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मायावती के पुराने तेवर में आते ही सियासी अटकलों का दौर शुरू, क्या अखिलेश के साथ 1993 का करिश्मा दोहरा सकती हैं?यूपी 2027...
13/03/2025

मायावती के पुराने तेवर में आते ही सियासी अटकलों का दौर शुरू, क्या अखिलेश के साथ 1993 का करिश्मा दोहरा सकती हैं?

यूपी 2027 विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने को लेकर गुणा-गणित हुई शुरू। भतीजे आकाश को पार्टी से निकालने के बाद मायावती ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं लगातार बीजेपी पर हमला बोल रही है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि मायावती और अखिलेश के साथ आने पर ही बीजेपी हार सकती है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या अखिलेश-मायावती साथ आकर 1993 (सपा-बसपा) की तरह फिर से गठबंधन सरकार बना सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में अभी लंबा समय है। लेकिन प्रदेश में सरकार बनाने को लेकर गुणा-गणित अभी से शुरू हो गया है। भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से निकालने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। मायावती ने अपने बीते कुछ बयानों में बीजेपी को आड़े हाथों लेकर इस बात का एहसास करा दिया है। मायावती के इन बदलते तेवरों से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है। चर्चा है कि अखिलेश यादव और मायावती एक बार फिर साथ आ सकते हैं। अगर ये दोनों नेता साथ आते हैं तो साल 1993 में मिली सपा-बसपा गठबंधन की करिश्माई जीत को दोहरा सकते हैं।

केशव देव मौर्य के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू
दरअसल यूपी में जीत की हैट्रिक लगाने के लिए सत्ताधारी बीजेपी हिंदुत्व के एजेंडे पर काम कर रही है। सीएम योगी ने बजट सत्र के दौरान इसकी एक बानगी भी पेश कर दी है। उधर मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी अपने पीडीए के सहारे यूपी की सत्ता में वापसी करना चाहती है। लेकिन इसी बीच महान दल के अध्यक्ष केशव देव मौर्य ने बड़ा बयान दे दिया है।

केशव देव मौर्य ने कहा कि बीजेपी से अकेले ना ही समाजवादी पार्टी जीत पाएंगी और ना ही अकेले बहुजन समाज पार्टी जीत पाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे में बेहतर यही होगा कि सपा और बसपा दोनों मिलकर बीजेपी को सत्ता से हटाकर 2027 में सरकार बना लें। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

2019 में एक साथ आ चुके हैं दोनों धुरविरोधी
एक-दूसरे के राजनीतिक धुरविरोधी माने जाने वाले मायावती और अखिलेश यादव मोदी को सत्ता से हटाने के लिए 2019 लोकसभा चुनाव में एक साथ आ चुके हैं। इस चुनाव में मायावती 0 से 10 सीट पर पहुंच गई थी, लेकिन सपा मुखिया अखिलेश यादव 2014 के आंकड़ों पर ही सीमित रह गए थे।

हालांकि 10 सीटों का फायदा होने के बाद भी मायावती ने सपा का वोट बसपा में ट्रांसफर ना होने का आरोप लगाते हुए अपने रास्ते अलग कर लिए थे। इसके बाद से पूर्व मुख्यमंत्री मायावती अक्सर बीजेपी की तुलना में सपा और कांग्रेस पर ज्यादा हमले बोलने लगी थी। इस पर सपा मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने समय-समय पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी है। यही नहीं, सपा ने बसपा के टिकटों पर भी सवाल खड़े किए हैं।

1993 की जीत को दोहराने का है मौका
वहीं राजनीतिक जानकारों की माने तो राजनीति में कोई किसी का स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता है। 1993 में गठबंधन की सरकार बनाने के बाद 1995 के गेस्ट हाउस कांड के बाद मुलायम सिंह यादव और मायावती के रास्ते अलग हो गए थे। लेकिन साल बाद सपा और बसपा साथ आ गए थे। साल 2019 के चुनाव में अखिलेश, मायावती और मुलायम सिंह यादव एक साथ एक मंच पर नजर आए थे। इसलिए ये कहना कि यह दोनों दल एक साथ नहीं आ सकते हैं, ये कहना गलत होगा।

वहीं चर्चा ये भी है कि मायावती के साथ गठबंधन करके अखिलेश यादव 1993 वाले करिश्मा को दोहराना चाहते है। दिसंबर 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया गया था, उसके ठीक बाद साल 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में सपा और बसपा ने मिलकर सरकार बना ली थी। तब सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव और बसपा के संस्थापक कांशीराम ने मिलकर सरकार बनाई थी।

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27/02/2024

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लोकसभा सीट(2) कैराना सांसद= प्रदीप चौधरी भाजपा पश्चिम की जाट-मुस्लिम बाहुल्य कैराना लोकसभा की गिनती प्रदेश की खास सीटों ...
30/10/2023

लोकसभा सीट(2) कैराना
सांसद= प्रदीप चौधरी भाजपा

पश्चिम की जाट-मुस्लिम बाहुल्य कैराना लोकसभा की गिनती प्रदेश की खास सीटों में होती है, फिलहाल यहां से भाजपा के प्रदीप चौधरी सांसद है.

इन्होने 2019 चुनाव में महागठबंधन की सपा प्रत्याशी तबस्सुम हसन को 92 हज़ार से ज़्यादा वोटों से हराया था, प्रदीप चौधरी को 566,961 व तबस्सुम हसन को 474,801 वोट मिली थी.

अब 2024 का लोकसभा चुनाव नज़दीक है कुछ समय बाद प्रत्याशी भी घोषित होने शुरू हो जाएंगे, भाजपा से मौजूदा सांसद प्रदीप चौधरी व मृगांका सिंह दावेदार है तो सपा+रालोद से पुर्व सांसद तबस्सुम हसन, कैराना विधायक नाहिद में से किसी एक का टिकट तय माना जा रहा है.

लोकसभा सीट(1) सहारनपुर सांसद=हाजी फज़लुर्रहमान (बसपा)लोकसभा चुनाव 2019 में बसपा प्रत्याशी हाजी फज़लुर्रहमान ने भाजपा प्रत्...
28/10/2023

लोकसभा सीट(1) सहारनपुर
सांसद=हाजी फज़लुर्रहमान (बसपा)

लोकसभा चुनाव 2019 में बसपा प्रत्याशी हाजी फज़लुर्रहमान ने भाजपा प्रत्याशी तत्कालीन सांसद राघव लखनपाल को 22417 मतों को हराकर सांसद बने थे, बसपा के हाजी फज़लुर्रहमान को 514139 व भाजपा के राघव लखनपाल को 491722 मत मिले थे.

अब लोकसभा चुनाव में कुछ ही वक़्त बचा है जहा तक मुमकिन है बसपा दोबारा हाजी फज़लुर्रहमान पर दांव खेलेगी, भाजपा फिर से राघव लखनपाल को मौका देगी या किसी नए चेहरे पर दांव चलेगी ये भी देखना होगा, इंडिया गठबंधन में सीट जहा तक लग रहा है कांग्रेस को मिलेगी तो इमरान मसूद गठबंधन से मैदान में आ सकते है.

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