Pankti Pawan Samaj Foundation

Pankti Pawan Samaj Foundation Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Pankti Pawan Samaj Foundation, Nonprofit Organization, Gorakhpur.

02/09/2026

।🚩 मिक्सी में पिसा 'कुश' और विकृत होता सनातन धर्म: एक कड़वा सच 🚩"कुशस्य मूले ब्रह्मा, मध्ये विष्णु, अग्रतः शिवः।"सनातन धर्म में 'कुश' (दूर्वा सदृश पवित्र घास) को साक्षात देव-स्वरूप माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इसके मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्रभाग में महादेव का वास है। यह भगवान विष्णु के रोम से उत्पन्न अत्यंत पवित्र और पूजनीय वनस्पति है।लेकिन अत्यंत दुःख की बात है कि हाल ही में बीते श्रावण मास में रुद्राभिषेक के नाम पर एक नई और शास्त्र-विरुद्ध प्रथा देखने को मिली। कई तथाकथित विद्वानां और पंडितों के कहने पर यजमानों ने रोग-व्याधि की शांति के लिए 'कुशोदक' (कुश का जल) बनाने के नाम पर कुश को मिक्सी में पिसवाया, उसे कूटा और उसकी चटनी बनाकर रस निकाला।क्या यह सर्वोचित है? क्या हमारा शास्त्र इसकी अनुमति देता है? बिलकुल नहीं! यह शास्त्र की मर्यादा और हमारी आस्था के साथ खिलवाड़ है।❌ मिक्सी में कुश पीसना अनुचित और अमर्यादित क्यों है?देवताओं का अनादर: जिस कुश में त्रिदेवों का वास है, उसे मिक्सी के ब्लेड से काटना, पीसकर भर्ता बना देना साक्षात देवताओं का अनादर और घोर पाप है।शिवलिंग की मर्यादा का उल्लंघन: शिवपुराण और कर्मकांड के ग्रंथों के अनुसार, शिवलिंग पर चढ़ने वाला हर द्रव्य निर्मल, स्वच्छ और कण-रहित होना चाहिए। कुश को पीसने से जल गाढ़ा, कड़वा और रेशेदार हो जाता है। ऐसा कचरायुक्त जल शिवलिंग पर चढ़ाना और जलाधारी को अवरुद्ध करना शास्त्र-विरुद्ध है।मशीनी अपवित्रता: मिक्सी या ग्राइंडर जैसे आधुनिक उपकरणों में पूर्व में कई प्रकार की खाद्य सामग्रियां (लहसुन, प्याज, मिर्च आदि) पीसी जाती हैं। उसमें भगवान के अभिषेक की सामग्री पीसना अपवित्रता को आमंत्रण देना है।📜 क्या है शास्त्र-सम्मत सही विधि? (शिवपुराण के अनुसार)शास्त्रों में 'कुशोदक' (कुश + उदक अर्थात् जल) तैयार करने की विधि बेहद सरल और सात्विक है:तांबे, पीतल या चांदी के कलश में शुद्ध जल या गंगाजल भरें।उसमें कुश की पवित्र पत्तियां या उसका अग्रभाग (अग्र भाग) कुछ समय के लिए या रातभर के लिए डुबाकर रख दें।कुश में आध्यात्मिक ऊर्जा को स्थानांतरित करने की अद्भुत क्षमता होती है। जल में रहने मात्र से ही उसके दिव्य और औषधीय गुण पानी में समाहित हो जाते हैं।इसके बाद उस कुश-युक्त पवित्र जल को छानकर, महामृत्युंजय मंत्र या रुद्र सूक्त के पाठ के साथ शिवलिंग पर पतली धारा से अर्पित करें। यही विधि रोग-व्याधि का नाश करने वाली है।📢 सनातनियों से करबद्ध प्रार्थना!श्रावण मास बीत चुका है, लेकिन आगामी समय में होने वाले देव-कार्यों के लिए आज ही सचेत हो जाएं। धर्म को अपनी सुविधा या आधुनिक बुद्धि से मत चलाइए। अगर कोई पंडित या आचार्य आपको ऐसी मनगढ़ंत और विकृत विधियां (जैसे मिक्सी में कुश पीसना) बताएं, तो उन्हें विनम्रतापूर्वक शास्त्र का नियम याद दिलाएं।धर्म की रक्षा तभी होगी, जब हम धर्म को उसके मूल और शुद्ध स्वरूप में मानेंगे।✍️ इस संदेश को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि सनातन धर्म की शुद्धता और मर्यादा बनी रहे।🙏 हर हर महादेव! 🙏
श्री सितांसु मणि त्रिपाठी जी
पंक्तिपावन धरा धाम सिरजम
वरिष्ठ सदस्य पंक्तिपावन समाज फाउंडेशन🚩

एक दुखद सूचना।।       पंक्तिपावन ग्राम पच रुखिया निवासी श्री लल्लन प्रसाद मिश्र जी अभी अभी प्राप्त सूचना के अनुसार गोलोक...
02/09/2026

एक दुखद सूचना।।
पंक्तिपावन ग्राम पच रुखिया निवासी श्री लल्लन प्रसाद मिश्र जी अभी अभी प्राप्त सूचना के अनुसार गोलोक वाशी हो गए।। भगवान उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे और उनको अपने श्री चरणों मे स्थान दे।।
विनम्र श्रद्धांजलि।।शत शत नमन🙏😭

27/08/2026

बहुत से लोग सोचते हैँ की आजकल लोग श्री केदारनाथ मंदिर के दर्शन हेतु क्यूँ लालायित रहते हैँ....
तो ये रहा उत्तर..... 👇👇👇👇
DRDO के रिसर्च और रात मे शिवलिंग से निकलती नीली रौशनी का रहस्य....

1. 2013 की आपदा: जब केदारनाथ डूबा, पर शिवलिंग नहीं हिला.....

16 जून 2013। केदारनाथ में बादल फटा। मंदाकिनी में सुनामी आई। 10,000 लोग मरे। पूरा केदारनाथ शहर बह गया।

पर चमत्कार देखो - केदारनाथ मंदिर को खरोंच तक नहीं आई। 1000 साल पुराना मंदिर, 400 किमी/घंटा की रफ्तार से आए पत्थरों के सैलाब के बीच खड़ा रहा।

क्यों?
क्योंकि मंदिर के ठीक पीछे एक विशाल शिला आकर अटक गई थी। 20 फीट ऊँची, 60 फीट चौड़ी। उसने मंदिर को ढाल की तरह बचा लिया।

वैज्ञानिक बोले - "संयोग है।"
भक्त बोले - "नहीं, भीम शिला है। महादेव ने भेजी थी।"

पर असली रहस्य तो आपदा के 10 साल बाद खुला। 2023 में।

2. DRDO की रिसर्च: जब शिवलिंग से रेडिएशन निकला

2023, मई। चारधाम यात्रा शुरू हुई। DRDO और ISRO की टीम केदारनाथ में "हिमालयन एनर्जी स्टडी" कर रही थी। मंदिर के अंदर Geiger Counter ले गए - रेडिएशन नापने के लिए।

गर्भगृह में घुसते ही मशीन पागल हो गई। बीप... बीप... बीप...

नॉर्मल रेडिएशन: 0.1 माइक्रोसीवर्ट/घंटा
शिवलिंग के पास: 7.8 माइक्रोसीवर्ट/घंटा - 78 गुना ज्यादा!

सबसे बड़ा शॉक: रात 12 बजे से 3 बजे के बीच रेडिएशन 15 माइक्रोसीवर्ट तक पहुँच जाता। और उसी समय शिवलिंग से नीली-सुनहरी रोशनी की पतली किरणें निकलतीं।

नंगी आँखों से दिखती थीं। जैसे शिवलिंग साँस ले रहा हो।

टीम लीडर डॉ. विक्रम राठौर ने फोटो खींची। कैमरे में कुछ नहीं आया। रोशनी सिर्फ इंसानी आँखों से दिखती थी, डिजिटल सेंसर से नहीं।

सरकार ने रिपोर्ट दबा दी। "लोग डर जाएंगे। यात्रा रुक जाएगी।"

पर एक जूनियर साइंटिस्ट अनन्या शर्मा ने चुपके से सैंपल ले लिया - शिवलिंग पर चढ़े जल का।

3. अनन्या की खोज: जब पानी 'तीर्थ' नहीं, 'ईंधन' निकला

दिल्ली IIT लैब। अनन्या ने जल का टेस्ट किया।

रिजल्ट देखकर होश उड़ गए:

1. ट्राइटियम H-3: पानी में रेडियोएक्टिव हाइड्रोजन। न्यूक्लियर फ्यूजन का ईंधन। 1 लीटर ट्राइटियम = 80 लाख लीटर पेट्रोल जितनी ऊर्जा।
2. मोनोएटॉमिक गोल्ड: सोने का ऐसा रूप जो कमरे के तापमान पर सुपरकंडक्टर बन जाता है। मिस्र के पिरामिड में भी मिला था।
3. ORMUS एलिमेंट: 'Orbitally Rearranged Monoatomic Elements'। वैज्ञानिक मानते हैं ये DNA रिपेयर कर सकता है, उम्र बढ़ा सकता है।

अनन्या समझ गई - केदारनाथ का जल साधारण नहीं। शिवलिंग कोई पत्थर नहीं। ये प्राचीन न्यूक्लियर रिएक्टर है।

रात 12-3 बजे जो रोशनी निकलती है, वो चेरेंकोव रेडिएशन है - जो न्यूक्लियर रिएक्टर के कोर में दिखती है।

पर सवाल - 12,000 फीट पर, 1000 साल पहले ये टेक्नोलॉजी किसने बनाई?

4. रावल जी की डायरी: 400 साल पुराना रहस्य

अनन्या केदारनाथ वापस गई। मंदिर के मुख्य पुजारी रावल भीमाशंकर लिंग से मिली। 85 साल के। 1947 से पूजा कर रहे।

"रावल जी, सच बताओ। ये रोशनी क्या है?"

रावल जी हँसे। "बेटा, तुम पहली वैज्ञानिक नहीं। 1952 में नेहरू जी भी आए थे। पर कुछ रहस्य किताबों में नहीं, परंपरा में मिलते हैं।"

उन्होंने तांबे के पत्रों वाली डायरी निकाली। 400 साल पुरानी। उनके परदादा के परदादा ने लिखी थी।

डायरी में लिखा था:

"कलियुग 5000 वर्ष बीते, जब आकाश से अग्नि बरसेगी, केदार जागेगा। शिवलिंग से नील-सुवर्ण ज्योति निकलेगी। वो ज्योति नहीं, *महादेव का तीसरा नेत्र है। जो पापी देखेगा, भस्म। जो भक्त देखेगा, अमर।"

"ये शिवलिंग स्वयंभू नहीं। पांडवों ने बनाया था। अर्जुन ने गांडीव से वज्र-शिला काटी। भीम ने नागलोक से पारा लाया। नकुल-सहदेव ने सोमरस डाला। युधिष्ठिर ने वेद मंत्र फूंके। 36 दिन लगे। उद्देश्य - कलियुग में जब धर्म घटेगा, तो ये ऊर्जा केंद्र मानवता बचाएगा।"

5. अमावस्या की रात: जब अनन्या ने रोशनी देखी

15 अगस्त 2023। श्रावण अमावस्या। अनन्या ने ठान लिया - आज रात 12 बजे गर्भगृह में रहूंगी।

रावल जी माने नहीं। "बेटा, नियम है - रात में गर्भगृह बंद। महादेव का श्रृंगार होता है। कोई नहीं देख सकता।"

"क्यों रावल जी? क्या होता है अंदर?"

रावल जी की आँख भर आई। "40 साल से मैं पुजारी हूँ। पर 12 बजे के बाद मैं भी बाहर आ जाता हूँ। क्योंकि अंदर महादेव खुद आते हैं। मैंने एक बार छुपकर देखा था 1975 में। 7 दिन तक बुखार रहा। आँखों से खून आया।"

पर अनन्या नहीं मानी। वो सीटीवी कंट्रोल रूम में छुप गई। स्क्रीन पर गर्भगृह दिखता था।

रात 12:00:00
सन्नाटा। अचानक शिवलिंग काँपने लगा। जैसे अंदर भूकंप हो।
12:01:30
शिवलिंग के जलहरी से - जहाँ से अभिषेक का पानी निकलता है - नीली रोशनी की लेजर निकली। पतली, पर इतनी तेज कि स्क्रीन सफेद हो गई।

12:02:45
रोशनी सुनहरी हो गई। और गर्भगृह की दीवारों पर संस्कृत के मंत्र उभरने लगे। खुद-ब-खुद। जैसे होलोग्राम।

अनन्या ने संस्कृत पढ़ी थी। मंत्र था - "त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्..." - महामृत्युंजय मंत्र।

12:15:00
रोशनी के बीच एक आकार बना - 15 फीट ऊँचा। जटाधारी, त्रिशूल, डमरू, गले में साँप। साक्षात महादेव।

वो शिवलिंग के चारों ओर तांडव करने लगे। हर कदम पर मंदिर हिलता, पर गिरता नहीं।

अनन्या की नाक से खून बहने लगा। स्क्रीन देखने से ही। वो बेहोश हो गई।

6. सुबह का चमत्कार: जब अनन्या 20 साल जवान हो गई

सुबह 5 बजे रावल जी ने अनन्या को उठाया। वो गर्भगृह के बाहर पड़ी थी।

"बेटा, तू अंदर कैसे आई? और ये क्या... तेरा चेहरा..."

अनन्या उठी। शीशे में देखा। 32 साल की अनन्या 22 की लग रही थी। झुर्रियाँ गायब। आँखों के नीचे डार्क सर्कल गायब। बाल काले-घने।

मेडिकल चेकअप हुआ। DNA टेलोमेयर - जो उम्र बताता है - 10 साल छोटा हो गया था।

रावल जी समझ गए। "तुझे महामृत्युंजय दीक्षा मिल गई। जो अमावस्या की रात महादेव का तांडव देख ले, और बच जाए, वो कालजयी हो जाता है।"

"पर मैंने तो सिर्फ स्क्रीन पर देखा..."

"स्क्रीन ही क्यों, श्रद्धा से देखना जरूरी है। तू वैज्ञानिक होकर भी शिव को मानने आई। इसीलिए कृपा हुई। वरना 1975 में मेरा चेला पागल हो गया था।"

7. भीम शिला का सीक्रेट: NASA क्यों डरा?

2013 की आपदा के बाद NASA ने भीम शिला का सैंपल लिया।

रिपोर्ट क्लासिफाइड है। पर लीक हुई बात: शिला ग्रेनाइट की नहीं है

ये एयरोजेल + टाइटेनियम का मिश्रण है - जो 2023 में लैब में बना। 1000 साल पहले कैसे?

और शिला का वाइब्रेशन - 7.83 Hz। ये शूमैन रेजोनेंस है - धरती की दिल की धड़कन।

मतलब भीम शिला जिंदा है। वो मंदिर को बचा रही है क्योंकि शिवलिंग से कनेक्टेड है। जैसे वाई-फाई।

अनन्या ने थ्योरी दी: "केदारनाथ मंदिर एक पावर प्लांट है। शिवलिंग रिएक्टर। भीम शिला कूलिंग टावर। मंदाकिनी मॉडरेटर। और 12 ज्योतिर्लिंग मिलकर भारत का प्राचीन एनर्जी ग्रिड बनाते हैं।"

8. 2025 की शिवरात्रि: जब पूरी दुनिया ने रोशनी देखी

फरवरी 2025, महाशिवरात्रि। ISRO ने परमिशन दी - लाइव टेलीकास्ट होगा केदारनाथ से।

रात 12 बजे। 140 करोड़ लोग टीवी देख रहे।

जैसे ही पंडितों ने "हर हर महादेव" बोला, शिवलिंग से नीली-सुनहरी रोशनी निकली।

इस बार कैमरे में कैद हो गई। क्योंकि ISRO ने क्वांटम कैमरा लगाया था - जो चेरेंकोव रेडिएशन पकड़ लेता है।

पूरी दुनिया ने देखा। NASA ने ट्वीट किया - "Unknown Energy Signature detected in Himalayas. Not natural."

अगले दिन केदारनाथ जल की डिमांड 1000 गुना बढ़ गई। लोग बोले - "ये अमृत है।"

9. रहस्य का विज्ञान: महादेव का 5G प्लान

अनन्या अब DRDO छोड़कर 'केदारनाथ रिसर्च फाउंडेशन' चलाती है। वो बताती है:

1. शिवलिंग: स्वयंभू नहीं, वज्र-शिला + पारा + सोम रस का रिएक्टर। पारा = Mercury = सुपरकंडक्टर।
2. जलाभिषेक: पानी डालने से कोल्ड फ्यूजन होता है। H2O + Hg = H-3 ट्राइटियम + ऊर्जा = रोशनी।
3. बेलपत्र: इसमें एगेलिन होता है - जो रेडिएशन सोखता है। इसीलिए चढ़ाते हैं।
4. रात 12-3: ब्रह्म मुहूर्त + कॉस्मिक रे मैक्सिमम। रिएक्टर पीक पर।
5. ॐ ध्वनि: 432 Hz। ये फ्रीक्वेंसी पानी के अणु को एलाइन करती है, फ्यूजन आसान होता है।

मतलब हमारे पूर्वज न्यूक्लियर फिजिक्स जानते थे। पर उन्होंने इसे 'धर्म' बना दिया। क्यों? ताकि लालची लोग इसका गलत इस्तेमाल न करें। सिर्फ निष्काम भक्त ही फायदा उठाए।

10. अंतिम चेतावनी: रोशनी किसे दिखेगी?

रावल जी अब 87 के। वो कहते हैं:

"बेटा, 2023 के बाद से हर अमावस्या को रोशनी दिखती है। पर सबको नहीं

जो घमंड लेकर आएगा - उसे दिखेगी नहीं। कैमरे में भी नहीं।
जो पैसा कमाने आएगा - बीमार पड़ेगा।
जो 'बाबा फेमस हो जाऊँ' सोचकर आएगा - पागल हो जाएगा।

पर जो आँसू लेकर आएगा - 'हे भोलेनाथ, मैं हार गया हूँ' - उसे रोशनी दिखेगी। और एक बूँद जल मिल गया तो जिंदगी बदल जाएगी।"

अनन्या ने पूछा - "रावल जी, आपने क्यों नहीं पिया अमृत?"

रावल जी हँसे। "मैं पुजारी हूँ, मालिक नहीं। महादेव की ड्यूटी है मुझे। अमर होकर क्या करूँगा? मुझे तो बस ये चाहिए कि जब मेरी मृत्यु हो, तो महादेव खुद तारक मंत्र दें - जैसे मणिकर्णिका में देते हैं।"
कहानी का सार:
1. शिवलिंग पत्थर नहीं, यंत्र है - प्राचीन ऊर्जा केंद्र।
2. रोशनी चमत्कार नहीं, विज्ञान है - कोल्ड फ्यूजन + चेरेंकोव रेडिएशन।
3. श्रद्धा ही पासवर्ड - अहंकारी को कुछ नहीं दिखता, भक्त को अमृत मिलता है।
4. केदारनाथ = कैलाश का पावरहाउस - 12 ज्योतिर्लिंग ग्रिड का हिस्सा।

॥ केदारं ज्योतिर्लिंगं ॥ ॐ नमः शिवाय ॥ हर हर महादेव ॥

---
यह कथा केदारनाथ की मान्यताओं, DRDO रिसर्च, शिव पुराण और वैज्ञानिक थ्योरी का संगम है।
शिवलिंग पर रिसर्च जारी है। श्रद्धा और विज्ञान का बैलेंस जरूरी है।
Copied

छोटे भाई मयंक शुक्ला ( मुंडेरा शुक्ल, संत कबीर नगर) का UPSSSC ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित होने पर बैजू नाथ दर्शन...
19/08/2026

छोटे भाई मयंक शुक्ला ( मुंडेरा शुक्ल, संत कबीर नगर) का UPSSSC ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित होने पर बैजू नाथ दर्शन करते हुए।
बहुत-बहुत बधाई हार्दिक शुभकामनाएं.....
सुधीर शुक्ल
वरिस्ठ सदस्य पंक्तिपावन समाज फाउंडेशन।।🚩

पंक्तिपावन समाज फाउंडेशन के बौद्धिक प्रकोष्ठ के वरिस्ठ सदस्य ,मार्गदर्शक,पंक्तिपावन कुल शिरोमणि परमादरणीय डॉ गायत्री प्र...
15/08/2026

पंक्तिपावन समाज फाउंडेशन के बौद्धिक प्रकोष्ठ के वरिस्ठ सदस्य ,मार्गदर्शक,पंक्तिपावन कुल शिरोमणि परमादरणीय डॉ गायत्री प्रसाद पांडेय जी द्वारा पंक्तिपावन समाज को बार बार गौरवान्वित किया जाता रहा है।। उसी कड़ी में महत्वपूर्ण उपलब्धियों में एक कड़ी और जुड़ते हुए आपको करपात्र सम्मान मिलते ही समस्त पंक्तिपावन समाज मे खुसी की लहर दौड़ पड़ी है।।सङ्गठन और पंक्तिपावन समाज की तरफ से आपको बहुत बहुत बधाई।।🚩🕉️🌷🌷
आपका अभिनंदन है ,वंदन है।।🌷🚩🙏
सादर चरण स्पर्श ।।🙏🚩🌷🕉️🔱🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

14/08/2026

14अगस्त 1947को आधुनिक भारत के धर्म के आधार पर दो टुकडे कर दिये गये कांग्रेस ने अंग्रेजो के साथ मिलकर .हिन्दुओ के साथ सबसे बडा अत्याचार हुआ कि उनका अपना कोई देश नही रह गया आज भारत मे 9राज्यो मे हिन्दू आबादी विभिन्न कारणो से अल्पसंख्यक हो चुकी है
इस देश की जनता को सोच-विचार करना होगा कि देश पुन:बटने न पाये. क्योकि देश के अंदर और विदेशी शक्तियां भारत को शक्तिशाली बनते नही देखना चाहती है.
जय भारत

14/08/2026

अभी अभी लखनऊ एस जी पी जी आई से बेहद मर्माहत करने वाला समाचार प्राप्त हुआ है कई दिनों से लिवर डिपार्टमेंट के आई सी यू में भर्ती ग्राम मांटे के पंडित मूलचंद मिश्र का पौत्र और पंडित बद्रीनाथ शुक्ल जी का दामाद विवेक मिश्र अल्पायु में गोलोक को प्रस्थान कर गया। प्रभु श्री राम दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें, अश्रुपूरित श्रद्धांजलि।।🙏🙏🙏😭😭😭😭😭😭
दोनों परिवारों पर एक साथ बज्रपात हुआ ।। विनम्र श्रधांजलि।।

धर्म शब्द संस्कृत की 'धृ' (धृञ्) धातु से बना है। व्याकरण में 'धातु' शब्द मूल क्रिया  को कहते हैं।धर्म का अर्थशाब्दिक अर्...
11/08/2026

धर्म शब्द संस्कृत की 'धृ' (धृञ्) धातु से बना है। व्याकरण में 'धातु' शब्द मूल क्रिया को कहते हैं।धर्म का अर्थशाब्दिक अर्थ: 'धृ' धातु का अर्थ है—धारण करना, थामना, संभालना या बनाए रखना।तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत्" का अर्थ है कि धर्म का हनन (नाश) करने वाले का धर्म नाश कर देता है और रक्षा किया गया धर्म रक्षा करता है। इसलिए कभी भी धर्म का हनन नहीं करना चाहिए, ताकि नष्ट किया हुआ धर्म स्वयं हमारा विनाश न कर सके। धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः" जो महाभारत (वनपर्व) और मनुस्मृति में मिलता है। धर्म के बारे मुख्यत तीस लक्षण है जो पुराणों में बताया गया है कुछ लक्षणों की व्याख्या किया जा रहा है ।मनुस्मृति और महाभारत के अनुसार धर्म के मुख्य दस लक्षण बताए गए हैं:धृति (धैर्य): सुख-दुख या लाभ-हानि में मन को स्थिर रखना।क्षमा (क्षमाशीलता): दूसरों के अपराध को माफ करना।दम (मन का संयम): मन को बुरे विचारों से बचाना।अस्तेय (चोरी न करना): बिना आज्ञा किसी की वस्तु न लेना।शौच (पवित्रता): शरीर और मन की शुद्धि।इंद्रिय-निग्रह: इंद्रियों को अपने वश में रखना।धी (विवेक): सही और गलत को समझने की बुद्धि।विद्या (ज्ञान): सत्य और शास्त्रों का ज्ञान।सत्य (सच्चाई): सदैव सत्य का आचरण करना।अक्रोध (क्रोध न करना): क्रोध का त्याग करना। धर्म के बारे में तुलसी दास जी लिखते है धर्म न दुसर सत्य समाना।आगम निगम पुराण बखाना।।अर्थ धर्म से बड़ा कोई सत्य नहीं है वेद पुराण इसकी व्याख्या करते है।जब तक जीवन धर्म की रक्षा करे तो धर्म भी आप की रक्षा करता है। "धर्मो रक्षति रक्षितः" का अर्थ समझाया। हम धर्म की रक्षा करेंगे तो धर्म हमारी रक्षा करेगा।

शैलेन्द्र शुक्ल जी महाराज।।
वरिष्ठ सदस्य पंक्तिपावन समाज फाउंडेशन🚩
चर्चा परिचर्चा
फाउंडेशन व्हाट्सप्प मुख्य पटल।।

पंक्तिपावन समाज के लिए खुशियों का पल ।। पंक्तिपावन धरा धाम मूल ग्राम सरया तिवारी बर्तमान आवास बांसगांव निवासी आयुष राम त...
07/08/2026

पंक्तिपावन समाज के लिए खुशियों का पल ।।
पंक्तिपावन धरा धाम मूल ग्राम सरया तिवारी बर्तमान आवास बांसगांव
निवासी आयुष राम त्रिपाठी पुत्र श्री प्रह्लाद राम त्रिपाठी का चयन आर्मी में असिस्टेंट कमांडर के पद पर हुआ है।।

सूचना प्राप्त होते ही सभी ग्राम वासी और मित्रों रिस्तेदारो में खुसी की लहर दौड़ गयी है।। बहुत बहुत बधाई सत्यम ।।🚩🚩🚩🌷💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐🙏🏻

Address

Gorakhpur
273008

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Pankti Pawan Samaj Foundation posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share