Ujjansh People Foundation

Ujjansh People Foundation social welfare
(1)

17/05/2026
चित्र में माँ वाग्देवी की वह प्रतिमा है जिसे अंग्रेज भोजशाला से ब्रिटेन ले गए और वहां जो पूजा का विषय था उसे लोगों के लि...
16/05/2026

चित्र में माँ वाग्देवी की वह प्रतिमा है जिसे अंग्रेज भोजशाला से ब्रिटेन ले गए और वहां जो पूजा का विषय था उसे लोगों के लिए प्रदर्शनी का विषय बना दिया।

#भोजशाला मंदिर, धार

14/05/2026

गाथा मंदार की : मंथन से मन तक (भाग 11)
आज कथा बासुकीनाथ की
by मुनेश्वर (Retd IRS)
# # # # # # # # #
मंदार पर्वत से लगभग 30 km की दूरी पर समुंदर मंथन का एक सम्बन्ध पाया जाता है......जिसे बासुकीनाथ मंदिर कहते है........ शिव पुराण मे कहा गाया है कि समुन्दर मंथन मे मथनी के रूप मे मंदार पर्वत और रस्सी के रूप मे नागराज बासुकी का प्रयोग किया गाया था.......समुन्दर मंथन के बाद इसी स्थान पर थके बासुकी नाग ने शिव की आराधना की थी. ......कहते शिव ने भक्ति से ख़ुश होकर उन्हें आशीर्वाद दिया ओर उनके नाम से जग प्रसिद्धि दी वैसे ....यहाँ शिवलिंग पहले से स्थापित थी......या बासुकी नाग ने इसकी स्थापना की यह स्पष्ट नहीं है........इस मंदिर को बासुकीनाथ कहने के पीछे एक और जन कथा मिलती है....इसके अनुसार एक आदिवासी बासुकी तातमे ने यहाँ मंदिर का निर्माण करवाया था.....जब उसे वहाँ खुदाई करते समय यहाँ शिव लिंग मिट्टी के अंदर प्राप्त हुईं.....जिसके कारण इसका नाम बासुकीनाथ पड़ा था.......यह इलाका दुमका जिले मे पड़ता है और.......आज भी यह आदिवासी बहुल क्षेत्र माना जाता है....जो लोग आदिवासी को हिन्दू नहीं मानते उन्हें इस मंदिर की इस कथा पर ध्यान देना चाहिए..... ऐसे भी मोराग बुरु यानी पहाड़ के देव कैलाश पर बसने वाले शिव को ही कहते है....सिंधु घाटी सभ्यता मे पशुपति के सील का मिलना यह बताते है कि शिव आदि काल से है और आदिवासी उनके पूजक है.... खैर विषयतर न होते है. इस मंदिर का एक सम्बन्ध ज्योति लिंग देवघर से भी माना जाता है..........ऐसी मान्यता है कि कोई भी वैद्यनाथ धाम की पूजा इससे 45km दूर स्थित बासुकीनाथ की पूजा के बिना अधूरी है.........एक अध्यात्मिक सम्बन्ध है. कहते है जब रावण शिव जी को लंका ले जा रहा था.......... तब संध्या वदना के समय शिव लिंग को गड़रिया के रूप मे विष्णु को पकड़ाया शिव लिंग भारी होता है और........लिंग वही स्थापित होगया जिसे वैधयनाथ ज्योति लिंग कहतेहै उसी समय यहाँ पर भी एक........शिव लिंग स्थापित हुआ इसी कारण कुछ लोग इसे भी ज्योति लिंग मानते है........और दोनों के मध्य एक अध्यात्मिक सम्बन्ध बनाते है और दोनों की पूजा एक साथ पूजा होती है........यह कुछ उसी तरह है जैसा मध्य प्रदेश मे नर्मदा तट पर स्थित ज्योति लिंग ओम्कारेश्वर और नर्मदा के...............दूसरे छोर पर स्थापित मामालेश्वर की पूजा का सम्मलित महत्व का है. .........बाबा बासुकीनाथ को फ़ौजदारी बाबा भी कहते है मान्यता है कि यहाँ सीधी और तत्वरित सुनवाई होती है फ़ौजदारी मामले की तरह..........हमारे इलाके मे अंग देश मे यह मान्यता बहुत मान्य है यहाँ बताता चलू कि मेरे पिताजी का नाम बासुकी था.....जो सात बेटियो के बाद हुए थे इनके आशीर्वाद से हुए थे इसलिए उनका नाम बासुकी रखा गाया था.......यहाँ मंदिर कब से है कहना मुश्किल है एक मान्यता के अनुसार 16,वी सदी मे सत्य हरिश्चन्द्र के वंशज वीरभद्र राय ने कराई थी.......हालांकि यह दावा बहुत सही नहीं प्रतीत होता किसी राजा के द्वारा यह मंदिर बना हो ऐसा कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है........हाँ जनकथाओ के अनुसार वर्तमान मंदिर का निर्माण बॉसकी तातमे नामक आदिवासी ने कराया.......जो 150 साल पुराना है नागर शैली मे बना यह मंदिर है जिसके प्रांगण मे 30अन्य छोटे छोटे अन्य देवी देवता के मंदिर है..........पास मे अन्य शिव मंदिरों के सामान एक तालाब है जिसे वन गंगा कहते है पूजा से पहले यहाँ स्न्नान का विशेष महत्व है....यहाँ मनत पुरी होने पर कड़ाही प्रसाद चढ़ाने का रिवाज है.........आज के समय यहाँ टाटानगर के निवासियों विशेष कर इन्दर अग्रवाल जी व अन्य के......अथक प्रयास के बाद एक धर्मशाला बना है जिसे टाटा धर्मशाला कहा जाता है .....जहाँ रुकने ओर भोजन की उत्तम व्यवस्था है. एक तीर्थ के रूप मे एक ओर जहाँ यह देवघर के वैद्यनाथ धाम से जुडा है...ओर दूसरी ओर मंदार पर्वत से... इस मंदिर से मंथन की कथा को कितना बल मिलता है....यह विज्ञानं का तर्क न हो पर बासुकी का रज्जु के रूप मे प्रयोग ओर....समीप मे मंदिर मिलना क्या बताता है. यहाँ यह भी.......बताता चलू कि आज तक सब से बड़े सांप को विज्ञान ने नाम बासुकी का ही दिया है क्यों मुझे पता नहीं.....मुनेश्वर, सदस्य इतिहास संकलन समिति
वर्तमान निवास जमशेदपुर

12/05/2026

विदेशी यूनिवर्सिटीज में संस्कृत पर रिसर्च होने लगे हैं
भारत की प्राचीन भाषा संस्कृत आज सिर्फ धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं रही, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर प्रोग्रामिंग जैसी आधुनिक तकनीकों में भी इसकी उपयोगिता बढ़ने लगी है और इसी कारण इस भाषा पर कई विदेशी यूनिवर्सिटीज रिसर्च कर रही हैं. दुनिया की कई विदेशी यूनिवर्सिटीज में संस्कृत पर रिसर्च और पढ़ाई की मांग बढ़ रही है. इसकी वैज्ञानिक संरचना और स्पष्ट व्याकरण के कारण ही इसे “Queen of All Languages” भी कहा जाता है

12/05/2026

संस्कृत का अध्ययन याददाश्त, उच्चारण और तार्किक सोच को मजबूत करने में मदद कर सकता है. यही कारण है कि कई स्कूल अब फिर से संस्कृत शिक्षा पर जोर देने लगे हैं

06/05/2026

Address

Dhanbad

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Ujjansh People Foundation posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Ujjansh People Foundation:

Share