हिंदी भवन

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हिंदी भवन, समस्त भारतीय भाषाओं के साथ हिंदी के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित संस्था है, जो भारत की विभिन्न भाषाओं के बीच सामंजस्य स्थापित कर उसकी राष्ट्रीय, भावनात्मक एवं सांस्कृतिक एकता को अक्षुण्ण रखने के लिए कृतसंकल्प है।

हिंदी भवन संवाद का नवीन अंक शीघ्र हीइस अंक में विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर के बहुआयामी साहित्यिक व्यक्तित्व पर केंद्रित व...
04/06/2026

हिंदी भवन संवाद का नवीन अंक शीघ्र ही
इस अंक में विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर के बहुआयामी साहित्यिक व्यक्तित्व पर केंद्रित विशेष सामग्री प्रस्तुत की जा रही है। उनकी कालजयी कविताओं, कहानियों और उपन्यासों के साथ-साथ उनके शिक्षा-दर्शन, मानवीय चिंतन और रचनात्मक दृष्टि पर भी सारगर्भित लेख शामिल हैं।

साथ ही हिंदी कविता के विशिष्ट स्वर मंगलेश डबराल, प्रकृति और मानवीय संवेदना के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत, तथा हास्य-व्यंग्य की उज्ज्वल परंपरा के प्रतिनिधि रचनाकार पंडित गोपाल प्रसाद व्यास पर केंद्रित सामग्री भी इस अंक की विशेष आकर्षण होगी।

यह अंक केवल साहित्य के अध्ययन का माध्यम नहीं, बल्कि उन रचनात्मक स्रोतों तक पहुँचने का एक प्रयास है, जहाँ से भाषा अपना सौंदर्य, संवेदना अपनी गहराई और जीवन अपनी सार्थकता प्राप्त करता है।

आप सभी साहित्य-प्रेमियों का स्वागत है इस नई साहित्यिक यात्रा में।

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हिंदी हास्य-व्यंग्य की अमूल्य परंपरा के अप्रतिम रचनाकार के. पी. सक्सेना जी की यह दुर्लभ प्रस्तुति आपके लिए साझा कर रहे ह...
04/06/2026

हिंदी हास्य-व्यंग्य की अमूल्य परंपरा के अप्रतिम रचनाकार के. पी. सक्सेना जी की यह दुर्लभ प्रस्तुति आपके लिए साझा कर रहे हैं।
यदि आपको यह वीडियो पसंद आए तो कृपया Like, Share और Subscribe अवश्य करें।

#केपी_सक्सेना

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#कवि_सम्मेलन
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हिंदी हास्य-व्यंग्य की अमूल्य परंपरा के अप्रतिम रचनाकार के. पी. सक्...

04/06/2026

"अपने शरीर के साथ-साथ अपना सिर उठाओ — यही स्वतंत्रता का पहला पाठ है।"
"उठाओ, मेरी बच्ची,
अपने शरीर के साथ-साथ अपना सिर।
लंबी लड़ाई है
और सैनिकों में हैं जो सब पुरुष हैं।"

यह केवल एक कविता की पंक्ति नहीं, बल्कि स्त्री की स्वतंत्र पहचान, आत्मगौरव और संघर्षशीलता का उद्घोष है।

रघुवीर सहाय ने अपनी कविताओं में समाज की विसंगतियों, सत्ता के अहंकार और मनुष्य की अस्मिता के प्रश्नों को गहरी संवेदना के साथ उठाया। यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि सम्मान केवल अस्तित्व का नहीं, बल्कि विचार और आत्मविश्वास का भी होना चाहिए।

आज भी जब समानता और अधिकारों की लड़ाई जारी है, तब यह कविता नई पीढ़ी को साहस, जागरूकता और आत्मसम्मान का संदेश देती है।

शब्दों के इस सजग प्रहरी को नमन।

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https://youtube.com/shorts/qneGbAInvA0के. पी. सक्सेना का अद्भुत रचना-पाठ | व्यंग्यश्री सम्मान समारोह | हिंदी भवन | 13 फर...
03/06/2026

https://youtube.com/shorts/qneGbAInvA0
के. पी. सक्सेना का अद्भुत रचना-पाठ | व्यंग्यश्री सम्मान समारोह | हिंदी भवन | 13 फरवरी 2006

हिंदी हास्य-व्यंग्य की गौरवशाली परंपरा के दो महान हस्ताक्षरों—पंडित...

03/06/2026

"ढीली इस जीवन की कमान कसनी है।"
— शमशेर बहादुर सिंह

शमशेर बहादुर सिंह की कविता हमें याद दिलाती है कि जीवन एक सतत साधना है। अपनी चेतना, अपने विचार और अपने संकल्प को निरंतर धार देना ही सृजन और विकास का मार्ग है।

आज के व्यस्त और विचलित समय में यह पंक्ति हमें आत्मानुशासन, जागरूकता और कर्मनिष्ठा का संदेश देती है।

🌹 हिंदी कविता के इस विलक्षण शिल्पी को नमन।

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02/06/2026

"जिस तरह 'सेलर' में शराब बरसों 'मेच्योर' होती रहती है, इस तरह छोटी-छोटी घटनाएँ बरसों दिमाग में मेच्योर होती रहती हैं। उन्हें फिर लिपिबद्ध करने में पुरानी शराब का-सा नशा हासिल होता है।"

— मोहन राकेश

एक सच्चा रचनाकार घटनाओं को केवल देखता नहीं, उन्हें जीता है। जीवन की छोटी-छोटी अनुभूतियाँ, स्मृतियाँ और क्षण समय की तहों में परिपक्व होते रहते हैं। जब वे शब्दों का रूप लेते हैं, तब उनमें अनुभव की वह गहराई होती है जो पाठक के मन को लंबे समय तक बाँधे रखती है।

शायद इसी कारण महान साहित्य तत्काल नहीं लिखा जाता, वह जीवन के भीतर धीरे-धीरे पकता है।

🌹 शब्दों के इस जादूगर मोहन राकेश को नमन।

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https://www.youtube.com/shorts/qneGbAInvA0के. पी. सक्सेना का अद्भुत रचना-पाठ | व्यंग्यश्री सम्मान समारोह | हिंदी भवन13 फ...
02/06/2026

https://www.youtube.com/shorts/qneGbAInvA0
के. पी. सक्सेना का अद्भुत रचना-पाठ | व्यंग्यश्री सम्मान समारोह | हिंदी भवन

13 फरवरी 2006 को हिंदी भवन में आयोजित पंडित गोपाल प्रसाद व्यास जयंती समारोह के अवसर पर "व्यंग्यश्री सम्मान" से अलंकृत उत्सव पुरुष के. पी. सक्सेना ने अपने विशिष्ट अंदाज़ में रचना-पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया था।

हास्य, व्यंग्य, लोकभाषा और जीवन की सहज अनुभूतियों को शब्द देने वाले के. पी. सक्सेना हिंदी साहित्य और मंचीय परंपरा के ऐसे रचनाकार हैं, जिनकी प्रस्तुतियाँ आज भी उतनी ही ताज़ा और प्रासंगिक प्रतीत होती हैं।

यह वीडियो हिंदी भवन के साहित्यिक अभिलेखागार की एक महत्वपूर्ण धरोहर है।

यदि आपको हिंदी साहित्य, कवि सम्मेलन और हास्य-व्यंग्य की परंपरा पसंद है तो वीडियो को Like, Share और Subscribe अवश्य करें।

#केपी_सक्सेना

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#साहित्यिक_धरोहर



हिंदी हास्य-व्यंग्य की गौरवशाली परंपरा के दो महान हस्ताक्षरों—पंडित...

02/06/2026

भारतीय सिनेमा के महान शोमैन राज कपूर की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। 🌹

राज कपूर केवल एक अभिनेता या फिल्मकार नहीं थे, बल्कि भारतीय सिनेमा की आत्मा थे। उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से आम आदमी के सपनों, संघर्षों, प्रेम और सामाजिक सरोकारों को बड़े पर्दे पर जीवंत किया।

आवारा, श्री 420, संगम, मेरा नाम जोकर और राम तेरी गंगा मैली जैसी कालजयी फिल्मों ने उन्हें विश्व सिनेमा में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनकी कला में मनोरंजन के साथ मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक संदेशों का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।

राज कपूर ने भारतीय सिनेमा को केवल लोकप्रियता ही नहीं, बल्कि एक ऐसी सांस्कृतिक पहचान भी दी जो आज भी करोड़ों दर्शकों के हृदय में जीवित है।

उनकी स्मृति को शत-शत नमन।
राज कपूर भले ही हमारे बीच नहीं हैं, किंतु उनकी फिल्में, उनके गीत और उनका सृजन भारतीय सिनेमा के इतिहास में सदैव अमर रहेंगे। 💐

#राजकपूर #भारतीय_सिनेमा #श्रद्धांजलि

ये पंक्तियाँ बेकल उत्साही जी की हैं। व्यवस्था पर सीधा प्रहार। क्योंकि ये हमें आईना दिखाती है। हम-आप चौराहे से गुजर जाते ...
01/06/2026

ये पंक्तियाँ बेकल उत्साही जी की हैं। व्यवस्था पर सीधा प्रहार। क्योंकि ये हमें आईना दिखाती है। हम-आप चौराहे से गुजर जाते हैं, पर सड़क पर पड़ी "लाश" सिर्फ एक शरीर नहीं है। वो पूरी व्यवस्था की नाकामी है। और "लिखा था" का मतलब है कि मरने वाला भी जाते-जाते अपना बयान दर्ज कर गया: कि उसे जहर पता था, पर भूख ज्यादा बड़ी थी।
#भूख_में_ज़हरीली_रोटी_भी_मीठी_लगती_है #बेकलउत्साही #सड़क #शायरी #गरीबी #हिंदीलिटरेचर
#भूख_में_ज़हरीली_रोटी
#बेकल_उत्साही
#सड़क_का_सच
#गरीबी_की_शायरी
#रोटी_का_सवाल
#भूख_का_सच
#जंतर_मंतर_से_जमीन_तक

कैफ़ी आज़मी उन विरले रचनाकारों में थे जिन्होंने कविता को केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं रहने दिया, बल्कि उसे समाज परिवर...
01/06/2026

कैफ़ी आज़मी उन विरले रचनाकारों में थे जिन्होंने कविता को केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं रहने दिया, बल्कि उसे समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया। उनकी शायरी में प्रेम की कोमलता भी है और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का साहस भी। वे उन कवियों में थे जिनके शब्द किताबों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि जनजीवन की धड़कनों में बस गए।




#इंकलाब_की_आवाज़
#मोहब्बत_और_प्रतिबद्धता

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