10/02/2025
उत्तराखंड वन्यजीव बोर्ड-
उत्तराखंड वन्यजीव बोर्ड उत्तराखंड राज्य में वन्यजीव संरक्षण से संबंधित नीतियों और योजनाओं को बनाने और कार्यान्वित करने वाला एक शीर्ष सलाहकार निकाय है। यह बोर्ड भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत गठित किया गया है और राज्य में वन्यजीवों की सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण तथा संरक्षित क्षेत्रों (जैसे राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों आदि) के विकास के लिए काम करता है।
उत्तराखंड वन्यजीव बोर्ड के प्रमुख कार्य:
1. वन्यजीव संरक्षण नीतियाँ बनाना – राज्य में वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के लिए नीतियों का निर्धारण करता है।
2. पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना – वन्यजीवों और उनके आवासों की रक्षा के लिए वैज्ञानिक उपायों की अनुशंसा करता है।
3. संरक्षित क्षेत्रों का प्रबंधन – राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और जैव विविधता हॉटस्पॉट की सुरक्षा और संवर्धन में सहायता करता है।
4. वन्यजीव संघर्ष समाधान – मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए योजनाएँ बनाता है।
5. संरक्षण से जुड़े कानूनों को लागू करना – वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रावधानों को लागू करने में राज्य सरकार की मदद करता है।
बोर्ड के सदस्य:
• अध्यक्ष: मुख्यमंत्री (उत्तराखंड)
• सदस्य: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग के मंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि आदि।
महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्र:
उत्तराखंड में कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य हैं, जिनकी सुरक्षा में यह बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जैसे:
• जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान
• राजाजी राष्ट्रीय उद्यान
• गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान
• गोविंद वन्यजीव अभयारण्य
इस प्रकार, उत्तराखंड वन्यजीव बोर्ड राज्य में वन्यजीव संरक्षण और सतत पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।