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27/04/2026

ग्वालियर के तत्कालीन कथित शासक ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेज़ों के साथ मिलकर जनता से ग’द्दारी की, आजादी के बाद उसके वारिशों ने कई दशक तक पार्टी विशेष से सत्ता लुफ़्त उठाया और फिर एक बार राजतंत्र की तरह गद्दा’री करके दलबदलू हुआ और वर्तमान में भी सत्ता लुफ़्त ले रहा है, लेकिन अब जनता को स्टेज पर खड़ा होकर जेब से प्याज निकालकर बता रहा है की मैं मेरी गाड़ी में एसी नहीं चलाता बस जेब में एक “प्याज” रखता हूँ ताकि गर्मी से छुटकारा मिले और ये बात सुनकर सामने बैठी भीड़ ज़ोरदार तालियाँ पीट कर नेता के प्रति वफ़ादार होने का प्रमाण देती है।
प्याज दिखा कर स्टेज से ग़रीब जनता का @ # # काटने वाला उस महल में रहता है जिसके अंदर 400+ कमरें है और कमरे ही नहीं सारा परिसर सेंट्रलाइज्ड एयर कूल्ड है उसी परिसर में उनकी स्कूल भी है जो ३०० एकड़ में बनी हुई है, जो लोग टेंट में बैठ कर तालियाँ बजा रहे है वो ना तो इस स्कूल में अपने बच्चो को पढ़ा सकते है ना नौकरी कर सकते है लेकिन उनके नेता ने ऐतिहासिक बात बोल दी कि देखो मैं तो प्याज रखता हूँ और गाड़ी में भी ऐसी भी नहीं चलाता बस इस से ज़्यादा हमें और चाहिए भी क्या? खैर! बजाते रहो ‘तालियाँ’

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27/04/2026

इतिहास में राजा बनने का कोई निश्चित पैटर्न नहीं दिखाई पड़ता. शुरुआत में कुछ कच्चे व्यापारिक मार्ग होते थे जिनसे होकर लोग एक जगह से दूसरी जगह की यात्राएं किया करते थे. इन यात्राओं का उद्देश्य व्यापारिक, धार्मिक या कभी कभी पर्यटन भी होता था. उस समय कुछ महत्वाकांक्षी लुटेरे सौ पचास मजबूत और लड़ाकू लोगों को लेकर इनमें से किसी मार्ग पर बैठ जाते थे और वहां से आने जाने वालों को जबरदस्ती लूटना शुरू कर देते थे. इस तरह महज लूटना ही जारी रखते तो कुछ दिनों बाद उधर से आवागमन बंद हो जाता और फिर वह किसे लूटते? तो होता यूं था कि जिनको लूटा जाता था उनको लूटने का व्यवस्थित तरीका अपनाया जाने लगा. लूट की एक निश्चित धनराशि तय कर दी गई और इस निश्चित धनराशि का नाम कर या टैक्स रख दिया गया. अब जनता को भी पता था कि लूटने वाला एक निश्चित धनराशि ही लूटेगा और बदले में कुछ दूरी तक, जिसे उस लुटेरे का राज्य कहा जाता था, दुबारा न लूटे जाने की गारंटी होने लगी.

इस तरह लूटे गए धन से किसी स्थान विशेष में लुटेरों के सरगना के लिए ऐशो आराम की सुविधाओं से युक्त एक महल बना दिया जाता था. महल में रहने वाला प्रधान लुटेरा बाकी छोटे छोटे लुटेरों को क्षेत्रवार तैनात कर देता था जिससे लूट की पूरी व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके. इस पूरे लूटतंत्र पर कब्जे के लिए दूसरे लुटेरों के साथ वर्चस्व की लड़ाई बीच बीच में होती रहती थी जिसमें मार काट मचती थी जिसे युद्ध कहा जाता था. फिर जो विजयी होता था, लूट का पूरा तंत्र उसका हो जाता था. यह सिलसिला राजतंत्र कहा जाने लगा.

जनता लूट के इस पूरे तंत्र से विद्रोह न कर दे इसके लिए धर्म का सहारा लिया गया. कुछ पुरोहितों और चारणों-भाटों को लूट में से कुछ हिस्सा देकर अपनी प्रशस्ति गवाई जाती थी और मुख्य लुटेरे, जिसे राजा कहा जाता था, को ईश्वर का अवतार बता कर जनता को भ्रमित रखा जाता था. मुख्य लुटेरों के नाम पर कहानियां गढ़ कर उन्हें कभी सूर्य नाम के तारे या चंद्रमा नाम के उपग्रह का वंशज बता दिया जाता था तो कभी लुटेरे को अत्यंत प्राचीनकाल से ही राजा यानी लुटेरा बताने के लिए फर्जी इतिहास गढ़ा जाता था, ताम्रपत्र तैयार करवाए जाते थे, चारणों भाटों से प्रशस्ति गवाई जाती थी. इस तरह लूट का एक पूरा तंत्र विकसित हो जाता था.

उस दौर में आम जनता के जीवन में राज्य का हस्तक्षेप उस तरह नहीं होता था जिस तरह आज होता है. लोग अपने जीवन में व्यस्त और मस्त थे. राजा कौन बनता है, इससे बहुत ज्यादा सरोकार नहीं होता था. जनता को तो सिर्फ टैक्स देना था. राजा कोई भी होता, लोकतांत्रिक व्यवस्था की तरह जनता के प्रति कोई जवाबदेही तो थी नहीं. थोड़ा कम या ज्यादा करके सभी राजा अपने ऐशोआराम का ही प्रबंध करते थे. जनता के लिए देश की सीमा 100-200 मील तक ही होती थी. इसके बाद देश ही बदल जाता था. जीने के लिए एक देश अच्छा नहीं तो दूसरे देश चले जाया करते थे. उनके लिए देश की सीमा मायने नहीं रखती.

कई कई सदियों तक राजतंत्र चला ही इसलिए कि राज्य का लोगों के जीवन पर कोई हस्तक्षेप नहीं था. आज के लोकतंत्र में जितना हस्तक्षेप है उसका एक चौथाई भी तब रहा होता तो जनता राजा को पटक-पटक कर मारती.

सोचिए, राजतंत्र में जितने भी राजे रजवाड़े थे वह काम क्या करते थे जिससे उनके पास बड़े बड़े महल होते थे? क्या वह वास्तुकार थे? क्या वह राजगीर थे? उनके पास बड़े बड़े महल बनाने और ऐशोआराम के लिए धन कहाँ से आता था? क्या वह व्यापारी थे? उनके पास खाने के लिए अच्छे से अच्छा भोजन, फल, दूध घी कहाँ से आता था? क्या वह किसान थे? क्या वह पशुपालन करते थे? क्या वह बागवानी करते थे? राजाओं, रानियों, राजकुमारों के पास सुगम यातायात के लिए बढ़िया से बढ़िया घोड़े और रथ कहाँ से आते थे? दान करके दानवीर कहलाने के लिए राजाओं के पास धन कहाँ से आता था? सेवा करने के लिए नौकर चाकर कहाँ से आते थे?

जाहिर सी बात है कि राजे रजवाड़े यह सब कुछ जनता के दिए टैक्स से करते थे. जो अपने अस्त्र शस्त्र के जोर से लोगों को लूट ले, जनता के दिए धन से महल बनवाए और ऐश करे वह वीर और पराक्रमी नहीं, लुटेरा कहलाता है. सच तो यह है कि मनुष्य इस धरती को चाहे जितना खींचतान ले, एक इंच भी जमीन नहीं बढ़ा सकता. यह सब प्राकृतिक है. फिर जमीन के किसी हिस्से पर कब्जा करके वहां रहने वाली जनता से उगाही करना और उसी में से थोड़ा सा दान करके दानवीर बन लेना कोई महानता वहानता नहीं है.

अस्त्र शस्त्र के बल पर दूसरों की हत्या करके उनका धन छीन लेना हत्या, लूट और गुंडागर्दी जैसा अपराध है. सच तो यह है कि अपने उत्पादक श्रम से अर्जित धन का उपभोग ही व्यक्ति का जायज हक़ है, बाकी सब लूट है।
Via:Jat Ethnic

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26/04/2026

समझ नहीं आ रहा है गर्मी सहने की हमारी कैपेसिटी कमजोर हो गई या गर्मी की इंटेंसिटी ही बढ़ गई? बचपन में तो हम लोग दिन में एक दो बजे तक गांव के ग्राउंड पर खेलते रहते थे ना कोई ठंडा पानी ना कोई कोल्डड्रिंक लेकिन आज हालात ये है कि दिन में 11 बजे खुले में बाहर निकला मुश्किल हो रहा है!🙃

26/04/2026

सांसद सयानी घोष जैसी वक्ता ने चुनावी पासा पलट दिया

25/04/2026

Men are happiest when they are improving themselves physically, mentally, and financially.

An idle man is a depressed man.

25/04/2026

सेंट्रल मार्केट मेरठ में गल्ले पर बैठे अंध भक्त पिछले कई दिनों से लगातार संघी पार्टी व आकाओं को गालियाँ दे रहे थे और छाती पीट प्रदर्शन करते हुए कह रहे थे फलानी पार्टी को वोट देकर गलती कर दी आगे से नहीं करेंगे क्यों की कई दशकों से इन लोगो ने अवैध कब्जे किए हुए थे वो बुल्डोजर से तोड़ दिए गए लेकिन इतने दिन से गायब लोकल सांसद अरुण गोविल मौके पर पहुंचा तो भक्त लोग ग़ुलामों की तरह बिछ गए।
और गा रहे हैं “मेरे घर राम आए हैं”। मजे की बात अरुण गोविल उनको रोक भी नहीं रहा, कुर्सी पर बैठ के फुल फीलिंग ले रहा है।😹

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24/04/2026

उधर चुनाव चल रहे है इधर दिल्ली में अलग ही चल रहा है!
मम्माज बॉयज़ राघव चड्ढा को आप पार्टी ने छोटी उम्र में सांसद बना दिया और तमाम बेनिफिट्स भी दिए, लेकिन इसने आप पार्टी के 7 सांसदों के साथ मिलकर आज बीजेपी जॉइन करने का ऐलान कर दिया। दस दिन पहले तक जिसके घर व्यापार पर ईडी की छापेमारी चल रही थी वह अशोक मित्तल भी इसके साथ जा रहा है, मजे की बात इस मित्तल को AAP ने राज्यसभा में डिप्टी की कुर्सी दी थी चड्ढा को हटा कर 😹
एक बात तय है मूल संघियों का अल्टीमेट गोल यही है ये लोग अंत में नागपुरी अड्डे पर ही जाते है कुछ ईडी सीबीआई के ख़ौफ़ से और कुछ पुश्तेंनी चली आ रही गद्दाri से।
खैर! हमें क्या लेना।

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24/04/2026

कुछ दिन में आपको गोदी मीडिया बताएगा की अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की क़ीमत में भारी उछाल आ गया है इसलिए आपको पेट्रोल डीजल पर इतना-इतना तो देना ही पड़ेगा, लेकिन ये नहीं बताएगा की जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की क़ीमत बिल्कुल नीचे थी तब जनता को सस्ता पेट्रोल डीजल क्यों नहीं मिला था?
ये सब ज्ञान आपको चुनाव खत्म होते ही पाँच मई के आस पास सुनने को मिलेगा तब तक अपनी पॉकेट को टाइट करके रखो।

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23/04/2026

🔺साल 2024 में जामनगर में सरकार के सेठ के बेटे की प्री वेडिंग समारोह में इंडियन एयरफोर्स के जामनगर वायुसेना अड्डे पर 24 घंटे प्राइवेट विमानों की अनुमति मिली और ये चार पाँच दिन तक चलता रहा क्यों भाई कोई युद्ध चल रहा था जो IAF के प्रेमिसेस का उपयोग प्राइवेट कार्य के लिए किया गया?
🔺नागपुर के एक जातिगत संगठन हेड को जेड+ सिक्योरिटी मिली हुई है, किस संवैधानिक पद पर है ये आदमी? राष्ट्र के लिए क्या योगदान है? जो हमारे टैक्स के पैसे से जेड प्लस सिक्योरिटी दी जा रही है?
🔺नोटबंदी के बाद 2016 में एथनॉल वाले वैज्ञानिक की बेटी शादी में सरकारी सिक्योरिटी तैनात की गई, क्यों भाई ? जनता के टैक्स के पैसे को इसलिए उड़ाया जा रहा था की मंत्री के बेटी की शादी है?
🔺एक नचनिया फ़ोरेन में पार्टी करते हुए बाथ टब में डूब कर चल बसी उसको इंडिया लाकर राष्ट्र ध्वज ओढ़ाया गया, क्यों भाई युद्ध में शहीद हुई थी ?
🛑दूसरी तरफ़ कई राज्यों के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक जी को अंतिम समय में राजकीय सम्मान नहीं दिया गया जिसके वो हकदार थे!
॰आज ये सब इसलिए लिख रहे है क्यों की पिछले दिनों राजस्थान में एक बीजेपी नेता की बेटी की शादी थी जो जाट समाज से आते है उन्होंने दो चार दमकल लगाकर मिट्टी पर पानी डलवा दिया ताकि शादी में धूल मिट्टी से बचाव हो सके बस फिर क्या था सम्पूर्ण गोदी मीडिया हाय तौबा करने लग गया देखो जैसे एक मंत्री ने बेटी की शादी में सरकारी संसाधन लगा दिए और हूँ हा करने वाला गोदी मीडिया उसी मंत्री का चरण चुम्बन भी करता रहता है ताकि समय से सरकारी विज्ञापन और तमाम लाभ मिलते रहे, लेकिन उसके सिर्फ़ जाट होने के कारण अपने मालिक को ख़ुश करने के लिए कई घंटों तक गोदी मीडिया इसी पर डिबेट कर बैठा। खैर! हमें इन से कोई सरोकार नहीं मंत्री उनका, गोदी मीडिया उनका एक दूसरे को कैसे भी लताड़े लेकिन यार किसी के जाट होने मात्र से डिबेट के नाम पर मुर्गा लड़ाई बंद करो।

गोदी मीडिया को सवाल पूछने थे कि देश की सबसे सुरक्षित बताए जाने वाली रिफाइनरी में आग लग गई कितने सौ करोड़ का नुकसान हुआ?
घटना के समय ड्यूटी पर तैनात इंजीनियर्स के नाम सार्वजनिक करने चाहिए थे की कौन लोग है जो जातिगत सेटिंग व सत्ता लोलूप होने के कारण बिना मेरिट के रिफाइनरी में काम कर रहे है?
किसी व्यक्ति की सनक के कारण रिफाइनरी का तीसरी बार उद्घाटन करने के तामझाम पर जो हज़ारों करोड़ फूंक दिए वो किस खजाने से आए थे?
🔺देश को कौन लूट रहा है हम सब अच्छे से समझते है🔺

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बीजेपी का एक सड़कछाप विधायक आईपीएस आयुष जाखड़ को धमकी दे रहा है, इसको ध्यान रखना चाहिए कानून काम करेगा उस दिन इसको छुपने...
22/04/2026

बीजेपी का एक सड़कछाप विधायक आईपीएस आयुष जाखड़ को धमकी दे रहा है, इसको ध्यान रखना चाहिए कानून काम करेगा उस दिन इसको छुपने की जगह नसीब नहीं होगी।

22/04/2026

जिस हिसाब से चुनाव में असली मुद्दों पर बहस ना होकर झाल मुड़ी और एक किलो ज़्यादा मछली खाने का स्टेज से जो अनाउंसमेंट हो रहा है और इन बातों पर खी खी और तालियाँ पीटने वालो को देख कर लग रहा है आपके उच्च शिक्षित बच्चे मज़दूर ही बनेंगे और पाँचवी फेल राष्ट्रखादी अपने बच्चो को एथेनॉल की कम्पनियों के मालिक बनायेंगे, पत्नियों के नाम पर दुबई में अरबों का निवेश करेंगे, क्रिकेट संघ के अध्यक्ष बनायेंगे, विदेशों में शेखों को साथ बिजनस करेंगे और आप झाल मुड़ी में खुश रहना😹

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