Jai Jinendra

Jai Jinendra this page is for usefull things and Information

20/08/2025

ज़िंदगी के सौ रंग (पार्ट-2)
अगले दिन सब हिमाचल के त्रिउंड के लिये रवाना हो गए।
अथर्व जैन के कदम तीखी चढ़ाई पर लड़खड़ा रहे थे, पर उसका दिल हिमालय की ख़ूबसूरती में खोया था। त्रिउंड का ट्रैक, जो उसने अपने दोस्तों-रिया, विक्रम, और कल्पना-के साथ प्लान किया था, अब एक असली इम्तेहान बन गया था। चारों ने अपने बैग कंधों पर लटका रखे थे, और ठंडी हवा उनके चेहरों को छू रही थी। अथर्व, एक धार्मिक जैन लड़का जो अपने दिल में भगवान महावीर के मूल-अहिंसा, सत्य, और अपरिग्रह-लेकर चलता था। सुबह, ट्रैक शुरू करने से पहले, उसने एक छोटे से जैन मंदिर में नवकार मंत्र का जाप किया था, और रिया ने भी उसके साथ सामायिक किया था। रिया का सफ़ेद अनारकली सूट हवा में लहराया, और उसका शांत चेहरा मंदिर के दर्शन के बाद और चमक रहा था। "यार, ये चढ़ई कब ख़त्म होगी?" विक्रम ने हंसी के साथ शिकायत की, अपना पसीना पोंछते हुए। विक्रम का लंबा कदम और मस्ती भरा अंदाज़ ग्रुप को हमेशा हँसाता था। कल्पना अपने रंग-बिरंगे लहंगे के साथ जो अब थोड़ी सी धूल से ढक गया था, कैमरा निकालकर बोली, विक्रम, शिकायत बंद कर! ये शॉट्स मेरे ट्रैवल व्लॉग के लिए परफेक्ट हैं! कल्पना का सपना था एक जैन यात्रा व्लॉग बनाने का, और वो हर दोस्त को रिकॉर्ड कर रही थी। रिया, जो हमेशा ग्रुप की प्लानर थी, मुस्कुरा रही थी और कहा, "अथर्व, तू बोलता था ना, 'जिंदगी एक यात्रा है।' अब ये यात्रा हमें कहां ले जाएगी?" अथर्व ने एक गहरी सांस ली और हिमालय के दूर-दराज के शिखर की तरफ देखा। रिया, महावीर स्वामी ने कहा था, 'अपनी आत्मा को पहचानो।' ये ट्रैक बस एक शुरुआत है।" उसने अपने बैग से एक छोटी सी जैन पुस्तक निकाली, जिसने सुबह मंदिर में लिखा था: अहिंसा ही जीवन का असली रास्ता है। रिया ने उसकी डायरी देखी और मुस्कुरायी, उसका चेहरा एक गहरी समझ से भर गया। शाम ढलते ही, चारो त्रिउंड के शिखर पर पहुंच गए। तारों के नीचे, उन्हें एक छोटा सा अलाव जलाया। पर्यावरण शांत था, सिर्फ जंगली जानवरों की हल्की आवाजें और हवा का सरसराना सुनायी दे रहा था। विक्रम ने अपनी बाइक डिजाइन के सपने बताए, कल्पना ने अपने व्लॉग के लिए नए आइडिया सोचे शुरू किए, और रिया ने इको-फ्रेंडली घर बनाने का अपना सपना दोहराया। अथर्व ने कहा, "मैं एक ऐसी जिंदगी जीना चाहता हूं जो जैन मूल्यों के साथ दुनिया को प्रेरणा दे।" रिया की तरफ़ देखते हुए, उसने उसकी आँखों में अलाव की रोशनी देखी—एक रिश्ता जो दोस्ती और धार्मिक समझ से जोड़ा था। अचानक, कोहरे का एक घना पर्दा छा गया। देखते ही देखते, चारों एक दूसरे से बिछड़ गए। अथर्व ने चिल्लाया, "रिया! विक्रम! कल्पना! कहाँ हो?" पर जवाब में सिर्फ हवा का शोर था। उसने अपने दिल में नवकार मंत्र जप और अपने बैग के टॉर्च से रास्ता ढूंढने लगा। एक छोटी सी गुफा के पास, उसने कुछ पुराने पत्थर देखे, जिनके ऊपर जैन तीर्थंकर के चिन्ह उकेर रखे थे। ये क्या था? कोई पौराणिक जैन स्थल? उसने सोचा, "ये जगह तो किसी मंदिर का राज़ छुपा रही है। "थोड़ी देर बाद, कोहरा थोड़ा हटा, और उसने दरवाजे से विक्रम की आवाज़ सुनी। चारो फिर मिले, पर अथर्व के मन में वो गुफा का राज़ बार-बार आया। उन्हें अलाव के पास बैठकर फैसला किया कि सुबह उस गुफा की खोज करेंगे। पर रात के अँधेरे में, एक अजीब सी आवाज़ आई—जैसा कोई पत्थर गिराने की। कल्पना ने डरते हुए कहा, "अथर्व, ये क्या था?" अथर्व ने मशाल उठाई, पर अँधेरे में कुछ नहीं दिखा। उसके दिल में एक सवाल उठा—क्या ये गुफा सिर्फ एक पौराणिक स्थल है, या इसमें कुछ और छुपा है?

19/08/2025

ज़िंदगी के सौ रंग (पार्ट-1)

दिल्ली, 2025
अथर्व जैन अपने हॉस्टल के पुराने बालकनी पर खड़ा था, जहां दिल्ली की शाम का शोर-रिक्शा के हॉर्न, रेहड़ीवालों की पुकार, और जलेबी की मीठी खुशबू-उसे आ रही थी। 19 साल का ये जैन लड़का, आईआईटी दिल्ली का इंजीनियरिंग विद्यार्थी, अपने दिल में जैन धर्म के मूल-अहिंसा, सत्य, और अपरिग्रह-लेकर चलता था। दोस्त उसे पसंद से बात करते थे, क्योंकि वो बोलता था, "जिंदगी का सुख अपने मन को शांत रखने में है, जैसे महावीर स्वामी ने सिखाया।" ये बातें उन्हें हँसाती थी, पर सोचने पर भी मजबूर करती थी।''अथर्व, जल्दी चल, मंदिर का समय हो रहा है!'' विक्रम की आवाज कमरे से आई। विक्रम, एक पतला-दुबला मैकेनिकल इंजीनियरिंग का छात्र, हमेशा मस्ती के मूड में रहता था, पर जैन मंदिर के दर्शन के लिए हमेशा तैयार था। आज शाम का प्लान था दिल्ली के दिगंबर जैन लाल मंदिर चांदनी चौक में सामायिक करना, और फिर एक हल्दीराम पर खाना। रिया और कल्पना भी साथ थीं।“अरे, आ रहा हूँ!” अथर्व ने अपना सफेद कुर्ता ठीक किया और फोन देखा। रिया का मैसेज था: अथर्व, जल्दी करो! अथर्व मुस्कुराया। रिया, एक धार्मिक जैन लड़की, ग्रुप की प्लानर थी, हमेशा एक कदम आगे। कल्पना अपनी कहानियों से सबको हसती थी, और उसका पारंपरिक लहंगा पहनने का अंदाज़ सबको पसंद था। चारों परिसर गेट पर मीले और ऑटो लेकर दिगंबर जैन लाल मंदिर पहुंचे। मंदिर के शांत वातावरण में, भगवान महावीर के सामने सामायिक किया, नवकार मंत्र जप, और अहिंसा का संकल्प लिया। रिया ने अपने सिंपल अनारकली सूट में एक छोटी डायरी में जैन सूत्र लिखा, और अथर्व ने उसकी तरफ देखते हुए सोचा कि उसका धर्म के प्रति समर्पण कितना सुंदर है। मंदिर के बाद, उनको एक हल्दीराम पर पनीर टिक्का और पाव भाजी का मजा लिया, और अगले बड़े प्लान की बात: हिमालय में त्रियुंड का ट्रेक। "अथर्व, तेरा ये 'जिंदगी एक यात्रा है' वाला विचार मंदिर में भी लगता है," कल्पना ने छेड़ा, अपने दुपट्टे को संभालते हुए पनीर टिक्का खाते हुए। "पर अगर हम ट्रैक पर भटक गए, तो तुम्हें ही महावीर स्वामी का नाम लेकर रास्ता ढूंढना होगा।" अथर्व ने चाय का सिप लिया और हंसा। "भटकना भी तो धर्म का हिस्सा है, कल्पना। महावीर स्वामी ने कहा था, 'अपनी आत्मा को पहचानो।' रास्ता अपना आप मिल जाएगा।"

प्राचीन ब्राह्मी लिपि में लिखित "णमोकार महामंत्र " देखने में आया है। उल्लेखनीय है कि प्राचीन जैन शास्त्र प्राकृत भाषा मे...
05/12/2024

प्राचीन ब्राह्मी लिपि में लिखित "णमोकार महामंत्र " देखने में आया है। उल्लेखनीय है कि प्राचीन जैन शास्त्र प्राकृत भाषा में लिखे गए थे जिसकी लिपि " ब्राह्मी" ही थी। यद्यपि आज ब्राह्मी लिपि के जानकार कम हैं, फिर भी वाराणसी की डाक्टर मुन्नी जैन व डाक्टर फूल चन्द्र जैन "प्रेमी" जैसे विद्वान हमारे सौभाग्य से हमारे मध्य उपस्थित हैं जिनको प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि की खासी जानकारी है।

08/09/2024

Address

Dhamawala
Dehra Dun
248001

Telephone

+917017124755

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Jai Jinendra posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Jai Jinendra:

Share