01/10/2025
जिस दिन तुम्हे राजनीति अच्छी लगने लग जाएगी उस दिन तुम्हे मैं वापिस बुला लुंगा...
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी उत्तरप्रदेश में आरएसएस के प्रान्त प्रचारक थे, उन्हें संघ के द्वितीय सरसंघचालक गुरु जी ने बुलाया और कहा कि दीनदयाल जी अब आपको जनसंघ (वर्तमान बीजेपी) का काम देखना है। ये सुनकर दीनदयाल जी असहज हो गए और गुरु जी से निवेदन किया कि गुरु जी मैं राजनीतिक जीवन नही जी सकता, मेरी वृति मुझे राजनीति करने की अनुमति नही देती और मुझे राजनीति अच्छी भी नही लगती। इसलिए मैं निवेदन करता हूं कि आप मुझे यह काम न सौंपे।
तब गुरुजी का उत्तर था कि जिस दिन तुम्हे राजनीति अच्छी लगने लग जाएगी उस दिन तुम्हे मैं वापिस बुला लुंगा। बस उसी दिन से दीनदयाल जी अपने दो जोड़ी धोती कुर्ते लेकर राष्ट्रवादी राजनीति की नीव में खुद पत्थर बनने निकल गए। नेहरू केबिनेट के हिन्दू विरोध से दुखी होकर निकले श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लेकर भारत के एक राष्ट्र्वादी दल जनसंघ के निर्माण में खुद को तिल तिल गलाकर जीवन खपा कर जनसंघ जैसे दल का निर्माण कर गए, जो आज हर देशद्रोही चुनोतियो से लड़ रही है।
पूरा जीवन सादा जीवन दो जोड़ी कपड़े में जनसंघ का अध्यक्ष फटी धोती पैदल साइकल चने भूंगडे खाकर वामपंथ कोंग्रेस और मुस्लिम लीग से लड़ता रहा। ऎसे थे दीनदयाल उपाध्याय जी जो अपनी हड्डियां तक गला गए राष्ट्र निर्माण में।
दीनदयाल जी के जन्मदिवस के अवसर पर सादर नमन
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