02/09/2026
2 सितम्बर 1994 — उत्तराखंड आंदोलन की वह काली तारीख, जिसे भुलाया नहीं जा सकता
2 सितम्बर 1994 उत्तराखंड राज्य आंदोलन के इतिहास में एक ऐसी काली तारीख है, जब अपने पृथक राज्य की लोकतांत्रिक मांग को लेकर मसूरी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों पर तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार की पुलिस और पीएसी ने गोलियां बरसाईं। इस बर्बर गोलीकांड में छह आंदोलनकारी शहीद हुए, जिनमें वीरांगनाएं हंसा धनाई और बेलमती चौहान भी शामिल थीं।
बेलमती चौहान की शहादत आंदोलन के दमन की क्रूरता की प्रतीक बन गई। आंदोलनकारियों के बीच प्रचलित विवरणों के अनुसार, पुलिस ने उनके माथे पर बंदूक रखकर गोली चलाई। उनकी निर्मम हत्या ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया।
मसूरी गोलीकांड में पुलिस उपाधीक्षक उमाकांत त्रिपाठी की भी मृत्यु हुई। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि वे आंदोलनकारियों पर गोली चलाने के पक्ष में नहीं थे और इसी कारण उन्हें पीएसी की गोली का शिकार होना पड़ा। इन घटनाओं ने उस दौर में राज्य आंदोलन के दमन और प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए।
यह वह दौर था जब खटीमा और मसूरी की शहादतों ने उत्तराखंड के जनमानस को भीतर तक आंदोलित कर दिया। 2 सितम्बर को पौड़ी में भी हजारों आंदोलनकारी अलग राज्य की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे थे। उस समय तक मसूरी गोलीकांड की भयावह खबर आम आंदोलनकारियों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई थी; अगले दिन जब इसकी जानकारी सामने आई तो आक्रोश और पीड़ा की लहर पूरे पहाड़ में फैल गई।
तीन दशक से अधिक समय बीत गया, उत्तराखंड राज्य बन गया, लेकिन सवाल आज भी वही है—क्या हमने अपने शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाया?
शहीदों ने जिस उत्तराखंड की कल्पना की थी, वह जल-जंगल-जमीन की रक्षा करने वाला, युवाओं को रोजगार देने वाला, गांवों को मजबूत करने वाला और आम जनता की आवाज को सम्मान देने वाला राज्य था। दुर्भाग्य से आज भी हमें सत्ता की खींचतान, राजनीतिक स्वार्थ, अराजकता और दिशाहीनता से जूझना पड़ रहा है।
मसूरी के शहीदों की शहादत हमें केवल श्रद्धांजलि देने के लिए नहीं, बल्कि अपने दायित्व का स्मरण कराने के लिए है।
आइए, 2 सितम्बर को संकल्प लें—
शहीदों के सपनों का उत्तराखंड बनाएंगे,
सत्ता की अराजकता से मुक्त उत्तराखंड बनाएंगे,
और इस राज्य की अस्मिता, संसाधनों तथा जनभावनाओं की अंतिम सांस तक रक्षा करेंगे।
मसूरी गोलीकांड के अमर शहीदों को कोटिशः नमन।
हंसा धनाई जी और बेलमती चौहान जी सहित सभी शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
जय उत्तराखंड। जय शहीद। 🙏