श्रमिक वंचित वर्ग संगठन

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श्रमिक वंचित वर्ग संगठन श्रमिक वंचित वर्ग
को षड्यंत्रकारियों और
वोटों के दलालों से बचाना है।

25/04/2026

साथियों भाजपा पार्टी की सरकार का एजेंडा हमेशा आपस में लड़वाने का रहा है। एसा की काम उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री। योगी आदित्यनाथ जी एक सासनादेश लागू करके बसोर बांसफोड़ धरकार समाज को आपस लड़वा दिया। और हमारे नासमझ नेता लोग जातिसूचक शब्द का हवाला देते हुए खूब महाभारत कर रहे हैं। जबकि सब नेताओं मिलकर फरवरी 2024 को लागू किए गए शासनादेश जिसमें बसोर बांसफोड़ धरकार समाज को आवास देने के लिए सरकार द्वारा किए गए वादे को पूरा करने के वाबद आवाज उठानी चाहिए थी लेकिन नहीं वह तो मैं खाऊं मैं खाऊं वाले खेल को खेलने में लगे हैं। और जो भी सामाजिक कार्यकर्ता या राजनैतिक प्रतिनिधि सरकार को सरकार की ही कही बात याद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं यह तथाकथित अंगुआकार नेताओं को नागवार गुजर रहे हैं। क्योंकि उन्हें सत्ता पक्ष से उनकी उम्मीद टूटने का खतरा मंडरा रहा है इसलिए यह लोग सामाजिक कार्यकर्ता, किसान मजदूर विकलांग एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवान दास अहिरवार जी को और सपा सांसद नारायण दास अहिरवार जी को टारगेट करके उनका विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और तो और बसोर बिरादरी के लीडर करन बरार को भी बेइज्जत करने में लगे हैं क्योंकि करने बरार बसोर बांसफोड़ धरकार समाज के वजूद के लिए भगवान दास अहिरवार जी के साथ मिलकर आवाज उठा रहे हैं इसलिए इन बिरादरियों के तथाकथित अंगुआकार नेताओं को अभी भी समझ में आ जाए तो बहुत अच्छा होगा नहीं तो यह लोग समाज से अलग-थलग पड़ जाएंगे।

05/04/2026
02/04/2026
17/07/2023

देश के लिए गर्व का पल...
14 जुलाई 2023 को दोपहर 2:30 बजे चंद्रयान 3 लांच करेगा ISRO...

जय हिन्द!!🙏🇮🇳

17/07/2023
12/07/2023

ज्योति मौर्या को तो बहुत viral किया….✍🏽
इस नारी को भी viral करो।
उत्तराखंड की पहली महिला टैक्सी ड्राइवर: पति हुए बीमार तो डबल MA, LLB कर चुकी रेखा ने थामा कार का स्‍टेयरिंग, टैक्सी चला कर कर रही परिवार का पालन पोषण...
हमे गर्व है इस महिला पर 🙏

10/07/2023

एक बार 94 साल के एक बूढ़े व्यक्ति को मकान मालिक ने किराया न दे पाने के कारण उसे मकान से निकाल दिया। बूढ़े व्यक्ति के पास एक पुराना बिस्तर, कुछ एल्युमीनियम के बर्तन, एक प्लास्टिक की बाल्टी और एक मग आदि के अलावा शायद ही कोई और सामान था। बूढ़े ने मालिक से किराया देने के लिए कुछ समय देने का अनुरोध किया। पड़ोसियों को भी बूढ़े आदमी पर दया आयी और उनके कहने पर मकान मालिक को किराए का भुगतान करने के लिए उस बूढ़े आदमी को कुछ दिनों की मोहलत देने के लिए मना लिया।

वह बूढ़ा आदमी अपना सामान अंदर ले गया। रास्ते से गुजर रहे एक पत्रकार ने रुक कर यह सारा नजारा देखा। उसने सोचा कि यह मामला उसके समाचार पत्र में प्रकाशित करने के लिए उपयोगी होगा। उसने एक शीर्षक भी सोच लिया,
”क्रूर मकान मालिक, बूढ़े को पैसे के लिए किराए के घर से बाहर निकाल देता है।”

फिर उसने किराएदार बूढ़े की और किराए के घर की कुछ तस्वीरें भी ले लीं।
पत्रकार ने जाकर अपने प्रेस मालिक को इस घटना के बारे में बताया। प्रेस के मालिक ने तस्वीरों को देखा और हैरान रह गए। उन्होंने पत्रकार से पूछा, कि क्या वह उस बूढ़े आदमी को जानता है?
पत्रकार ने कहा, नहीं।
अगले दिन अखबार के पहले पन्ने पर बड़ी खबर छपी। शीर्षक था,
”भारत के पूर्व प्रधान मंत्री गुलजारीलाल नंदा एक दयनीय जीवन जी रहे हैं”।
खबर में आगे लिखा था कि कैसे पूर्व प्रधान मंत्री किराया नहीं दे पाने के कारण कैसे उन्हें घर से बाहर निकाल दिया गया।
टिप्पणी की थी कि आजकल फ्रेशर भी खूब पैसा कमा लेते हैं। जबकि एक व्यक्ति जो दो बार पूर्व प्रधान मंत्री रह चुका है और लंबे समय तक केंद्रीय मंत्री भी रहा है, उसके पास अपना ख़ुद का घर भी नहीं??
दरअसल गुलजारीलाल नंदा को वह स्वतंत्रता सेनानी होने के कारण रु. 500/- प्रति माह भत्ता मिलता था। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इस पैसे को भी अस्वीकार कर दिया था, कि उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के भत्ते के लिए स्वतंत्रता की लड़ाई नहीं लड़ी। बाद में दोस्तों ने उसे यह स्वीकार करने के लिए विवश कर दिया कि उनके पास जीवन यापन का अन्य कोई स्रोत नहीं है। अतः वो इसी पैसों से वह अपना किराया देकर गुजारा करते थे।

अगले दिन तत्कालीन प्रधान मंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों को वाहनों के बेड़े के साथ उनके घर भेजा। इतने वीआइपी वाहनों के बेड़े को देखकर मकान मालिक दंग रह गया। तब जाकर उसे पता चला कि उसका किराएदार कोई और नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री गुलजारीलाल नंदा जी हैं जो दो दो बार भारत के पूर्व प्रधान मंत्री रह चुके हैं।

मकान मालिक अपने दुर्व्यवहार के लिए तुरंत गुलजारीलाल नंदा जी के चरणों में झुक गया। अधिकारियों और वीआईपीयों ने गुलजारीलाल नंदा से सरकारी आवास और अन्य सुविधाएं को स्वीकार करने का अनुरोध किया। श्री गुलजारीलाल नंदा ने इस बुढ़ापे में ऐसी सुविधाओं का क्या काम, यह कह कर उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

और अंतिम श्वास तक वे एक सामान्य नागरिक की तरह, एक सच्चे स्वतंत्रता सेनानी बन कर ही रहे। 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी व एच डी देवगौड़ा के मिलेजुले प्रयासो से उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
पिछले 10 जून को उनकी 26 वीं पुण्यतिथि थी, पर शायद किसी व्यक्ति को स्मरण रहा हो। 😥

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