18/09/2026
राष्ट्र की रक्षा हिंदुओं ने की और हिंदुत्व की रक्षा सदैव क्षत्रियों ने की है
सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन सिंह ने की महारानी बस्सी चित्तौड़गढ़ से मुलाकात
नई दिल्ली।
रा ष्ट्र की रक्षा का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, उसमें हिंदुओं का पराक्रम और क्षत्रियों का बलिदान सबसे पहले अंकित होगा। हिंदुत्व की धरोहर को सुरक्षित रखने की जो परंपरा वीरों ने तलवार के बल पर निभाई, उसी को आज आधुनिक युग की क्षत्राणियां अपनी विद्या और विवेक से आगे बढ़ा रही हैं। इन्हीं में से एक नाम है सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट और यूके की सालिसिटर रीना एन सिंह का, जिन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य न्याय, सत्य और धर्म की रक्षा को बनाया है। रीना सिंह इस बात का जीता-जागता प्रमाण हैं कि राष्ट्र और हिंदुत्व की सुरक्षा केवल रणभूमि में लड़कर ही नहीं, बल्कि न्यायालय की चौखट से भी की जा सकती है। वे अपने ज्ञान, साहस और धर्मनिष्ठा से यह साबित करती हैं कि आधुनिकता और परंपरा का संगम जब किसी स्त्री में मिलता है, तो वह क्षत्राणी न केवल परिवार या समाज, बल्कि पूरे राष्ट्र की शक्ति बन जाती है।
चित्तौड़गढ़ की वह धरती, जिसने रानी पद्मिनी जैसी वीरांगनाओं का त्याग देखा और जौहर जैसी अमर गाथाओं को जिया, आज भी वीरता की मिसाल
है। इसी भूमि की प्रतीक महारानी बस्सी के साथ जब रीना सिंह खड़ी होती हैं, तो यह दृश्य केवल दो महिलाओं का साथ नहीं, बल्कि इतिहास और वर्तमान का अद्भुत संगम बन जाता है। महारानी बस्सी स्वयं शौर्य और स्वाभिमान की ध्वजवाहक हैं और उनके साथ रीना सिंह का यह जुड़ाव स्पष्ट करता है कि क्षत्राणी आज भी हिंदुत्व की प्रहरी बनकर खड़ी हैं। रीना सिंह का कहना है कि हिंदुत्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है जो सत्य, धर्म और न्याय पर टिकी है।
उसकी रक्षा करना हर क्षत्राणी का कर्तव्य है और यही उनका संकल्प भी है। सुप्रीम कोर्ट की सीढ़ियों से लेकर यूके के कानूनी गलियारों तक अपनी प्रतिभा का परचम लहराने वाली यह क्षत्राणी बहन आज जब चित्तौड़गढ़ की महारानी के साथ खड़ी होती हैं, तो यह केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का संदेश है। यह संदेश कि चाहे समय कितना भी बदल जाए, हिंदुत्व की नींव कभी हिल नहीं सकती, क्योंकि उसकी रक्षा करने वाली क्षत्राणियां हमेशा मौजूद रहेंगी।