Astro Spiritual Yog

Astro Spiritual Yog Holding "The Real Legendary flower of Indian Cluster fig i.e Udumbara Tree we aim to expand its wisdom by selling its Auspicious products".

We also aim to make Spiritual hermitage temple named "Amogh Tatva Darshan" in UP India.

धनुर्योगीक उच्चारण :- ब्रह्मचारी करे तो 1000 वर्ष जियेगा गृहस्थ करे तो 110 वर्ष निरोग, वृद्ध(60+) करे तो आयु बढ़ेगा और नि...
22/04/2026

धनुर्योगीक उच्चारण :- ब्रह्मचारी करे तो 1000 वर्ष जियेगा गृहस्थ करे तो 110 वर्ष निरोग, वृद्ध(60+) करे तो आयु बढ़ेगा और निर्वाण पद पायेगा। जो स्वस्थ चित्त एवं निरोग है वह भले सकाम जीने वाला हो ऐसा मनुष्य भी कभी रोगी नही होगा यदि प्रतिदिन प्राप्त दीक्षा विधि के अनुसार बताये गये धनुर्योगीक क्रियाओं को करेगा। स्वस्थ मानव शरीर के लिये समस्त तात्विक विकल्पों में सर्वश्रेष्ट है धनुर्योग।

Spirit is the permanent dimension. Physic is under mortal nature whereas spirit is an universal element hence universal vibrations of celestial sound Aum can heal deep enough within spirit too. But here nature of human body is being dominated by panchtatvik vibrations within the Aum by a special method of Dhanuryog. It's 1st demonstration uncut video where heart is rehabilitating and it's evidence is the lowering of the blood pressure in 7 chants.

Dhanur yogic chant of Aum i.e. Om is amongst most ancient Heart rehabilitation technique of Bharatavarsh.
It's education was not allowed because it was not possible to be written as it's theory is Trigunatmk means it combines entire visible and invisible elements to get pronounced once, hence only rarest succeeds in achieving this art of Spiritual world.

The philosophy of Dhanuryog is profound. This video shows that Dhanuryogic Om chant cannot be done and no other video can be created by anyone else like this on B/P machine where b/p will be reduced by anyone else from 172/125 to 105/89 in just 7 utterances of OM sound because sound being created over here is on Dhanuryogic principles; no one can do it except Tatvayogi(Astro Spiritual yogi )Vikas Rajendra Prasad Tiwari.

Vikas Rajendra Prasad Tiwari is a Dhanuryogic chant expert he has practised this art from the age of 5 years. He can demonstrate this chant anywhere and can make anyone capable of achieving the same results. He can change any results for all vital body organs and can heal nervous system too by Dhanuryogic method.

He can modify his own body system in 3 modes by Dhanuryogic chanting methods.
Intoxication(Panchtatvik diffusional method), Healing(Dhanuryogic chant of Om), nonageing(Panchtatvik ekah pran method) modes.

Anyone who has seen him doing it in practical have self not succeeded in doing it on their own because kriya looks simple but it holds secret theory of Dhanuryogic darshana.

This art is of Fiery element
it's Guru is Shiva and shakti is moola and it's tutor is Vikas Rajendra Prasad Tiwari Tiwari.

Dhanuryogic chant of Aum i.e. Om is amongst most ancient Heart rehabilitation technique of Bharatavarsh.It's education was not allowed because it was not pos...

ये पोस्ट हमारा है और पोस्ट में मौजूद चित्र और अनेको चित्र हम धारण करते हैं क्योंकि यह हमारा ट्रेड मार्क हैं। सभी से अनुर...
03/08/2025

ये पोस्ट हमारा है और पोस्ट में मौजूद चित्र और अनेको चित्र हम धारण करते हैं क्योंकि यह हमारा ट्रेड मार्क हैं। सभी से अनुरोध है कि इसका गलत प्रयोग न करें। ये चिन्ह गलत प्रयोग करने वालों के लिए असत्य पर चलने वालों के लिए दुर्भाग्य का कारण बन जाता है कारण ये वास्तविक गुलर का पुष्प है जिसको बिना भगवान श्री महाविष्णु के ईच्छा के कोई प्राप्त तो छोड़ो अपितु इसे देखने के पश्चात इसके भाव को भी नहीं झेल सकता है। यह हमने संसार के शुभता के लिए पोस्ट किया था। क्योंकि हमें भगवान और प्रकृति द्वारा पुर्ण अधिकार प्राप्त है की हम इसका प्रचार प्रसार करें। अन्य लोग भी प्रचार प्रसार कर सकते हैं लेकिन स्वयं का संपत्ति इसे कोई और नहीं बना सकता है ऐसा जो भी करेगा वह संसार को धोखा देगा और भगवान को भी और इसका फल जो की ऊंदुबर (श्री महाविष्णु) कोप है उसे प्राप्त करेगा। इसलिए हमारा सबसे निवेदन है की हमारे साथ चलें परंतु हमको लुटे नहीं हमारे बौद्धिक संपत्ति को अपना ना बनाये।





Vikas Rajendra Prasad Tiwari Astro spiritual yog flower, Flower of Udumbara, Bhartiy Gular vriksh ka divya pushp pic.

भारतीय "उदुम्बरा(गूलर) वृक्ष" के पुष्प का ज्योतिषीय,वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व।

भारतीय गूलर के पुष्प का कहावत पूर्णतया सत्य है जिसका प्रमाण है इस लेख के साथ प्रस्तुत किया उसका अद्भुत चित्र।यदि,हम इस कहावत का पड़ताल करें तो हर रहस्य धर्म और भारतीय ज्योतिष शाश्त्र का प्रमाणित हो जाता है। हम सभी जानते है की धर्म और ज्योतिष से सम्बंधित बातें आधुनिक विज्ञान के लिए एक भ्रम के अतरिक्त और कुछ नहीं होता है। इसलिए अस्तित्वतः प्रमाणित हो जाने के बाद भी भारतीय गूलर का पुष्प आधुनिक विज्ञान के लिए एक भय का कारन बना हुआ है । इस अद्भुत पुष्प का सत्यता यदि प्रमाणित हो जाता है तो,वह विज्ञान के लिए एक नया सर दर्द बन जाएगा क्योंकि इसकी उत्पत्ति कब और कैसे होती है यह जानना उतना ही कठिन है जितना कठिन "कालान्तर में रह कर काल को देख सकना है"।

धर्म के प्राचीन ग्रंथो का मानना है की यह पुष्प ३००० वर्ष में एक बार खिलता है इसलिए यदि इस पुष्प की सत्यता प्रमाणित हो जाती है,तो धर्मानुसार सोंचे तो पाएंगे की दूसरे पुष्प की प्रतीक्षा करते करते आधुनिक विज्ञान का युग ही समाप्त हो जाएगा अतएव यह पुष्प विज्ञान के परे होने के कारन विज्ञान के लिए एक किम्दन्तीय आज भी है जबकी इसका असल चित्र हमने कई बार संसार के सम्मुख रख दिया है।

इस पुष्प का वर्णन उत्तर भारत के कहावतों में मिलने का क्या रहस्य है?
इस पुष्प का वर्णन और प्रशंशा उत्तर भारत(कपिलवस्तु लुम्बिनी नेपाल) में जन्म लिए भगवन श्री महाविष्णु के नवे बुद्ध अवतार द्वारा बुद्धिष्ट लोटस सूत्र में क्यों मिलता है?
इस पुष्प का रहस्य क्या है?

इन प्रश्नो का उत्तर जानने के लिए पहले हमे इस पुष्प के ज्योतिषीय महत्व को जानना पड़ेगा। यह अद्भुत पुष्प हर भांति से भारतीय ज्योतिष शाश्त्र के सत्यता का पूर्ण परिचायक ही नहीं बल्कि धर्म के रक्षा लिए भगवान के दृढ़ निश्चय और उनके संकल्प का भी अद्भुत प्रमाण है।

भारतीय वैदिक ज्योतिष ग्रहों की चाल और नक्षत्रो के फलों का समावेश कर भविष्य को प्राचीन समय से आज तक कहता आया है।वैदिक ज्योतिष में ग्रहो को देवता भी कहते है और सभी प्रमुख सात देवताओ को तत्वाधिपति कहतें है। जो पांच तत्वों के अधिपति है और ग्रह रूप में सर्पिल मार्ग अर्थात कुण्डलिकार पथ पर ब्रह्माण्ड में भ्रमण करते है। भारतीय ज्योतिष पृथ्वी को ब्रह्माण्ड का केंद्र मनाता है और ग्रहों को पृथ्वी के १२ भावो में पार्वतित होता देखता है।जो गूलर का फूल हमने प्रस्तुत किया है वह पूर्ण कुण्डलिकार या कहें तो सर्पिल है और यह गूलर अर्थात उदुम्बरा के वृक्ष के सबसे ऊँचे डाली से उतपन्न एक विशेष सर्पिल शाखा पर खिला था। विशेष सर्पिल शाखा से २७ अन्य सर्पिल शाखा उतप्पन होते हैं जिसमे प्रत्येक सर्पिल शाखा के ऊपर एक नाग के मुख के भांति चौड़ी पुष्प की पत्ती रहती है जो नव भागो में बटीं रहती है।एक मुख्य सर्पिल शाखा से निकलने वाली सत्ताईस अन्य सर्पिल शाखाएं सत्ताईस नक्षत्रो को सम्बोधित करतें है। उनपर खिलने वाले हर एक पत्तों के नव भाग हर राशि के नव नक्षत्र चरणों को व्यक्त करतें है। १२ राशियों के १०८ नक्षत्र चरण होते हैं और इस पुष्प में १०८ पत्ते ही जान पड़ते है परन्तु वास्तविकता ये है,की, एक ही पत्ते में ९ पत्तिया आपस में जुड़े रहकर भी अलग अलग ऊपर से होकर सर्प सा प्रतीत होते है।

इससे यह प्रमाणित हो जाता है की ३००० वर्ष में नहीं बल्कि जब सूर्य २७०० बार १०८ नक्षत्र चरणों का भ्रमण पूरा कर लेता है तब यह उदुम्बरा अर्थात गूलर का पुष्प खिलता है। इस पुष्प के खिलने पर पिछले २७०० वर्षो में जो कुछ उत्पन्न हुआ है वह सब परिवर्तित होने लगता है और नया २७०० वर्ष का चरण प्रारम्भ हो जाता है अर्थात ये पुष्प यह भी बताता है की कलियुग के २७०० वर्ष के ४ चरण होतें है और कलियुग का पूर्ण आयु १०८०० वर्ष ही होता है और सबसे बड़े सतयुग का आयु इसका चार गुना अर्थात ४३२०० वर्ष ही होता है। जिसको ४३२००० वर्ष का कीलित संख्या बुद्धजीवियों ने प्रमाण न रहने पर दे दिया।

यह पुष्प २०१३ अप्रैल में खिला था वहाँ से २७०० वर्ष घटा दे तो ६८७ बीसी पहुँच जाएंगे जहा से कलियुग के दूसरे चरण का प्रारम्भ हुआ और लगभग २०० साल में श्री बुद्ध का अवतार हुआ था। दूसरे चरण से २७०० वर्ष घटा दें, तब ३३८७ बीसी पहुंच जाएंगे जिसके आगे लगभग १८० वर्ष बाद श्री कृष्ण का जन्म हुआ था ।अर्थात यह पुष्प एक समय के अंत और नए समय के प्रारम्भ पर खिलता है और इसके खिलने पर २०० वर्ष के भीतर भगवान स्वयं पृथ्वी पर आतें हैं। जब धर्म के हानि से प्रकृति त्राहिमाम कर उठती है तब देवताओं के उदासीनता को दूर करने हेतु भगवान की विधि प्रारम्भ होती है। जैसे बच्चा गर्भ में नाल के सहारे ब्रह्माण्ड से जुड़ा रहता है उसी प्रकार गूलर का पेड़ जो पीपल और वट के वृक्षों से भी कोमल और गौर वर्ण है, उसके आधार पर एक नाड़ी से २७ नक्षत्रो का सर्पिल आकाश(ब्रह्माण्ड) गूलर के पुष्प के रूप में खिलता है जो भगवान के आगमन का ब्रह्म विधि सम्बोधित करता है। यह पुष्प धर्म के रक्षा हेतु भगवान के संकल्प का प्रमाण भी है। इस पुष्प से ग्रहीय प्रभाव से उत्पन्न होने वाली सांसारिक सभी पीड़ाओं का निवारण होता है फिर वह काल सर्प का पीड़ा हो या मंगल अर्थात भौम का दोष या किसी भी प्रकार का भय या रुकावट सब हल हो जाता है। इसलिए, भगवान ने बुद्धिष्ट कमल सूत्र में इस पुष्प को स्वर्गकिय ब्रह्मांडकीय कमल कहा है,और इसके कभी न समाप्त होने वाले सुगंध का भी वर्णन किया है ।

(Written by Vikas Rajendra Prasad Tiwari)

10/03/2025

भाग्य से सब कुछ पाने वाले कभी कुंडली के पिछे नहीं पड़ते है। इसलिए ही बड़े और अनुभवीयों ने भगवान के समक्ष देवताओं को और ग्रहों को गौण बताया हैं। भाग्य और भगवान एक ही होते हैं।

10/03/2025

कर्म का पूर्णता धर्म पर और धर्म का पूर्णता उसके वास्तविक तत्व स्थिति के प्रयोगात्मक सिद्धि पर होता है। छोटा सा प्रयोग भी ऐसा कोई बता न सका अब तक। कथा कहानी एक साधारण विषय है लेकिन धर्म के तत्वों का सही प्रयोग असाधारण ईश्वरीय ज्ञान का द्योतक होता है।

09/03/2025

भक्ति कछुए के कवच जैसा होता है,तक्षण सुरक्षा देता है। त्याग नाग देवता के केंचुल जैसा है जो घीसकर निकलने के पश्चात नव जीवन देता है। ज्ञान के लिए तो नीम्न से उच्च तक जीवन संभावित हुआ ही है।

मीत्रों ये वास्तविक भारतीय गुलर के वृक्ष के पुष्प की कुछ छवियां है जो हमारा कोपीराईट पीक्स हैं। ये पुष्प ऐस्ट्रो स्पिरीच...
09/03/2025

मीत्रों ये वास्तविक भारतीय गुलर के वृक्ष के पुष्प की कुछ छवियां है जो हमारा कोपीराईट पीक्स हैं। ये पुष्प ऐस्ट्रो स्पिरीचुअल योग का आधार है और भारत देश के अगुढ़ रहस्यों में सम्मिलित वह रहस्य है जिसमें मृत्युलोक अर्थात ये संसार संभव होने का दर्शन एवं भारत देश से भगवान (श्री हरि महाविष्णु) का अटूट संबंध और सभी मतांतरो के विस्तार का रहस्य प्रमाणित होता है।

इसे आपके दर्शनों के लिए हम यहां पोस्ट कर रहें हैं की आप भी भगवान के ब्रह्मांडकीय पद्मनाभ के प्राकृतिक स्वरूप का दर्शन कर सकें।

भगवान का जय हो,प्रकृति और उसके विधान का जय हो,भारत देश का जय हो,और भगवान अपने आगामी स्वीकृत अवतरण का साक्ष देना प्रारंभ करें क्योंकि इस पुष्प के खिलने के साथ ही(३१ मार्च २०२५ को १२ वर्ष हो जायेंगे भारत देश में इस पुष्प को खिले हुए) भगवान के आगामी अवतार का विधान हो चुका होता है।

जिसको कोई न प्राप्त कर सका उसको ६३ वर्ष के आयु में सहज ही चन्द्र बाण से काटकर धरती पर लाने वाले मेरे महात्यागी,धर्मवीर,धनुर्धारी,ईश्वरभक्त पिता श्री राजेन्द्र प्रसाद तिवारी जी(ग्राम शिवजातपुर गोपीगंज) को और मेरी माता श्रीमती पानकुंवर तिवारी जी को नमन करता हूं। इनको प्राप्त इस ईश्वरीय वरदान (जिसे विज्ञान नहीं मानता है) उसको उसका स्थान दिलाने मान दिलाने के ध्येय के साथ चलते रहना ही मेरा धर्म है।

।।जय श्री पद्मनाभ जय ऊंदुबरेश जय श्री महाविष्णु।।

08/03/2025

ज्योतिष(Astro)के ज्ञान से तत्व का दृष्टि मिलता है। उस तत्व दृष्टि से आत्मीक(Spiritual) विकास होता है तब जाकर कहीं योग(Yog) का कुछ सिद्धि प्राप्त होता है।

सभी मीत्रों को नमन। हमारा रेजीस्टर्ड ब्रांड लोगो और ट्रेड मार्क। एक ऐसा सत्य जो विज्ञान के परे भगवान के समीप और मानव सभ्...
08/03/2025

सभी मीत्रों को नमन। हमारा रेजीस्टर्ड ब्रांड लोगो और ट्रेड मार्क। एक ऐसा सत्य जो विज्ञान के परे भगवान के समीप और मानव सभ्यता एवं कल्प का मूल है फूल गुलर का।

हमें गुलर का अर्थात ऊदुंबर(Cluster fig Tree) का पुष्प प्राप्त हुआ जो २७०० वर्ष में एक बार खिलता है और किसी को भगवान के ईच्छा से ही मिलता है और जीसे यह मिलता है उसे संघर्ष भी बहुत कठिनतम प्राप्त होता है।

हम फिर वापस आपके साथ हैं अपने इस पेज के माध्यम से।

।।जय पद्मनाभ ऊंदुबरेश श्री महाविष्णु।।

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