06/05/2026
बांग्लादेश की धार्मिक कट्टरता: 1972 से लेकर आज तक की सबसे बड़ी रेडिकल स्टोरी
1971 की मुक्ति के बाद बांग्लादेश “सेक्युलर‑बंगाली राष्ट्रवाद” पर खड़ा हुआ, लेकिन 1975 के तख्तापलट के बाद फौजी शासक जिया‑उर‑रहमान और हुसैन मुहम्मद एरशाद ने राजनीतिक समर्थन के लिए इस्लाम को राज्य‑भाषा बना दिया।
इसी दौर में जमात‑ए‑इस्लामी, Hefazat‑e‑Islam और अन्य इस्लामिस्ट ग्रुप्स ने खुलकर राजनीति और समाज में जगह बनानी शुरू की। 1990–2000 के दशकों में गरीबी, बेरोजगारी, धर्म‑आधारित शिक्षा संस्थानों में कट्टरपंथी विचार और अल‑कायदा/ISIS जैसे अंतरराष्ट्रीय जिहादी नेटवर्कों के संपर्क ने बांग्लादेश को इस्लामिक रैडिकलाइज़ेशन का एक बड़ा केंद्र बना दिया।
सबसे बड़ी धार्मिक रैडिकल घटना: 2005 के JMB बम धमाके
2005 का 17 अगस्त का दिन आज तक बांग्लादेश के इतिहास में सबसे काला माना जाता है:
जमात‑उल‑मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) ने एक ही दिन में 63 शहरों में को‑ऑर्डिनेटेड बम धमाके किए।
यह देश की सबसे बड़ी “एक‑साथ इस्लामिस्ट टेरर एक्टिविटी” थी, जिसमें दर्जनों मासूम लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए।
इस घटना के बाद मध्य और दूरदराज के गाँव–शहरों में भी लोगों ने पहली बार महसूस किया कि “धार्मिक कट्टरता” सिर्फ मस्जिद या रैली तक सीमित नहीं, बल्कि सड़कों, बाजारों और मासूम के घरों तक घुस चुकी है।
कैसे शुरू हुई यह रैडिकल लहर
1971 के बाद सरकार ने झूम‑झूम करते रहे: कभी सेक्युलर, कभी इस्लाम‑आधारित ढांचा।
1980 के दशक में एरशाद ने घोषणा की: “इस्लाम राज्य‑धर्म” (State Religion)। यह फैसला बाद में धार्मिक ग्रुप्स को लीगल और राजनीतिक नैरेटिव देने का बड़ा मौका बना।
1990–2000 में मदरसा‑सिस्टम, धार्मिक रैलियाँ और अंतरराष्ट्रीय जिहादी आइडियोलॉजी ने जो नए नेटवर्क बनाए, उनका जन्म CBN, JMB, Hefazat‑e‑Islam और बाद में ISIS‑साइड‑आधारित ग्रुप्स के रूप में देखा गया।
सरकार ने क्या‑क्या किया
2000 के दशक में बांग्लादेश सेना और पुलिस ने JMB के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाया:
सैकड़ों सदस्य गिरफ्तार,
नेता फाँसी पर,
गुप्त कैंप और बम‑फैक्ट्री बर्बाद।
2010 के दशक से शेख हसीना सरकार ने:
Hizb‑ut‑Tahrir जैसे ग्लोबल इस्लामिस्ट ग्रुप को बैन किया,
अन्य जिहादी नेटवर्कों के खिलाफ निगरानी और गिरफ्तारी अभियान तेज किए।
“Prison‑based deradicalization” और मस्जिद‑स्कूल‑मीडिया के जरिए “मॉडरेट इस्लाम” की नई भाषा इंट्रोड्यूस की गई, ताकि जिहादी आकर्षण धीरे‑धीरे कम हो।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या हुआ
बांग्लादेश पहले “सेक्युलर‑मुस्लिम डेमोक्रसी” की लेबल के साथ जाना जाता था, लेकिन
2005 के बम ब्लास्ट,
2010–2016 में ब्लॉगर्स, लेखकों, अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार हत्याएँ
ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों को बांग्लादेश को “इस्लामिक रैडिकलाइज़ेशन का हॉट‑स्पॉट” की तरह देखने पर मजबूर कर दिया।
अमेरिका, यूरोप और भारत ने बांग्लादेश के साथ काउंटर‑टेररिज़्म और इंटेलिजेंस सहयोग बढ़ाया, क्योंकि यहाँ से निकलने वाले जिहादी नेटवर्क दक्षिण‑पूर्व एशिया और मध्य पूर्व तक जाकर जुड़ रहे थे।
भारत और पड़ोसी क्षेत्र पर असर
बांग्लादेश की सीमा‑पार इस्लामिक रैडिकल ग्रुप्स और उनके विदेशी जिहादी नेटवर्कों के कारण भारत‑बांग्लादेश सीमा सुरक्षा संवेदनशील हो गई।
नॉर्थ‑ईस्ट भारत के राज्यों में भी अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि यहाँ घुसने वाले कट्टर आइडियोलॉजी का असर भारतीय मुस्लिम युवाओं पर भी पड़ सकता है।