KALYAN ASHRAM ASSAM

KALYAN ASHRAM ASSAM Non profit social welfare organization registered under Societies Registration Act XXI of 1860.

KALYAN ASHRAM ASSAM is a non-profit organization affiliated to Akhil Bharatiya Vanavasi Kalyan Ashram and registered under the Societies Registration Act XXI of 1860. It has been working at far flung corners, across the state of Assam with aims and objectives of promoting all round development among Janajatis, i.e., Scheduled Tribes, through variety of socio-economic initiatives, taking into accou

nt the importance of preservation & propagation of their rich cultural, religious traditions and heritage.

Ending Ceremony . Parichya Varag , Guwahati
08/11/2023

Ending Ceremony . Parichya Varag , Guwahati

Kalyan Ashram Assam , Guwahati Vivhag "Parichai Varg " Successfully held at Guwahati . Date : 1 Nov to 5 Nov 2023. কল্যা...
08/11/2023

Kalyan Ashram Assam , Guwahati Vivhag "Parichai Varg " Successfully held at Guwahati . Date : 1 Nov to 5 Nov 2023.

কল্যান আশ্ৰম,অসমৰ উদ্যোগত পোণপ্ৰথম বাৰৰ বাবে ১নবেম্বৰৰ পৰা ৫ নবেম্বৰলৈ তিনিখন জিলা ( গুৱাহাটী মহানগৰ জিলা , দক্ষিণ কামৰূপ আৰু গোৱালপাৰা) সামৰি ৫ দিনীয়া "পৰিচয় বৰ্গ" সুকলমে অনুষ্ঠিত কৰা হ'ল । এই বিশেষ বৰ্গৰ উদ্দেশ্য আছিল আমি নিজৰ হেৰুৱাৱ ধৰা প্ৰকৃত চিনাকিক পুণৰ উজাগৰ কৰি আমাৰ জনজাতি সমাজৰ যুৱপ্ৰজন্মৰ সবাংঙ্গীন বিকাশ সাধন কৰা । শাৰিৰীক, মানসিক, আবেগিক, বৌদ্ধিক আৰু আধ্যাত্মিক দিশৰে কিদৰে নিজৰ ভিতৰৰ ভাৰতীয় সত্বাক জাগ্ৰিত কৰি আৰু নিজ জনজাতি ধৰ্ম-কৃষ্টি-সংস্কৃতিৰ ৰক্ষক হৈ একো একোজন দেশৰ মানৱ সম্পদ ৰূপে গঢ় দিয়াই উক্ত পৰিচয় বৰ্গৰ লক্ষ্য-উদ্দেশ্য। ধন্যবাদ ।
দিনাংক ১/১১/২৩ ৰ কিছু আলোকচিত্ৰ ।

Kalyan Ashram Assam first time organised  a basic janjati youth Training "Parichay Barg" .  Three Districts included her...
31/10/2023

Kalyan Ashram Assam first time organised a basic janjati youth Training "Parichay Barg" . Three Districts included here Guwahati metro district, South Kamrup and Goalpara (Guwahati Bibhag) .
Age: 18 to 40 years .
Place : Sevabharti Janajati boys Hostal. Adingiri .
Enrollment date : 31/10/23
We request all our Janjati Sangathan kindly forward this Message to our youth to develop their personality and overall wellbeing .
Thank you .
K.A.A

29/10/2023

आइए स्व कार्तिक उरांव जी का जन्मशती वर्ष हम उत्सव के रूप में मनाए।

आज 29 अक्टूबर 2023 प्रख्यात जनजाति नेता स्वर्गीय कार्तिक उरांव जी का जन्म जयंती दिवस। जन्मजाति समाज की उन्नति के लिए संपूर्ण जीवन भर जिन्होंने समर्पित भाव से काम किया। ऐसे कार्तिक बाबू जी के जन्मशती वर्ष को भी आज से प्रारंभ हो रहा है।

जिन्होंने अपनी धर्म - संस्कृति - परंपरा को छोड़कर धर्मांतरण किया है, ऐसे जनजातियों के आरक्षण की सुविधा रद्द होनी चाहिए ऐसी मांग लेकर कार्तिक उरांव जी ने लंबा संघर्ष किया था। उनके जीवित होते हुए दुर्भाग्य से यह सपना साकार नहीं हो पाया। आज हम सब मिलकर कार्तिक जी के इस सपने को पूर्ण करने का संकल्प करना होगा।

कार्तिक जी का संपूर्ण जीवन ही समाज के लिए रहा। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने बाकी संपूर्ण जीवन केवल जनजाति समाज के विकास के लिए और इस समाज के विभिन्न समस्याओं को सुलझा कर एक सशक्त जनजाति समाज की निर्मिती के लिए व्यतीत किया था। उन्होंने काम तो जनजाति समाज के लिए किया लेकिन उनके कार्य का विस्तार संपूर्ण देश में हुआ था। इसीलिए संपूर्ण देश ने इस जन्मशती वर्ष को एक उत्सव के रूप में मनाना चाहिए।

जिन्होंने अपनी संस्कृति परंपरा छोड़कर अन्य धर्म का अवलंब किया है ऐसे व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति सूची से बाहर निकलना चाहिए ऐसी मांग उन्होंने की थी इस मांग को पूरा करने के लिए एक संघर्ष करना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

स्व कार्तिक उराँव जी के जन्म शताब्दी वर्ष के निमित्त विशेष डाक टिकट और सिक्का जारी करने की मांग अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने की है। कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रामचन्द्र खराड़ी जी ने प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से पत्र लिखकर यह मांग रखी है। पत्र में कार्तिक जी का जन्म शताब्दी वर्ष एक उत्सव के रूप में मनाने की अपील भी की है।

जन्मशती वर्ष के निमित्त स्वर्गीय कार्तिक उरांव जी की प्रेरक स्मृति को शत-शत नमन।
🙏🙏🙏

*पंखराज साहेब बाबा कार्तिक उरांव*  *लघु जीवन परिचय :-* पंखराज साहेब बाबा कार्तिक उरांव जी का जन्म 29 अक्टूबर 1924 को झार...
29/10/2023

*पंखराज साहेब बाबा कार्तिक उरांव*

*लघु जीवन परिचय :-*

पंखराज साहेब बाबा कार्तिक उरांव जी का जन्म 29 अक्टूबर 1924 को झारखंड राज्य के गुमला जिला के करौंदा लिटाटोली ग्राम में हुआ । इनके पिता का नाम स्व. जायरा उराँव एवं माता का नाम स्व. बिरसी उराँव था। इन्होंने प्राथमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा गुमला जिला में प्राप्त कर आइ.एस.सी. की पढ़ाई पटना के साइंस कॉलेज में पूरी की । तदुपरांत इंजीनियरिंग की पढ़ाई बिहार इंजीनियरिंग कॉलेज पटना से की ।

वे 1950-52 में बिहार सरकार के सिंचाई विभाग में सहायक अभियंता के रूप में कार्यरत रहे । इंजीनियरिंग की स्नातकोत्तर परीक्षा लंदन के विश्वविद्यालय से पास की । सितंबर 1955 से 1958 तक, ब्रिटिश रेल्वे में तकनीकी सहायक तथा ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट कमिशन, लंदन में वरीय तकनीकी सहायक आदि पदों पर भी कार्य किए । 1958 से 1961 तक विश्व के तत्कालीन सबसे बड़े आण्विक विद्युत गृह, हींकले पॉइंट अटामिक पावर स्टेशन में डिजाइनर के गरिमामय पद पर रहकर आपने कार्य किया ।

विदेश से वापस लौटने पर डॉ. कार्तिक उरांव मई 1961 से दिसंबर 1961 तक एच.ई.सी., रांची के वरीय इंजीनियर(डिजाइन) रहे । 1962 के लोकसभा चुनाव में आप लोहरदगा संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी रहे पर विजयी नहीं हो सके । 1962 से 67 तक फिर से एच.ई.सी. में उप मुख्य अभियंता के रूप में कार्यरत रहे । 1967 से 1977 तक आपने संसद में लोहरदगा संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया । 1977 से 1980 तक आप बिहार विधान सभा में विधायक भी रहे ।

1980 में तीसरी बार लोहरदगा के सांसद निर्वाचित हुए । भारत सरकार में पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग में राज्य मंत्री (9 जून 1980 तक) और 8 दिसंबर 1981, मृत्युपर्यंत संचार राज्य मंत्री रहे । दिनांक 8 दिसंबर 1981 को संसद के शीतकालीन सत्र में भाग लेने पहुंचे । वे संसद भवन में ही अचानक अस्वस्थ हो गए और हृदयगति रुकने के कारण उनकी मृत्यु हो गई *।महत्वपूर्ण योगदान* :-
वर्ष 1963 में पौराणिक पारंपरिक सामाजिक शासन व्यवस्था “पड़हा” का पुनर्गठन एवं पड़हा पत्रिका का सम्पादन आपके द्वारा हुआ । 1967-68 में रांची में सरहूल पुजनोत्सव एवं झांकी निकालने की परंपरा का शुभारंभ किया । जनजाति समाज के सांस्कृतिक उत्थान एवं उनकी पहचान को सुदृढ़ करने की दृष्टि से आपने कई कदम उठाए ।

18/10/2023

जनजाति शक्तिपीठ 3
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विदर्भ की शक्ति स्वरूपा
महाकाली माता

जनजातीय समाज की यह मान्यता है, और बहुत सारे उत्सव, मेले और इतिहास में कहा जाता है की.आत्राम (आत्राम याने 6 देव वाला गोत्र) नाम के एक जमीनदार को तीन लडकिया थी। जिनका विवाह उनके पिता करना चाहते थे। लेकिन उनको विवाह करना मंजूर नही था। इसलिये वह तीनों घर से निकल गई। इनमें से एक बहेन चंद्रपूर में आकर यही बस गई। यही आगे चलकर महाकाली माता के नाम से पहचानी जाने लगी। जैसे-जैसे महाकाली माता के अनेक चमत्कारों की कथा विभिन्न जगह फैल गई, वैसे वैसे श्रद्धालुओं की भीड़ माता के मंदिर में दर्शन के लिए आती गई।आज महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के चंद्रपूर में माता महांकाली का मंदिर न केवल जनजाति समाज का, बल्कि संपूर्ण हिंदू समाज का एक श्रद्धा केंद्र बन गया है।

समाज में मान्य हुई एक कथा के अनुसार,13वीं शताब्दी में गोंड के राजा सुरजा (उर्फ सेर साह) की मृत्यु पर, उनका पुत्र खांडक्या बल्लाल सिंहासन पर बैठा। इस राजकुमार के पूरे शरीर पर गांठें थी। उनकी देखभाल उनकी बुद्धिमान और सुंदर पत्नी करती थी। जब कोई उपाय खांडक्या को ठीक नहीं कर सके तो उसने उसे सिरपुर छोड़ने और वर्धा के उत्तरी तट पर रहने के लिए प्रेरित किया, जहां उसने बल्लालपुर नामक एक किला बनवाया। एक दिन जब राजा बल्लालपुर के उत्तर-पश्चिम में शिकार कर रहा था, तो उसे प्यास लगी और वह पानी की तलाश में झारपट नदी के सूखे तल पर पहुंच गया। उसने देखा कि एक छेद से पानी बह रहा है। उसने इस झरने का पानी तो पिया लेकिन शीतल जल से अपना हाथ पांव और चेहरा भी धोया भी किया। अगले दिन सुबह रानी यह देखकर हैरान हो गई की उसके शरीर पर से कहीं गांठे गायब हो चुकी थी। पूछताछ करने पर खांडक्याने रानी को झारपट के पानी पीने और हाथ पांव धोने की बात कही। रानी ने खांडक्या से उस स्थान पर ले जाने का आग्रह किया। दोनों झरपट की ओर आगे बढ़े और थोड़ी देर में छेद मिल गया। घास और रेत साफ करने पर ठोस चट्टान में गाय के पांच पैरों के निशान दिखे, जिनमें से प्रत्येक में पानी भरा हुआ था। घटनास्थल पर जल का अक्षय स्त्रोत था। वह एक पवित्र तीर्थ कुंड था त्रेता युग का प्रसिद्ध अचलेश्वर तीर्थ!

जब राजा ने इस तीर्थ स्थल के पानी से स्नान किया तो उसके शरीर की सभी गांठें गायब हो गईं। खांडक्या बल्लाळशहा राजाने उस पानी के आगे का शोध किया तो वहा एक भुयार दिखा। उस भुयार की साफसफाई करने के बाद उसे भूतार में एक सुंदर महाकाली की मूर्ति प्राप्त हुई। खांडक्या राजा ने इस स्थान पर माता का एक छोटा मंदिर बनाया। यह छोटा मंदिर आज एक विशाल मंदिर में परिवर्तित हुआ है। महाकाली माता के इस मंदिर में दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

महाराष्ट्र के चंद्रपुर की इस महाकाली माता के मंदिर को एक अनन्य साधारण स्थान प्राप्त है। प्रत्येक वर्ष चैत्र पौर्णिमा को यहा बडी यात्रा होती है। जिसमें महाराष्ट्र,तेलंगाना, मध्य प्रदेश, छत्तीसगड से लाखों श्रद्धालु महाकाली माता के दर्शन के लिए आते हैं। चंद्रपूर के राजघराणे में आत्राम राजाओं का 500 साल तक राज्य रहा। उसमे राणी हिराई आत्राम का बहुत बडा कार्यकाल रहा है। रानी हिराई एक श्रद्धावान रानी थी। उन्होंने अपने राज्य में कई मंदिर बनवाए। रानी स्वयं एक पराक्रमी रानी थी, जिसने अनेक युद्ध में विजयश्री प्राप्त की। लेकिन युद्ध में विजय प्राप्ति का एकमात्र कारण केवल महाकाली माता की असीम कृपा है, ऐसा उनका विश्वास था। इसलिये रानी हिराई ने माता महांकाली एक भव्य मंदिर बनवाया। आज जो मंदिर चंद्रपुर में खड़ा है उसका निर्माण रानी हिराई द्वारा ही किया गया है।

आज भी यह मंदिर भारत की सनातन परंपरा का एक जीता जागता प्रतीक है। जनजाति समाज चंद्रपुर की इस महाकाली माता को अपना श्रद्धा स्थान मानता है। अपनी इच्छित मनोकामना की पूर्ति करने वाली यह माता है ऐसा जनजाति समाज का विश्वास है। इसी कारण महाराष्ट्र के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में गोंड, कोलाम, कोया समाज के श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए यहां बड़ी श्रद्धा से आते हैं। नवरात्रि में भी यहां श्रद्धालुओं की बहुत बड़ी भीड़ दर्शन के लिए आती है माता किसी को भी निराश नहीं करती, सब की मनोवांछित कामनाएं पूर्ण करती है, ऐसी प्रत्येक श्रद्धालुओं की श्रद्धा होती है।
बोलो... महाकाली माता की जय!!

- प्रकाश गेडाम

Kalyan Ashrm Assam, Jano sampark at Amoni, Nagaon District. Date : 17/10/23
17/10/2023

Kalyan Ashrm Assam, Jano sampark at Amoni, Nagaon District. Date : 17/10/23

15/10/2023

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Kalyan Ashram, K. B. Road, Paltan Bazar
Guwahati
781008

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