Sandeep Chamoli

  • Home
  • Sandeep Chamoli
Call Website Contact the organization

Sandeep Chamoli कठिन रास्तो से ना घबराए, कठिन रास्ते
अक्सर खूबसूरत मंजिल तक लेकर जाता है। 💪🌟🔥

04/09/2026

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।

भगवान श्रीकृष्ण के सत्य, प्रेम, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा हमें सदैव मिलती रहे।

देवकीनंदन श्रीकृष्ण की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का वास हो तथा हमारा समाज प्रेम, भाईचारे और सद्भाव से परिपूर्ण रहे।

जय श्रीकृष्ण! 🙏🦚

#श्री_कृष्ण_जन्माष्टमी #जन्माष्टमी

2 सितम्बर 1994 — उत्तराखंड आंदोलन की वह काली तारीख, जिसे भुलाया नहीं जा सकता2 सितम्बर 1994 उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इति...
02/09/2026

2 सितम्बर 1994 — उत्तराखंड आंदोलन की वह काली तारीख, जिसे भुलाया नहीं जा सकता

2 सितम्बर 1994 उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास में एक ऐसी काली तारीख है, जब अपने पृथक राज्य की लोकतांत्रिक मांग को लेकर मसूरी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों पर तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार की पुलिस और पीएसी ने गोलियां बरसाईं। इस बर्बर गोलीकांड में छह आंदोलनकारी शहीद हुए, जिनमें वीरांगनाएं हंसा धनाई और बेलमती चौहान भी शामिल थीं।

बेलमती चौहान की शहादत आंदोलन के दमन की क्रूरता की प्रतीक बन गई। आंदोलनकारियों के बीच प्रचलित विवरणों के अनुसार, पुलिस ने उनके माथे पर बंदूक रखकर गोली चलाई। उनकी निर्मम हत्या ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया।

मसूरी गोलीकांड में पुलिस उपाधीक्षक उमाकांत त्रिपाठी की भी मृत्यु हुई। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि वे आंदोलनकारियों पर गोली चलाने के पक्ष में नहीं थे और इसी कारण उन्हें पीएसी की गोली का शिकार होना पड़ा। इन घटनाओं ने उस दौर में राज्य आंदोलन के दमन और प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए।

यह वह दौर था जब खटीमा और मसूरी की शहादतों ने उत्तराखंड के जनमानस को भीतर तक आंदोलित कर दिया। 2 सितम्बर को पौड़ी में भी हजारों आंदोलनकारी अलग राज्य की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे। उस समय तक मसूरी गोलीकांड की भयावह खबर आम आंदोलनकारियों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई थी; अगले दिन जब इसकी जानकारी सामने आई तो आक्रोश और पीड़ा की लहर पूरे पहाड़ में फैल गई।

तीन दशक से अधिक समय बीत गया, उत्तराखंड राज्य बन गया, लेकिन सवाल आज भी वही है—क्या हमने अपने शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाया?

शहीदों ने जिस उत्तराखंड की कल्पना की थी, वह जल-जंगल-जमीन की रक्षा करने वाला, युवाओं को रोजगार देने वाला, गांवों को मजबूत करने वाला और आम जनता की आवाज को सम्मान देने वाला राज्य था। दुर्भाग्य से आज भी हमें सत्ता की खींचतान, राजनीतिक स्वार्थ, अराजकता और दिशाहीनता से जूझना पड़ रहा है।

मसूरी के शहीदों की शहादत हमें केवल श्रद्धांजलि देने के लिए नहीं, बल्कि अपने दायित्व का स्मरण कराने के लिए है।

आइए, 2 सितम्बर को संकल्प लें—
शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाएंगे,
सत्ता की अराजकता से मुक्त उत्तराखंड बनाएंगे,
और इस राज्य की अस्मिता, संसाधनों तथा जनभावनाओं की अंतिम सांस तक रक्षा करेंगे।

मसूरी गोलीकांड के अमर शहीदों को कोटिशः नमन।
हंसा धनाई जी और बेलमती चौहान जी सहित सभी शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
जय उत्तराखंड। जय शहीद। 🙏

रक्षाबंधन के पावन पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। 🌺भाई-बहन का रिश्ता प्रेम, विश्वास, स्नेह और आजीवन सुरक्षा का प्र...
28/08/2026

रक्षाबंधन के पावन पर्व की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। 🌺

भाई-बहन का रिश्ता प्रेम, विश्वास, स्नेह और आजीवन सुरक्षा का प्रतीक है। यह पावन बंधन हमारे जीवन में खुशियाँ, अपनापन और मजबूती लेकर आए।

ईश्वर से प्रार्थना है कि सभी भाई-बहनों के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली बनी रहे।

रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🙏🪢❤️

#एडवोकेट

27/08/2026

भारतवर्ष में शायद उत्तराखंड ही वह राज्य है, जिसने राज्य बनने के बाद अपनी मूल संस्कृति, परंपराओं और पहाड़ी पहचान को सबसे तेजी से खोने का दर्द झेला है।

हमें विकास के नाम पर अपनी जड़ों, बोली-भाषा, लोक परंपराओं और जल-जंगल-जमीन से दूर नहीं होना है।
अपनी पहचान बचाना ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा संघर्ष है।

जय उत्तराखंड 🚩
जय हिमाल 🏔️

विकास के दावों के बीच 80 वर्षीय बुजुर्ग को 8 किलोमीटर डंडे के सहारे अस्पताल ले जाने की मजबूरी!देवभूमि उत्तराखंड के चंपाव...
25/08/2026

विकास के दावों के बीच 80 वर्षीय बुजुर्ग को 8 किलोमीटर डंडे के सहारे अस्पताल ले जाने की मजबूरी!

देवभूमि उत्तराखंड के चंपावत जिले में नेपाल सीमा से लगे बकोड़ा गांव की यह तस्वीर प्रदेश के तथाकथित धाकड़ और धुरंधर विकास मॉडल की जमीनी हकीकत बयां करती है।

80 वर्षीय दीवान सिंह के पैर में छह दिन पहले कांटा चुभा। हालत बिगड़ने पर जब अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी तो गांव में सड़क नहीं थी। मजबूर ग्रामीणों ने डंडों और कपड़े की झोली का सहारा लिया और करीब 8 किलोमीटर तक बुजुर्ग को पैदल ढोकर मोस्टा से सीम गांव पहुंचाया। बारिश के बीच रवींद्र रावत, जगदीश सिंह, प्रियांशु और केदार ने लगभग दो घंटे यह जोखिम भरा सफर तय किया। इसके बाद जीप से करीब 35 किलोमीटर दूर टनकपुर उप जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया।

सवाल सिर्फ एक बुजुर्ग का नहीं है।

अकेड़ी, मोस्टा, ग्वानी और बकोड़ा की 500 से अधिक आबादी आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रही है।

बताया जा रहा है कि पीएमजीएसवाई के तहत 22.30 किलोमीटर सड़क के लिए ₹18.30 करोड़ की डीपीआर भारत सरकार को भेजी जा चुकी है। लेकिन सवाल यह है कि डीपीआर भेजने के बाद सड़क कब बनेगी?

जब बीमार और बुजुर्ग व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए आज भी ग्रामीणों को डंडे की झोली बनानी पड़े, तो फिर पहाड़ में विकास के बड़े-बड़े दावों का मतलब क्या है?

सरकार से सीधा सवाल है—
इन गांवों तक सड़क कब पहुंचेगी? और कब पहाड़ के लोगों को सम्मानजनक और सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी?

उत्तराखंड केवल देहरादून और मैदानी शहरों का नाम नहीं है।
सीमांत गांवों का विकास ही असली उत्तराखंड का विकास है।

#उत्तराखंड #चंपावत #बकोड़ा #सड़क #पलायन #सीमांत_गांव #उत्तराखंड_विकास

23/08/2026

महिलाएं हर दिन, हर जगह हिंसा का सामना कर रही हैं - कुछ दिखाई देते हैं, कुछ बिना दिखे आपको, आपके भविष्य को चोट पहुंचा रहे हैं।

इस रुकावट को, इस डर को हमें हर हाल में मिटाना है - देश को आपकी पूरी भागीदारी की ज़रूरत है।

22/08/2026

हिमालय की आवाज़, पहाड़ के स्वाभिमान और उत्तराखंड की आत्मा के कवि — गिरीश चंद्र तिवारी ‘गिर्दा’ को पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन। 🙏🏻

गिर्दा हमारे बीच आज भले ही देह रूप में नहीं हैं, लेकिन उनकी कविता, उनके विचार और पहाड़ के लिए उनका संघर्ष आज भी हर उस दिल में जीवित है, जो उत्तराखंड की मिट्टी, संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और अस्मिता से प्रेम करता है।
उन्होंने हमें सिखाया कि पहाड़ केवल भौगोलिक भूभाग नहीं, बल्कि हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारे स्वाभिमान का प्रतीक है।
आज उनकी पुण्यतिथि पर हम संकल्प लें कि उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों,संस्कृति, युवाओं के भविष्य और पहाड़ के स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपनी आवाज़ बुलंद करते रहेंगे।
जय हिमाल, जय उत्तराखंड

SIR पर महत्वपूर्ण चर्चाआज धर्मपुर विधानसभा में ब्लॉक अध्यक्ष एवं वर्तमान पार्षद श्री मुकीम भूरा जी से मुलाकात कर उनके क्...
19/08/2026

SIR पर महत्वपूर्ण चर्चा

आज धर्मपुर विधानसभा में ब्लॉक अध्यक्ष एवं वर्तमान पार्षद श्री मुकीम भूरा जी से मुलाकात कर उनके क्षेत्र में SIR (Special Intensive Revision) के संबंध में विस्तृत चर्चा की।

इस दौरान Form-7 के माध्यम से दर्ज की गई आपत्तियों की पूरी जानकारी ली। क्षेत्रवासियों द्वारा यह चिंता सामने रखी गई है कि SIR की प्रक्रिया के माध्यम से अल्पसंख्यक क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका है

हमारा स्पष्ट मत है कि हर पात्र नागरिक के मताधिकार की रक्षा होना आवश्यक है। किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया और सत्यापन के मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए।

इस विषय को लेकर जल्द ही जिलाधिकारी महोदय से मुलाकात कर वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाएगा और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।

लोकतंत्र मजबूत होगा, जब हर पात्र मतदाता का वोट सुरक्षित होगा।

#मतदाता_सूची #मताधिकार #धर्मपुर Manoj Rawat Pritam Singh Ganesh Godiyal Bhuwan Kapri Indian National Congress

19/08/2026

Address


Telephone

+919997165317

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Sandeep Chamoli posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Sandeep Chamoli:

Shortcuts

  • Want your organization to be the top-listed non profit organization?

Share