डेटा का हिस्सा बन सके और हिमालयी जैव विविधता के संरक्षण में योगदान दे सके।

🌏 प्रकृति संरक्षण की दिशा में एक छोटा कदम

GBBC केवल एक पक्षी गणना कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को दर्शाने का एक माध्यम है। भरमौर की यह यात्रा हमें यह याद दिलाती है कि हिमालय की जैव विविधता कितनी अनमोल है और इसके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास कितने आवश्यक हैं।

हमने कुछ पक्षियों की कुछ प्रजातियां देखी जैसे कि

Red head Bull Finch

Brambling

Yellow breasted green Finch

Himalaya woodpecker

Streaked Laughing Thursh

Blue Whistling Thrush

Large bill Crow

Black Kite

Plain Mountain Finch

Yellow Billed Blue Magpie

Winter Wren

Himalayan Bulbul

Red Vented Bulbul

Russet Sparrow

House Sparrow

Fire fronted Serin

Green backed Tit

Coal Tit

Himalayan Vulture

Rock Pigeon



Yellow billed Chough

etc etc.

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ।। आस्था और श्रद्धा के महापर...
15/02/2026

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ।। आस्था और श्रद्धा के महापर्व महाशिवरात्रि की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।

Call for Articles-Paryavaran Chetna: Annual Magazine We invite you to submit articles for Paryavaran Chetna: Annual Maga...
14/02/2026

Call for Articles-Paryavaran Chetna: Annual Magazine

We invite you to submit articles for Paryavaran Chetna: Annual Magazine, to be published on 5 June 2026 (World Environment Day) 🌍

📌 Please find the poster and detailed submission guidelines attached.

📝 Submission Deadline: 31 March 2026

📧 Submit at: [email protected]

Selected articles will be published with author credits. For any queries, please contact the admin.
Rules & Instructions:-
-Team Paryavaran Chetna
https://1drv.ms/b/c/169e8ce550e731f5/IQA85vPC-K8YSK6ZiDW-lbReAXQsgZxV9YeZ6rgERsvfIIs

Address

V. P. O Sahoo Teh. &Dist. Chamba
H. P

Telephone

+918894108007

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Gajinder Verma Photography posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Gajinder Verma Photography:

Share