Akhil Bhartiya Patrakaar Suraksha Samiti ABPSS

Akhil Bhartiya Patrakaar Suraksha Samiti ABPSS पत्रकारों और मानवाधिकार रक्षकों की सुरक्षा के लिए समर्पित राष्ट्रीय संगठन।

05/10/2026

सोशल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक महिला पत्रकार की शिकायत और एफआईआर की मांग को लेकर थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहे पत्रकारों व प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने बलपूर्वक हिरासत में लिया

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई मेंपत्रकार उत्कर्ष गौर को हिरासत में लिए जाने का भी दावा...

लोकतंत्र सशक्त कैसे होगा जब पत्रकार ही दमनकारी नीतियों का शिकार बन रहा हो - उठो जागो पत्रकार सुरक्षा कानून के लिए एकजुट हो जाओ यही हमारा नारा है यही हमारा लक्ष्य -

Akhil Bhartiya Patrakaar Suraksha Samiti ABPSS

उत्तराखंड क्रांति दल में एक बार फिर संगठन और उसके ही एक प्रमुख चेहरे के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। केंद्रीय अनुशासन...
29/08/2026

उत्तराखंड क्रांति दल में एक बार फिर संगठन और उसके ही एक प्रमुख चेहरे के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। केंद्रीय अनुशासन समिति ने सर्किट हाउस, पौड़ी गढ़वाल निवासी आशुतोष नेगी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए **6 वर्ष के लिए निष्कासित** कर दिया है। 27 अगस्त 2026 को जारी पत्र में पार्टी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ कथित रूप से भ्रामक और तथ्यहीन बयानबाजी को कार्रवाई की मुख्य वजह बताया है।

लेकिन यह सिर्फ एक निष्कासन का मामला नहीं है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब उत्तराखंड की राजनीति चुनावी मोड में प्रवेश कर चुकी है और यूकेडी जैसे राज्य आंदोलन से निकले दल के सामने अपने संगठन और जनाधार को मजबूत करने की बड़ी चुनौती है।

पार्टी के पत्र के मुताबिक आशुतोष नेगी को पहले भी 9 जुलाई को नोटिस दिया गया था। 17 जुलाई को उनके जवाब का उल्लेख है। इसके बाद 22 अगस्त को दोबारा स्पष्टीकरण मांगा गया और पार्टी का दावा है कि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। अनुशासन समिति ने यह भी कहा कि उन्हें अपने व्यवहार में सुधार के पर्याप्त अवसर दिए गए, लेकिन इसके बावजूद कथित अनुशासनहीन गतिविधियां जारी रहीं।

सबसे गंभीर बात यह है कि पार्टी ने अपने आदेश में आशुतोष नेगी के आचरण को संगठन को चुनावी वर्ष में नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से जोड़ते हुए गंभीर टिप्पणी की है। साथ ही, निष्कासन अवधि में यूकेडी के नाम, झंडे, चुनाव चिन्ह या किसी अधिकृत पद का इस्तेमाल न करने का निर्देश भी दिया गया है।

अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आशुतोष नेगी को क्यों निकाला गया।

बड़ा सवाल यह है कि **चुनाव से ठीक पहले यूकेडी अपने ही सक्रिय चेहरों के साथ किस तरह का राजनीतिक रास्ता चुन रही है?**

और दूसरा सवाल—क्या यह कार्रवाई संगठनात्मक अनुशासन को मजबूत करेगी या पार्टी के भीतर चल रहे पुराने मतभेदों को और गहरा करेगी?

आशुतोष नेगी का पक्ष इस पूरे विवाद को समझने के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना पार्टी का आधिकारिक आदेश।

क्योंकि राजनीति में निष्कासन एक प्रशासनिक फैसला हो सकता है, लेकिन उसका असर अक्सर संगठन की जमीन पर दिखाई देता है।

**उत्तराखंड की जनता अब सिर्फ फैसला नहीं देख रही… वह यह भी देख रही है कि इस फैसले के बाद यूकेडी की राजनीति किस दिशा में जाती है।**

#उत्तराखंडक्रांतिदल #आशुतोषनेगी #उत्तराखंड_राजनीति

यह सवाल सिर्फ पत्रकारों का नहीं —यह हर उस नागरिक का सवाल है जो चाहता है कि उसके इलाके की सच्ची खबर सामने आए। जो चाहता है...
21/08/2026

यह सवाल सिर्फ पत्रकारों का नहीं —
यह हर उस नागरिक का सवाल है जो चाहता है कि उसके इलाके की सच्ची खबर सामने आए। जो चाहता है कि भ्रष्टाचार उजागर हो। जो चाहता है कि सत्ता से निडर होकर जवाब माँगा जाए।

अगर आप मानते हैं कि **पत्रकार सुरक्षा कानून ज़रूरी है —
तो इस खबर को शेयर करें, इस अभियान को आगे बढ़ाएं।

क्योंकि यह अभियान तब सफल होगा —
जब पत्रकार नहीं, पूरा समाज इसकी माँग उठाएगा।

सवाल यह नहीं कि पत्रकार ज़िंदा है या नहीं।

सवाल यह है —
क्या वह बिना डर के सच लिख सकता है?
क्या वह बिना दबाव के कैमरा उठा सकता है?
क्या वह बिना खतरे के जनता की बात कर सकता है?

जब तक इन सवालों का जवाब 'हाँ' नहीं होता — यह अभियान रुकेगा नहीं।

और सुनिए —
पत्रकारिता की स्वतंत्रता की रक्षा करना, सिर्फ पत्रकारों की नहीं — हम सबकी ज़िम्मेदारी है।

अधिक जानकारी के लिए: www.abpss.co.in

#पत्रकारसुरक्षा #पत्रकारसुरक्षाकानून

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग फिर PMO पहुंची, ABPSS के प्रयास जारीपत्रकार सुरक्षा कानून की राष्ट्रव्यापी मांग ...
19/08/2026

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग फिर PMO पहुंची, ABPSS के प्रयास जारी

पत्रकार सुरक्षा कानून की राष्ट्रव्यापी मांग अब एक बार फिर केंद्र सरकार के सामने है।

अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (ABPSS) ने 3 अगस्त को PMO में दिए आवेदन के बाद भारतीय प्रेस परिषद (PCI) के 17 अगस्त के जवाब पर असंतोष जताते हुए 18 अगस्त को अपील दाखिल की।

संगठन ने इसी दिन PMO में नया आवेदन भी प्रस्तुत किया है।

ABPSS का सवाल सीधा है—2015 में पत्रकार सुरक्षा को लेकर रिपोर्ट और केंद्रीय कानून की सिफारिश के बाद अब तक क्या कार्रवाई हुई?

क्या राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर कोई प्रस्ताव, नीति या विधायी प्रक्रिया वर्तमान में विचाराधीन है?

संगठन ने पत्रकार संगठनों और संबंधित हितधारकों से परामर्श की प्रक्रिया शुरू करने की मांग भी की है।

अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है।

क्या वर्षों पुरानी सिफारिश अब किसी ठोस कानून की दिशा में आगे बढ़ेगी?

#पत्रकारसुरक्षा

14/08/2026

🇮🇳 स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇮🇳

मैं पत्रकार हूँ।
कलम से सच लिखता हूँ, सवाल पूछता हूँ।
मैं भी परिवार वाला हूँ—क्या मेरी भी सुरक्षा जरूरी नहीं? 🖊️

सच्ची पत्रकारिता सदा सत्ता से सवाल करती है।
और सुरक्षित पत्रकार ही मजबूत लोकतंत्र में आपकी आवाज़ बनता है।

पर सच लिखने पर पत्रकार मारा जाता है,
कभी मुकदमों में उलझाया जाता है, कभी बंधनों में बांधा जाता है।

आज पत्रकार अपने हक के लिए जाग रहा है। ✊
केंद्र सरकार से मांग है—पत्रकार सुरक्षा का कठोर राष्ट्रीय कानून बनाया जाए।

क्योंकि कलम भी एक मिशन है, और कलमकार भी एक सैनिक। 🖊️

पोस्ट साझा कीजिए—क्योंकि सुरक्षित पत्रकार ही मजबूत लोकतंत्र की आवाज़ बन सकता है।

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

#पत्रकारसुरक्षाकानून

 # # # **पत्रकार सुरक्षा कानून ज़रूरी क्यों?**कभी आपने सोचा है—**जो आदमी आपके लिए सच खोजने निकलता है, उसके सच की हिफाजत ...
11/08/2026

# # # **पत्रकार सुरक्षा कानून ज़रूरी क्यों?**

कभी आपने सोचा है—**जो आदमी आपके लिए सच खोजने निकलता है, उसके सच की हिफाजत कौन करता है?**

जब कोई पत्रकार भ्रष्टाचार पर सवाल उठाता है, किसी ताकतवर के खिलाफ खबर लिखता है, किसी पीड़ित की आवाज़ बनता है या व्यवस्था की वह तस्वीर दिखाता है जिसे छिपाया जाना चाहिए था—तब वह सिर्फ खबर नहीं कर रहा होता… **वह अपने लिए खतरा भी मोल ले रहा होता है।**

कभी धमकी मिलती है।
कभी हमला होता है।
कभी मुकदमा दर्ज होता है।
कभी गिरफ्तारी होती है।
और कभी खबर लिखने वाला पत्रकार खुद खबर बन जाता है।

लेकिन उसके बाद?

**उसके परिवार के साथ कौन खड़ा होता है?
उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेता है?
उसकी आवाज़ दबाने की कोशिश के खिलाफ कौन आवाज़ उठाता है?**

सबसे बड़ा सवाल यही है।

क्योंकि पत्रकार कोई विशेषाधिकार नहीं मांग रहा।
वह वही काम कर रहा है, जिसकी जरूरत लोकतंत्र को है—**सवाल पूछना।**

आज अगर एक पत्रकार डरकर सवाल पूछना छोड़ देता है, तो नुकसान सिर्फ उस पत्रकार का नहीं होता।
**नुकसान आपका होता है। हमारा होता है। पूरे समाज का होता है।**

क्योंकि जिस दिन पत्रकार सवाल पूछने से डरने लगेगा, उस दिन आम आदमी की आवाज़ कौन उठाएगा?

इसीलिए पत्रकार सुरक्षा सिर्फ पत्रकारों का मुद्दा नहीं है।
**यह हर उस नागरिक का मुद्दा है, जो सच जानना चाहता है।**

और शायद अब हमें यह सवाल पूछना चाहिए—

**पत्रकार जब हमारे लिए खड़ा है, तो पत्रकार के लिए कौन खड़ा होगा?**

यही सवाल **1 दिसंबर 2026, जंतर-मंतर, नई दिल्ली** से देश के सामने रखा जाएगा।

**अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति — पत्रकार सुरक्षा कानून के लिए।**

**क्योंकि सुरक्षित पत्रकार ही निर्भीक होकर सच लिख सकता है।**

https://www.facebook.com/share/p/1DJaon5g2P/
10/08/2026

https://www.facebook.com/share/p/1DJaon5g2P/

🚨 *ALERT* 🚨

*1 दिसंबर | जंतर मंतर | सुबह 11 बजे*

*जब कलम पर हमला होगा तो लोकतंत्र कैसे बचेगा?*

पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अब सड़क पर उतरना होगा।

आइए एक साथ मिलकर सरकार से मांग करें:
**"पत्रकार सुरक्षा अधिनियम लागू करो"**

स्थान: जंतर मंतर, नई दिल्ली
तारीख: 1 दिसंबर 2026

आपकी 1 दिन की मौजूदगी,
हजारों पत्रकारों का भविष्य सुरक्षित कर सकती है।

*चुप मत बैठिए। चलिए।* ✊





_अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति_

10/08/2026

सम्पूर्ण भारत में पत्रकार सुरक्षा के लीये देशव्यापी आंदोलन की तैयारी शुरू

📢 1 दिसंबर — चलो जंतर-मंतर, नई दिल्ली पत्रकारिता की स्वतंत्रता तभी सुरक्षित होगी, जब पत्रकार सुरक्षित होंगे।जनहित की आवा...
08/08/2026

📢 1 दिसंबर — चलो जंतर-मंतर, नई दिल्ली

पत्रकारिता की स्वतंत्रता तभी सुरक्षित होगी, जब पत्रकार सुरक्षित होंगे।
जनहित की आवाज़ उठाने वाले पत्रकारों को भय, धमकी और दबाव से मुक्त वातावरण मिले—इसी संकल्प के साथ अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (ABPSS) का राष्ट्रीय अभियान।
कलम की सुरक्षा, लोकतंत्र की सुरक्षा है।
आइए, 1 दिसंबर को जंतर-मंतर पहुंचकर इस आवाज़ को मजबूत करें।
आपकी भागीदारी ही इस आंदोलन की ताकत है।

#पत्रकारसुरक्षाआंदोलन

     #पत्रकार_सुरक्षा_कानूनलोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्वतंत्र, निर्भीक और सुरक्षित पत्रकारिता होती है। जब पत्रकार ...
07/08/2026

#पत्रकार_सुरक्षा_कानून

लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी स्वतंत्र, निर्भीक और सुरक्षित पत्रकारिता होती है। जब पत्रकार भय, दबाव, धमकी या हिंसा के साये में काम करने को मजबूर हो जाए, तब सिर्फ एक पत्रकार नहीं, बल्कि जनता का सच जानने का अधिकार भी खतरे में पड़ जाता है।

इसी उद्देश्य को लेकर अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (ABPSS) ने अब अपने अभियान को नई गति दे दी है। माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के नेतृत्व में लगातार ऑनलाइन बैठकों का सिलसिला जारी है। देश के सभी प्रदेश संगठन सक्रिय हो रहे हैं। 6 अगस्त को हुई राष्ट्रीय ऑनलाइन बैठक में एक व्यापक जनआंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई, जिसका उद्देश्य केवल एक है—भारत में पत्रकार सुरक्षा कानून को वास्तविकता बनाना।

प्रधानमंत्री जी को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। अब देशव्यापी जनजागरण और जनसंपर्क अभियान की तैयारी शुरू हो रही है। यह किसी सरकार के विरोध का अभियान नहीं है, न ही किसी राजनीतिक विचारधारा के समर्थन का। यह उस पत्रकार की सुरक्षा का अभियान है, जो हर दिन समाज की आवाज़ बनता है, लेकिन संकट आने पर अक्सर खुद को अकेला पाता है।

सच तो यह है कि पत्रकार समाज के हर वर्ग की लड़ाई लड़ता है। किसी की समस्या उठाता है, अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है, भ्रष्टाचार को उजागर करता है और लोकतंत्र को मजबूत बनाता है। लेकिन जब उसी पत्रकार पर हमला होता है, झूठे मुकदमे दर्ज होते हैं, धमकियाँ मिलती हैं या दबाव बनाया जाता है, तब उसे अपने संघर्ष भी अक्सर अकेले ही लड़ने पड़ते हैं। अनेक संगठन होने के बावजूद आज भी एक ऐसा मजबूत कानूनी सुरक्षा कवच नहीं है, जिस पर हर पत्रकार समान रूप से भरोसा कर सके।

यही सोच इस अभियान की असली ताकत है। यह किसी एक संगठन, किसी एक पदाधिकारी या किसी एक पत्रकार का अभियान नहीं है। यह उन सभी पत्रकारों के लिए एक साझा संकल्प है जो आज मैदान में काम कर रहे हैं, और उन नई पीढ़ियों के लिए भी जो आने वाले वर्षों में पत्रकारिता को अपना दायित्व बनाएँगी। हमारा प्रयास है कि भारत में ऐसा प्रभावी पत्रकार सुरक्षा कानून बने, जो हर पत्रकार को भयमुक्त वातावरण में अपने संवैधानिक दायित्व निभाने का अधिकार और सुरक्षा प्रदान करे।

यदि आप भी मानते हैं कि "पत्रकार सुरक्षित होगा, तभी लोकतंत्र मजबूत होगा", तो इस जन-अभियान का हिस्सा बनिए। यह किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे पत्रकार समाज के भविष्य का संकल्प है।

#पत्रकार_सुरक्षित_लोकतंत्र_मजबूत

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