Nawvihaan Livelihood Foundation

Nawvihaan Livelihood Foundation Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Nawvihaan Livelihood Foundation, Dhanbad.

2013 में भारत प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में लगभग 140वें नंबर पर था। और 2026 आते आते भारत 157वें नंबर पर पहुंच गया। मतलब 12 सा...
20/05/2026

2013 में भारत प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में लगभग 140वें नंबर पर था। और 2026 आते आते भारत 157वें नंबर पर पहुंच गया। मतलब 12 साल में भारत की मीडिया की हालत ऐसी कर दी गई कि अब दुनिया हमें “आंशिक लोकतंत्र” और “डर के माहौल वाली पत्रकारिता” के उदाहरण के रूप में देखने लगी है।

पाकिस्तान 153 पर, बांग्लादेश 152 पर और भारत 157 पर। जिन देशों को टीवी पर रोज “नाकाम” बताकर चिल्लाया जाता है, मीडिया की आजादी में वो भी आगे निकल गए। यह उपलब्धि ऐसे ही नहीं मिली भाई, इसके लिए दिन रात मेहनत की गई है। लोकतंत्र का गला दबाने की मेहनत।

कभी मीडिया प्रधानमंत्री को घेरता था। अब प्रधानमंत्री मीडिया को चुनते हैं कि कौन सवाल पूछेगा और कौन चरण धोएगा।

इंदिरा गांधी से इमरजेंसी पर सवाल हुए राजीव गांधी से बोफोर्स पर सवाल हुए नरसिम्हा राव से घोटालों पर सवाल हुए अटल बिहारी वाजपेयी से कारगिल इंटेलिजेंस फेलियर पर सवाल हुए। मनमोहन सिंह को तो मीडिया ने “मौनमोहन” बोल बोलकर जिंदा आदमी का मीम बना दिया था।

2G, CWG, कोलगेट, महंगाई, आतंकवाद, हर चीज पर मीडिया रोज सरकार को काटता था। पत्रकार प्रेस कॉन्फ्रेंस में खड़े होकर सरकार की आंख में आंख डालकर सवाल पूछते थे। सरकारें नाराज होती थीं लेकिन पत्रकारों के घर ED नहीं पहुंचती थी। चैनलों के लाइसेंस का डर नहीं दिखाया जाता था। विज्ञापन बंद कराने की धमकी नहीं दी जाती थी।

अब पत्रकारिता नहीं होती, सरकारी आरती होती है देश का प्रधानमंत्री खुले प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचता है और टीवी एंकर उसके इंटरव्यू में पूछते हैं कि “आप आम काटकर खाते हैं या चूसकर?” देश बेरोजगारी में रिकॉर्ड बना रहा है, लेकिन टीवी पर बहस चल रही होती है कि किसी अभिनेता ने मंदिर में जूते पहन लिए या नहीं।

पेट्रोल 110 पार जाएगा तो एंकर बताएगा इससे राष्ट्र मजबूत होता है। गैस सिलेंडर 1200 का होगा तो बताएगा त्याग भारतीय संस्कृति है। रुपया गिरेगा तो बोलेगा विदेशी साजिश। महंगाई बढ़ेगी तो बोलेगा यह “वैश्विक घटना” है। भुखमरी आएगी तो बताएंगे उपवास शरीर के लिए लाभदायक है।

इतना बेहया मीडिया शायद इतिहास में कम ही देखा गया होगा।

2024 की रिपोर्टों के अनुसार भारत में बेरोजगारी दर युवाओं में 15 से 20 प्रतिशत के बीच घूमती रही, लेकिन टीवी पर घंटों की बहस किस पर हुई? हिंदू मुस्लिम।

देश में LPG सिलेंडर 400 से बढ़कर 1000-1200 तक पहुंच गया, लेकिन चैनलों ने जनता का गुस्सा दिखाने के बजाय “उज्ज्वला क्रांति” के पैकेज चला दिए।

2014 में डॉलर लगभग 60 रुपये था, आज 95-96 के आसपास घूमता है, लेकिन टीवी पर यह सवाल नहीं उठेगा कि अर्थव्यवस्था की असली हालत क्या है।

2023 में भारत में प्रेस पर हमले, पत्रकारों की गिरफ्तारी और इंटरनेट शटडाउन के मामलों में भारत दुनिया के सबसे खराब देशों में गिना गया। लेकिन टीवी स्क्रीन पर आपको सिर्फ पाकिस्तान, मुसलमान, मंदिर, और विपक्षी नेताओं की चीख सुनाई देगी।

न्यूज़ चैनल कम और बीजेपी आईटी सेल का एक्सटेंशन ज्यादा लगते हैं। एंकर ऐसे चीखते हैं जैसे सीमा पर अकेले चीन से युद्ध जीतकर आए हों। “डिबेट” में विपक्ष को बुलाकर 5 लोग मिलकर चिल्लाएंगे, माइक काटेंगे, अपमान करेंगे और फिर बोलेंगे लोकतंत्र जिंदा है। लोकतंत्र नहीं भाई, टीवी पर सामूहिक बदतमीजी जिंदा है।

2014 के बाद मीडिया पर कॉर्पोरेट कब्जा तेजी से बढ़ा। बड़े उद्योगपतियों ने चैनल खरीदे, विज्ञापन सरकार के हाथ में गए, और जिसके हाथ में विज्ञापन उसका संपादकीय भी उसके हाथ में।

सरकार को पता है कि अगर कैमरा कंट्रोल में है तो जनता का दिमाग कंट्रोल में है। इसलिए असली मुद्दे गायब कर दो।

बेरोजगारी गायब। शिक्षा गायब। अस्पताल गायब। किसान गायब। बस रोज नया धार्मिक तमाशा फेंको और जनता को लड़वाते रहो।

सबसे खतरनाक चीज क्या हुई पता है?
जनता को यह महसूस ही नहीं होने दिया गया कि उसका शोषण हो रहा है।
महंगा पेट्रोल भरवाओ और बोलो राष्ट्रहित। महंगी गैस खरीदवाओ और बोलो आत्मनिर्भरता।

बेरोजगारी दो और बोलो स्टार्टअप।
सवाल पूछो तो बोलो देशद्रोही।

यानी आदमी की जेब काटो और उसी से ताली भी बजवाओ। राजनीति का इससे बड़ा जादू शायद इतिहास में कम हुआ होगा।

लोकतंत्र में अदालत और मीडिया आम आदमी की आखिरी उम्मीद होते हैं। अदालत देर से न्याय दे सकती है, लेकिन मीडिया अगर बिक जाए तो जनता अंधेरे में छोड़ दी जाती है। और भारत में वही हुआ। चौथा स्तंभ अब सत्ता की गोद में बैठकर जनता को ही डांटता है।

पत्रकार सत्ता से नहीं, जनता से पूछते हैं “तुम इतने सवाल क्यों पूछ रहे हो?”

157वां नंबर सिर्फ रैंक नहीं है। यह पूरे सिस्टम का पोस्टमार्टम है। यह बताता है कि भारत में मीडिया अब खबर नहीं बेचता, नैरेटिव बेचता है।

पत्रकारिता नहीं करता, प्रचार करता है।
सवाल नहीं पूछता, आदेश पढ़ता है।

जनता टीवी पर चीखते हुए एंकर देखकर खुद को राष्ट्रवादी समझती रहती है जबकि उसकी जेब, नौकरी, भविष्य और सोच चारों तरफ से निचोड़ी जा चुकी होती है।

जिस दिन देश की मीडिया मरती है, उसी दिन लोकतंत्र ICU में भर्ती हो जाता है। और भारत का लोकतंत्र अभी वेंटिलेटर पर पड़ा है, बस टीवी एंकर उसके सामने ढोल बजाकर बोल रहे हैं “सब चंगा सी।”

02/05/2026

झुमर गीत और नृत्य जो झारखंड की प्रमुख नृत्य है, जो कोई भी उत्सव में माहौल को और उत्साहित कर देता है, उसकी एक प्रस्तुति कर्म गीत के साथ , जिसमें दस हजार महिला पुरुष एक साथ प्रस्तुति माननीय प्रधानमंत्री के समक्ष गुवहाटी स्टेडियम में दिये, उसका एक झलक का‌ आनंद प्राप्त करें, और कमेंट करें आपको कैसा लगा।



30/04/2026

मानसिक शांति के लिए धुन को‌ अवश्य एक बार सुने, छोटे छोटे बच्चियों के अपने सांस्कृतिक गीत और पारंपरिक वाद्य यंत्र के साथ तैयारी।



29/04/2026
संतोष बिना जीवन में प्रसन्नता के द्वार बंद हो जाते हैं। संतोषी जीवन में प्रतिस्पर्धा कम होती है। भविष्य सुखमय बनाने के च...
28/04/2026

संतोष बिना जीवन में प्रसन्नता के द्वार बंद हो जाते हैं। संतोषी जीवन में प्रतिस्पर्धा कम होती है। भविष्य सुखमय बनाने के चक्कर में हम वर्तमान दुःखमय बना देते हैं। जो वर्तमान में संतुष्ट हैं, उन्हे भविष्य की चिंता नहीं सताएगी। वर्तमान में जीना यानी कल की प्रतीक्षा बिना, पूरी ऊर्जा से जीना।
समय सदा वर्तमान बनकर आता है; इसलिए सामर्थ्य, निष्ठा और उत्साह से वर्तमान जियें, भविष्य स्वतः आनंदमय होगा..!!
#सर्वे भवन्तु सुखिन:...🙏

28/04/2026

जरूर सुने एकबार

Address

Dhanbad

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Nawvihaan Livelihood Foundation posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Nawvihaan Livelihood Foundation:

Share